Nomi giri

Nomi giri jai shree radhe

17/04/2020

सरस्वती स्त्रोत्र
ॐ रवि-रुद्र-पितामह-विष्णु-नुतं, हरि-चन्दन-कुंकुम-पंक-युतम्! मुनि-वृन्द-गजेन्द्र-समान-युतं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥1॥

शशि-शुद्ध-सुधा-हिम-धाम-युतं, शरदम्बर-बिम्ब-समान-करम्। बहु-रत्न-मनोहर-कान्ति-युतं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥2॥

कनकाब्ज-विभूषित-भीति-युतं, भव-भाव-विभावित-भिन्न-पदम्। प्रभु-चित्त-समाहित-साधु-पदं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥3॥

भव-सागर-मज्जन-भीति-नुतं, प्रति-पादित-सन्तति-कारमिदम्। विमलादिक-शुद्ध-विशुद्ध-पदं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्।।4||

मति-हीन-जनाश्रय-पारमिदं, सकलागम-भाषित-भिन्न-पदम्। परि-पूरित-विशवमनेक-भवं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥5॥

परिपूर्ण-मनोरथ-धाम-निधिं, परमार्थ-विचार-विवेक-विधिम्। सुर-योषित-सेवित-पाद-तमं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥6॥

सुर-मौलि-मणि-द्युति-शुभ्र-करं, विषयादि-महा-भय-वर्ण-हरम्। निज-कान्ति-विलायित-चन्द्र-शिवं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥7॥

गुणनैक-कुल-स्थिति-भीति-पदं, गुण-गौरव-गर्वित-सत्य-पदम्। कमलोदर-कोमल-पाद-तलं,तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्

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12/04/2020

विडियो देखने के लिए विडियो पर क्लिक करें और चैनल को सब्सक्राइब करें धन्यवादVaidik Shri Mahalaxmi वैदिक श्री महालक्ष्मी पाठ स्तोत्र का पाठ करने से घर में सुख समृद्धि आती है स्वर गोपालानंद बापू जी

वैदिक श्री महालक्ष्मी पाठ स्तोत्र का पाठ करने से घर में सुख समृद्धि आती है स्वर गोपालानंद बापू जी.... Om Namo Narayan I am mahant nomigiri fri...

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09/04/2020

कृपया इस वीडियो को अंतर देखने के लिए वीडियो पर क्लिक करें चैनल को सब्सक्राइब करें लाइक करें और अपने मित्रों से शेयर करें गणपति जी की कृपा बनी रहे # mahantnomigiri Ganpati Atharva sheersham कोई भी नया कार्य शुरू करने से पहले अवश्य सुने सारे कार्य सिद्ध होंगे सारे विघ्न समाप्त होंगे

shri Ganpati Atharva sheersham कोई भी नया कार्य शुरू करने से पहले अवश्य सुने सारे कार्य सिद्ध होंगे सारे विघ्न समाप्त होंगे Om Namo Nar...

🍀🌷 राधे राधे🌷🌿वृंदावन में बाँकेबिहारी जी मंदिर में बिहारी जी की काले रंगकी प्रतिमा है। इस प्रतिमा के विषय में मान्यता है...
07/04/2020

🍀🌷 राधे राधे🌷🌿

वृंदावन में बाँकेबिहारी जी मंदिर में बिहारी जी की काले रंग
की प्रतिमा है। इस प्रतिमा के विषय में मान्यता है कि इस
प्रतिमा में साक्षात् श्रीकृष्ण और राधाजी समाहित हैं , इसलिए
इनके दर्शन मात्र से राधा-कृष्ण के दर्शन के फल की प्राप्ति होती है ।
इस प्रतिमा के प्रकट होने की कथा और लीला बड़ी ही रोचक और
अद्भुत है, इसलिए हर वर्ष मार्गशीर्ष मास
की पंचमी तिथि को बाँकेबिहारी मंदिर में
बाँकेबिहारी प्रकटोत्सव मनाया जाता है।
बाँकेबिहारी जी के प्रकट होने की कथा-संगीत सम्राट तानसेन के गुरु
स्वामी हरिदास जी भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त थे। वृंदावन में
स्थित श्रीकृष्ण की रास-स्थली निधिवन में बैठकर भगवान को अपने
संगीत से रिझाया करते थे। भगवान की भक्ति में डूबकर हरिदास
जी जब भी गाने बैठते तो प्रभु में ही लीन हो जाते। इनकी भक्ति और
गायन से रीझकर भगवान श्रीकृष्ण इनके सामने आ गये। हरिदास
जी मंत्रमुग्ध होकर श्रीकृष्ण को दुलार करने लगे। एक दिन इनके एक
शिष्य ने कहा कि आप अकेले ही श्रीकृष्ण का दर्शन लाभ पाते हैं, हमें
भी साँवरे सलोने का दर्शन करवाइये। इसके बाद हरिदास
जी श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबकर भजन गाने लगे। राधा-कृष्ण की युगल
जोड़ी प्रकट हुई और अचानक हरिदास के स्वर में बदलाव आ गया और
गाने लगे-
भाई री सहज जोरी प्रकट भई,
जुरंग की गौर स्याम घन दामिनी जैसे।
प्रथम है हुती अब हूँ आगे हूँ रहि है न टरि है तैसे।
अंग-अंग की उजकाई सुघराई चतुराई सुंदरता ऐसे।
श्री हरिदास के स्वामी श्यामा पुंज बिहारी सम वैसे वैसे।
श्रीकृष्ण और राधाजी ने हरिदास के पास रहने की इच्छा प्रकट की।
हरिदास जी ने कृष्णजी से कहा कि प्रभु मैं तो संत हूँ। आपको लंगोट
पहना दूँगा लेकिन माता को नित्य आभूषण कहाँ से लाकर दूँगा। भक्त
की बात सुनकर श्रीकृष्ण मुस्कराए और राधा-कृष्ण की युगल
जोड़ी एकाकार होकर एक विग्रह के रूप में प्रकट हुई। हरिदास जी ने
इस विग्रह को ‘बाँकेबिहारी’ नाम दिया। बाँके बिहारी मंदिर में
इसी विग्रह के दर्शन होते हैं। बाँके बिहारी के विग्रह में राधा-कृष्ण
दोनों ही समाए हुए हैं, जो भी श्रीकृष्ण के इस विग्रह का दर्शन
करता है, उसकी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
कुंजबिहारी...श्री हरिदास....

