https://gaurbrahmansamaj.com/ ब्राह्मण समाज दुनिया के सबसे पुराने संप्रदाय एवं जाति में से एक है। ... वेदों के अनुसार "ब्राह्मणों की उत्पत्ति" हिंदू धर्म के देवता "ब्रह्मा" से हुई थी वर्तमान समय में जितने भी ब्राह्मण समाज के लोग हैं वे सब भगवान ब्रह्मा के वंशज हैं। गौड़ ब्राह्मणों का नाम एक प्राचीन प्रांत के नाम पर पड़ा है। ब्राह्मणों को सम्पूर्ण भारतवर्ष में विभिन्न उपनामों से जाना जाता है –> दीक
्षित, शुक्ल, द्विवेदी, त्रिवेदी, चतुर्वेदी, खाण्डल विप्र, ऋषीश्वर, वशिष्ठ, कौशिक, भार्गव , भारद्वाज, सनाढ्य ब्राह्मण, राय ब्राह्मण, त्यागी , बैरागी वैष्णव ब्राह्मण, बाजपेयी, श्रीखण्ड,भातखण्डे अनाविल, देशस्थ, कोंकणस्थ , दैवदन्या, देवरुखे और करहाड़े, निषाद अयंगर, हेगडे, नम्बूदरीपाद, अयंगर एवं अय्यर, नियोगी, राव, दास, मिश्र, शाकद्वीपीय (मग), जोशी, आदि। एक प्राचीन प्रांत बंगदेश से लेकर अमरनाथ तक जो चिरकाल तक बिहार और बंगाल की राजधानी रहा है जो गौड़ नगर / गौड़ देश में निवेश करने वाले गौड़ ब्राहमण कहलाये | समस्त उत्तर भारतीय ब्राह्मण संयुक्त रुप से गौड़ कहलाते थे। परंतु लंका विजय के बाद, इन ब्राह्मणों में वर्ग या समूह स्थापित होने प्रारंभ हो गए। गौड़ ब्राहमण के पाँच भेदों में से एक खास गौड़ ब्राह्मण जिसे आदि गौड़ भी कहते हैं | ब्रह्मोत्पत्ति निबन्ध के निर्णय अध्याय मैं लिखा है कि जो वेदपाठी , तपस्वी ब्राह्मण सर्वप्रथम ब्रह्मक्षेत्र मैं पैदा हुए थे , वेद के धारण करने वाले तथा सदाचार प्रवर्तक थे | ये ही आदि गौड़ ब्राहमण है | गुरु बटेश्वर मुनि को शिष्यों का दक्षिणा अस्वीकार तब महाराजा जनमेजय ने मुनि और शिष्यों को एक-एक चिट्टी एक-एक पान का बीड़ा दिया | हर एक चिट्ठी मैं एक-एक ग्राम दान का संकल्प था जब पान खोलकर देखे गए तब यह गुप्त दान का भेद खुला। अंत मैं यही हुआ की जो ग्राम जिस – जिस को मिला वह उसी में बसा और जिस ग्राम या नगर मैं जो बसा उसी पर उसका शाशन हुआ। गौड़ ब्राह्मणों की उप-शाखाएं - गौड़ ब्राह्मण | गौड़ बामन | आदि-गौड़ | श्री-गौड़ | आदि-श्री गौड़ | गुर्जर गौड़ https://gaurbrahmansamaj.com/brahman-shreni/ https://gaurbrahmansamaj.com/genealogy-of-brahmans/ https://gaurbrahmansamaj.com/