Baba Mohan Ram, Kali kholi

Baba Mohan Ram, Kali kholi Verified Official © ORIGINAL PAGE Official Page of Kali kholi Mandir baba Mohan Ram ji. Plz connect with us and share with ur friends from Delhi.
(240)

This page is a devotional page on baba mohan ram ji.... plzzz dont comment any wrong or dirty comment, link, pics, videos on this page
Way To Kali Kholi

Baba Mohan Ram's Kali Kholi's is situated approx. 100 k.m. By road take the NH-8 (Jaipur Highway) and from Daruhera a road goes to Bhiwari (very famous industrial area). Just about 2 k.m. before the Bhiwari Industrial take a right hand turn which

straight goes to village Milakhpur and from there a road goes to Kholi.


आरती बाबा मोहन राम जी की

जग मग जग मग जोत जली है मोहन आरती होने लगी है
पर्वत खोली का सिंहासन जिस पर मोहन लगाते आसन
आ मंदिर मैं देते भासन उस मोहन की जोत जगी है |
जगमग जगमग ......
कलयुग मैं अवतार लियो है पर्वत ऊपर वास कियो है
गाँव मिलकपुर मंदिर तेरा जहाँ दुखियो का लग रहा डेरा
ज्ञान का वहां भंडार भरा है सीताफल का वृक्ष खड़ा है
जगमग जगमग ......
यहाँ पैर दिल तुम रखो सच्चा सभी है इसमें बूढा बच्चा
प्रेम से मिलकर शक्कर बाटों बाबा जी का जोहड़ छॉटो
उस मोहन की जोत जगी है
जगमग जगमग ......
अंधे तो तुम नेत्र देते कोढ़ी को देते हो काया
बाँझन को तुम पुत्तर देते निर्धन को देते हो माया
जगमग जगमग ......
शिला जी को तुम दर्शाए गाँव मिलकपुर मंदिर बनवाए
शिव जी जी का वास कराये अपनी माया को दर्शाए
जगमग जगमग ......
शिला जी की वही है विनती प्रेम से मिलकर बोलो आरती
उस मोहन की जोत जैग है मोहन आरती होने लगी है
जगमग जगमग ......

13/10/2025

18 अक्टूबर को धनतेरस है, इसके साथ दीपोत्सव शुरू हो जाएगा। इस साल दीप पर्व 5 नहीं 6 दिनों का रहेगा, क्योंकि कार्तिक अमावस्या 20 और 21 अक्टूबर को दो दिन रहेगी। 20 तारीख की रात लक्ष्मी पूजा होगी और 21 को स्नान-दान की कार्तिक अमावस्या रहेगी। 22 तारीख को गोवर्धन पूजा और 23 को भाई दूज मनेगी।

इस बार दीपावली की तारीख को लेकर पंचांग भेद हैं, क्योंकि कार्तिक मास की अमावस्या दो दिन है। अधिकतर ज्योतिषियों का मत है कि दीपावली 20 अक्टूबर को मनाना ज्यादा शुभ है।

20 अक्टूबर को दीपावली क्यों मनाएं

ज्योतिषियों का कहना है कि कार्तिक अमावस्या की रात में लक्ष्मी पूजन का विधान है, 20 अक्टूबर की रात में कार्तिक अमावस्या रहेगी, लेकिन 21 अक्टूबर की शाम को ये तिथि खत्म हो जाएगी। इसलिए 20 तारीख की रात में लक्ष्मी पूजा करना चाहिए।

20 तारीख को अमावस्या तिथि दोपहर 2.25 बजे शुरू हो जाएगी और अगले दिन शाम 4 बजे तक रहेगी। 20 तारीख को ही अमावस्या का संध्या काल (प्रदोष काल) रहेगा और लक्ष्मी पूजा करने के लिए ये दिन श्रेष्ठ रहेगा।

18 अक्टूबर को धनतेरस- इस दिन भगवान धनवंतरि की जयंती भी मनाते हैं। धनतेरस की रात में यमराज के लिए दीपक जलाने की परंपरा है। धनतेरस पर देवी लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। धनतेरस पर घर के नए बर्तन भी खरीदते हैं।

19 अक्टूबर को रूप चौदस- रूप चौदस को नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। इस तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नाम के दैत्य का वध किया था। इसी वजह से इस पर्व को नरक चतुर्दशी कहते हैं। रूप चौदस पर उबटन लगाकर स्नान की परंपरा है।

