जिसके कान हों वह सून ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है

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जिसके कान हों  वह सून ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है Present work of Holy Spirit and the Love of God for Mankind.

शैतान चाहे जितना भी ‘सामर्थ्यवान’ हो, चाहे वह जितना भी दुस्साहसी और महत्वाकांक्षी हो, चाहे नुकसान पहुँचाने की उसकी क्षमत...
28/07/2026

शैतान चाहे जितना भी ‘सामर्थ्यवान’ हो, चाहे वह जितना भी दुस्साहसी और महत्वाकांक्षी हो, चाहे नुकसान पहुँचाने की उसकी क्षमता जितनी भी बड़ी हो, चाहे मनुष्य को भ्रष्ट करने और लुभाने की उसकी तकनीकें जितनी भी व्यापक हों, चाहे मनुष्य को डराने की उसकी तरकीबें और योजनाएँ जितनी भी चतुराई से भरी हों, चाहे उसके अस्तित्व के रूप जितने भी परिवर्तनशील हों, वह कभी एक भी जीवित चीज सृजित करने में सक्षम नहीं हुआ, कभी सभी चीजों के अस्तित्व के लिए व्यवस्थाएँ या नियम निर्धारित करने में सक्षम नहीं हुआ, और कभी किसी सजीव या निर्जीव चीज पर शासन और नियंत्रण करने में सक्षम नहीं हुआ। ब्रह्मांड और आकाश के भीतर, एक भी व्यक्ति या चीज नहीं है जो उससे पैदा हुई हो, या उसके कारण अस्तित्व में हो; एक भी व्यक्ति या चीज नहीं है जो उसके द्वारा शासित हो, या उसके द्वारा नियंत्रित हो। इसके विपरीत, उसे न केवल परमेश्वर के प्रभुत्व के अधीन रहना है, बल्कि, परमेश्वर के सभी आदेशों और आज्ञाओं का पालन करना है। परमेश्वर की अनुमति के बिना शैतान के लिए जमीन पर पानी की एक बूँद या रेत का एक कण छूना भी मुश्किल है; परमेश्वर की अनुमति के बिना शैतान धरती पर चींटियों का स्थान बदलने के लिए भी स्वतंत्र नहीं है, परमेश्वर द्वारा सृजित मानव-जाति की तो बात ही छोड़ दो। परमेश्वर की दृष्टि में, शैतान पहाड़ पर उगने वाली कुमुदनियों से, हवा में उड़ने वाले पक्षियों से, समुद्र में रहने वाली मछलियों से, और पृथ्वी पर रहने वाले कीड़ों से भी तुच्छ है। सभी चीजों के बीच उसकी भूमिका सभी चीजों की सेवा करना, मानव-जाति के लिए कार्य करना, और परमेश्वर के कार्य और उसकी प्रबंधन-योजना के काम आना है। उसकी प्रकृति कितनी भी दुर्भावनापूर्ण क्यों न हो, और उसका सार कितना भी बुरा क्यों न हो, केवल एक चीज जो वह कर सकता है, वह है अपने कार्य का कर्तव्यनिष्ठा से पालन करना : परमेश्वर के लिए सेवा देना, और परमेश्वर को एक विषमता प्रदान करना। ऐसा है शैतान का सार और उसकी स्थिति। उसका सार जीवन से असंबद्ध है, सामर्थ्य से असंबद्ध है, अधिकार से असंबद्ध है; वह परमेश्वर के हाथ में केवल एक खिलौना है, परमेश्वर की सेवा में रत सिर्फ एक मशीन है!

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19/05/2026

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15/04/2026

🔥 कोप का दिन — चेतावनी और उद्घोषणा

कोई भी जो देह में है, कोप के दिन से नहीं बच सकता।
आज, मैं तुम लोगों को तुम्हारे ही अस्तित्व के लिए इस प्रकार धिक्कारता हूँ, ताकि मेरा कार्य सुचारु रूप से आगे बढ़े और पूरे ब्रह्मांड में मेरा उद्घाटन कार्य अधिक उचित और उत्तम ढंग से क्रियान्वित किया जा सके। मैं सभी देशों और राष्ट्रों के लोगों के लिए अपने वचनों, अधिकार, प्रताप और न्याय को प्रकट करता हूँ। जो कार्य मैं तुम लोगों के बीच करता हूँ, वह संपूर्ण जगत में मेरे कार्य का आरंभ है।

यद्यपि अभी अंत के दिन चल रहे हैं, याद रहे कि “अंत के दिन” केवल एक युग का नाम है; ठीक व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग के समान यह एक युग का संकेत देता है और यह अंतिम कुछ वर्षों या महीनों के बजाय एक संपूर्ण युग को इंगित करता है। फिर भी अंत के दिन अनुग्रह के युग और व्यवस्था के युग से काफ़ी अलग हैं। अंत के दिनों का कार्य इस्राएल में क्रियान्वित नहीं किया जाता बल्कि अन्यजाति राष्ट्रों के बीच किया जाता है; यह मेरे सिंहासन के सामने, इस्राएल के बाहर के सभी राष्ट्रों और कबीलों के लोगों पर विजय है, ताकि संपूर्ण जगत में मेरी जो महिमा है, वो ब्रह्मांड और नभमंडल को भर सके।

