24/05/2026
संसार आकर्षित तो कर सकता है,
पर हृदय को तृप्त नहीं कर सकता।
माया कुछ क्षणों के लिए मन को बहला सकती है,
पर आत्मा की प्यास नहीं बुझा सकती।
यह चंचल मन अंततः उसी को खोजता है
जहाँ न छल हो, न स्वार्थ, केवल प्रेम हो।
और ऐसा निष्कलंक, मधुर और पूर्ण प्रेम
केवल श्री राधा-गोविंद के चरणों में ही मिलता है॥
-श्री राधा गोविंद