03/05/2026
क्या आपने आज की अव्यक्त मुरली पढ़ी है? यदि हाँ, तो नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास करें। साथ ही, अव्यक्त मुरली का विश्लेषण भी अवश्य देखें और मधुबन मुरलियों के ऐसे ही और भी गहन विश्लेषणों के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें।
1. अगर “स्मृति दिवस” सिर्फ याद करने का दिन नहीं बल्कि “समर्थी दिवस” भी है, तो क्या केवल भावनात्मक स्मृति रखना पर्याप्त है, या फिर हर कर्म में उस स्मृति को जीना ही असली परीक्षा है?
2. जब हर कर्म में स्मृति को जीना ही परीक्षा है, तो फिर ऐसा क्यों होता है कि अमृतवेले में शक्तिशाली स्थिति अनुभव करने वाला व्यक्ति कर्म करते समय वही स्थिति खो देता है?
3. यदि कर्म करते समय स्थिति इसलिए डगमगाती है क्योंकि आत्मा स्वयं को “करावनहार मालिक” नहीं मानती, तो क्या हमारी हार परिस्थितियों से होती है या अपनी सीट छोड़ देने से?
4. अगर असली कमजोरी “सीट छोड़ना” है, तो क्या यह संभव है कि इंसान बाहर से सेवा करता रहे लेकिन भीतर से अभी भी देह-अभिमान और असुरक्षा में जी रहा हो?
5. और यदि भीतर की असुरक्षा ही सबसे बड़ा भ्रम है, तो क्या “एवररेडी” बनने का अर्थ मृत्यु या विनाश से डरना नहीं, बल्कि हर क्षण ऐसा जीना है जैसे अगला क्षण अंतिम भी हो सकता है?
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