यह इसलिए है ताकि मैं और अधिक महिमा प्राप्त कर सकूँ, ताकि पृथ्वी के सभी प्राणी मेरी महिमा को हर राष्ट्र को, निरंतर पीढ़ी-दर-पीढ़ी सौंप सकें, और स्वर्ग एवं पृथ्वी के सभी प्राणी मेरी उस समस्त महिमा को देख सकें, जो मैंने पृथ्वी पर अर्जित की है। अंत के दिनों के दौरान क्रियान्वित कार्य विजय का कार्य है। यह पृथ्वी पर सभी लोगों के जीवन का मार्गदर्शन नहीं, बल्कि पृथ्वी पर मानवजाति के सहस्रों-वर्ष लंबे अविनाशी दुःख का अंत है।
परिणामस्वरूप, अंत के दिनों का कार्य इस्राएल में किए गए हजारों वर्षों के कार्य जैसा नहीं हो सकता, न ही यह यहूदिया में महज कुछ सालों के कार्य जैसा हो सकता है, जो परमेश्वर के दूसरे देहधारण होने तक दो हजार साल तक जारी रहा। अंत के दिनों के लोग केवल देह में आए मुक्तिदाता के पुनः प्रकटन को देखते हैं, और वे परमेश्वर के व्यक्तिगत कार्य और वचन को प्राप्त करते हैं। अंत के दिनों की समाप्ति में दो हजार वर्ष नहीं लगेंगे; वे संक्षिप्त हैं, उस समय की तरह जैसे जब यीशु ने यहूदिया में अनुग्रह के युग का कार्य किया था।
ऐसा इसलिए है क्योंकि अंत के दिन संपूर्ण युग का उपसंहार हैं। ये परमेश्वर की छह-हज़ार-वर्षीय प्रबंधन योजना की पूर्णता और समाप्ति हैं और ये मनुष्य के दुःखों की जीवन यात्रा का समापन करते हैं। ये समस्त मानवजाति को एक नए युग में नहीं ले जाते या मानवजाति का जीवन जारी नहीं रहने देते; इसका मेरी प्रबंधन योजना या मनुष्य के अस्तित्व के लिए कोई महत्व नहीं होगा। यदि मानवजाति इसी प्रकार चलती रही, तो देर-सवेर उसे शैतान द्वारा पूरी तरह निगल लिया जाएगा।

मेरा कार्य केवल छह हज़ार वर्ष तक चलता है और मैंने वादा किया कि समस्त मानवजाति पर उस दुष्ट का नियंत्रण भी छह हजार वर्षों तक ही रहेगा। इसलिए, अब समय पूरा हुआ। मैं अब और न तो जारी रखूँगा और न ही विलंब करूँगा। अंत के दिनों के दौरान मैं शैतान को परास्त कर दूँगा, मैं अपनी संपूर्ण महिमा वापस ले लूँगा और मैं पृथ्वी पर उन सभी आत्माओं को वापस प्राप्त करूँगा जो मुझसे संबंधित हैं।
इस दिन के बाद से मैं पृथ्वी पर फिर कभी भी देहधारी नहीं बनूँगा और फिर कभी भी मेरा आत्मा जो सब का संप्रभु है, पृथ्वी पर कार्य नहीं करेगा। मैं पृथ्वी पर केवल एक मानवजाति की पुनर्रचना करूँगा, एक ऐसी मानवजाति जो पावनीकृत हो और जो पृथ्वी पर मेरा वफादार शहर हो। पर जान लो कि मैं संपूर्ण संसार को जड़ से नहीं मिटाऊँगा, न ही मैं समस्त मानवजाति को जड़ से मिटाऊँगा।

मैं उस शेष तृतीयांश को रखूँगा—वह तृतीयांश जो मुझसे प्रेम करता है और मेरे द्वारा पूरी तरह से जीत लिया गया है। मैं इस तीसरे तृतीयांश को फलदायी बनाऊँगा और पृथ्वी पर कई गुना बढ़ाऊँगा, ठीक वैसे जैसे इस्राएली व्यवस्था के तहत फले-फूले थे। यह मानवजाति हमेशा मेरे साथ रहेगी, मगर यह आज की बुरी तरह से गंदी मानवजाति की तरह नहीं होगी, बल्कि ऐसी मानवजाति होगी, जो मेरे द्वारा प्राप्त कर लिए गए लोगों का समूह होगी।
इस प्रकार की मानवजाति को शैतान नष्ट, परेशान या घेर नहीं पाएगा। यही वह मानवजाति है, जो मेरे द्वारा जीत ली गई है और जिसे मेरी प्रतिज्ञा हासिल है। अंत के दिनों के दौरान मेरे द्वारा जीती गई मानवजाति वह मानवजाति भी होगी, जिसे बख्श दिया जाएगा और जिसे मेरे अनंत आशीष प्राप्त होंगे। यही शैतान पर मेरी विजय का प्रमाण है।

मानवजाति के बीच जिन लोगों को मेरे द्वारा बचाया और जीता नहीं गया है, वे ख़ामोशी से समुद्र की गहराइयों में डूब जाएँगे, और मेरी भस्म करने वाली लपटों द्वारा हमेशा के लिए जला दिए जाएँगे। मैं इस पुरानी, अत्यधिक गंदी मानवजाति को जड़ से मिटाऊँगा। जैसे मैंने मिस्र की पहली संतानों को नष्ट किया था, वैसे ही मैं न्याय करूँगा।

आज तुम मेरा प्रतिरोध करते हो और आज मेरे वचन तुम लोगों के हृदयों में कठोरता को उजागर करते हैं। तुम लोग मेरे कोप का संचय कर रहे हो, अपने पापों पर और अधिक न्याय ला रहे हो। जब कोप का दिन आएगा, तब कौन बच सकेगा?
मैंने बहुत प्रयास किया है, बहुत ऊर्जा लगाई है, फिर भी तुम लोगों ने मेरी बातों को नहीं सुना। तुम लोग कहाँ मेरे सामने झुके हो? तुम लोग मुझसे ऐसा व्यवहार क्यों करते हो? तुम्हारे हृदय इतने कठोर क्यों हैं?

