02/09/2019
मानस के अनुसार सज्जन और दुष्ट लोग चंदन और कुल्हाड़ी की तरह होते हैं ।कुल्हाड़ी का स्वभाव काटना होता है ,वह चन्दन को काट देती है। किंतु चन्दन कुल्हाड़ी से कटने पर भी अपने स्वभाव के कारण उसे सुवासित कर देता है ।इस गुण के कारण चन्दन देवों के माथे पर विराजमान होता है। और कुल्हाड़ी को उसके स्वभाव की बजह से, मुँह आग में तपा कर उसे घन से पीटा जाता है ।
सज्जन शीलवान होते हैं ,उन्हें पराया दुख देख कर ,दुख होता है और सुख देखकर सुख होता है ।उनके मन मे किसी के प्रति वैर भाव नहीं होता ।दीनों पर दया करने वाले ,मन वचन कर्म से निष्कपट ,सबको सम्मान देने वाले ,और स्वयं मान रहित होते हैं ।कामना रहित ,सरल सहज , भगवान के चरणों में प्रीति ।दुःख-सुख में समान भाव से स्थिर और किसी से भी कठोर वचन न बोलने वाले पुरूष सज्जन होते हैं ।
दुष्टों के हृदय में बहुत सन्ताप रहता है। दूसरे को सुखी देखकर सदा जलते रहते हैं ।निर्दयी ,कपटी ,कुटिल ,पापों की खान ,बिना कारण किसी से वैर रखना ,जो भलाई करे उसका बुरा करना दुष्टों का स्वभाव होता है ।जब किसी को विपत्ति में देखते हैं तो ऐसे सुखी होते हैं जैसे खजाना पा गए हों ।
माता पिता ,गुरु ब्राह्मण किसी को नहीं मानते ,दूसरों को दुख पहुंचाने के लिए खुद कष्ट उठाते हैं ।दुसरो को नष्ट करने के प्रयत्न में खुद भी नष्ट होजाते हैं।उनका हृदय दम्भ व कपट से भरा होता है ।वेदों और धर्म के निंदक ,ब्राह्मण द्रोही दुष्टों की यही पहचान है ।
परहित सरस् धरम नहीं भाई ।पर पीड़ा सम नहीं अधमाई ।।