20 अक्टूबर को लक्ष्मी पूजा- मान्यता है कि देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था और इस मंथन से कार्तिक अमावस्या पर देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। देवी ने भगवान विष्णु का वरण किया था। इस वजह से इस दिन लक्ष्मी पूजा की जाती है। दीपावली की रात भगवान गणेश, महालक्ष्मी, भगवान विष्णु के साथ शिव, देवी सरस्वती, कुबेर देव की भी पूजा की जाती है।

21 अक्टूब को स्नान-दान की कार्तिक अमावस्या- इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य करना चाहिए। दोपहर में पितरों के लिए धूप-ध्यान भी करें। इस दिन शाम करीब 4 बजे कार्तिक अमावस्या तिथि खत्म हो जाएगी और कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि शुरू होगी।

22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा- कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर मथुरा स्थित गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की परंपरा है। द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने ब्रज के लोगों से कंस की नहीं, गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए कहा था, तब से ही इस पर्वत की पूजा की जा रही है।

23 अक्टूबर को भाई दूज- ये पर्व यमुना और यमराज से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि इस तिथि पर यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने आते हैं। यमुना यमराज को भोजन कराती हैं। मान्यता है कि इस तिथि पर जो भाई अपनी बहन के घर भोजन करता है, यमराज-यमुना की कृपा से उसकी सभी परेशानियां दूर होती हैं और भाग्य का साथ मिलता है।

25/08/2025

बहन निक्की की दुःखद हत्या की खबर से बड़ा स्तब्ध हूं, यू जला कर किसी की बहन बेटी को मार देना इस से बड़ा अमानवीय कार्य कोई नहीं हो सकता |

मेरा एक मत है अगर समाज़ के लोग इसको ठीक समझे तो अपने घर से शुरुआत करें

लोग पहले तो मुह बंद करके बेठे रहते है पंचायत करते हैं, समाज के नाकाबिल ठेकेदारों से समझोता करवाते हैं फिर भी बात नहीं बनतीं और समझोता करते रहते हैं अपने कर्मों से भाग्य से, तब ना बाप ना माँ ना भाई बहन कोई भी तागडा स्टेंड नहीं लेता बस घिसने के लिए छोड देते हैं कि बेटी घिस ले गृहस्थी में

और इन धन के लोभीयों को मुह लगाया किसने हमारी अपनी गुज्जर बिरादरी ने, जब ब्याह के टाइम फोर-बढ़ाई के लिए 1 1 करोड़ 2 2 करोड़ कैश देकर वीडियो बनवाते हैं, दिखावा करते हैं 10 लाख की माला 50 लाख का भात 10 लाख की चढ़त..... अरे क्यूँ भई, अब भुगते फिर |

क्यूँ इनको सर पे चढ़ा रहे हो इनका ना कभी भरा ना कभी भरने वाला ब्लकि तुम्हारे चक्कर में कोई गरीब बेचारा अन्दर से असुरक्षित महसूस करके ओकात से ज्यादा कर्जा करके बेटी ब्याहता है उसके दिल से पूछो जरा, कि समाज से दबाव में आकर उसको क्या नी करना पड़ता

ना दहेज लो, ना दो बल्कि लेने देने वालों का भी बिरादरी बहिष्कार करे तो बहुत अच्छा है |

दहेज को रिवाज मत बनाओ ये ना हमारी परम्परा थी ना हो सकती |

अपनी बेटियों को पढ़ा लो उनको कामयाब बनाओ जिस से खुद अपने पे आश्रित हो सके और कोई डिमांड ना करे

सौजन्य से: एडमिन पेज बाबा मोहन राम जी मंदिर
#दहेजएकअभिशाप

Jai baba Mohan ram ji ki
13/06/2025

Jai baba Mohan ram ji ki

Aai Dooj Per Bheed Lage..

22/01/2025

आज 22 जनवरी ही पिछले वर्ष का वह पावन दिन, जब 500 साल पुराने सपने को साकार होते देखा। आँसू, प्रार्थना और भक्ति का वह दिव्य क्षण आज भी दिल को भावुक कर देता है।

आप सभी बंधुजनों माताओं और बहनों को अयोध्या में भगवान श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ की बहुत बहुत बधाई एवं अनन्य शुभकामनाएं।

