29/03/2026
आंतरिक मुक्ति, शांति और परम आनंद की ओर ले जाने वाली एक आधुनिक और संपूर्ण मार्गदर्शिका।
जीवंत उपनिषद केवल एक किताब नहीं बल्कि मेरे भीतर की वह पुकार है जो हर उस इंसान के लिए है जो इस भागदौड़ भरी दुनिया में कहीं खो गया है। हम अक्सर बाहरी सफलता और भौतिक प्रगति के पीछे भागते रहते हैं पर भीतर एक अजीब सी खालीपन और बेचैनी बनी रहती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हम केवल सतही स्तर पर जी रहे हैं और हमारा अपनी आत्मा से नाता टूट चुका है।
इस पुस्तक के माध्यम से मैंने नर से नारायण की यात्रा का एक व्यावहारिक रास्ता दिखाने की कोशिश की है। हम दिन भर दूसरों से अपनी तुलना करते हैं और यही तुलना हमारे दुख और मानसिक तनाव की सबसे बड़ी जड़ है। जब हम दूसरों के जीवन को केवल सोशल मीडिया के चश्मे से देखते हैं तो अपने वास्तविक जीवन को अधूरा समझने लगते हैं। जीवंत उपनिषद हमें उस तुलना के जाल से निकालकर कृतज्ञता और संतोष की ओर ले जाती है।
इसमें मैंने उन गहरे विषयों को छूने का प्रयास किया है जो हमारे जीवन को सीधा प्रभावित करते हैं जैसे कि अहंकार से मुक्ति का असली मतलब क्या है या फिर हर पल आनंद में कैसे जिया जाए। यह सफर शरीर से आत्मा तक का है और परिमित से अपरिमित तक का है।
मेरा मानना है कि जहाँ तुलना समाप्त होती है वहीं से असली स्वतंत्रता शुरू होती है। यह पुस्तक एक दर्पण की तरह है जिसमें आप अपनी देह को नहीं बल्कि अपने उस अविनाशी स्वरूप को देखेंगे जो हमेशा से आपके भीतर था। अगर आप भी अपने जीवन में एक गहरा रूपांतरण चाहते हैं और आंतरिक शांति की खोज में हैं तो यह यात्रा आपके लिए है।
Now available on kindle unlimited as ebook and as paperback on Amazon, Flipkart and Astitva Prakashan website.
~भगवान श्री नरेंद्र किशोर