True Scientific Hindu

True Scientific Hindu हिन्दू धर्म:- दुनिया का एक मात्र वैज्ञानिक धर्म.

21/10/2024

जानिये #भारत भूमि के बारे मे विदेशियों की राय -----
1. #अलबर्ट #आइन्स्टीन - हम भारत के बहुत ऋणी हैं, जिसने हमें गिनती सिखाई, जिसके बिना कोई भी सार्थक वैज्ञानिक खोज संभव नहीं हो पाती।
2. #रोमां रोलां ( #फ्रांस) - मानव ने आदिकाल से जो सपने देखने शुरू किये, उनके साकार होने का इस धरती पर कोई स्थान है, तो वो है भारत।
3. हू शिह ( #अमेरिका में #चीन #राजदूत)- सीमा पर एक भी सैनिक न भेजते हुए भारत ने बीस सदियों तक सांस्कृतिक धरातल पर चीन को जीता और उसे प्रभावित भी किया।
4. #मैक्स मुलर- यदि मुझसे कोई पूछे की किस आकाश के तले मानव मन अपने अनमोल उपहारों समेत पूर्णतया विकसित हुआ है, जहां जीवन की जटिल समस्याओं का गहन विश्लेषण हुआ और समाधान भी प्रस्तुत किया गया, जो उसके भी प्रसंशा का पात्र हुआ जिन्होंने प्लेटो और कांट का अध्ययन किया,तो मैं भारत का नाम लूँगा।
5. #मार्क ट्वेन- मनुष्य के #इतिहास में जो भी मूल्यवान और सृजनशील सामग्री है, उसका भंडार अकेले भारत में है।
6. #आर्थर शोपेन्हावर - #विश्व भर में ऐसा कोई अध्ययन नहीं है जो उपनिषदों जितना उपकारी और उद्दत हो। यही मेरे जीवन को शांति देता रहा है, और वही मृत्यु में भी शांति देगा।
7. #हेनरी , #डेविड थोरो - प्रातः काल मैं अपनी बुद्धिमत्ता को अपूर्व और #ब्रह्माण्डव्यापी गीताके तत्वज्ञान से स्नान करता हूँ, जिसकी तुलना में हमारा आधुनिक #विश्व और उसका साहित्य अत्यंत क्षुद्र और तुच्छ जन पड़ता है।
8. #राल्फ वाल्डो #इमर्सन - मैं भगवत #गीता का अत्यंत ऋणी हूँ। यह पहला ग्रन्थ है जिसे पढ़कर मुझे लगा की किसी विराट शक्ति से हमारा संवाद हो रहा है।
9. #विल्हन वोन #हम्बोल्ट- गीता एक अत्यंत सुन्दर और संभवतः एकमात्र सच्चा दार्शनिक #ग्रन्थ है जो किसी अन्य भाषा में नहीं। वह एक ऐसी गहन और उन्नत वस्तु है जैस पर सारी दुनिया गर्व कर सकतीहै।
10. एनी #बेसेंट -विश्व के विभिन्न धर्मों का लगभग ४० वर्ष अध्ययन करने के बाद मैं इस नतीजेपर पहुंची हूँ की हिंदुत्व जैसा परिपूर्ण, वैज्ञानिक, दार्शनिक और अध्यात्मिक धर्म और कोई नही 💐💐💐💐💐

25/02/2023

Real Science of Hinduism. ❤❤

03/05/2022

जिस व्यक्ति ने अपनी आयु के 20 वे वर्ष में पेशवाई के सूत्र संभाले हो ...40 वर्ष तक के कार्यकाल में 42 युद्ध लड़े हो और सभी जीते हो यानि जो सदा "अपराजेय" रहा हो ...जिसके एक युद्ध को अमेरिका जैसा राष्ट्र अपने सैनिकों को पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ा रहा हो ..ऐसे 'परमवीर' को आप क्या कहेंगे ...?
आप उसे नाम नहीं दे पाएंगे ..क्योंकि आपका उससे परिचय ही नहीं ...
सन 18 अगस्त सन् 1700 में जन्मे उस महान पराक्रमी पेशवा का नाम है -
" बाजीराव पेशवा "
जिनका इतिहास में कोई विस्तृत उल्लेख हमने नहीं पढ़ा ..
हम बस इतना जानते हैं कि संजय 'लीला' भंसाली की फिल्म है "बाजीराव-मस्तानी"

