haweli gopi vlogs

haweli gopi vlogs संत सेवा , दर्शन , गौ सेवा ,वानर सेवा ।।

🛕*. *【आप भी ब्रज चौरासी कोस यात्रा एवं ब्रजवास की  तैयारी कर लीजिये जी】**👉रजिस्ट्रेशन आरम्भ हो गए हैं जी* *🚗【बृज चौरासी ...
04/01/2026

🛕*. *【आप भी ब्रज चौरासी कोस यात्रा एवं ब्रजवास की तैयारी कर लीजिये जी】*
*👉रजिस्ट्रेशन आरम्भ हो गए हैं जी*
*🚗【बृज चौरासी कोस परिक्रमा एवं दर्शन🚎】*

*(दिनांक 22 फरवरी से 28 फरवरी 2026)*

*🚘(यात्रा कार द्वारा निकाली जाएगी)*🚖
*【एक यात्री का सम्पूर्ण खर्च-15100/*】
♾️♾️♾️♾️♾️♾️♾️♾️♾️♾️♾️
*1-यात्रा नित्य सुबह वृन्दावन से आरम्भ होगी एवं रात्रि विश्राम भी वृन्दावन में ही करेगी*
*2-विश्राम का प्रबंध अतिथिगृह में वातानुकूलित कमरे डबलबेड एवं अटैच्ड बाथरूम सहित में होगा*

*3-अधिकतर कार 7 सीटर एवं 5 सीटर होंगी जिनमे ड्राइवर के अतिरिक्त सीट के अनुरूप ही यात्री बैठेंगे ताकि यात्रा आरामदायक हो सके*
*4-सुबह बालभोग,दोपहर का भोजन एवं रात्रिभोज बिल्कुल शुद्ध सात्विक एवं शाकाहारी होगा*
*5-सभी दर्शनीय,आध्यात्मिक एवं पौराणिक महत्व के स्थलों का वर्णन साथ में चल रहे ब्रजवासियों द्वारा किया जाएगा*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*✍️【कृपया यह पोस्ट अपने सभी मित्रों/रिश्तेदारों व ग्रुपो में शेयर कर दीजिए जी】👉*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*【प्रमुख दर्शन स्थल】*

*यमुना तलहटी क्षेत्र- भांडीरवन,वंशीवट,बेलवन,मानसरोवर, भतरोड बिहारी, पागलबाबा, अक्रूर घाट,बिरला मन्दिर,*
*(गोकुल महावन क्षेत्र-*)
*गोकुल,क्षीरसागर, ब्रह्मांड घाट, नंदी आनंदी,रमणरेती, नंदमहल,चौरासी खम्भा,रावल गांव,लोहवन दाऊजी मन्दिर*

*मथुरा क्षेत्र---*

*गोकर्ण महादेव,विश्राम घाट,पिप्पलेश्वर, द्वारिकाधीश, ध्रुव टीला, मधुवन,तालवन,कुमुदवन, शांतनु विहारी,कपिलमुनि आश्रम,श्रीकृष्ण जन्मस्थान, भूतेश्वर महादेव, पोतरा कुंड,केशवदेव,*

*(गोवर्धन क्षेत्र)*---

*बहुलावन,मुखराई, गोवर्धन, कुसुम सरोवर, चन्द्र सरोवर,मानसी गंगा,चकलेश्वर, दानघाटी,गोविंद कुंड,अप्सरा कुंड,पूंछरी ,जतीपुरा, मुखारबिंद, उद्धवकुण्ड,राधा कुंड,श्याम कुंड,महाप्रभु बैठक,*

*(चारधाम मन्दिर कामवन क्षेत्र)*

*चारधाम मन्दिर,जल महल,केदारनाथ, आदि बद्री,गंगोत्री, जमनोत्री, पशुपतिनाथ, चरण पहाड़ी,कामवन,मदनमोहन जी,गोपीनाथ जी,विमल कुंड,गया कुंड,भोजन थाली,कदमखण्डी,*

*(बरसाना क्षेत्र)*

*बरसाना,बृषभान कुंड,सांकरी खोर,गहवर वन,मोर कुटी,मान मन्दिर,प्रेम सरोवर,संकेत वन,नंदगाँव,पावन सरोवर,मोती कुंड,हीरा कुंड,देह कुंड,भजन कुटी,कोकिला वन,ज्ञान गुदड़ी*

