20/12/2025
॥ दोहा-युक्त कीर्तन ॥
दोहा १
भक्त पुकारे प्रेम से, द्रवित हुए भगवान।
साकार हुए निराकार, मिटा सकल अज्ञान॥
कीर्तन
भक्त हेतु हरि रूप बनाया रे…
ब्रह्मानंद मेरे मन भाया रे…
हरि बोल… हरि बोल…
श्याम सुंदर हरि बोल…
दोहा २
चरण कमल की धूलि से, कटे भव के फेर।
जिसने शरण गही प्रभु, उसका मिटा अंधेर॥
कीर्तन
तेरे चरण कमल बलिहारी रे…
जग से पार उतारी रे…
गिरधारी रे… गिरधारी रे…
गोवर्धन धारी रे…
दोहा ३
दर्शन बिनु नैन सूखे, व्याकुल तन-मन प्राण।
श्याम सूरतिया देखे बिनु, सूना सारा ज्ञान॥
कीर्तन
मुझे दे दर्शन गिरधारी रे…
नैन प्यासे श्याम तुम्हारे रे…
श्याम… श्याम…
सांवरा श्याम…
दोहा ४
श्याम रूप रस सिंधु है, डूबे संत सुजान।
फल की इच्छा त्याग कर, पाया परम विधान॥
कीर्तन
तेरी सांवरी सूरतिया पे वारी रे…
तन-मन-जीवन हारी रे…
समापन दोहा
नाम बिना न साधना, नाम बिना न पार।
हरि नाम रट ले प्राणी, यही जीवन सार॥
संकीर्तन
हरि नाम… हरि नाम…
सच्चा साथी हरि नाम…
॥ गिरधारी लाल की जय ॥ 🙏🦚
॥ श्रीश्याम सुंदर की जय ॥