कुर्मी चौपाल

कुर्मी चौपाल कुर्मी है हम कर्मयोगी

मदद.......मदद..... Help..... Help....🙏अपील आप सभी लोगों से श्री अमर सिह पटेल, अपर निजी सचिव, उ0प्र0 सचिवालय के पद पर कार...
27/10/2025

मदद.......मदद..... Help..... Help....🙏
अपील आप सभी लोगों से
श्री अमर सिह पटेल, अपर निजी सचिव, उ0प्र0 सचिवालय के पद पर कार्यरत थे, एक ह्वाट्सप मैसेज अनजाने में सचिवालय ग्रुप में फारवर्ड हो जाने के कारण दि0 07 सितम्बर 2020 द्वारा बर्खास्त कर दिए गए। विधिक कानूनी अड़चन प्रक्रिया के कारण आज तक बहाली नहीं हो पाई। इनकी माता राम मनोहर लोहिया अस्पताल आईसीयू में एक माह लगातार भर्ती रहीं और दि0 25 अगस्त 2025 को स्वर्गवास हो गया। माता जी की सेवा के दौरान अमर सिंह के पेट में दर्द होता रहा किन्तु इग्नोर करते रहे। अचानक दर्द बढ़ने@जाच होने पर गाल ब्लैडर में ट्यूमर का पता चला, कुछ लोगों के सहयोग से दि0 07 अक्टूबर को टेण्डर पाम हास्पिटल में आपरेशन हेतु भर्ती कराया गया, आपरेशन के दौरान टयूमर के कैन्सरस होने की आशंका के दृष्टिगत सर्जन द्वारा केवल बायोप्सी का सैम्पल लिया जा सका- बायोप्सी रिपोर्ट में Neuroendocrine Cancer (Metastatc carcinoma) की पुष्टि हुई, टांका काटने के कुछ दिन बाद दिनाक 23-10-2025 को पित्त नली ब्लाक हो जाने पर विवेकानंद हॉस्पिटल के डॉक्टरों के त्वरित प्रयास से Biliary plastic stent placed हुआ।
इनका परिवार अवसाद, निराशा आर्थिक तंगी, बैंक कर्ज से ग्रसित हो गया है कैसर के इलाज व बुनियादी आवश्यकताओं/संन्तुलन के दृष्टिगत फौरी तौर पर आर्थिक सहयोग हेतु श्री पटेल एवं उनके बेटे आयुष पटेल का बैंक डिटेल निम्नवत है। कृपया यथा संभव सहयोग करने का कष्ट करें-
Name- Amar Singh
SBI A/C 10223080514
IFC Code: SBIN0006893
9454410505@ptyes

Son- Ayush Patel
SBI A/C 41138911365
IFC Code: SBIN0016728
7080740052@ptyes
Dr. Pallavi Patel
Akash Patel
Anupriya Patel अनुप्रिया पटेल
Swatantra Dev Singh

आप सभी जिम्मेदार साथी भी कुछ मदद करे |मृतक मंगलदेव वर्मा बन्धुकपुरवा इटियाथोक गोंडा के माता का खाता नंबर हैl इंडियन बैंक...
08/10/2025

आप सभी जिम्मेदार साथी भी कुछ मदद करे |
मृतक मंगलदेव वर्मा बन्धुकपुरवा इटियाथोक गोंडा के माता का खाता नंबर हैl
इंडियन बैंक खाता संख्या 59123459912
ifsc कोड IDIB000D551
आप सब भी अपने हिसाब से 100,200,500,1000,2000 जिसको सहयोग करना है सीधे उनके खाते में भेज दीजिए ।
क्योंकि समाज के नेता लोग तो नपुंसक हो चुके हैं इनको सिर्फ दलाली करने आती है चाहे अनुप्रिया पटेल और स्वतंत्र देव पटेल हो या अन्य

राजनीति में प्रतिनिधित्व बनाम प्रभाव: अनुप्रिया पटेल और आशीष पटेल की "सत्ता में मौन भागीदारी" का विश्लेषण विशेष रिपोर्टउ...
08/07/2025

राजनीति में प्रतिनिधित्व बनाम प्रभाव: अनुप्रिया पटेल और आशीष पटेल की "सत्ता में मौन भागीदारी" का विश्लेषण

विशेष रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश की जातीय राजनीति में "कुर्मी समाज" हमेशा से एक निर्णायक भूमिका में रहा है, विशेषकर पूर्वांचल और अवध क्षेत्र में। लेकिन जब सवाल उनके प्रतिनिधित्व और परिणाम का आता है, तो सबसे बड़ा नाम जो सामने आता है — वह है अनुप्रिया पटेल और उनके पति आशीष पटेल का।

पद मिला, पर प्रभाव नहीं: सत्ता में होते हुए भी 'निष्क्रिय' क्यों?