जय श्री राम! 🚩

25/10/2024

दीपोत्सव 29 अक्टूबर से 3 नवंबर तक:
इस साल 5 नहीं 6 दिन का रहेगा दीपोत्सव, कार्तिक अमावस्या रहेगी दो दिन
इस साल दीपावली की तारीख को लेकर पंचांग भेद हैं, क्योंकि कार्तिक मास की अमावस्या 31 अक्टूबर और 1 नवंबर दो दिन रहेगी। इस वजह से दीपोत्सव 5 नहीं 6 दिन का रहेगा।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, इस साल कार्तिक अमावस्या 31 अक्टूबर की दोपहर करीब 3 बजे से शुरू हो जाएगी और अगले दिन यानी 1 नवंबर की शाम करीब 4.40 बजे तक रहेगी। कार्तिक अमावस्या की रात में लक्ष्मी पूजा करने की परंपरा है। इसलिए 31 अक्टूबर की रात लक्ष्मी पूजा करनी चाहिए, क्योंकि 31 की रात में ही अमावस्या तिथि रहेगी और 1 नवंबर की रात में कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रहेगी।
29 अक्टूबर को धनतेरस
मंगलवार, 29 अक्टूबर से दीपोत्सव शुरू हो जाएगा। इस दिन धनतेरस मनाई जाएगी। धनतेरस पर भगवान धनवंतरि जयंती भी मनाते हैं। धनतेरस की रात में यमराज के लिए दीपक जलाने की परंपरा है। इस तिथि पर देवी लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है।
30 अक्टूबर को रूप चौदस
बुधवार, 30 अक्टूबर को रूप चौदस मनाई जाएगी, इसे नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। इस दिन उबटन लगाने की परंपरा है। माना जाता है कि इस तिथि भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नाम के दैत्य का वध किया था। इसी वजह से इस पर्व को नरक चतुर्दशी कहते हैं।
31 अक्टूबर को लक्ष्मी पूजा
गुरुवार, 31 अक्टूबर की रात देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाएगी। मान्यता है कि देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था और इस मंथन से कार्तिक मास की अमावस्या पर देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थी। देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु का वरण किया था। इसके साथ एक अन्य मान्यता ये है कि इस तिथि पर भगवान राम 14 वर्ष का वनवास खत्म करके और रावण वध करके अयोध्या लौटे थे। तब लोगों ने राम के स्वागत के लिए दीपक जलाए थे।
1 नवंबर को स्नान-दान की कार्तिक अमावस्या
शुक्रवार, 1 नवंबर को भी कार्तिक मास की अमावस्या रहेगी। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य करना चाहिए। दोपहर में पितरों के लिए धूप-ध्यान भी करें। इस दिन शाम को कार्तिक अमावस्या तिथि खत्म हो जाएगी।
2 नवंबर को गोवर्धन पूजा
शनिवार, 2 नवंबर को कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा यानी गोवर्धन पूजा पर्व है। इस दिन मथुरा स्थित गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की परंपरा है। द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने ब्रज के लोगों से कंस की नहीं, गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए कहा था, तब से ही इस पर्वत की पूजा की जा रही है।
3 नवंबर को भाई दूज
रविवार, 3 नवंबर को भाई दूज है। ये पर्व यमुना और यमराज से संबंधित है। माना जाता है कि इस तिथि पर यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने जाते हैं। यमुना यमराज को भोजन कराती हैं। मान्यता है कि इस तिथि पर जो भाई अपनी बहन के घर भोजन करता है, यमराज-यमुना की कृपा से उसकी सभी परेशानियां दूर होती हैं और भाग्य का साथ मिलता है।

14/10/2023

मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप ‘शैलपुत्री’

15 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि का पहला दिन है और इस दिन घटस्थापना के बाद मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री का पूजन, अर्चन और स्तवन किया जाता है। शैल का अर्थ है हिमालय और पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म लेने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। पार्वती के रूप में इन्हें भगवान शंकर की पत्नी के रूप में भी जाना जाता है। वृषभ (बैल) इनका वाहन होने के कारण इन्हें वृषभारूढा के नाम से भी जाना जाता है। इनके दाएं हाथ में त्रिशूल है और बाएं हाथ में इन्होंने कमल धारण किया हुआ है। मां शैलपुत्री का पूजन और स्तवन निम्न मंत्र से किया जाता है।

वन्दे वांछितलाभाय, चंद्रार्धकृतशेखराम्‌।
वृषारूढां शूलधरां, शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥

अर्थात मैं मनोवांछित लाभ के लिये अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने वाली, वृष पर सवार रहने वाली, शूलधारिणी और यशस्विनी मां शैलपुत्री की वंदना करता हूं।

शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की कृपा आप सभी पर बनी रहे!

