Braj Madhuri

Braj Madhuri वही तन, मन, धन धन्य है जो हरि-गुरु की सेव?

संसार आकर्षित तो कर सकता है,पर हृदय को तृप्त नहीं कर सकता।माया कुछ क्षणों के लिए मन को बहला सकती है,पर आत्मा की प्यास नह...
24/05/2026

संसार आकर्षित तो कर सकता है,
पर हृदय को तृप्त नहीं कर सकता।
माया कुछ क्षणों के लिए मन को बहला सकती है,
पर आत्मा की प्यास नहीं बुझा सकती।
यह चंचल मन अंततः उसी को खोजता है
जहाँ न छल हो, न स्वार्थ, केवल प्रेम हो।
और ऐसा निष्कलंक, मधुर और पूर्ण प्रेम
केवल श्री राधा-गोविंद के चरणों में ही मिलता है॥

-श्री राधा गोविंद

श्रीकृष्ण एवं आनन्द दोनों पर्यायवाची शब्द हैं । विश्व का प्रत्येक व्यक्ति एकमात्र आनंद ही चाहता है । अतः वह आनन्द का दास...
22/05/2026

श्रीकृष्ण एवं आनन्द दोनों पर्यायवाची शब्द हैं । विश्व का प्रत्येक व्यक्ति एकमात्र आनंद ही चाहता है । अतः वह आनन्द का दास है अतः वह श्रीकृष्ण का भी अनजाने में दास ही है।
- #जगद्गुरु_श्रीकृपालुजी_महाराज

संसार में उन्हीं मनुष्यों का जीवन धारण करना सार्थक कहा जा सकता है, जिनके हृदय-पटल पर हर समय मुरली मनोहर मुकुन्द की मंजुल...
18/05/2026

संसार में उन्हीं मनुष्यों का जीवन धारण करना सार्थक कहा जा सकता है, जिनके हृदय-पटल पर हर समय मुरली मनोहर मुकुन्द की मंजुल मूर्ति नृत्य करती रहती हो। जिनके कर्ण-रन्ध्रों में प्रतिक्षण मनोहर मुरली की मधुर तान सुनायी पड़ती रहती हो। जिनके चक्षु भगवान की छवि के अतिरिक्त किसी अन्य वस्तु का दर्शन ही न करना चाहते हों, जिनका मनमधुप सदा भक्त-भयहारी भगवान के चरण-कमलों का मधुरातिमधुर मकरन्द-पान करता रहता हो, ऐसे शुभ-दर्शन भक्त स्वयं तो कृतकृत्य होते ही हैं, वे सम्पूर्ण संसार को भी अपनी पद-रज से पावन बना देते हैं। उनकी वाणी में उन्माद होता है, दृष्टि में जीवों को अपनी ओर आकर्षित करने की शक्ति होती है, उनके सभी कार्य अलौकिक होते हैं, उनके सम्पूर्ण कार्य लोकबाह्य और संसार के कल्याण करने वाले ही होते हैं।

- #संत_वाणी

श्री राधे राधे

❤️ हे हरि! हे मेरे राधानाथ! आपकी जय हो…मैं बार-बार आपके श्रीचरणकमलों में यही विनती करता हूँ—एक बार मुझे अपनी शरण में ले ...
17/05/2026

❤️ हे हरि! हे मेरे राधानाथ! आपकी जय हो…
मैं बार-बार आपके श्रीचरणकमलों में यही विनती करता हूँ—
एक बार मुझे अपनी शरण में ले लो।
हे नाथ!
अनगिनत योनियों में भटकने के बाद
आज थककर मैं आपकी शरण में आया हूँ।
अब अपने गुणों की कृपा से
इस अधम का भी उद्धार कर दीजिए।
हे राधारमण!
आप ही इस जगत के कारण हैं,
आप ही जीवन का आधार हैं।
आपके अतिरिक्त मेरा कोई नहीं…
कोई भी सहारा नहीं।
हे प्रभु!
आप त्रिभुवन के मंगलस्वरूप,
समस्त जगत के नाथ हैं।
यदि आप ही मेरी उपेक्षा कर देंगे,
तो मेरी गति क्या होगी?
मैंने सोच-विचार कर देखा है—
आपके सिवा मेरा उद्धार करने वाला कोई नहीं।

— श्रील नरोत्तम दास ठाकुर ✨

नयनं मधुरं हसितं मधुरम्। हृदयं मधुरं गमनं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 1 ।।हे कृष्ण! आपके होंठ मधुर हैं, आपका मुख मध...
14/05/2026

नयनं मधुरं हसितं मधुरम्। हृदयं मधुरं गमनं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 1 ।।

हे कृष्ण! आपके होंठ मधुर हैं, आपका मुख मधुर है, आपकी आंखें मधुर हैं, आपकी मुस्कान मधुर है, आपका हृदय मधुर है, आपकी चाल मधुर है, मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है ।।1।।

