ज्ञान

ज्ञान ज्ञान है वो जानकारी और गुण, जो हम शिक्ष?

ज्ञान है वो जानकारी और गुण, जो हम शिक्षा या अनुभव करने के माध्यम से प्राप्त कर सकते है। ज्ञान का दान है किसी और को ज्ञान देना, यानि समझाना या सिखाना।

ज्ञान प्राप्त करने के दो माध्यम है:
शिक्षा लेना
ज्ञान योग करना

☼ शिक्षा एक व्यापक अवधारणा है, जो छात्रों में कुछ सीख सकने के सभी अनुभवों का हवाला देते हुए
☼ शिक्षण एक असल उपदेशक की क्रियाओं को कहते है जो शिक्षण को सुझाने के लिए आकल्पित किया गया हो


☼ प्रशिक्षण विशिष्ट ज्ञान, कौशल, या क्षमताओं की सीख के साथ शिक्षार्थियों को तैयार करने की दृष्टि से संदर्भित है, जो कि तुरंत पूरा करने पर लागू किया जा सकता है

► ज्ञान योग स्वंज्ञान अर्थात स्वं का जानकारी प्राप्त करने को कहते है। ये अपनी और अपनी परिवेश को अनुभव करने के माध्यम से समझना है।

ऊर्जा : वासना से ध्यान की ओर:ऊर्जा का स्वभाव है ..बहना, खर्च होना, गति देना, लेकिन यदि उसका रूपांतरण हो जाए तो वही ऊर्जा...
30/11/2025

ऊर्जा : वासना से ध्यान की ओर:
ऊर्जा का स्वभाव है ..बहना, खर्च होना, गति देना, लेकिन यदि उसका रूपांतरण हो जाए तो वही ऊर्जा बिजली की तरह
अद्भुत शक्ति बन जाती है।

जैसे विज्ञान ने बिजली को
तरंगों में, प्रकाश में,
रॉकेटों में बदल दिया —
वैसे ही आध्यात्म का विज्ञान
ऊर्जा को चेतना में बदलता है।
इसे ही वासना रूपांतरण कहते हैं।
ध्यान योग का अपना विज्ञान है।
और यही वास्तविक आध्यात्मिक विज्ञान है।

#आध्यात्मिकज्ञान #आध्यात्मिकविज्ञान #ध्यानयोग #ऊर्जारूपांतरण #वासना_से_ध्यान #ध्यानसाधना #चेतनाजागरण #योगमार्ग #शक्तिजागरण #आंतरिकयात्रा

30/11/2025
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10/08/2024

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard!

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धर्म केवल कल्याण का कारक है। जिसमें कल्याण नही हो उसका धर्म से कोई संबंध होना संदिग्ध है। जो अपने कल्याण का ध्यान खुद नह...
29/09/2023

धर्म केवल कल्याण का कारक है। जिसमें कल्याण नही हो उसका धर्म से कोई संबंध होना संदिग्ध है। जो अपने कल्याण का ध्यान खुद नही देता उसको नष्ट होना ही रहता है। जो अपने कल्याण से दूर रहता है वह दूसरों द्वारा अपने कल्याण के लिए उपयोग कर लिया जाता है। सौ.:-इं.गुं.कं.

04/10/2022

योग से तात्पर्य केवल जुड़ने से है, दो लोग मिलकर दसियों के छक्के छुडा सकते हैं| कोई पाँच लोग मिलकर नियंत्रक के साथ समुचित सह(योग) से तो लाखों या करोड़ों पर अपनी बात थोप सकते हैं| केवल योग ही सभी की अंतिम परिणाम निर्धारित करने मे समर्थ है, जो उचित तरीकों से योग करता है उनकी कोई ज़रूरत की पूर्ति या समस्या का निदान शेष नही रहती| परिणाम रहित उठा-बैठक करने या करने के नाम से उलझाकर अपनी रोटी सेकने वाले पहले से ही कमी नही हैं, उस नक्कार खाने में तुरही बजाने का कोई इरादा नही है| “फुट डालो और राज करो” की तर्ज पर कथित बुद्धिमान लोगों के सह(योग) या उप(योग) से ही लोगों को खुद के वि(योग) करके ही कुछ कमीनें अपने गोपनीय और दुर्व्यवस्थित योग और अपडेट द्वारा अनुचित लाभ उठा और बनाए रख पाते हैं|