"अगर मुझे पहुँचने में देर हो गई तो इतिहास लिखेगा कि एक राजपूत ने मदद मांगी और ब्राह्मण भोजन करता रहा "

ऐसा कहते हुए भोजन की थाली छोड़कर बाजीराव अपनी सेना के साथ राजा छत्रसाल की मदद को बिजली की गति से दौड़ पड़े ।

धरती के महानतम योद्धाओं में से एक , अद्वितीय , अपराजेय और अनुपम योद्धा थे बाजीराव बल्लाल ।

छत्रपति शिवाजी महाराज का हिन्दवी स्वराज का सपना जिसे पूरा कर दिखाया तो सिर्फ - बाजीराव बल्लाल भट्ट जी ने ।

अटक से कटक तक , कन्याकुमारी से सागरमाथा तक केसरिया लहराने का और हिंदू स्वराज लाने के सपने को पूरा किया ब्राह्मण पेशवाओं ने ,खासकर पेशवा 'बाजीराव प्रथम' ने

इतिहास में शुमार अहम घटनाओं में एक यह भी है कि दस दिन की दूरी बाजीराव ने केवल पांच सौ घोड़ों के साथ 48 घंटे में पूरी की, बिना रुके, बिना थके !!

देश के इतिहास में ये अब तक दो आक्रमण ही सबसे तेज माने गए हैं । एक अकबर का फतेहपुर से गुजरात के विद्रोह को दबाने के लिए नौ दिन के अंदर वापस गुजरात जाकर हमला करना और दूसरा बाजीराव का दिल्ली पर हमला ।

बाजीराव दिल्ली तक चढ़ आए थे । आज जहां तालकटोरा स्टेडियम है । वहां बाजीराव ने डेरा डाल दिया । उन्नीस-बीस साल के उस युवा ने मुगल ताकत को दिल्ली और उसके आसपास तक समेट दिया था ।

तीन दिन तक दिल्ली को बंधक बनाकर रखा । मुगल बादशाह की लाल किले से बाहर निकलने की हिम्मत ही नहीं हुई । यहां तक कि 12वां मुगल बादशाह और औरंगजेब का नाती दिल्ली से बाहर भागने ही वाला था कि उसके लोगों ने बताया कि जान से मार दिए गए तो सल्तनत खत्म हो जाएगी । वह लाल किले के अंदर ही किसी अति गुप्त तहखाने में छिप गया ।
बाजीराव मुगलों को अपनी ताकत दिखाकर वापस लौट गए ।

हिंदुस्तान के इतिहास के बाजीराव बल्लाल अकेले ऐसे योद्धा थे जिन्होंने अपनी मात्र 40 वर्ष की आयु में 42 बड़े युद्ध लड़े और एक भी नहीं हारे । अपराजेय , अद्वितीय ।

बाजीराव पहले ऐसा योद्धा थे जिसके समय में 70 से 80 % भारत पर उनका सिक्का चलता था । यानि उनका भारत के 70 से 80 % भू भाग पर राज था ।

बाजीराव बिजली की गति से तेज आक्रमण शैली की कला में निपुण थे जिसे देखकर दुश्मनों के हौसले पस्त हो जाते थे ।

बाजीराव हर हिंदू राजा के लिए आधी रात मदद करने को भी सदैव तैयार रहते थे ।
पूरे देश का बादशाह एक हिंदू हो, ये उनके जीवन का लक्ष्य था । और जनता किसी भी धर्म को मानती हो, बाजीराव उनके साथ न्याय करते थे ।

आप लोग कभी वाराणसी जाएंगे तो उनके नाम का एक घाट पाएंगे, जो खुद बाजीराव ने सन 1735 में बनवाया था । दिल्ली के बिरला मंदिर में जाएंगे तो उनकी एक मूर्ति पाएंगे । कच्छ में जाएंगे तो उनका बनाया 'आइना महल' पाएंगे , पूना में 'मस्तानी महल' और 'शनिवार बाड़ा' पाएंगे

अगर बाजीराव बल्लाल , लू लगने के कारण कम उम्र में ना चल बसते , तो , ना तो अहमद शाह अब्दाली या नादिर शाह हावी हो पाते और ना ही अंग्रेज और पुर्तगालियों जैसी पश्चिमी ताकतें भारत पर राज कर पाती..!!