वेदोक्त श्री सुक्तम लक्ष्मी प्राप्ति की सर्वोत्तम साधनाइस स्तोत्र का पाठ 16 दिन  करने या सुनने से घर में लक्ष्मी का निवा...
05/04/2020

वेदोक्त श्री सुक्तम लक्ष्मी प्राप्ति की सर्वोत्तम साधना
इस स्तोत्र का पाठ 16 दिन करने या सुनने से घर में लक्ष्मी का निवास होता है श्री महंत नवमी गिरी महाराज श्री धाम वृंदावन उत्तर प्रदेश
नोट : 3 दिवस का लक्ष्मी प्रयोग जानने या अपने घर परायण हेतु संपर्क करें 9041238005

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राधे राधे जी
04/04/2020

राधे राधे जी

03/04/2020

कामदा एकादशी

उद्देश्य :
समस्त पापों की शांति

तिथि :
चैत्र के शुक्लपक्ष की एकादशी

कथा :
प्राचीनकाल में भोगीपुर नामक एक नगर था। वहाँ पर अनेक ऐश्वर्यों से युक्त पुण्डरीक नाम का एक राजा राज्य करता था। भोगीपुर नगर में अनेक अप्सरा, किन्नर तथा गन्धर्व वास करते थे। उनमें से एक जगह ललिता और ललित नाम के दो स्त्री-पुरुष अत्यंत वैभवशाली घर में निवास करते थे। उन दोनों में अत्यंत स्नेह था, यहाँ तक कि अलग-अलग हो जाने पर दोनों व्याकुल हो जाते थे। एक दिन गन्धर्व ललित दरबार में गान कर रहा था कि अचानक उसे अपनी पत्नी की याद आ गई। इससे उसका स्वर, लय एवं ताल बिगडने लगे। इस त्रुटि को कर्कट नामक नाग ने जान लिया और यह बात राजा को बता दी। राजा को ललित पर बड़ा क्रोध आया। राजा ने ललित को राक्षस होने का श्राप दे दिया। जब उसकी प्रियतमा ललिता को यह वृत्तान्त मालूम हुआ तो उसे अत्यंत खेद हुआ। ललित वर्षों वर्षों तक राक्षस योनि में घूमता रहा। उसकी पत्नी भी उसी का अनुकरण करती रही। अपने पति को इस हालत में देखकर वह बडी दुःखी होती थी। वह श्रृंगी ऋषि के आश्रम में जाकर विनीत भाव से प्रार्थना करने लगी। उसे देखकर श्रृंगी ऋषि बोले कि हे सुभगे! तुम कौन हो और यहाँ किस लिए आई हो? ‍ललिता बोली कि हे मुने! मेरा नाम ललिता है। मेरा पति राजा पुण्डरीक के श्राप से विशालकाय राक्षस हो गया है। इसका मुझको महान दुःख है। उसके उद्धार का कोई उपाय बतलाइए। श्रृंगी ऋषि बोले हे गंधर्व कन्या! अब चैत्र शुक्ल एकादशी आने वाली है, जिसका नाम कामदा एकादशी है। इसका व्रत करने से मनुष्य के सब कार्य सिद्ध होते हैं। यदि तू कामदा एकादशी का व्रत कर उसके पुण्य का फल अपने पति को दे तो वह शीघ्र ही राक्षस योनि से मुक्त हो जाएगा और राजा का श्राप भी अवश्यमेव शांत हो जाएगा। ललिता ने मुनि की आज्ञा का पालन किया और एकादशी का फल देते ही उसका पति राक्षस योनि से मुक्त होकर अपने पुराने स्वरूप को प्राप्त हुआ। फिर अनेक सुंदर वस्त्राभूषणों से युक्त होकर ललिता के साथ विहार करते हुए वे दोनों विमान में बैठकर स्वर्गलोक को प्राप्त हुए। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने से समस्त पाप नाश हो जाते हैं तथा राक्षस आदि की योनि भी छूट जाती है। संसार में इसके बराबर कोई और दूसरा व्रत नहीं है। इसकी कथा पढ़ने या सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
।। जय जय श्री राधे।।
जब मेघनाद का वध नहीं हो पा रहा था तो इसी आमद एकादशी को भगवान राम ने घी के दीपक जला कर उर्जापुंज का निर्माण किया था, और मेघनाद गवका वध किया था.
यह एकादशी विजय की प्रतीक है.
इसलिए आप सभी घर पर घी का दीपक जलाये. आप भी सब परेशानियों पर विजय प्राप्त कर परिवार के लिए सुख, शांति, प्रेम और प्रगति की विजय प्राप्त करेंगे. आप सभी के लिए शुभकामनाएं🌹

03/04/2020
03/04/2020
03/04/2020

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