12/01/2024
ki ekta
दिल छू लेने वाली कविता
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बड़े होकर भाई बहन कितने दूर हो जाते हैं। इतने व्यस्त हैं सभी, कि मिलने से मज़बूर हो जाते हैं।
एक दिन भी जिनके बिना नहीं रह सकते थे हम, सब ज़िन्दगी मे अपने मसरूफ हो जाते हैं |
छोटी-छोटी बात बताये बिना हम रह नही पाते थे,अब बड़े-बड़े मुश्किलो से हम अकेले जूझते जाते हैं।
ऐसा भी नहीं की उनकी एहमियत नही हैं कोई, पर अपनी तकलीफ़े जाने क्यूँ उनसे छिपाते हैं।
रिश्ते नए,ज़िन्दगी से जुड़ते चले जाते हैं, और बचपन के ये रिश्ते कहीं दूर हो जाते हैं|
खेल खेल मे रूठना मनाना रोज़ रोज़ की बात थी,अब छोटी सी गलतफहमी दिलो को दूर कर जाती है।
सब अपनी उलझनो मे उलझ कर रह जाते हैं,कैसे बताए उन्हें हम, वो हमे कितना याद आते हैं।
वो जिन्हे एक पल भी हम भूल नहीं पाते हैं,बड़े होकर वो भाई बहन हमसे दूर हो जाते हैं।
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पीयूष भारद्वाज
मुरादाबाद