31/10/2025
कन्स वध लीला
चारों ओर मृत्यु की बिभिशिका लखाई परे
काल प्रतिबिंब निज निकट निहारो है।
कहत मुकंद निज सिंहासन खडो है गयो
मारो मारो शब्द भय कांपत पुकारॉ है।
ताहि समय अट्टहास करके हँसे है हरी,
मामा नेक ठहर ऐसो बचन उचारो है।
उछरि छलांग दे झटक के पटक लियो,
केशि गहि कंस कौ धरा पै धरि मारो है ।
कंस वध महोत्सव की अनेकों शुभकामनाएं।