Shree pragyasagar prabudhha sangh

Shree pragyasagar prabudhha sangh Welcome to Shri Pragyasagar Prabudhds Sangha official page. Founded By Shree Pragyasagar Prabudhha Sangh Socity Mhow

आज सम्पुर्ण विश्व एक अनोखे तनाव से गुजर रहा हे! विश्व में प्रतिदीन 100,000 से ज्यादा लोग भुखे सोते हे! वही जल संकट, पर्यावरण,ग्लोबल वार्मिंग आज हमारे सामने एक विशिष्ट समस्या हे, जिसके परिणाम हम हम भुकंम्प, सुनामि एंव उत्तराखण्ड आपदा के रुप मे भुगत चुके हे! श्री प्रज्ञासागर प्रबुध्द संघ - स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कार, जल संरक्षण एंव पर्यावरण,

गोवंश संर्वधन "जिव दया" ओर प्रदुषण मुक्त, संस्कारवान, मानव कल्यार्णाथ के सपनो के संकल्प के साथ भारत देश को विश्व में जगतगुरु के साथ शसक्त राष्ट्र बनाने के लिय प्रतिबध्द संस्था हे!

राष्ट्रीय कल्याण हेतु योजनाए - (1) जल संरक्षण एंव पर्यावरण महा यग - तरुण त्रिवेण वनो कि स्थापना करना, वृक्षारोपण करना पोधो व उनके बिजो का वितरण करना, जल संरक्षण का संदेश फ़ेलाना, वन - नदियो, तलाबो, आदी जल संसाधनो को प्रदुषण से बचाना, नालियो, कम्पोस्ट गढ़्ढ़ो, सुलभशोचालयो, कुओ, हेंडपंम्प, हेतु प्रचार-प्रसार करना! वन व वन्य पशुओ को बचाना, जल-जंगल बचाने के लिय समाज को जागरुक करना ओर जिव दया पशुओ व पर्यावरण के विकास हेतु कार्य करना! संचालित माय डियर पोधारोपण, स्मृति वृक्षारोपण योजना, राष्ट्रीय पर्यावरण महायज्ञ के अंर्तगत रेलियो, सास्ंकृतिक आयोजन व देव पोधो का वितरण करना आदी ! (2) गोवंश संर्वधन - गोवंश का हमारी आर्थिक सम्पन्नता में बहुत बड़ा योगदान हे , वहीं भारतिय संस्कृति के अनुसार गोवंशो को देवत्व क दर्जा प्राप्त हे अपितु गोवंश क दुध बल्की मल मुत्र भि हमारे लिय लाभदायक हे! इस्लिय गोवंश कि रक्षा के लिय समाज को जग्रत करना, जिव दया करना उन्के आवास गोशालाओ का संचालन करना, उन्के इलाज व खान-पान हेतु प्रबंध करना भविष्यवद योजना हे! (3) मानव कल्यार्णाथ - सामाजिक कुरुतियो, नशामुक्ति, शाकाहार के लिय समाज को प्रेरित करना, दहेज प्रथा, मानव तस्करि, शोषण, अंधविश्वास, भृष्टाचार, नशा, धुम्रपान, बाल विवाह, छुआछुत, बाल मजदुरी, बाल अपराध, आदी से समाज को मुक्त कराना एंव इसके निवारण हेतु अभियान संचालित करना! विपत्ति में फ़से परिवारो कि मदद करना, महिलओ, बच्चो, बुजुर्गो कि सहायता करना, निशुल्क शिक्षा, इलाज, आवास का प्रबंध करना! बाल आश्रम, बृध्दाश्रम, महिला उथ्तान आश्रमो का संचालन करना! भविष्यवद योजना हे! वर्तमान मे भोजन प्रसादि का वितरण, गरिबो को कम्बल वितरण, आदि संचालित हे! (4) Cooming soon

Contact :- श्री प्रज्ञासागर प्रबुध्द संघ (धार्मिक, सामाजिक एंव परर्माथिक संस्था)

2768, यादव मोहल्ला महु केंट (जिला - इन्दोर), मध्यप्रदेश (भारत) - 453441
Mob. no. - 9300968999
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09/02/2021