27/09/2022

"ज्ञानिनामपिचेतांसि देवीभगवती हि सा, बलादाकृष्यमोहाय महामाया प्रयच्छति|" वैसे तो यह सात पदों मे दुर्गा जी की महिमा मॅंडन का पहला पद है जिसमे 'उस महामाया को प्रणाम किया गया है जो ग्यानियो की चेतना को भी बल पूर्वक खींच कर मोह मे डाल देती हैं| यह काम भले ही दुनिया मे अव्यक्त रूप से दुर्गा जी द्वारा किया जाता रहता हो किंतु आ (सभी स्वरों और व्यंजनों मे अनिवार्य रूप से रहने वाला) की तरह दुनिया के साधारण उपलब्ध तत्वों (ज़रूरतों या समस्याओं) से बना हुवा किले ( दुर्ग ) जैसी संरचना भी यह काम बखूबी करती ही रहती है| प्राचीन काल मे भगवती द्वारा दिए गये आशीर्वाद स्वरूप देवतागण ना भी बुलाए तो देवताओं के वेश मे दुष्ट-मूर्ख-कमजोर लोगों द्वारा भी लोगों के कल्याण के लिए बुलाए जाने पर खुद ही प्रकट होकर उनकी बाधा निश्चित रूप से दूर करती रहती हैं| इसे ही दुनिया मे तमाम गोपनीय और दुर्व्यवस्थित सिंडिकेटो द्वारा लोगों की ज़रूरत या समस्या के "नाम" से खुद को ही लेटेस्ट होना दिखाकर उनके अनुसार परिणाम सर्वत्र, सदैव, स्वतः भी खुद ही होते हुवे आसानी से देखा जा सकता है| अब मेरे जैसे गुंडे-बदमाश-लुच्चे-लफंगे के कहने पर भी इन भगवती महामाया को हर हाल मे आना और अपना पुराना वादा निभाना ही होगा| यह काम वैसे भी अनादि काल से दुनिया के कथित देवताओं (देने वाले, प्रकाशित होने/ करने वाले) कमजोर लोगों द्वारा अपने आधिक्य वाली शक्तियों के सम्मिलीकरण द्वारा सभी तरह के ग्यानियो को ज़बरदस्ती उनकी मर्ज़ी के विपरीत भी भ्रम मे डाल कर किया जाता रहा है| अब इसे डंके की चोट पर जो भी चाहेगा सार्वजनिक, व्यवस्थित और प्रमाणित तरीकों से कर सकेगा| कहीं कोई विरोध करने की हिम्मत ताक़त या बुद्धि रखेगा तो मेरे अध्यावधिक सिंडिकेट के प्रमुख हथियार (आईना, शीशा) की चपेट मे आकर अपने सारे सामर्थ्य सहित खुद ही नष्ट हो जाएगा| इस तरीके से किसी के द्वारा भी, हर तरह के ग्यानियो (बल-बुद्धि-विध्या धारी लोगों) की चेतना(बल-बुद्धि-विध्या) को बल पूर्वक खींचा कर, उन्हें ज़बरदस्ती भ्रम मे डाल कर, अपने अनुरूप परिणाम निकालने के लिए मजबूर किया जा सकता है। इसलिए पसंद का इज़हार करने के बजाए जहाँ ना समझ मे आए या कोई कमी हो वहीं कमेंट करें या कमेंट करने वाले लोगों को आमंत्रित करे| जिससे सत्य जो कुछ भी हो प्रकाशित होकर लोगों को आनंद, नियंत्रण, सर्वत्रता और सदैवता मे बाधक तत्वों को नष्ट करने वाली शक्तियों को उनका सही टारगेट दिखाया जा सके|