मैंने कभी तुम्हें बेवजह नहीं डाँटा, न ही तुम्हें नष्ट किया। फिर भी तुम लोग मेरा विरोध करते हो, मेरे वचनों को अनदेखा करते हो और अधार्मिकता में जीते हो। तुम्हारे कर्म और शब्द तुम्हारे ही खिलाफ गवाही दे रहे हैं। मेरी सहनशीलता सीमित है, और मेरा न्याय निश्चित है।
जब वह दिन आएगा, तो कोई भी छुप नहीं पाएगा। मेरी ताड़ना हर अधर्म पर आएगी। तुम लोगों के सभी कार्य पहले ही मेरी दृष्टि में आ चुके हैं और तुम्हारे सभी वचन मेरे कानों तक पहुँच चुके हैं। अब भी समय है — समझो, बदलो और सत्य को स्वीकार करो।

27/03/2026

सर्वशक्तिमान परमेश्वर का प्रकट होना और न्याय का संदेश ✦✦

सभी कलीसियाओं में परमेश्वर पहले से ही प्रकट हो चुका है। आत्मा बोल रहा है, वह एक प्रबल अग्नि है, उसमें महिमा है और वह न्याय कर रहा है; वह मनुष्य का पुत्र है, जो पाँवों तक का वस्त्र पहने हुए है और छाती पर सोने का पटुका बाँधे हुए है। उसके सिर और बाल श्‍वेत ऊन के समान उज्ज्वल हैं, और उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान हैं; उसके पाँव उत्तम पीतल के समान हैं, मानो भट्ठी में तपे हुए हों; और उसका शब्द अनेक जल के शब्द के समान है। वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिए हुए है, और उसके मुख में तेज़ दोधारी तलवार है और उसका मुँह ऐसा प्रज्‍वलित है, जैसे सूर्य कड़ी धूप के समय चमकता हो!

मनुष्य के पुत्र को देखा गया है, और परमेश्वर ने अपने आप को खुले रूप से प्रकट किया है। जमकर चमकते सूरज की तरह परमेश्वर की महिमा प्रकट की गई है! परमेश्वर का तेजस्वी मुख अपनी चमक से चकाचौंध करता है; किसकी आंखें उसके विरोध की हिम्मत कर सकती हैं? विरोध का अर्थ है मृत्यु! अपने दिल में जो कुछ भी तुम सोचते हो, जो भी शब्द तुम कहते हो या जो कुछ भी तुम करते हो, उसके लिए थोड़ी-सी भी दया नहीं दिखाई जाती है। तुम लोग सब समझोगे और देखोगे कि तुम लोगों ने क्या पाया है—मेरे न्याय के अलावा कुछ नहीं! अगर तुम लोग मेरे वचनों को खाने और पीने के लिए अपना प्रयास नहीं करते हो, बल्कि मनमाने ढंग से गड़बड़ी करते हो और मेरा निर्माण नष्ट करते हो, तो क्या मैं इसे बरदाश्‍त कर सकता हूँ? मैं इस तरह के व्यक्ति के साथ नरमी नहीं करूँगा! यदि तुम्हारा व्यवहार और अधिक बिगड़ा, तो तुम आग में भस्म हो जाओगे!

सर्वशक्तिमान परमेश्वर एक आध्यात्मिक शरीर में प्रकट हुआ है, और सिर से पैर तक देह या रक्त से बिल्‍कुल जुड़ा नहीं है। वह ब्रह्मांडीय दुनिया से परे है, और तीसरे स्वर्ग के गौरवशाली सिंहासन पर बैठा सभी चीजों पर शासन करता है! ब्रह्मांड और सभी चीज़ें मेरे हाथों में हैं। मैं जो भी कहूँगा वही होगा। मेरा आदेश पूरा होगा। शैतान मेरे पैरों के तले है; वह एक अथाह कुंड में है! मेरे एक आदेश के जारी होने पर तो आकाश और पृथ्वी गायब हो जाएंगे और उनका कोई अस्तित्‍व नहीं रहेगा! सभी चीज़ें नवीनीकृत हो जाएंगी; यह एक अटल सत्य है, जो पूरी तरह सही है। मैंने दुनिया को जीत लिया है, सभी बुरों पर विजय प्राप्त की है।

मैं यहाँ बैठा तुम लोगों से बात कर रहा हूँ; जिनके पास कान हैं, उन्हें सुनना चाहिए और जो जीवित हैं, उन्हें स्वीकार करना चाहिए। दिन समाप्त हो जाएंगे; दुनिया की सभी चीजें खत्म हो जाएँगी, और सब कुछ नया बनकर उत्पन्न होगा। यह याद रखना! याद रखो! तुम इस बारे में लापरवाही नहीं कर सकते। आकाश और पृथ्वी गायब हो जाएँगे, परन्तु मेरे वचन रहेंगे!

