26/09/2022
"या देवी सर्वभूतेषू शक्ति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥" यह सभी भूतों(तत्वों) में शक्ति के रूप में स्थित दुर्गा को नमस्कार, नमस्कार तथा बार-२ नमस्कार किया गया है, इसे चाहो भक्ति से करो या मजबूरी मे नमस्कार तो करना ही पड़ता है| देवताओं के सिंडिकेट जैसे संगठन की ही तर्ज पर दुनिया के सारे सिंडिकेट भी सभी व्यक्ति-वस्तु-व्यवस्था मे सदैव, सर्वत्र, स्वतः उसकी चेतना, बुद्धि, निद्रा, छुधा, छाया, तृष्णा, छान्ती, जाति, लज्जा, शांति, श्रद्धा, कांति, लछ्मी, वृत्ति, स्मृति, दया, तुष्टि, मातृ, भ्रांति तथा सभी इंद्रियों की अधिष्ठात्री शक्ति के रूप में स्थित रहने वाली शक्तियों का ही उपयोग करते रहते हैं इसीलिए उसको प्रणाम, उसको प्रमाण, उसको बारंबार प्रणाम करना ही पड़ता है, उसको चाहो या ना चाहो, मानो या ना मानो, जानो या ना जानो, पूजो या ना पूजो, होगा वही जिस पर इस तरह से बने लेटेस्ट सिंडिकेट की कृपा होगी| इसको सरल भाषा मे इस तरह से भी कहा जा सकता है कि सभी जीव-जन्तु-वनस्पतियों सहित सभी व्यक्ति-वस्तु-व्यवस्था मे चेतना, बुद्धि, निद्रा, छुधा, छाया, तृष्णा, छान्ति, जाति, लज्जा, शांति, श्रद्धा, कांति, लछ्मी, वृत्ति, स्मृति, दया, तुष्टि, मातृ, भ्रांति तथा अन्य रूपों मे रहने वाली शक्तियों के सम्मिश्रण से बने और समय-स्थान-परिस्थितियों के अनुरूप अपडेट रहने वाले सिंडिकेट जैसे संगठन को तोड़ना असंभव रहता है| अपितु इस प्रकार से बने दुनियावी सिंडिकेट जब भी चाहे, जो भी चाहे, किसी को भी दुष्ट घोषित करके ही निपटा सकते हैं, निपटाते रहते हैं, आगे भी एसा ही होता रहने वाला है, फिलहाल तो इनको रोकने वाला ना तो कोई पैदा हुवा है ना ही निकट भविष्य में एसा होने की कोई संभावना ही है| ज़्यादा लिखना ठीक नही है मैं तो दुनिया में अपने दुष्टतम स्वरूप से ही, इन्ही शक्तियों के दम से बने सिंडिकेट को अपडेट रखकर तमाम शरीफों के वेश मे छिपे दुश्टों को बिना कुछ किए धरे ही निपटाने वाला हूँ| जिसको मेरी वर्तमान या पूर्व की कोई बात समझ मे ना आए या कोई कमी या सुधार बता सके केवल वही कमेंट सके| सादर,