Maa Narmada Pujan Samagri

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13/08/2025
निमाड़ में रक्षाबंधन के पूर्व आने वाले रविवार को वीरपोस पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भाई अपनी बहन को शगुन के रूप...
03/08/2025

निमाड़ में रक्षाबंधन के पूर्व आने वाले रविवार को वीरपोस पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भाई अपनी बहन को शगुन के रूप में गेहूं, चावल, कपड़ा, नारियल, मिठाई व अन्य उपहार देकर आशीर्वाद लेते हैं। बहनों को रक्षाबंधन पर मायके आने के लिए निमंत्रण दिया जाता है। बहनों को भी इस पर्व का इंतजार रहता है। बहनें भी भाइयों को तिलक लगाकर व आरती उतारकर आशीर्वाद देती हैं। इस पर्व पर भाई-बहनों द्वारा वीरपोस कथा भी सुनी जाती है।

नाग पंचमी का क्या है महत्व?सावन के महीने में सांप भू गर्भ से निकलकर भू तल पर आ जाते हैं। माना जाता है कि नाग किसी व्यक्त...
29/07/2025

नाग पंचमी का क्या है महत्व?
सावन के महीने में सांप भू गर्भ से निकलकर भू तल पर आ जाते हैं। माना जाता है कि नाग किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचाएं, इसलिए नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा-अर्चना की जाती है। कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को बिहार, बंगाल, उड़ीसा, राजस्थान आदि स्थानों पर नाग देवता की पूजा की जाती है। वहीं, शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को देश के अन्य राज्यों में नाग पंचमी मनाई जाती है। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, नाग देवता स्वयं पंचमी तिथि के स्वामी हैं। ऐसे में इस दिन उनकी पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। मान्यता है कि नाग पंचमी पर विधि-विधान से नाग देवता की पूजा करने से कुंडली में मौजूद राहु व केतु से जुड़े दोषों से मुक्ति मिल सकती है। नाग देवता को पाताल लोक का भी स्वामी बताया गया है। ऐसे में पंचमी तिथि के दिन भूमि की खुदाई भूलकर भी नहीं करनी चाहिए।
नाग पंचमी पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठ कर स्नानादि करने के बाद साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद, पास के शिवालय में जाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें और व्रत का संकल्प लें। अब अपने घर, रसोई और मंदिर के दरवाजे के दोनों ओर खड़िया से पुताई करके कोयले से नाग देवता का चिन्ह बना लें। अगर ऐसा संभव न हो, तो आप नाग देवता की तस्वीर का प्रयोग भी कर सकते हैं। फोटो लगाने के बाद घर में नाग देवता विधि-विधान से पूजा करें और फिर पास के खेत या ऐसे स्थान पर दूध का कटोरा रखकर आ जाएं जहां सांप आ सकते हैं। अब नाग देवताओं को दूध और जल से स्नान कराएं। साथ ही, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें। अब अंत में आरती करें और नाग पंचमी की कथा का पाठ भी अवश्य करें। इससे बेहद शुभ फल की प्राप्ति होती है।

गेरू से पोत कर पीले रंग से बनाते हैं जिरोती श्रावण मास की अमावस्या जो कि हरियाली अमावस्या के रूप में भी मनाई जाती है, उस...
24/07/2025

गेरू से पोत कर पीले रंग से बनाते हैं जिरोती श्रावण मास की अमावस्या जो कि हरियाली अमावस्या के रूप में भी मनाई जाती है, उसी दिन को संपूर्ण निमाड़ क्षेत्र में जिरोती अमावस्या के रुप में मनाया जाता है। इस दिन घर के भीतरी दरवाजों के दोनों ओर की दीवारों के एक विशेष आकार के हिस्से को गेरू के रंग से पोत कर उस पर पीले रंग से जिरोती बनाई जाती है। पूजन आरती कर प्रसाद चढ़ाया जाता है।
जिरोती कला सिर्फ एक कला नहीं बल्कि प्रदेश की परम्‍पराओं की मूल आधार मानी जाती है। यह कला प्रदेश के जीवन में रची बसी प्रकृति, परंपरा और यहां की समृद्ध व पौराणिक संस्‍कृति के रूपों में से एक है। लोकचित्र जिरोती को जातीय स्‍मृति, इतिहास और संस्‍कृति के अनुभवों का सार माना जाता है। लोकचित्रों की परंपरा पौराणिक काल से ही चली आ रही है।
पारंपरिक रूप से बनाई जाने वाली इस भित्ति चित्र रूपी जिरोती कला में जिरोती माता को रसोई में काम करती गृहिणी के रूप में दिखाया जाता है और जिरोती माता के आसपास के अन्य रेखांकित पात्रों में चांद, सूरज, नाग देवता, गणगौर नृत्य करते कुछ स्त्री-पुरूष, पालने में झूलते हुए बच्चे और गृहस्थ जीवन के सुख और समृद्धि से संबंधित कुछ अन्य प्रकार की आकृतियां भी बनाई जातीं हैं।
जिरोती बेटियों का त्योहार है और निमाड़ में यह पूरे उत्साह व श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

MAA NARMADA PUJAN SAMAGRI

19/07/2025

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15/07/2025

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11/07/2025

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