05/10/2026
🌺 इंदिरा एकादशी व्रत कथा
प्राचीन समय में महिष्मती नगरी में इंद्रसेन नाम के एक धर्मात्मा राजा राज्य करते थे। वे भगवान विष्णु के परम भक्त थे और अपनी प्रजा का पालन-पोषण बहुत अच्छे से करते थे। उनके राज्य में सभी लोग सुखी और धर्म-कर्म में लगे रहते थे।
एक दिन राजा इंद्रसेन अपनी सभा में बैठे थे। तभी वहाँ देवर्षि नारद जी का आगमन हुआ। राजा ने उनका आदर-सत्कार किया और आने का कारण पूछा।
नारद जी ने कहा—
“हे राजन्! मैं अभी यमलोक से आया हूँ। वहाँ मैंने आपके पिता को देखा। आपके पिता ने जीवन में बहुत पुण्य कर्म किए थे, लेकिन एक व्रत के नियम में हुई छोटी-सी भूल के कारण उन्हें यमलोक में कष्ट भोगना पड़ रहा है।”
यह सुनकर राजा बहुत दुखी हुए। उन्होंने नारद जी से अपने पिता को इस कष्ट से मुक्त कराने का उपाय पूछा।
तब नारद जी ने कहा—
“हे राजन्! आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी, जिसे इंदिरा एकादशी कहा जाता है, उसका विधिपूर्वक व्रत करें। इस व्रत का पुण्य अपने पिताजी को अर्पित करें। इससे आपके पिताजी को यमलोक के कष्ट से मुक्ति मिलेगी और वे भगवान विष्णु के धाम को प्राप्त करेंगे।”
राजा ने नारद जी के बताए अनुसार इंदिरा एकादशी का व्रत करने का संकल्प लिया।