एक बार फिर तुम लोगों को प्रोत्साहित करता हूँ : व्यर्थ में भागो मत! जागो! मुड़ो और किनारा निकट है! मैं पहले ही तुम लोगों के बीच प्रकट हो चुका हूँ और मेरी वाणी उदित हो चुकी है। मेरी वाणी तुम लोगों के सामने उदित हो चुकी है, हर दिन वह तुम लोगों के सामने, तुमसे रूबरू होती है, हर दिन वह ताजी और नई होती है। तुम मुझे देखते हो और मैं तुम्हें देखता हूँ; मैं तुमसे निरंतर बात करता हूँ और तुम्हारे साथ आमने-सामने होता हूँ। फिर भी तुम मुझे अस्वीकार करते हो, तुम मुझे नहीं जानते हो; मेरी भेड़ें मेरी वाणी सुन सकती हैं, और फिर भी तुम लोग संकोच करते हो! तुम लोग संकोच करते हो! तुम्हारा दिल सुन्न हो गया है, तुम्हारी आँखों को शैतान ने अंधा कर दिया है, और तुम मेरा गौरवशाली मुख देख नहीं पाते हो—तुम कितने दयनीय हो! कितने दयनीय!

मेरे सिंहासन के सामने उपस्थित सात आत्माओं को पृथ्वी के सभी कोनों में भेजा गया है और मैं कलीसियाओं से बात करने के लिए अपना संदेशवाहक भेजूंगा। मैं धार्मिक और विश्वासयोग्य हूँ; मैं वह परमेश्वर हूँ जो मनुष्यों के दिल की गहराइयों की सूक्ष्मता से जांच करता है। पवित्र आत्मा कलीसियाओं से बात करता है और ये मेरे वचन हैं जो मेरे पुत्र के भीतर से निकलते हैं; जिनके कान हैं उन सभी को सुनना चाहिए! जो जीवित हैं उन सभी को स्वीकारना चाहिए! बस उन्हें खाओ और पिओ, और संदेह न करो। जो समर्पण करेंगे और मेरे वचनों पर ध्यान देंगे, उन सभी को महान आशीष प्राप्त होंगे! जो ईमानदारी से मेरे मुखमंडल की खोज करेंगे, उन सभी के पास निश्चित रूप से नई रोशनी, नई प्रबुद्धता और नई अंतर्दृष्टि होगी; सब कुछ ताज़ा और नया होगा।

मेरे वचन तुम्हारे लिए किसी भी समय प्रकट होंगे और वे तुम्हारी आत्मा की आंखें खोल देंगे ताकि तुम आध्यात्मिक क्षेत्र के सभी रहस्यों को देख सको। राज्य मनुष्य के बीच है। शरण में प्रवेश करो और सभी अनुग्रह और आशीष तुम्हें प्राप्त होंगे, अकाल और महामारी तुम्हें पास नहीं आ सकेंगे, और भेड़िए, साँप, बाघ और तेंदुए तुम्हें नुकसान पहुंचाने में असमर्थ रहेंगे। तुम मेरे साथ जाओगे, मेरे साथ चलोगे और मेरे साथ महिमा में प्रवेश करोगे!

सर्वशक्तिमान परमेश्वर! उसका गौरवशाली शरीर खुले रूप से प्रकट होता है, पवित्र आध्यात्मिक शरीर उदय होता है और वह स्वयं पूर्ण परमेश्वर है! दुनिया और देह दोनों बदल गए हैं और पहाड़ी पर उसका रूप-परिवर्तन परमेश्वर का व्‍यक्तित्‍व है। वह अपने सिर पर सुनहरा मुकुट पहने हुए है, उसके वस्त्र पूर्ण रूप से श्वेत हैं, छाती पर सोने का पटुका बाँधे हुए है और दुनिया व सभी चीज़ें उसकी चरण-पीठ हैं। उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान हैं, उसके मुख में तेज़ दोधारी तलवार है और वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिए हुए है। राज्य का मार्ग असीम उज्ज्वल है और उसकी महिमा उदित हो रही और चमक रही है; पर्वत आनंदित हैं और जल हास्‍य मग्‍न हैं, और सूर्य, चंद्रमा और तारे सभी अपनी क्रमबद्ध व्यवस्था में घूमते हैं, और अद्वितीय, सच्चे परमेश्वर का स्वागत करते हैं, जिनकी विजयी वापसी उसके छह हज़ार वर्ष की प्रबंधन योजना को पूरा करने की घोषणा करती है। ख़ुशी से सब कूदते और नाचते हैं! जय हो! सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपने गौरवशाली सिंहासन पर बैठा है! गाओ! सर्वशक्तिमान का विजयी ध्वज प्रतापी, भव्‍य सिय्योन पर्वत की ऊंचाई पर लहराता है! सभी राष्ट्र उत्साहित हैं, सभी लोग गा रहे हैं, सिय्योन पर्वत प्रसन्‍नता से हँस रहा है, और परमेश्वर की महिमा का उदय हुआ है! मैंने कभी सपनों में भी नहीं सोचा था कि मैं कभी परमेश्वर का चेहरा देखूंगा, फिर भी आज मैंने देखा है। हर दिन उसके साथ आमने-सामने, मैं अपना दिल खोलकर रखता हूँ। खाने पीने का सभी कुछ, वह प्रचुरता से प्रदान करता है। जीवन, वचन, कार्य, सोच, विचार—उसका महिमामय प्रकाश इन सभी को उज्जवल करता है। वह रास्ते के हर कदम पर अगुवाई करता है, और यदि कोई दिल विद्रोह करता है तो उसका न्याय तुरंत करता है।

