जो वैश्य/ बनिया भाइयों के साथ रहेगा, वही हमारा नेता बनेगा

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जो वैश्य/ बनिया भाइयों के साथ रहेगा, वही हमारा नेता बनेगा 🙏जय वैश्य समाज🙏
✊ एकजुट वैश्य समाज ✊

वैश्य जागरूक मंच - पंजी0 मुरादाबाद महानगर की बैठक का सफल आयोजन,  #महानगर_कार्यकारिणी_भंग,  #नवीन_कार्यकारिणी_गठन_प्रक्रि...
05/08/2026

वैश्य जागरूक मंच - पंजी0 मुरादाबाद महानगर की बैठक का सफल आयोजन, #महानगर_कार्यकारिणी_भंग,
#नवीन_कार्यकारिणी_गठन_प्रक्रिया_प्रारंभ

ैश्य_समाज
#वैश्य_जागरुक_मंच
#वैश्य_एकता_जिंदाबाद

24/07/2026
19/07/2026

वैश्य 🔥 समाज को अभिताभ जैसे युवाओं पर गर्व है , वो अपनी समस्या के लिए खुल कर अपनी आवाज तो रख रहे है ।।

“साहब, देखना नहीं… बस न्याय दिला दीजिए!”

लखीमपुर खीरी के कक्षा 8 के छात्र अमिताभ गुप्ता का यह साहस हर किसी के लिए प्रेरणा है। अपने घर पर कथित अवैध कब्जे की शिकायत लेकर यह 13 वर्षीय बालक अकेले तहसील दिवस में पहुँचा और बिना किसी डर के अपनी बात जिला अधिकारी के सामने रखी।

यह घटना केवल एक बच्चे की हिम्मत की कहानी नहीं, बल्कि इस बात का संदेश है कि अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने की कोई उम्र नहीं होती।
#वैश्य_जागरूक_मंच
#वैश्य_समाज
#वैश्य_एकता_जिंदाबाद

दिनांक 17 जुलाई 2026 को  #वैश्य_जागरूक_मंच - पंजी0 द्वारा मुरादाबाद में प्रमुख चौराहे पर वैश्य शिरोमणि महान  #दानवीर_राज...
18/07/2026

दिनांक 17 जुलाई 2026 को #वैश्य_जागरूक_मंच - पंजी0 द्वारा मुरादाबाद में प्रमुख चौराहे पर वैश्य शिरोमणि महान #दानवीर_राजा_भामाशाह जी के नाम पर #भामाशाह_चौक एवं उनकी #भव्य_प्रतिमा स्थापित किए जाने हेतु माननीय #माननीय_महापौर_आदरणीय_विनोद_अग्रवाल_जी को मांग पत्र सौपा गया
#वैश्य_समाज
#वैश्य_एकता_जिंदाबाद
#भामाशाह

 #साधना_गुप्ता और  #चंद्रप्रकाश_गुप्ता के पुत्र  #प्रतीक का जन्म 1987 में हुआ। साधना गुप्ता का विवाह 1986 में चंद्रप्रका...
14/05/2026

#साधना_गुप्ता और #चंद्रप्रकाश_गुप्ता के पुत्र
#प्रतीक का जन्म 1987 में हुआ।
साधना गुप्ता का विवाह 1986 में चंद्रप्रकाश गुप्ता से हुआ था, लेकिन 1990 में दोनों का तलाक हो गया। इसके बाद वर्षों तक प्रतीक अपनी मूल पहचान के साथ बड़े हुए।
साल 2003 में जब मुलायम सिंह यादव ने साधना गुप्ता से विवाह किया, तब 16 वर्ष की आयु में प्रतीक को “यादव” नाम मिला। लेकिन नाम मिल जाने भर से स्वीकार्यता नहीं मिलती।
समाजवादी पार्टी के राजनीति और यादव परिवार के भीतर प्रतीक को कभी वैसी स्वीकृति नहीं मिली, जैसी अखिलेश और परिवार के अन्य सदस्यों को प्राप्त थी।
वजह तो यह भी बताई गई कि उनके असली माता-पिता दोनों ही (गुप्ता) वैश्य समाज से थे इसलिए प्रतीक यादव को हमेशा से सत्ता के केंद्र से दूर रखा गया। जहाँ अखिलेश यादव बचपन से ही मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित थे, वहीं प्रतीक यादव को परिवार और पार्टी दोनों में सीमित भूमिका ही मिली।
वे न कभी सक्रिय राजनीति में आगे लाए गए, न संगठन में कोई बड़ा पद मिला, और न ही उन्हें सार्वजनिक रूप से उत्तराधिकारी जैसी स्वीकार्यता मिली।
इसके पीछे का कारण एक ही है कि वे असली यादव के बेटे नहीं थे और यह भी सच है कि समाजवादी पार्टी में अखिलेश यादव का प्रभाव बढ़ने के बाद परिवार के दूसरे धड़े धीरे-धीरे हाशिये पर चले गए।
ऐसे माहौल में प्रतीक यादव के लिए जगह बनाना और भी कठिन हो गया।

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