28अप्रैल सन् 1740 को उस पराक्रमी "अपराजेय" योद्धा ने मध्यप्रदेश में सनावद के पास रावेरखेड़ी में प्राणोत्सर्ग किया . आज उनकी पुण्यतिथि है.. उन्हें शत शत नमन,

#साभार

26/04/2022

That's how Hindus should grow their Children... 👏👏👏❤❤❤

Hindu Dharma...❤❤❤❤
20/03/2022

Hindu Dharma...❤❤❤❤

06/03/2022

😂😂एक सुन्दर व्यंग्य 😂😂

मैं शांति से बैठा अपना इंटरनेट चला रहा था...
तभी कुछ मच्छरों ने आकर मेरा खून चूसना शुरू कर दिया तो स्वाभाविक प्रतिक्रिया में मेरा हाथ उठा और चटाक हो गया..

और एक-दो मच्छर ढेर हो गए... फिर क्या था उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया कि, मैं असहिष्णु हो गया हूँ..

मैंने पूछा.., "इसमें असहिष्णुता की क्या बात है..?"

🤓🤓

वो कहने लगे.., "खून चूसना उनकी आज़ादी है.."

😩😩

बस "आज़ादी" शब्द सुनते ही कईं बुद्धिजीवी उनके पक्ष में उतर आये और बहस करने लगे.. इसके बाद नारेबाजी शुरू हो गयी..

😂😂

*तुम कितने मच्छर मारोगे..
हर घर से मच्छर निकलेगा.."*

😵😵

बुद्धिजीवियों ने अख़बार में तपते तर्कों के साथ बड़े-बड़े लेख लिखना शुरू कर दिया।

🤬

उनका कहना था कि ..,मच्छर देह पर मौज़ूद तो थे लेकिन खून चूस रहे थे ये कहाँ सिद्ध हुआ है ..

😛😛

और अगर चूस भी रहे थे तो भी ये गलत तो हो सकता है लेकिन *देहद्रोह'* की श्रेणी में नहीं आता...

😇😇

क्योंकि ये "मच्छर" बहुत ही प्रगतिशील रहे है..किसी की भी देह पर बैठ जाना इनका 'सरोकार' रहा है।

🤪🤪

मैंने कहा.., "मैं अपना खून नहीं चूसने दूंगा बस।"

😵😵

तो कहने लगे.., "ये "एक्सट्रीम देहप्रेम" है... तुम कट्टरपंथी हो, डिबेट से भाग रहे हो।"

😂😂

मैंने कहा..., "तुम्हारा उदारवाद तुम्हें मेरा खून चूसने की इज़ाज़त नहीं दे सकता।"

🤪🤪

इस पर उनका तर्क़ था कि भले ही यह गलत हो लेकिन फिर भी थोड़ा खून चूसने से तुम्हारी मौत तो नहीं हो जाती, लेकिन तुमने मासूम मच्छरों की ज़िन्दगी छीन ली..
*"फेयर ट्रायल"* का मौका भी नहीं दिया।

😭😭

इतने में ही कुछ राजनेता भी आ गए और वो उन मच्छरों को अपने बगीचे की 'बहार' का बेटा बताने लगे..

😇😇

हालात से हैरान और परेशान होकर मैंने कहा कि लेकिन ऐसे ही..
*मच्छरों को खून चूसने देने से मलेरिया हो जाता है,*
और तुरंत न सही बाद में बीमार और कमज़ोर होकर मौत हो जाती है...

🤓🤓

इस पर वो कहने लगे कि.. तुम्हारे पास तर्क़ नहीं हैं इसलिए तुम भविष्य की कल्पनाओं के आधार पर अपने *फासीवादी* फैसले को सही ठहरा रहे हो...

😵😵

मैंने कहा, "ये साइंटिफिक तथ्य है कि मच्छरों के काटने से मलेरिया होता है... मुझे इससे पहले अतीत में भी ये झेलना पड़ा है.. साइंटिफिक शब्द उन्हें समझ नहीं आया..

😄😄

तथ्य के जवाब में वो कहने लगे कि.., मैं इतिहास को मच्छर समाज के प्रति अपनी घृणा का बहाना बना रहा हूँ.. जबकि मुझे वर्तमान में जीना चाहिए।

🤓🤓

इतने हंगामें के बाद उन्होंने मेरे ही सिर माहौल बिगाड़ने का आरोप भी मढ़ दिया।

🤪🤪

मेरे ख़िलाफ़ मेरे कान में घुसकर सारे मच्छर भिन्नाने लगे कि..." हम लेके रहेंगे आज़ादी..."