ओम अवधुताय नम:
प्रेस विज्ञप्ति
महुँ (मध्यप्रदेश) नित्यानंद बापजी श्री भक्त मण्डल के शरणानंद बापजी ने बताया कि रामलला मंदिर निर्माण का अधिकार सिर्फ दक्षिण भारतीय विशिष्टाद्वैत संप्रदाय के प्रवर्तक भगवान भाष्यकार स्वामी रामानुजाचार्य के वंशज शिष्यो को ही है और राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट में एक तिहाई दक्षिण भारतीय व उनकी 60 प्रतिशत पुंजी सम्मिलित होनी चाहिए वाकी केन्द्र व राज्य सरकार का 40 प्रतिशत अनुदान होना चाहिए इस तरह राम मंदिर निर्माण के नाम पर चंदा वसुला जाना सरासर गलत है सिर्फ मंदिर निर्माण न करते हुए राम मंदिर मठ एक हव बनना चाहिए जिसमें विघालय, महाविद्यालय, गुरुकुल, अस्पताल, अन्न क्षैत्र, वृध्दाश्रम और बच्चों को छात्र वृत्ति की सुविधा होनी चाहिए व ट्रस्ट का आय - व्यय लेखा जोखा पारदर्शी होना चाहिए!

भवदीय
शरणानंद बापजी (शरद मोहन सोन)
मोबाइल नंबर 7828071436

श्रीमान संपादक महोदय
आपके व हमारे लोकप्रिय समाचार पत्र में इस जनहितार्थ समाचार को प्रकाशित करने की कृपा करें!
धन्यवाद..

06/02/2021

इंटरनेशनल घड़ी (डिजिटल समय मशीन) सही करने के लिए टिप्स :-

सत्यनिष्ठ दत्तात्रेय (15) पंद्रह दिवस एडवांस चल रहे हैं समय के मामले में या समय सुचक यंत्र चित्र से चार एडवांस भी मान सकते हैं

यदि एक मीनट को बहोत्तर सेकंड (72 कला) और एक घंटे (Hours) को बहोत्तर मीनट (72 मीनट) का कर दिया जाए तो एक दिन का समय बीस घंटे ( 20 Hours) का हो जाएगा.

हम गणितीय गणना (1-10) एक से दश तक करते हैं तो समय भी दश घंटे (10 Hours) का होना चाहिए
दश घंटे दिन के सुबह छ से रात्रि छ (6 से 6) तक
दश घंटे रात्रि के रात्रि छ से सुबह छ (6 से 6) तक

04/02/2021
21/01/2021

दश महाविघालय का क्रम :
दशमहाविद्या अर्थात महान विद्या रूपी देवी। महाविद्या, देवी दुर्गा के दस रूप हैं, जो अधिकांश तान्त्रिक साधकों द्वारा पूजे जाते हैं, परन्तु साधारण भक्तों को भी अचूक सिद्धि प्रदान करने वाली है। इन्हें दस महाविद्या के नाम से भी जाना जाता है। ये दसों महाविद्याएं आदि शक्ति माता पार्वती की ही रूप मानी जाती हैं। दस महाविद्या विभिन्न दिशाओं की अधिष्ठातृ शक्तियां हैं।
1) श्री श्री श्री धुम्रवती देवी आग्नेय कोण दिशा
2) श्री श्री श्री नील सरस्वती (तारा देवी) दक्षिण दिशा
3) श्री श्री श्री महाकाली देवी नेऋत्य कोण दिशा
4) श्री श्री भुवनेश्वरी देवी पश्चिम दिशा
5) श्री श्री देवी छिन्नमस्ता वायव्य कोण दिशा
6) श्री श्री मातंगी देवी उत्तर दिशा
7) श्री विघा त्रिपुर सुंदरी देवी ईशान कोण दिशा
8) श्री बगलामुखी देवी पुर्व दिशा
9) श्री त्रिपुर भैरवी आकाशवाणी देवी उपर कि दिशा आकाश
10) देवी कमला (लक्ष्मी) निचे कि दिशा धरती

यंहा श्री से कुल का अभिप्राय है और जिसमे श्री नहीं लगा वह अकुल है

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