परमेश्वर के साथ मिलकर खाना, साथ रहना, साथ जीना, उसके साथ होना, साथ चलना, साथ आनंद लेना, साथ-साथ महिमा और आशीष प्राप्त करना, परमेश्वर के साथ शासन साझा करना और राज्य में एक साथ होना—ओह, कितना आनंददायक है! ओह, कितना प्यारा है! हम हर दिन उसके साथ आमने-सामने होते हैं, हर दिन उससे बात करते हैं और निरंतर वार्तालाप करते हैं, हर दिन नई प्रबुद्धता और नई अंतर्दृष्टि प्राप्त करते हैं। हमारी आध्यात्मिक आंखें खुल गई हैं और हम सब कुछ देखते हैं; आत्मा के सभी रहस्य हमारे सामने प्रकट होते हैं। पवित्र जीवन कितना निश्चिंत है; तेज़ी से भागो और रुको मत, निरंतर आगे बढ़ो-आगे इससे भी अधिक अद्भुत एक जीवन है। केवल मीठे स्वाद से संतुष्ट न हो; हमेशा परमेश्वर में प्रवेश करने का प्रयास करो। वह सर्वव्यापी और प्रचुर है, और उसके पास सभी प्रकार की चीज़ें हैं जिनकी हम में कमी है। सक्रियता से सहयोग करो, उसके अंदर प्रवेश करो और कुछ भी कभी भी पहले जैसा नहीं रहेगा। हमारे जीवन का उत्थान होगा और कोई भी व्यक्ति, मामला या बात हमें परेशान नहीं कर पाएगी।

उत्थान! उत्थान! सच्चा उत्थान! परमेश्वर का जीवन उत्थान भीतर है और सभी वस्तुएं वास्तव में शांत हो जाती हैं! हम दुनिया और सांसारिक चीज़ों से परे चले जाते हैं, पतियों या बच्चों से कोई मोह नहीं रहता। बीमारी और परिवेश की बाध्यताओं के परे चले जाते हैं। शैतान हमें परेशान करने की हिम्मत नहीं कर सकता है। सभी आपदाओं से हम ऊपर हो जाते हैं—यह परमेश्वर को शासन की अनुमति देना है! हम शैतान को अपने कदमों के तले कुचल देते हैं, कलीसिया के लिए गवाही देते हैं और पूरी तरह से शैतान के बदसूरत चेहरे को बेनकाब करते हैं। कलीसिया का निर्माण मसीह में है, गौरवशाली शरीर का उदय हुआ है—यह स्‍वर्गारोहण में जीना है!

— 'न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है' से

27/03/2026

परमेश्वर के हृदय को सुख देने के लिए नया इंसान बनना

मैं शैतान के द्वारा इतनी बुरी तरह से भ्रष्ट हो चुका हूँ, कि जो कुछ भी मेरे पास है, मुझे उसका अहंकार हो गया है।
मैं अपने काम और अपने उपदेशों में दिखावा करता हूँ, मुझे लगता है कि मैं कमाल का इंसान हूँ।

मैं बेहद आत्म-तुष्ट और आत्माभिमानी हूँ!
मेरे अंदर ज़रा-सी भी इंसानियत नहीं है। मैं बहुत नीच और घिनौना हूँ! मेरे अंदर लेश-मात्र भी मानवता का अंश नहीं मिल सकता।

मैं हमेशा मुखौटा पहने रहता हूँ और ईमानदार होने का नाटक करता हूँ, ऐसे में तू दुखी कैसे नहीं होगा? तू मेरे दिल में झाँक कर देख चुका है, तेरे वचनों ने जो कुछ उजागर किया, उससे मैं शर्मिंदा हूँ।

इतना शर्मिंदा हूँ कि तुझसे नज़रें नहीं मिला सकता, मैं अपनी पीड़ा को बयाँ नहीं कर सकता, मेरा दिल टूट चुका है।
मैंने इतने समय तक तेरा अनुसरण किया, लेकिन मैंने कभी तेरी इच्छा की परवाह नहीं की।
मुझे सिद्धांतों और शब्दों का ज्ञान है, फिर भी मेरा स्वभाव नहीं बदला। तेरे वचनों ने सब-कुछ स्पष्ट कर दिया, लेकिन मैंने ही अपने दिल को खोजने में नहीं लगाया।
2 तेरे वचनों के न्याय और ताड़ना से गुज़रते हुए, आखिरकार मैं जाग गया हूँ। अब मैं तेरे खिलाफ़ विद्रोह नहीं करूंगा, अब मुझमें ज़मीर का अभाव नहीं होगा। तूने इंसान को बचाने के लिए, दीन बनकर देहधारण किया है।

— 'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

23/03/2026

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते है :

मेरे वचनों के सिद्धांतों और मेरे कार्य करने के तरीके के कारण, लोग मुझे नकारते हैं;
इतने लंबे समय से मेरे बोलने का यही उद्देश्य है (बड़े लाल अजगर के सभी वंशज इन वचनों के निशाने पर हैं)। यह मेरे कार्य करने का विवेकपूर्ण तरीका है; यह बड़े लाल अजगर के लिए मेरा न्याय है।
यह मेरी कार्यनीति है और एक भी व्यक्ति इसे पूरी तरह से समझ नहीं सकता। हर नये मोड़ पर, अर्थात्, मेरी प्रबंधन योजना के हर परिवर्ती चरण में, कुछ लोगों को हटाया जाना चाहिए; वे मेरे कार्य के अनुक्रम के अनुसार हटा दिए जाते हैं। केवल यही मेरी पूरी प्रबंधन योजना का कार्य करने का तरीका है। जब मैं एक-एक करके, उन लोगों को बाहर निकाल देता हूँ जिन्हें मैं हटाना चाहता हूँ, तब मैं अपने कार्य का अगला चरण शुरू करता हूँ। लेकिन यह अंतिम बार हटाया जाना है (और इसका अर्थ है चीन की कलीसियाओं में) और इसी अवधि में, विश्व के सृजन के बाद से, परिवर्ती चरण में बड़ी संख्या में लोगों को हटाया जाएगा।