मां शैलपुत्री की जन्म कथा

एक बार प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया. इसमें उन्होंने सारे देवताओं को अपना-अपना यज्ञ-भाग प्राप्त करने के लिए निमंत्रित किया, किन्तु शंकरजी को उन्होंने इस यज्ञ में निमंत्रित नहीं किया। सती ने जब सुना कि उनके पिता एक अत्यंत विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं, तब वहाँ जाने के लिए उनका मन विकल हो उठा।अपनी यह इच्छा उन्होंने शंकरजी को बताई। सारी बातों पर विचार करने के बाद उन्होंने कहा- प्रजापति दक्ष किसी कारणवश हमसे रुष्ट हैं. अपने यज्ञ में उन्होंने सारे देवताओं को निमंत्रित किया है। उनके यज्ञ-भाग भी उन्हें समर्पित किए हैं, किन्तु हमें जान-बूझकर नहीं बुलाया है. कोई सूचना तक नहीं भेजी है। ऐसी स्थिति में तुम्हारा वहाँ जाना किसी प्रकार भी श्रेयस्कर नहीं होगा।'

शंकरजी के इस उपदेश से सती का प्रबोध नहीं हुआ।
पिता का यज्ञ देखने, वहाँ जाकर माता और बहनों से मिलने की उनकी व्यग्रता किसी प्रकार भी कम न हो सकी। उनका प्रबल आग्रह देखकर भगवान शंकरजी ने उन्हें वहाँ जाने की अनुमति दे दी। सती ने पिता के घर पहुँचकर देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम के साथ बातचीत नहीं कर रहा है। सारे लोग मुँह फेरे हुए हैं।केवल उनकी माता ने स्नेह से उन्हें गले लगाया। बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव भरे हुए थे। परिजनों के इस व्यवहार से उनके मन को बहुत ठेस पहुँचा। उन्होंने यह भी देखा कि वहाँ चारों ओर भगवान शंकरजी के प्रति तिरस्कार का भाव भरा हुआ है। दक्ष ने उनके प्रति कुछ अपमानजनक वचन भी कहे। यह सब देखकर सती का हृदय क्षोभ, ग्लानि और क्रोध से संतप्त हो उठा। उन्होंने सोचा भगवान शंकरजी की बात न मान, यहाँ आकर मैंने बहुत बड़ी गलती की है।

वे अपने पति भगवान शंकर के इस अपमान को सह न सकीं, उन्होंने अपने उस रूप को तत्क्षण वहीं योगाग्नि द्वारा जलाकर भस्म कर दिया। वज्रपात के समान इस दारुण-दुःखद घटना को सुनकर शंकरजी ने क्रुद्ध होअपने गणों को भेजकर दक्ष के उस यज्ञ का पूर्णतः विध्वंस करा दिया। सती ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को भस्म कर अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया। इस बार वे 'शैलपुत्री' नाम से विख्यात हुर्ईं. पार्वती, हैमवती भी उन्हीं के नाम हैं। उपनिषद् की एक कथा के अनुसार इन्हीं ने हैमवती स्वरूप से देवताओं का गर्व-भंजन किया था।

माता शैलपुत्री के मंत्र
1. शिवरूपा वृष वहिनी हिमकन्या शुभंगिनी।
पद्म त्रिशूल हस्त धारिणी
रत्नयुक्त कल्याण कारीनी..

2. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:
बीज मंत्र— ह्रीं शिवायै नम:.

3. वन्दे वांच्छित लाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ .
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥

4. प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागर: तारणीम्.
धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्॥
त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्.
सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥
चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिन.
मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥

पूजन विधि

नवरात्रि प्रतिपदा के दिन कलश या घट स्थापना के बाद दुर्गा पूजा का संकल्प लें। इसके बाद माता दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की​ विधि विधान से पूजा अर्चना करें। माता को अक्षत्, सिंदूर, धूप, गंध, पुष्प आदि अर्पित करें। इसके बाद माता के मंत्र का जाप करें। फिर कपूर या गाय के घी से दीपक जलाकर उनकी आरती उतारें और शंखनाद के साथ घंटी बजाएं, और माता को प्रसाद चढ़ाएं। प्रसाद को लोगों में बांटे और खुद भी खाए।

🚩जय माता दी।।🚩
🚩जय श्रीहरि 🚩

🚩जय माता दी।।🚩

अधिमास को मलमास क्यों कहा गया ?हिंदू धर्म में अधिकमास के दौरान सभी पवित्र कर्म वर्जित माने गए हैं। माना जाता है कि अतिरि...
17/07/2023

