Bhagwan Shri Narendra Kishore

Bhagwan Shri Narendra Kishore God Within, Human Outside
Engineer ➔ MBA ➔ Realised Master
Sovereign Author: Pure Self Realisation & Jeevant Upanishad
👉 Direct Path to Liberation

आंतरिक मुक्ति, शांति और परम आनंद की ओर ले जाने वाली एक आधुनिक और संपूर्ण मार्गदर्शिका।जीवंत उपनिषद केवल एक किताब नहीं बल...
29/03/2026

आंतरिक मुक्ति, शांति और परम आनंद की ओर ले जाने वाली एक आधुनिक और संपूर्ण मार्गदर्शिका।

जीवंत उपनिषद केवल एक किताब नहीं बल्कि मेरे भीतर की वह पुकार है जो हर उस इंसान के लिए है जो इस भागदौड़ भरी दुनिया में कहीं खो गया है। हम अक्सर बाहरी सफलता और भौतिक प्रगति के पीछे भागते रहते हैं पर भीतर एक अजीब सी खालीपन और बेचैनी बनी रहती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हम केवल सतही स्तर पर जी रहे हैं और हमारा अपनी आत्मा से नाता टूट चुका है।

इस पुस्तक के माध्यम से मैंने नर से नारायण की यात्रा का एक व्यावहारिक रास्ता दिखाने की कोशिश की है। हम दिन भर दूसरों से अपनी तुलना करते हैं और यही तुलना हमारे दुख और मानसिक तनाव की सबसे बड़ी जड़ है। जब हम दूसरों के जीवन को केवल सोशल मीडिया के चश्मे से देखते हैं तो अपने वास्तविक जीवन को अधूरा समझने लगते हैं। जीवंत उपनिषद हमें उस तुलना के जाल से निकालकर कृतज्ञता और संतोष की ओर ले जाती है।

इसमें मैंने उन गहरे विषयों को छूने का प्रयास किया है जो हमारे जीवन को सीधा प्रभावित करते हैं जैसे कि अहंकार से मुक्ति का असली मतलब क्या है या फिर हर पल आनंद में कैसे जिया जाए। यह सफर शरीर से आत्मा तक का है और परिमित से अपरिमित तक का है।

मेरा मानना है कि जहाँ तुलना समाप्त होती है वहीं से असली स्वतंत्रता शुरू होती है। यह पुस्तक एक दर्पण की तरह है जिसमें आप अपनी देह को नहीं बल्कि अपने उस अविनाशी स्वरूप को देखेंगे जो हमेशा से आपके भीतर था। अगर आप भी अपने जीवन में एक गहरा रूपांतरण चाहते हैं और आंतरिक शांति की खोज में हैं तो यह यात्रा आपके लिए है।

Now available on kindle unlimited as ebook and as paperback on Amazon, Flipkart and Astitva Prakashan website.

~भगवान श्री नरेंद्र किशोर

27/03/2026

क्या आप जीवन के 'तनाव' और 'दुखों' से थक गए हैं? इस वीडियो में, हम 'स्थितप्रज्ञ' की गहन अवधारणा को समझते हैं—वह जो हर परिस्थिति में अडिग और शांत रहता है।
परम सत्य को जानें: आप 'सच्चे स्वरूप' (आत्मा) हैं, और यह संसार आपका रंगमंच है। जब आप समझ जाते हैं कि आपका जीवन एक 'लीला' (दिव्य खेल) है, तो आप अपने चरित्र को पूरी तरह से निभाते हुए भी निर्लिप्त रह सकते हैं। न आग आपको जला सकती है, न पानी आपको भिगो सकता है।
अद्वैत वेदांत के इस सार को समझें और आत्म-साक्षात्कार की ओर कदम बढ़ाएं।
✨ इन शिक्षाओं को विस्तार से समझने के लिए:
📖 मेरी बेस्टसेलर पुस्तकें पढ़ें: 'परम आत्मबोध' (Param Atmabodh) और 'Pure Self Realisation'
🌐 साप्ताहिक सत्संग के लिए हमारे "Pure Self Realisation" व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें।
🔗 सभी लिंक चैनल के बायो (Bio) में उपलब्ध हैं!
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26/03/2026

