20/08/2025
बृज कौ स्वाद वैकुण्ठ में नाहीं।
हरि गुन कथा भई जब मीठी बृजरस मिल्यो तब माहीं॥
बृजरस बिन कहा रसिक गावते बृज बिनु रस मरि जातो।
ब्रज महिमा कूँ वेई जानें जिन कौ बृज सों नातो॥
भुवन चतुर्दश मांझ धन्य ब्रज धनि-धनि ये ब्रजवासी।
नागरीदास धन्य हैं सोई जो बृज रैनु उपासी।।