26/09/2022

"या देवी सर्वभूतेषू शक्ति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥" यह सभी भूतों(तत्वों) में शक्ति के रूप में स्थित दुर्गा को नमस्कार, नमस्कार तथा बार-२ नमस्कार किया गया है, इसे चाहो भक्ति से करो या मजबूरी मे नमस्कार तो करना ही पड़ता है| देवताओं के सिंडिकेट जैसे संगठन की ही तर्ज पर दुनिया के सारे सिंडिकेट भी सभी व्यक्ति-वस्तु-व्यवस्था मे सदैव, सर्वत्र, स्वतः उसकी चेतना, बुद्धि, निद्रा, छुधा, छाया, तृष्णा, छान्ती, जाति, लज्जा, शांति, श्रद्धा, कांति, लछ्मी, वृत्ति, स्मृति, दया, तुष्टि, मातृ, भ्रांति तथा सभी इंद्रियों की अधिष्ठात्री शक्ति के रूप में स्थित रहने वाली शक्तियों का ही उपयोग करते रहते हैं इसीलिए उसको प्रणाम, उसको प्रमाण, उसको बारंबार प्रणाम करना ही पड़ता है, उसको चाहो या ना चाहो, मानो या ना मानो, जानो या ना जानो, पूजो या ना पूजो, होगा वही जिस पर इस तरह से बने लेटेस्ट सिंडिकेट की कृपा होगी| इसको सरल भाषा मे इस तरह से भी कहा जा सकता है कि सभी जीव-जन्तु-वनस्पतियों सहित सभी व्यक्ति-वस्तु-व्यवस्था मे चेतना, बुद्धि, निद्रा, छुधा, छाया, तृष्णा, छान्ति, जाति, लज्जा, शांति, श्रद्धा, कांति, लछ्मी, वृत्ति, स्मृति, दया, तुष्टि, मातृ, भ्रांति तथा अन्य रूपों मे रहने वाली शक्तियों के सम्मिश्रण से बने और समय-स्थान-परिस्थितियों के अनुरूप अपडेट रहने वाले सिंडिकेट जैसे संगठन को तोड़ना असंभव रहता है| अपितु इस प्रकार से बने दुनियावी सिंडिकेट जब भी चाहे, जो भी चाहे, किसी को भी दुष्ट घोषित करके ही निपटा सकते हैं, निपटाते रहते हैं, आगे भी एसा ही होता रहने वाला है, फिलहाल तो इनको रोकने वाला ना तो कोई पैदा हुवा है ना ही निकट भविष्य में एसा होने की कोई संभावना ही है| ज़्यादा लिखना ठीक नही है मैं तो दुनिया में अपने दुष्टतम स्वरूप से ही, इन्ही शक्तियों के दम से बने सिंडिकेट को अपडेट रखकर तमाम शरीफों के वेश मे छिपे दुश्टों को बिना कुछ किए धरे ही निपटाने वाला हूँ| जिसको मेरी वर्तमान या पूर्व की कोई बात समझ मे ना आए या कोई कमी या सुधार बता सके केवल वही कमेंट सके| सादर,

24/09/2022

लोग तो बस भेड़ों की तरह पीछे चलना ही पसंद करते हैं चाहे उनके आगे भेड़ की खाल में भेड़िया ही क्यों ना हो। अभी कुछ दिनों पहले तक जो लोग कोंग्रेस जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे वह आज मोदी जिंदाबाद कर रहे हैं, कल जो भी जीतेगा उसके पीछे ऐसे ही घूमेंगे। लोग केवल जीतने वाले को ही पूजते हैं, चाहे उसकी जीत फर्जी, नकली, धूर्ततापूर्ण या काल्पनिक ही क्यों ना हो। प्रत्येक आम इंसान कोई भी असंभव काम बगैर लागत, जोखिम और बाधा के निश्चित रूप से कर सकता है किंतु लोग सारी मेहनत, ताकत, बुद्धि तथा जान व माल की लागत पर भी फर्जी काबिल के पीछे घूमना ही पसंद करते हैं।