मैं बहस और विवाद में पड़कर परेशान हो गया था... उससे ज़्यादा जितना कि खून चूसे जाने पर हुआ।

😇😇

आख़िरकार मुझे तुलसी बाबा याद आये.. "सठ सन विनय कुटिल सन प्रीती"

🤪🤪

और फिर मैंने *काला हिट स्प्रे* उठाया और पूरे घर में भीतर से बाहर तक, ऊपर से नीचे तक, बगीचे से नाले तक उनके हर सॉफिस्टिकेटेड और सीक्रेट ठिकाने पर दे मारा...

🤓🤓

एक बार तेजी से भिन्-भिन् हुई.. फिर सब शांत..😄😄

उसके बाद से..
न कोई बहस...
न कोई विवाद...
न कोई आज़ादी...
न कोई बर्बादी...
न कोई क्रांति...
न कोई सरोकार...

🙏अब सब कुछ ठीक है.. बस यही दुनिया की रीत है🙏

यह पोस्ट पूर्णतः काल्पनिक है और इस पोस्ट का किसी भी तरह से किसी का कोई भी सम्बन्ध नही है.. 😂😂😂😂😂

😇🤓😇🤓😇

13/02/2022

मुस्लिम के कलम से......
(हिजाब के सम्बन्ध में)

भगवा धोती तिलक कौन रोक रहा है सर?

आप ही लोग तो पीछा छुड़ाएं बैठे है इन चीजों से, मुस्लिमो ने अपनी जड़ें न कल छोड़ी थी न आज छोड़ने को राजी है, आप लोगो को तो खुद कुछ साल पहले तिलक, भगवा, शिखा, से शर्म आती थी, आप ही लोगों ने आधुनिकता के नाम पर सब कुछ त्याग दिया, आप नहीं त्यागते तो स्कूल में धोती कुर्ता पहनना नॉर्मल माना जाता, बीएचयू में डिग्री लेते वक्त बच्चों का भारतीय पारंपरिक पोशाक पहनना खबर बनता है, जबकि ये तो नॉर्मल होना चाहिए था न?
खबर तो ये होती न कि हिंदू छात्रों ने गाउन पहन कर डिग्री ली,

आपने खुद अपनी संस्कृति अपने रीति-रिवाज अपने जड़ों को पिछड़ेपन के नाम पर त्यागा है, आज इतने साल बाद आप लोगो की नींद खुली है तो आप लोगों को उनकी जड़ों की तरफ लौटने के लिए कहते फिरते हैं ।
अपनी नाकामी, अपनी लापरवाही का गुस्सा हमारी जड़ों को काट कर क्यों निकालना चाहते है आप?

आप के बच्चे कॉन्वेंट से पढ़ने के बाद पोएम सुनाते थे तो आपका सर ऊंचा होता था,

हमारे मुस्लिम घरों में बाप का सिर तब झुक जाता है जब बच्चा रिश्तेदार के सामने कोई दुआ न सुना पाए, हमारे घरों में बच्चा बोलना सीखता है तो हम सिखाते हैं कि सलाम करना सीखो बड़ों से, आप लोगों ने नमस्कार को हैलो हाय से बदल दिया तो ये हमारी गलती है? किसी के मरने पर ऊं शांति: न कहकर के रिप( RIP) बोलने लगे हैं।

हमारे यहाँ बच्चा चलना सीखता है तो बाप की उंगलियां पकड़ कर मस्जिद जाता है, आप लोगों ने खुद मंदिरों की तरफ देखना छोड़ दिया तो बच्चे कैसे जानेंगे की मंदिर में जाकर क्या करना है, ये हमारी गलती है?

आप लोगों ने नामकरण और मुंडन जैसे फंक्शन को बर्थडे और एनिवरसिरी में बदल दिया तो ये हमारी गलती है?

आप ने जब नया घर लिया तो पुराने घर से गीता लेकर नहीं आए तो ये भी हमारी गलती है?
आपके पास तो सब कुछ था, संस्कृति, इतिहास, परंपराएं, आपने उन सब को पिछड़ेपन की निशानी मान कर त्याग दिया, हमने नहीं त्यागा बस इतना फर्क है।
क्या सिखा रहे हैं आप अपनी पीढ़ी को?

आपको देखकर आपके आचरण आपके रहन सहन आपकी आदतों से क्या सीखेगी आपकी आने वाली पीढ़ी?

तिलक तो घर से निकलने से पहले लगाते थे न आप लोग? क्यों छोड़ दिया? किसने रोका आपको?