पूरे इतिहास में, जब भी लोगों को हटाया गया है, बाद के सेवा-कार्य के लिए एक हिस्सा बच जाता है। लेकिन यह समय पहले जैसा नहीं है; यह निर्मल और चुस्त है, यह सबसे महत्वपूर्ण और सबसे व्यापक है। हालाँकि मेरे वचनों को पढ़कर, अधिकांश लोग अपने मन से संदेह निकालने का प्रयास करते हैं, किन्तु आखिर में वे इसे काबू नहीं कर पाते और अंततः संघर्ष में पड़ जाते हैं। यह निर्णय करना मनुष्य पर निर्भर नहीं है, क्योंकि जिन्हें मैंने पूर्वनियत कर दिया है वे बच नहीं सकते और जिन्हें मैंने पूर्वनियत नहीं किया है, उनसे मैं केवल घृणा ही कर सकता हूँ। जिन लोगों को मैं कृपापूर्वक देखता हूँ, मैं केवल उन्हीं से प्रेम करता हूँ, अन्यथा, कोई भी व्यक्ति आज़ादी से न तो मेरे राज्य को छोड़कर जा सकता है, न ही उसमें प्रवेश कर सकता है। यह लौहदंड है और यही मेरे प्रशासनिक आदेशों को संपन्न करने की सामर्थ्यवान गवाही और पूर्ण अभिव्यक्ति है।
यह निश्चित रूप से मात्र एक जोशीला होने का मामला नहीं है। मैंने क्यों कहा है कि शैतान पतन के सामने दुर्बल है? पहले उसके पास ताकत थी, किन्तु वह मेरे हाथों में है; यदि मैं उसे लेटने के लिए कहूँ, तो उसे लेटना होगा; यदि मैं उसे उठकर सेवा करने के लिए कहूँ, तो उसे उठकर अच्छी तरह से मेरी सेवा करनी होगी। ऐसा नहीं है कि शैतान ऐसा करने को तैयार है, बल्कि मेरा लौहदंड शैतान पर शासन करता है, वह इसी तरीके से आश्वस्त होकर मेरे वचन पर विश्वास करता है। मेरे प्रशासनिक आदेश उसे नियंत्रित करते हैं, मेरे पास शक्ति है, इसलिए उसके पास विश्वास करने के अलावा और रास्ता नहीं है; उसे रत्तीभर भी प्रतिरोध किए बिना, मेरे पैरों तले रौंद दिया जाना चाहिए।

अतीत में जब शैतान मेरे पुत्रों की सेवा कर रहा था, तो वह बेहद धृष्ट था और जानबूझकर मेरे पुत्रों को धमकाता था, मेरा अपमान करने की उम्मीद लगाए रहता था, और दावा करता था कि मुझमें क्षमता नहीं है। कितना अंधा है! मैं तुझे कुचल कर मार डालूँगा! चल आ! तू फिर से क्रूर होने का दुस्साहस तो कर! तू फिर से मेरे पुत्रों के साथ उपेक्षा का व्यवहार करने का दुस्साहस तो कर! लोग जितना अधिक ईमानदार होते हैं, जितना अधिक वे मेरे वचनों को सुनते हैं और मेरी आज्ञा का पालन करते हैं, तू उतना ही अधिक उन्हें धमकाता है, उतना ही अधिक तू उन्हें अलग करता है (यहाँ मैं तेरे अपने अनुचरों को इकट्ठा करके गुट बनाने की बात कर रहा हूँ)। अब तेरी क्रूरता के दिन लदने का वक्त आ गया है, मैं थोड़ा-थोड़ा करके तेरे साथ विवादों का खात्मा रहा हूँ; जो कुछ तूने किया है, उसके लिए मैं तुझे रत्तीभर भी बचकर नहीं निकलने दूँगा। शैतान, अब सत्ता तेरे हाथों में नहीं है; मैंने वो सत्ता वापस ले ली है और अब अपने पुत्रों को बुलाकर तुझसे निपटने का समय आ गया है। आज्ञाकारी बन और प्रतिरोध करना बिल्कुल छोड़ दे। मेरे सामने तूने पहले कितना ही अच्छा व्यवहार किया हो, आज उससे तुझे कोई सहायता नहीं मिलेगी।

यदि तू उन लोगों में से नहीं हैं जिन्हें मैं प्रेम करता हूँ, तो मुझे तेरी ज़रूरत नहीं है। अधिक लोग मुझे स्वीकार्य नहीं; यह वही संख्या होनी चाहिए जो मैंने पूर्व निर्धारित की है; उससे एक भी कम और भी बदतर है। शैतान, अवरोधक मत बन! क्या ऐसा हो सकता है कि मैं अपने हृदय में स्पष्ट नहीं हूँ कि मैं किससे प्रेम करता हूँ और किससे नफरत करता हूँ? क्या मुझे तेरे द्वारा याद कराने की आवश्यकता है? क्या शैतान मेरे पुत्रों को जन्म दे सकता है? सभी बेतुके हैं! सभी अधम हैं! मैं सभी को अच्छी तरह से और पूरी तरह से त्याग दूँगा। मुझे किसी एक भी आवश्यकता नहीं है; सब लोग चले जाओ! छः-हजार-वर्षीय प्रबंधन योजना समाप्ति पर है, मेरा कार्य हो गया है और मुझे जानवरों एवं नीच लोगों के इस झुंड को दूर करना है!