21/09/2022

लोगों द्वारा केवल सत्ता की ही पूजा की जाती है, उसने द्वारा कैसे सत्ता हासिल की गयी है या कैसे कार्य किया जा रहा है, उस पर कोई सवाल जवाब नही करता बल्कि अपनी चमचागिरी के चक्कर में अपने नियंत्रक के कृत्यों को ही सर्वश्रेष्ठ साबित करने का जुगाड़ में लग जाते हैं| सत्ता बदलते ही बदली हुई सत्ता के गुणगान और पुरानी की बुराई करना ही तथाकथित काबिल लोगों का प्रमुख काम रहता है| सत्ता परिवर्तन में बड़ी मात्रा में लोगों की जान, माल, ताक़त, शक्ति या बुद्धि का विनाश होता है इसलिए केवल एक ही सत्ता को स्थाई रूप से स्थापित करने के लिए दुनिया के सबसे कमजोर लोगों द्वारा सत्ता स्थापित करने की तकनीकी ही व्यवस्थित और प्रमाणित तरीके से सार्वजनिक की जा रही है जिससे किसी के भी द्वारा ग़लती किए जाने पर दूसरे उससे भी कमजोर व्यक्ति द्वारा उसका कान पकड़ कर उसे बाहर का रास्ता भी दिखा सके| काबिल लोग तो वैसे भी चमचागिरी करने के अतिरिक्त किसी और काम के नही होते हैं|

17/09/2022

मंगल भवन (मंगल करने) अमंगल हारी (अमंगल हटाने) का नाम लेकर ही दुनिया चल रही है। जिसने भी जितना भी महत्व प्राप्त किया है इसका नाम लेकर ही किया है। इसका नाम लिए बिना अच्छा या बुरा कोई भी काम नही किया जा सकता। जो इसका उपयोग करता है वह अपनी शक्तियों को जानकार, इसके सहारे कोई भी असंभव से असंभव काम कर सकता है। जो लोगों मंगल नही कर रहें हो या अमंगल नही हर रहे हों वह राम हो ही नही सकते। झूठे राम केवल झूठे लोगों का ही मंगल कर सकते है या अमंगल हर सकते है। राम यथार्थ हैं, सबमें हैं, सर्वत्र हैं, सदैव हैं, कल्याणकारी व निश्चित रूप से क्रियाशील हैं। आप मेरे उक्त पैरा को आप बार-२ पढ़ें, जिसमें श्री राम की सर्वत्र उपस्थिति व्यवहारिक जगत में भी स्वतः सिद्ध है। श्री राम सभी धर्मों, कर्मों, संविधानों, संस्कृतियों, सिद्धांतों, वादों, परिवादों, शब्दों, अर्थों और उनकी व्याख्याओं में (लोगों की ज़रूरत की पूर्ति या समस्याओं का निदान अर्थात मंगल भवन अमंगल हारी कहें या श्री राम) स्वतः निवास करते है। इन्हे लोगों को आसानी से समझने लायक बनाकर सभी के समस्त काम किए जा सकते है तथा समस्याएँ दूर की जा सकती हैं। जिनका केवल नाम लेना ही इतना कल्याणकारी है, वह खुद क्या नही कर सकते, इसका आप अंदाज़ा नही लगा सकते। मेरा सन्दर्भित पैरा या अन्य अभिव्यक्तिया तब तक पढ़िए जब तक कोई कमी ना मिले। जब यदि कोई कमी मिले तो मुझसे पूंछ लीजिएगा, मैं सदैव उपस्थित हूँ। जै श्री राम.

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