यात्रा नर से नारायण की...
क्या आप स्वयं को जानने के लिए तैयार हैं?
मेरी नई पुस्तक 'जीवंत उपनिषद' केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए है। यह आपको अपने वास्तविक स्वरूप के प्रति न केवल जाग्रत करेगी, बल्कि उस परम ज्ञान (Wisdom) को आपके दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने में मदद करेगी।
इस यात्रा में मेरे साथ जुड़ें और अपने भीतर के उस 'नारायण' से मिलें जो पूर्णता और आनंद का स्रोत है।
📖 अपनी प्रति आज ही प्राप्त करें! (Link in Bio/Comments)

26/03/2026

अद्वैत की लीला ।

26/03/2026

जीवन: बोझ या खेल? | The Secret of Fulfillment

अक्सर हम जीवन को एक प्रतिस्पर्धा या बोझ की तरह जीते हैं। लेकिन एक ज्ञानी के लिए, जीवन कोई संघर्ष नहीं बल्कि एक खेल है। इस शॉर्ट में, मैं साझा कर रहा हूँ कि कैसे 'पूर्णता' (Fulfillment) की तलाश बंद करके, 'पूर्णता से' जीना शुरू करें।

https://youtu.be/uUfbtszLRbU?si=IjHhBrnYPPluRl1lजाने बुद्ध पुरुष के सारे राज़ । एक बुद्ध और आम इंसान में क्या फ़र्क़ होत...
25/03/2026

https://youtu.be/uUfbtszLRbU?si=IjHhBrnYPPluRl1l

जाने बुद्ध पुरुष के सारे राज़ । एक बुद्ध और आम इंसान में क्या फ़र्क़ होता है जाने ।

मुक्ति (Enlightenment) के बारे में हमारी धारणा अक्सर कल्पनाओं से भरी होती है। क्या यह संसार से पलायन है, या इसे पूरी तरह से नए ....

मैं ही रास्ता हूँ, मैं ही मंज़िल हूँ, और मैं ही सत्य हूँ।बहुत लोग इसे अहंकार कहेंगे। लेकिन क्या समुद्र का खुद को 'असीम' क...
23/03/2026

मैं ही रास्ता हूँ, मैं ही मंज़िल हूँ, और मैं ही सत्य हूँ।

बहुत लोग इसे अहंकार कहेंगे। लेकिन क्या समुद्र का खुद को 'असीम' कहना अहंकार है, या उसकी वास्तविकता?
इस वीडियो में, मैंने उस सत्य को उजागर किया है जिसे हम अक्सर अपनी आंखों के इतने करीब होने के कारण देख नहीं पाते। जैसे आंख पूरी दुनिया को देखती है, पर खुद को नहीं देख सकती, वैसे ही हम 'स्वयं' (Self) को बाहर की भीड़ में खोज रहे हैं।

इस सत्संग में आप जानेंगे:

• The Math of Spirituality: क्यों आपका वर्तमान ज्ञान ही आपका सबसे बड़ा 'मापदंड' (limitation) बन गया है?

• Beyond the Ego: अहंकार सिर्फ घमंड नहीं है, यह एक 'सीमा' है। जब तक आप सीमा में हैं, आप असीम (Infinite) को नहीं पा सकते।

• Living Advaita: जीव से शिव होने की यात्रा—क्या इंसान भगवान हो सकता है?

यह वीडियो उनके लिए नहीं है जो सिर्फ चमत्कार या मनोरंजन खोज रहे हैं। यह उनके लिए है जो 'पात्र' (vessel) बनने को तैयार हैं ताकि उसमें असीम उतर सके।

पूरा वीडियो यहाँ देखें:

https://youtu.be/lQHFpdP5dmI?si=3bmZEJkQ0RZaEI77

अद्वैत का यह मार्ग तर्कसंगत (Rational) भी है और अनुभवजन्य (Experiential) भी। क्या आप अपनी सीमाओं को छोड़ने के लिए तैयार हैं?

Aham Brahmasmi | Living Advaita Vedanta Wisdom | Param Atmabodh by Bhagwan Shri Narendra Kishore🔱 Aham Brahmasmi | Advaita Vedanta का जीवंत दर्शन | Param At...