— 'वचन देह में प्रकट होता है, खंड 1' से

📚📚जब कोई व्यक्ति परमेश्वर के निकट आता है, तो उसके जीवन में धीरे-धीरे लेकिन गहरे आत्मिक और व्यवहारिक परिवर्तन दिखाई देने ...
19/02/2026

📚📚जब कोई व्यक्ति परमेश्वर के निकट आता है, तो उसके जीवन में धीरे-धीरे लेकिन गहरे आत्मिक और व्यवहारिक परिवर्तन दिखाई देने लगते हैं।
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1. हृदय और सोच में परिवर्तन
व्यक्ति का हृदय नम्र होता है, बुरी आदतों से मन हटने लगता है और अच्छे कार्य करने की इच्छा बढ़ती है।
पुराना स्वभाव बदलकर नया जीवन शुरू होता है।
“यदि कोई मसीह में है, तो वह नई सृष्टि है।” — Bible (2 Corinthians 5:17)

2. मन में शांति आती है
चिंता, भय और अपराध-बोध कम होने लगता है। परमेश्वर पर भरोसा करने से मन को सच्ची शांति मिलती है।
“मैं तुम्हें अपनी शांति देता हूँ।” — John 14:27

3. प्रार्थना का जीवन शुरू होता है
व्यक्ति प्रार्थना करने लगता है और उसे महसूस होता है कि वह अकेला नहीं है।
वह हर परिस्थिति में परमेश्वर से बात करना सीखता है।

4. व्यवहार और रिश्तों में सुधार
गुस्सा कम होता है, क्षमा करने की शक्ति आती है, प्रेम, दया और धैर्य बढ़ता है।
“प्रेम, आनंद, शांति, धैर्य…” — Galatians 5:22–23

5. कठिन समय में सामर्थ्य मिलती है
समस्याएँ समाप्त न भी हों, फिर भी उनका सामना करने का साहस और विश्वास मिलता है।
व्यक्ति टूटने के बजाय मजबूत बनता है।

6. जीवन का उद्देश्य स्पष्ट होता है
जीवन केवल स्वार्थ या भौतिक लाभ तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सत्य, सेवा और दूसरों के भले के लिए जीने की प्रेरणा मिलती है।

संक्षेप में:
परमेश्वर के निकट आने से हृदय बदलता है, सोच बदलती है और जीवन की दिशा बदल जाती है।

15/02/2026

मसीह में सच्ची शिक्षा (True Teaching in Christ) 📜📚

बाइबल के अनुसार कोई भारी नियमों का बोझ नहीं, बल्कि सत्य, प्रेम और जीवन परिवर्तन की शिक्षा है। इसे सरल बिंदुओं में समझिए:
✝️ 1. सत्य में चलना
यूहन्ना 14:6
“मैं ही मार्ग, सत्य और जीवन हूँ।”
अर्थ:
सच्ची शिक्षा किसी दर्शन या परंपरा में नहीं, स्वयं यीशु मसीह में है। वही सत्य का मापदंड हैं।
❤️ 2. प्रेम ही केंद्र है
मत्ती 22:37–39
“तू अपने परमेश्वर से… और अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना।”
अर्थ:
मसीह की शिक्षा का केंद्र प्रेम है—परमेश्वर से और मनुष्यों से। बिना प्रेम के सब शिक्षाएँ खोखली हैं।
🕊️ 3. अनुग्रह से उद्धार
इफिसियों 2:8–9
“अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है… कर्मों से नहीं।”
अर्थ:
उद्धार नियमों या अच्छे कामों से नहीं, बल्कि यीशु पर विश्वास से है।
🔄 4. मन परिवर्तन (Repentance) और नया जीवन
रोमियों 12:2
“इस संसार के समान न बनो, पर अपने मन के नए हो जाने से बदलते जाओ।”
अर्थ:
सच्ची शिक्षा अंदर से परिवर्तन लाती है—सोच, आदत और जीवन दिशा बदलती है।
🔓 5. स्वतंत्रता, न कि नियमवाद
गलातियों 5:1
“मसीह ने हमें स्वतंत्र रहने के लिए स्वतंत्र किया है।”
अर्थ:
मसीह में जीवन डर और दोष-भाव से मुक्त होकर, आत्मा की अगुवाई में जीना है।
🌿 6. फल से पहचान
गलातियों 5:22–23
“आत्मा का फल—प्रेम, आनंद, शांति, धीरज…”
अर्थ:
जहाँ सच्ची शिक्षा होती है, वहाँ जीवन का फल दिखाई देता है, सिर्फ शब्द नहीं।
📖 7. मसीह जैसा बनना लक्ष्य है
यूहन्ना 13:34
“जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक-दूसरे से प्रेम रखो।”
अर्थ:
सच्ची शिक्षा का लक्ष्य है—मसीह के स्वभाव में ढलना।