-श्रीमद् वल्लभाचार्य जी

परात्पर, सर्वशक्तिमान भगवान् के अनन्तान्त सगुण साकार अवतार स्वरूप हैं,किंतु चरम प्रेमानंद के प्राप्त करने की इच्छा रखने ...
13/05/2026

परात्पर, सर्वशक्तिमान भगवान् के अनन्तान्त सगुण साकार अवतार स्वरूप हैं,किंतु चरम प्रेमानंद के प्राप्त करने की इच्छा रखने वालों के लिये, सर्वाधिकमधुरतम अवतार स्वरूप
आनंदकंद-सच्चिदानन्द- अनन्तकोटी कन्दर्पलावण्ययुक्त
बृजेंद्रनन्दन श्रीकृष्णचंद्र ही हैं।

- #जगदगुरू_श्रीकृपालुजी_महाराज

प्रभो ! हमारी वाणी आपके मङ्गलमय गुणों का वर्णन करती रहे । हमारे कान आपकी रसमयी कथा में लगे रहें । हमारे हाथ आपकी सेवा मे...
11/05/2026

प्रभो ! हमारी वाणी आपके मङ्गलमय गुणों का वर्णन करती रहे । हमारे कान आपकी रसमयी कथा में लगे रहें । हमारे हाथ आपकी सेवा में और मन आपके चरण-कमलोंकी स्मृति में रम जायँ । यह सम्पूर्ण जगत् आपका निवास-स्थान है । हमारा मस्तक सबके सामने झुका रहे । संत आपके प्रत्यक्ष शरीर हैं । हमारी आँखें उनके दर्शन करती रहें ॥
( #श्रीमद्भागवतम-10/10/38)

श्री राधे राधे

❤️"जिस परम सत्य को महान योगी भी ध्यान में नहीं जान पाते, उस अद्वितीय ब्रह्म को यशोदा मैया ने बालक के रूप में खेलते हुए अ...
11/05/2026

❤️
"जिस परम सत्य को महान योगी भी ध्यान में नहीं जान पाते, उस अद्वितीय ब्रह्म को यशोदा मैया ने बालक के रूप में खेलते हुए अपनी गोद में पाया।"

#श्रीश्रीमद्भागवतम-दशम स्कंध

राधा कृष्ण प्राण मोर जुगल किशोर ।जीवने मरणे गति आर नाहि मोर ।भावार्थ: राधा-कृष्ण युगल किशोर ही मेरे प्राणस्वरूप हैं।इस ज...
09/05/2026

राधा कृष्ण प्राण मोर जुगल किशोर ।
जीवने मरणे गति आर नाहि मोर ।

भावार्थ: राधा-कृष्ण युगल किशोर ही मेरे प्राणस्वरूप हैं।
इस जीवन में उनके अतिरिक्त मेरी अन्य कोई गति (आश्रय) नहीं है।

— श्रील नरोत्तम दास ठाकुर

🌸 श्री राधे राधे 🌸

वो काला एक बांसुरी वाला,सुध बिसरा गया मोरी रे, सुध बिसरा गया मोरी ।माखन चोर वो नंदकिशोर जो,कर गयो मन की चोरी रे, सुध बिस...
07/05/2026

वो काला एक बांसुरी वाला,
सुध बिसरा गया मोरी रे, सुध बिसरा गया मोरी ।

माखन चोर वो नंदकिशोर जो,
कर गयो मन की चोरी रे, सुध बिसरा गया मोरी ॥

पनघट पे मोरी बईया मरोड़ी,
मैं बोली तो मेरी मटकी फोड़ी ।
पईया .पडू करूँ बीनती मैं पर,
माने ना वो एक मोरी रे, सुध बिसरा गया मोरी ॥

छुप गयो फिर एक तान सुना के,
कहाँ गयो एक बाण चला के ।
गोकुल ढूंढा मैंने मथुरी ढूंढी,
कोई नगरिया ना छोड़ी रे, सुध बिसरा गया मोरी ॥

#कृष्ण_भजन
श्री राधे राधे 🙏

एक बार अयोध्या जाओ, दो बार द्वारिका, तीन बार जाके त्रिवेणी में नहाओगे।चार बार चित्रकूट, नौ बार नासिक, बार-बार जाके बद्रि...
04/05/2026

एक बार अयोध्या जाओ, दो बार द्वारिका, तीन बार जाके त्रिवेणी में नहाओगे।

चार बार चित्रकूट, नौ बार नासिक, बार-बार जाके बद्रिनाथ घूम आओगे॥

कोटि बार काशी, केदारनाथ रामेश्वर, गया-जगन्नाथ, चाहे जहाँ जाओगे।

होंगे प्रत्यक्ष जहाँ दर्शन श्याम-श्यामा के, वृन्दावन सा कहीं आनन्द नहीं पाओगे॥


!!~!! जय-जय श्री राधे !!~!!

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