अनुप्रिया पटेल लगातार दूसरी बार मोदी सरकार में मंत्री हैं। आशीष पटेल यूपी में तकनीकी शिक्षा मंत्री रहे हैं। लेकिन विडंबना यह है कि दोनों सत्ता में रहते हुए भी अपने समाज के लिए कोई ठोस और प्रत्यक्ष काम नहीं दिखा सके, जिस पर जनता कहे — "हां, यह कुर्मी समाज के मंत्री ने कराया है।"

अब तक कोई पांच ठोस काम जो दबाव बनाकर कराए हों?

यहां एक कटु सत्य सामने आता है — ऐसे कोई पांच बड़े उदाहरण नहीं हैं जिनमें ये कहा जा सके कि मंत्री पद पर रहते हुए उन्होंने:

1. किसी थाने में कुर्मी युवकों के उत्पीड़न पर FIR दर्ज करवाई हो,

2. किसी ज़िले में OBC भर्ती भेदभाव या आरक्षण पर केंद्र/राज्य से भिड़ंत ली हो,

3. अपने समाज के लिए कोई शैक्षिक संस्थान, मेडिकल कॉलेज, OBC स्कीम या फंड पारित कराया हो,

4. किसी अफसरशाही के खिलाफ समाज के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ी हो,

5. या फिर कुर्मी बाहुल्य जिलों में योजनाओं का रणनीतिक विस्तार कराया हो।

नतीजा: जो समाज उन्हें चुनकर दिल्ली और लखनऊ भेजता है — उसी के युवाओं, किसानों, महिलाओं के लिए कोई स्पष्ट, ठोस, और जनसंवेदनशील कार्य दिखाई नहीं देता।

बड़े चेहरे, लेकिन छोटी सुनवाई: बीजेपी में 'कोटे का मंत्री' होने की सच्चाई
भाजपा के सहयोगी दलों को मंत्रीपद तो मिलता है, लेकिन वास्तविक नीतिगत फैसला और प्रशासनिक पकड़ सिर्फ भाजपा के बड़े चेहरों तक सीमित रहती है।
सत्ता में हैं, पर अफसर नहीं सुनते
मंत्री हैं, पर थानेदार नहीं मानता
राज्यसभा भेजते हैं, पर विकास योजनाओं की लिस्ट में नाम नहीं होता

यही वजह है कि कुर्मी समाज का एक बड़ा तबका अब सवाल कर रहा है — "क्या हमें केवल प्रतीकात्मक मंत्री चाहिए, या हक की आवाज़ उठाने वाला नेता?

राजनीतिक नुकसान: कब तक चलेगी ये 'प्रतीकवाद की राजनीति'?
अगर यह स्थिति जारी रही, तो इसका असर अगले चुनाव में साफ दिखेगा:
जनता कहेगी: "नाम का मंत्री है, काम का नहीं"
पार्टी के विधायक "अपने ही समाज के बीच अलोकप्रिय हो जाएंगे"

अपना दल (S) का आधार सिर्फ भाजपा के वोट पर टिका रहेगा, जो किसी भी वक्त गिर सकता है

कुर्मी समाज में नई लीडरशिप की मांग उठ सकती है — जो सिर्फ कुर्सी नहीं, काम भी करे

भविष्य की पटकथा: कब तक रहेगा 'सत्ता का कोटा'?

> अगर अपना दल ने सरकार पर दबाव बनाकर अपने समाज के मुद्दों — शिक्षा, रोज़गार, उत्पीड़न, प्रशासनिक भेदभाव — पर आवाज़ नहीं उठाई, तो 2027 तक कुर्मी समाज में वैचारिक विद्रोह तय है।

भाजपा को भी यह समझना होगा कि सिर्फ आंकड़ों की साझेदारी (ally share) से राजनीति नहीं चलती, बल्कि ज़मीन पर सम्मान और काम चाहिए।

अनुप्रिया पटेल और आशीष पटेल को अब प्रतीक से नीति-निर्माता बनना होगा।
वरना आने वाले चुनाव में जनता खुद कहेगी:

हमने चुना था लड़ने वाला, मिला सिर्फ समाज नाम का ढोल बजाने वाला!"

09/01/2025

गुलामी करेंगे तड़ीपार की और
वंशज सरदार पटेल के 😆😆😁
आक थू..

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