Chinta aur dukh se mukti ka asli raasta kya hai? Hum sab aksar apni ichhaon ke peeche bhagte rehte hain ye sochkar ki ja...
21/03/2026

Chinta aur dukh se mukti ka asli raasta kya hai? Hum sab aksar apni ichhaon ke peeche bhagte rehte hain ye sochkar ki jab wo puri hongi tab sukoon milega. Lekin sach toh ye hai ki jab tak chahat hai tab tak chinta bani rahegi.
Is video mein bahut hi saral tareeke se samjhaya gaya hai ki kaise hum apne darr aur stress se upar uth sakte hain. Jab hum khud ko aur apni atma ko samajh lete hain tab hamara har kaam anand se bhar jata hai. Agar aap bhi mansik shanti ki talash mein hain toh ye video zaroor dekhein.

Video link: https://youtu.be/LITo-uieWdo?si=Jh54L-qd6RVHAXfy

आपके सारे चिंता और दुःख से मुक्ति का रामबाण। Freedom from fear and stress.Chinta aur bhay se mukti. Highlights of Video.दुःख चिंता...

It is deeply fulfilling to share that my book Jeevant Upanishad: Nar se Narayan ki Yatra is now available in paperback o...
20/03/2026

It is deeply fulfilling to share that my book Jeevant Upanishad: Nar se Narayan ki Yatra is now available in paperback on Amazon. This work is a personal journey to understand how timeless wisdom can be lived in today’s world.

Jeevant Upanishad is a practical guide to discovering inner fulfillment, moving beyond restlessness, and living with peace, clarity, and joy. It explores the root of human dissatisfaction and offers a path from competition to compassion, from seeking outside to realizing within.

Honored to have its vision featured in The Literature Times. The journey from human to divine begins within.

The Literature Times Feature: https://www.theliteraturetimes.com/book-release-jeevant-upanishad-nar-se-narayan-ki-yatra-by-bhagwan-shri-narendra-kishore/

Paperback available on Amazon: https://amzn.in/d/03pqnMf4

~Bhagwan Shri Narendra Kishore

13/03/2026
संसार में हमेशा अधूरेपन की ही चर्चा होती है। हमसे हमेशा यही कहा जाता है कि हममें क्या कमी है, हमें और क्या पाना है या अभ...
11/03/2026

संसार में हमेशा अधूरेपन की ही चर्चा होती है। हमसे हमेशा यही कहा जाता है कि हममें क्या कमी है, हमें और क्या पाना है या अभी और क्या बनना बाकी है।

लेकिन सत्संग वह जगह है जहाँ पहली बार आपकी पूर्णता की बात होती है। उपनिषद का गहरा अर्थ ही यही है कि सत्य के करीब बैठना। और जब हम सत्य के करीब बैठते हैं, तो धीरे-धीरे समझ आता है कि हम केवल एक सीमित नर नहीं हैं। हमारे भीतर ही नारायण की पूर्णता पहले से मौजूद है।

मेरी नई पुस्तक जीवंत उपनिषद: नर से नारायण की यात्रा केवल किसी सिद्धांत या दर्शन की किताब नहीं है। यह मेरे अपने प्रत्यक्ष अनुभव और आत्मबोध से निकली हुई एक यात्रा है। यह एक निमंत्रण है अधूरे से पूर्ण की ओर लौटने का।

इसे पढ़ते हुए आप महसूस करेंगे कि आपके भीतर वह असीम शांति और पूर्णता हमेशा से थी।

यह पुस्तक अब अमेज़न किंडल पर उपलब्ध है। अगर आप किंडल अनलिमिटेड के सदस्य हैं तो आप इसे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के पढ़ सकते हैं।

लिंक: https://amzn.in/d/07vZaIn8

~Bhagwan Shri Narendra Kishore

जब जीवन का हर रंग उस परमात्मा के रंग में मिल जाता है, तब संघर्ष अपने आप समाप्त हो जाता है और एक अनूठा उत्सव शुरू होता है...
05/03/2026

जब जीवन का हर रंग उस परमात्मा के रंग में मिल जाता है, तब संघर्ष अपने आप समाप्त हो जाता है और एक अनूठा उत्सव शुरू होता है। सच तो यह है कि भक्ति केवल मंदिर की दीवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे हर छोटे-बड़े कर्म को ‘धर्म’ में बदल देने की एक अद्भुत कला है।
मेरी पुस्तक Param Atmabodh का असली सार भी यही है कि हम स्वयं को पहचानें और जीवन के हर परिणाम को उसकी मीठी कृपा मानकर स्वीकार करना सीखें। 🕉️🙏

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Mumbai
410206

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