आप का बच्चा कॉन्वेंट से पढ़ कर आता है और आप उसके बड़े होने पर अफसोस करते हैं कि देखो कॉन्वेंट हमारा कल्चर खा गया, पर कभी सोचा है कि बच्चा स्कूल से आकर तो आप ही के साथ आप के ही पास था? आपने क्या किया तब?

हमारे मजहब का लड़का कॉन्वेंट से आकर उर्दू-अरबी पढ़ने बैठ जाता है, आप को आज हिजाब के मामले पर याद आया कि यार हम भी तो भगवा गमछा ओढ़ सकते हैं ।

पर इसके पहले आपने कोशिश क्यों नहीं की कभी? कल्चर तो बनाइए इसको पहले, तब बराबरी कीजिएगा कि हम भी पहनेंगे, ऐसा न हो कि जोश-जोश में आप इजाजत ले लो, फिर आने वाली पीढ़ी खुद ही पहनना छोड़ दे।

सादर

10/11/2021
13/10/2021

Advance wishes for the upcoming festivals :

Oct 15 : What to celebrate? A***n king kiIIing a Moolnivasi? Ravan me laakh buraiyan thi lekin usne Sita ko kabhi chhua nahi.

Oct 19 : Eid Mubarak. AIIah bless all. May the festival of love and peace bring...

Oct 24 : Women fasting for men! Gosh the patriarchy!

Oct 31 : Merko pata nahi ye kya hota hai lekin this sounds cool and that's why... HAPPY HALLOWEEEEEEEEN!

Nov 4 : DON'T POLLUTE AIR! ENOUGH! PUHLEEZ!

Nov 10 : CHHATH! WHAT CHHATH? DON'T POLLUTE THE GOD DAMN RIVER PEOPLE!

Dec 25 : Merry Xmas guys! Yay Santa is coming!

मैंने 250 रुपये की टिकेट ले के फिल्म देखि लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा,मैंने मैंने DOMINOS  में जा के 400 रूपये का पिज़्ज़ा ...
13/10/2021

मैंने 250 रुपये की टिकेट ले के फिल्म देखि लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा,

मैंने मैंने DOMINOS में जा के 400 रूपये का पिज़्ज़ा खाया, जितना खा सका खाया और बाकी फेंक दिया लेकिन कोई कुछ नहीं बोला..

मैंने B'DAY पार्टी दी और 4000-5000 बेवजह लगा दिया, लोग आये कुछ खाया और कुछ waste भी किया लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा.,

मैंने हर साल IPL मैच में हजारो रूपये खर्च किये. 20 रूपये की कोल्ड्रिंक मैंने वहां 100 रुपये की ली, लेकिन किसी को भी उस चीज़ में कोई problem नहीं हुई.

पर जब मैं मंदिर में एक लोटे में थोडा सा दूध क्या ले के चला गया वो भी जिसमे आधे से भी कहीं ज्यादा पानी है तो सब सेक्युलर कुत्तो को एकदम से गरीब बच्चे नज़र आने लगे, थोडा सा तेल क्या चढ़ा दिया शनि देव पर एक मिनट में लाखो लाचार लोग दिखने लगे, मंदिर में थोड़े से पैसे क्या डाल दिए सड़क पर बैठे ऐसे भिखारी दिखने लगे जो हट्टे कट्टे होते हुए भी भीख मांगते हैं, गणेश जी की मूर्ति का पानी में विसर्जन क्या करने गये इन्हें प्रदुषण दिख जाता है ....

इन कुत्तो को देश में गरीबी और लाचारी सिर्फ तभी नज़र आती है जब कोई भी हिन्दू अपने रीती रिवाज़ निभाता है.

एक बात कान खोल कर सुन लो मैं "हिन्दू" और और मरते दम तक निभाऊंगा अपने रीती रिवाज़ अगर मेरी ID में भी कोई ऐसा भोंकने वाला कुत्ता है तो अभी के अभी निकल जाये मेरी ID से .. कोई जरुरत नहीं है ऐसे लोगो की मुझे... और जो मेरे साथ हैं वो इस पोस्ट को सिर्फ LIKE नहीं SHARE भी करे...

जय श्री राम..