📖 बाइबल बाल देवता और मोलेक के बारे में क्या कहती हैबाइबल बाल देवता और मोलेक की पूजा की कड़ी निंदा करती है, क्योंकि इनके ...
14/02/2026

📖 बाइबल बाल देवता और मोलेक के बारे में क्या कहती है
बाइबल बाल देवता और मोलेक की पूजा की कड़ी निंदा करती है, क्योंकि इनके नाम पर निर्दोष बच्चों की बलि दी जाती थी। यह कार्य परमेश्वर की दृष्टि में घोर पाप और घृणित अपराध है।
🔥 बाल देवता के बारे में बाइबल
बाल कनान देश और आसपास के क्षेत्रों का एक झूठा देवता माना जाता था। लोग इसे वर्षा, उपज और शक्ति के लिए पूजते थे।
❌ बाइबल की दृष्टि में
बाल की पूजा को मूर्ति पूजा कहा गया है
इसमें बच्चों की बलि, अनैतिक कर्म और अत्याचार शामिल थे
जब इस्राएलियों ने बाल की पूजा की, तो परमेश्वर का कोप और दंड उन पर आया
📖 बाइबल वचन
“उन्होंने बाल के लिए अपने बेटों और बेटियों को आग में जला दिया।”
— यिर्मयाह 19:5
🔥 मोलेक के बारे में बाइबल
मोलेक एक अत्यंत क्रूर देवता था, जिसके लिए जीवित बच्चों को आग में जला कर बलि दी जाती थी।
❌ परमेश्वर का कठोर आदेश
मोलेक को संतान चढ़ाना मृत्युदंड योग्य पाप था
यह कार्य परमेश्वर के पवित्र नाम का अपमान माना गया
📖 बाइबल वचन
“जो कोई अपनी संतान को मोलेक को दे, वह अवश्य मार डाला जाए।”
— लैव्यव्यवस्था 20:2–3
😡 परमेश्वर का स्पष्ट संदेश
बाइबल बार-बार यह सिखाती है कि:
बच्चों की बलि परमेश्वर को घृणित है
परमेश्वर ने कभी भी ऐसी आज्ञा नहीं दी
परमेश्वर जीवन देने वाला है, जीवन लेने वाला नहीं
📖
“मैंने न तो ऐसा आदेश दिया, न ही यह मेरे मन में कभी आया।”
— यिर्मयाह 7:31
✝️ बाइबल का मुख्य संदेश
बाल और मोलेक — झूठे देवता हैं
बच्चों की बलि — घोर पाप और अभिशाप है
सच्चा परमेश्वर — प्रेम, करुणा और जीवन का स्रोत है

✝️🔥 लोग यीशु मसीह के प्रचार का विरोध क्यों करते हैं? 🔥✝️जब भी यीशु मसीह के सुसमाचार का प्रचार होता है, तो कुछ लोग उसका व...
12/02/2026

✝️🔥 लोग यीशु मसीह के प्रचार का विरोध क्यों करते हैं? 🔥✝️

जब भी यीशु मसीह के सुसमाचार का प्रचार होता है, तो कुछ लोग उसका विरोध करते हैं। पर क्यों? 🤔
📖 “ज्योति संसार में आई, परन्तु मनुष्यों ने ज्योति से अधिक अन्धकार को प्रिय जाना, क्योंकि उनके काम बुरे थे।”
— (यूहन्ना 3:19-20)
सत्य जब प्रकट होता है, तो वह पाप को उजागर करता है।
और बहुत से लोग अंधकार को इसलिए चुनते हैं क्योंकि वे अपने बुरे कामों को छोड़ना नहीं चाहते।
📖 “तुम्हारा बैरी शैतान गरजते हुए सिंह के समान इस खोज में रहता है कि किसे फाड़ खाए।”
— (1 पतरस 5:8)
शैतान नहीं चाहता कि लोग सत्य को जानें, पाप से मन फिराएँ और परमेश्वर की ओर लौटें।
क्योंकि यीशु मसीह में सामर्थ है कि वे मनुष्य को पापों से छुड़ाएँ। ✝️
📖 “यदि पुत्र तुम्हें स्वतंत्र करेगा, तो तुम सचमुच स्वतंत्र हो जाओगे।”
— (यूहन्ना 8:36)
जब कोई व्यक्ति यीशु को स्वीकार करता है—
✔️ वह बुरे मार्ग को छोड़ देता है
✔️ दूसरों से प्रेम करना सीखता है ❤️
✔️ पाप से घृणा करने लगता है
✔️ नया जीवन प्रारम्भ करता है 🌿
📖 “हमारा मल्लयुद्ध लहू और मांस से नहीं, परन्तु प्रधानताओं और अधिकारों से है…”
— (इफिसियों 6:12)
विरोध चाहे कितना भी हो, परमेश्वर की आज्ञा स्पष्ट है:
📖 “इसलिए तुम जाकर सब जातियों को चेला बनाओ…”
— (मत्ती 28:19)
🔥 सुसमाचार का प्रचार रुकना नहीं चाहिए, क्योंकि यह अनन्त जीवन का संदेश है।
🙏 आइए, हम साहस के साथ सत्य का प्रचार करें।
✨ क्योंकि जहाँ यीशु की ज्योति पहुँचती है, वहाँ अंधकार टिक नहीं सकता।
📢 यदि यह संदेश आपको आशीष दे रहा है, तो कृपया इसे शेयर करें ताकि और लोग भी सत्य को जान सकें।
✝️ एक शेयर किसी के जीवन में परिवर्तन ला सकता है। 🌍❤️

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