अधिमास को मलमास क्यों कहा गया ?
हिंदू धर्म में अधिकमास के दौरान सभी पवित्र कर्म वर्जित माने गए हैं। माना जाता है कि अतिरिक्त होने के कारण यह मास मलिन होता है। इसलिए इस मास के दौरान हिंदू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह और सामान्य धार्मिक संस्कार जैसे गृहप्रवेश, नई बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी आदि आमतौर पर नहीं किए जाते हैं। मलिन मानने के कारण ही इस मास का नाम मल मास पड़ गया है।

01/07/2023

देव शयनी एकादशी को भगवान विष्णु चार महीने के लिए सो गए।
अब सृष्टि परेशान मुझे कौन संभालेगा।
चार दिन बाद ही आई गुरु पूर्णिमा
गुरुदेव चार दिन संभालते हैं।
अगले ही दिन श्रावण लग गया
भगवान शिव ने एक महीने संभाल लिया।
फिर आया भाद्रपद
भगवान कृष्ण जन्माष्टमी आ गई।
भाद्रपद के 19 दिन संभाला भगवान कृष्ण ने

फिर आई गणेश चतुर्थी
दस दिन गणेश जी ने संभाल लिया।
उसके बाद 16 दिन पितृदेवों ने संभाल लिया सृष्टि को।
फिर आ गए नवरात्रि
मां अम्बे गौरी दुर्गा ने दस दिन संभाल लिया सृष्टि का कार्यभार
फिर शुरू हुए दीवाली के 20 दिन
मां लक्ष्मी ने संभाल लिया सृष्टि को

दीवाली के बाद दस दिन संभाला कुबेर जी ने
और फिर आई देव उठनी एकादशी
भगवान विष्णु निद्रा से जाग
सृष्टि का कार्यभार संभाल लेते हैं

हैं ना हमारा सनातन धर्म कमाल

नमो नारायण

08/06/2023

रामायण में सुग्रीव और बालि इन्द्र के अवतार है। यथा -
एकबार मेरू पर्वत के शिखर पर ब्रम्हा जी के नेत्र से भरी सभा में एक दिव्य आनंदाश्रु निकला।ब्रम्हा जी ने उसे हाथ में लेकर ध्यान करके जमीन में डाल दिया। उस आनंदाश्रु के गिरते ही एक महान कपि उत्पन्न हो गया,उसका नाम पड़ा" रिक्षविरजा " ।बोला में कहाँ रहूँ,ब्रम्हा जी बोले इसी मेरु पर्वत पर रहो।कुछ समय रहा। पर्वत पर घूमते- घूमते फल- फूल खाता हुआ वन में विचरण कर रहा था।
अचानक वहाँ उसने मणि की शिलाओं से बनी एक सुंदर वावली देखीऔर उसमें वह पानी पीने लगा,तो उसमें उसे अपनी परछाईं दिखाई दी।वह समझा पानी के अंदर मेरा दुश्मन है।छलांग लगा दी पानी मे,वहाँ कुछ नहीं वो तो परछाईं थीं।
वह कपि रिक्षविरजा पानी से ज्यों ही बाहर निकला त्यों ही एक सुंदर स्त्री बन गया। क्योंकि उस वावली का यह प्रताप था कि जो भी इसमें कूदेगा, नहायेगा या अंदर जायेगा तो वह एक रात्रि के लिए स्त्री बन जायेगा।
जब स्त्री बना तो इन्द्र ने देखा तो उस सुंदरी की सुंदरता पर मोहित हो गयेऔर कामभावना जाग्रत हो गई।इन्द्र का वीर्य उस स्त्री के बालों पर गिरा ,जिससे " बालि" की उत्पत्ति हुई। सूर्य ने उस सुंदरी को देखा तो उनका वीर्य स्खलित होकर उस युवती के गर्दन,,( ग्रीवा) पर गिरा,जिससे सुग्रीव की उत्पत्ति हुई।

देवराज इंद्र की वीर्य स्खलन से इनकी माता के बाल पर से बालि और गर्दन पर से सुग्रीव उत्पन्न हुए थे ।

22/03/2023

आपको एवं आपके समस्त परिजनों, बंधुओं और मित्रों को 1,96,08,53,124 वें सृष्टिसंवत्सर ( सनातन वैदिक नववर्ष ) की ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएँ

परमपिता परमात्मा से प्रार्थना है कि यह नववर्ष आपके जीवन में नव उमंग व ऊर्जा का संचार करे तथा आपका जीवन सुख एवं समृद्धि से परिपूर्ण हो।

जय बाबा मोहन राम जी की

जय खोली वाले की

Address

Milakpur
Milakpur
301026

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Baba Mohan Ram, Kali kholi posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to Baba Mohan Ram, Kali kholi:

Share

Category