02/07/2021

............................. मंत्र जप रहस्य ................................ जप मन्त्रों का होता है , और मन्त्रों का निर्माण वर्णों की संघटना से होता है . वर्ण का दूसरा नाम है ' अक्षर ' अर्थात जिसका क्षरण न हो , अर्थात अक्षर अनश्वर हैं. वर्ण रूप से ध्वनि हैं. ध्वनि सुनाई भी देती है और नहीं भी सुनाई देती है, क्योंकि मानव के कर्ण यंत्रों की एक सीमा है . ध्वनि एक खास सीमा तक ही सुनाई देती है , जब उस अवस्था से ध्वनि का कंपन कम हो हो जाता है तब वह नहीं सुनाई देती है. .... अब प्रश्न है कि - ध्वनि उत्पन्न होती है या व्यापक रूप से वह विद्यमान है. उदाहरण किसी घंटे पर चोट करने पर ध्वनि प्रकट होती है, और धीरे धीरे वह कम होती जाती है , और एक बिंदु पर आकर वह इतनी कम हो जाती है कि , लगता है कि वह समाप्त हो गयी , तो क्या घंटे पर चोट देने के पूर्व वह नहीं थी ? और चोट देने के उपरान्त चंद क्षणों में ही वह समाप्त हो गयी, क्या उसका जीवन कुछ क्षणों का ही था ? .... बात यह है कि अनाहत रूप में ध्वनि सर्वत्र व्याप्त है , चोट देने से केवल कुछ स्पंदन बढ़ जाने के कारण हमारे प्रकृत कानों के सुनने के योग्य बनी थी ..... इसीलिये आगमशास्त्र में एवं अन्य दर्शनों में भी ध्वनि को अनश्वर माना गया है , एवं शब्द को आकाशात्मक कहा गया है . आकाश की तन्मात्रा शब्द को माना गया है, अर्थात ध्वनि स्वाभाविक रूप से अनाहत अवस्था में विद्यमान है , और इसीलिये शब्द को ब्रह्म माना गया है ..... ध्वनि ( शब्द ) की चार अवस्थाएँ होती हैं, १- परा , २- पश्यन्ति , ३- मध्यमा , ४- वैखरी ..... परावस्था वह है जहां ध्वनि मूल रूप में अनाहत अवस्था में विद्यमान है . यही अवस्था समग्र शक्तियों से युक्त है , और सृष्टि में समर्थ है . पश्यन्ति वह अवस्था है जहां ध्वनि से सृष्टि शुरू होती है और साधक उसे देख सकता है . मध्यम अवस्था वह है जहां पश्यन्ति से निकल कर शब्द बन जाते हैं, और उनका अनुभव सहज रूप से किया जा सकता है . वैखरी वह अवस्था है जब शब्द प्रकट हो जाता है और उसे कोई भी सुन सकता है . मानव को वैखरी अवस्था का बोध है जो ध्वनि का सबसे स्थूल रूप है वैखरी से यात्रा करके उत्तरोत्तर विकास करते हुए परा तक की यात्रा की जाती है , जहां साधक को सकल ज्ञान उपलब्ध हो जाते हैं..... वर्णों के एक विशेष प्रकार के संघटनों से एक विशेष रूप निर्मित होता है , अथवा मन्त्रों की ध्वनि तरंगों के माध्यम से एक विशेष अवस्था में पहुंचा जा सकता है.... वैखरी से जब विशेष यात्रा आरम्भ करते हैं , तो जितनी सूक्ष्मता की ओर बढ़ना संभव है उतना ही ध्वनि तरंग अपना प्रभाव देने में समर्थ होती हैं, अर्थात मंत्र का प्रभाव अनुभव होने लगता है. इसलिए साधना काल में वाचिक की अपेक्षा मानसिक जप श्रेष्ठ माना जाता है . जप सदैव मध्यमा भूमि ( अवस्था ) में होता है , और उसका विकास पश्यन्ति की ओर होना चाहिए . वैखरी का उपयोग केवल अभ्यास काल में होता है . जप के विकसित अवस्था में जप का अभ्यास भी बंद हो जाता है . जप निरंतर अनायास होता रहता है , और जब, जप अनायास होने लगे तब मंत्र की ध्वनि तरंगें संतुलित हो जाती हैं और मंत्र के अनुसार फल देने में समर्थ होती है. यही मंत्र प्रभाव का वास्तविक रहस्य है ...जय महाशक्ति !....

14/06/2021

Beef/Meat in Hinduism | Vegetarianism | Exposing Zakir Naik | Mahabharat | Neeraj Atri
(( please share this Message to reach out to Larger Audience ))











Also watch :
Zakir Naik lies about



https://youtu.be/nGRYBPZaD74

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