*(वृंदावन क्षेत्र)*

*रंग जी मन्दिर,गोविंददेब मन्दिर,निधिवन,राधारमण,गोपेश्वर महादेव,केशीघाट,राधाबल्लभ ,बांकेबिहारी, चीरघाट,कालीदह,इस्कॉन मंदिर,प्रेम मन्दिर,वैष्णोदेवी*
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁
🎷🎷🎷🎷🎷🎷🎷🎷
*(गोपी रसोई वृंदावन -धार्मिक प्रसारण)*
https://www.facebook.com/गोपी-रसोई-वृन्दावन-108855563833113/
*अपने फोन पर नित्य धार्मिक ,आध्यात्मिक व ज्ञानवर्धक पोस्ट प्राप्त करने के लिए इस नम्बर 7983669621 को अपने फोन में सेव करें*
*अपना नाम व निवास स्थान व्हाट्सएप करें*
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
*(आगामी ब्रज चौरासी कोस यात्रा )*

*दिनाँक -22 फरवरी से 28 फरवरी 2026*

*(यात्रा कार द्वारा निकाली जाएगी)*
*रजिस्ट्रेशन आरम्भ-प्रति यात्री सम्पूर्ण खर्च-15100/*
*जल्दी रजिस्ट्रेशन कराएं-7983669621 पर काल या व्हाट्सएप करें*
*रजिस्ट्रेशन आरम्भ हो गए हैं जी।।बिना रजिस्ट्रेशन के कोई यात्री शामिल नही किया जाएगा*
*सम्पर्क सूत्र-कॉल एवं व्हाट्सएप-7983669621*

03/11/2024

🙏💕 मेरे प्रिया प्रियतम श्री राधेश्याम 🪷 जी के आज दिनांक 3-11-2024 के मंगला आरती दर्शन 🪷 जय जय श्री राधेश्याम 🙇‍♂️🌸🌷🪷💐💕🙏

28/10/2024

🪀🪀🪀🪀🪀 *【रमा एकादशी व्रत कथा】*
*कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को रमा एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह अत्यंत शुभ है, क्योंकि यह मोक्ष एवं शुभ फल प्रदान करने वाली है। श्रीकृष्ण जी ने इस कथा का वर्णन युधिष्ठिर जी के समक्ष किया था, आज हम वही कथा आप लोगों के लिए लेकर आए हैं-*

*पौराणिक समय में मुचुकुंद नामक एक महान राजा राज किया करते थे। बड़े-बड़े देवता जैसे इंद्र, वरुण, चंद्रदेव, यमराज, इत्यादि उनके मित्र थे।*

*राजा मुचुकुंद अत्यंत धर्म परायण, सत्यनिष्ठ, और भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे। धर्म का पालन करने वाले इस राजा के राज्य में चारों ओर सुख और समृद्धि का वास था। उनकी एक चंद्रभागा नामक पुत्री थी, जो कि एक पवित्र नदी थी, राजा मुचुकुंद ने उसका विवाह राजा चंद्रसेन के पुत्र शोभना के साथ कर दिया।*

*कुछ समय बाद शोभना अपने ससुराल आया, उस समय चंद्रभागा भी अपने मायके में ही थी। शोभना को लगा था कि उसके इस प्रकार आने से उसकी पत्नी चंद्रभागा प्रसन्न हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके विपरीत वह अपने पति को देखकर अत्यंत चिंतित हो गई।*

*अब शोभना को भी आश्चर्य हुआ कि चंद्रभागा उसे देखकर इस प्रकार चिंतित क्यों हो गई। चंद्रभागा की चिंता का कराण यह था कि अगले दिन ही एकादशी थी और नियम के अनुसार, राजा मुचुकुंद के राज्य में सभी प्रजागणों के लिए इस व्रत का पालन करना अनिवार्य था। यहां तक कि उनके राज्य में हाथी, घोड़े समेत सभी पशुओं को भी भोजन नहीं दिया जाता था।*

*चंद्रभागा जानती थी कि उसके पिताजी इस नियम के प्रति अत्यंत कठोर हैं, और साथ ही उसकी विडंबना यह भी थी कि उसका पति शोभना शारीरिक रूप से काफी कमज़ोर था, और भोजन के बिना नहीं रह सकता था। शोभना के लिए एकादशी व्रत का पालन करना असंभव था। चंद्रभागा ने अपने पति को अपनी व्यथा का कारण बताते हुए कहा कि, “हे स्वामी मेरे पिता एकादशी व्रत के पालन को लेकर बहुत कठोर हैं, दशमी के दिन ही पूरे राज्य में ढोल-नगाड़े बजाकर इस बात की घोषणा कर दी जाएगी कि सभी के लिए इस व्रत को करना अनिवार्य है। मुझे पता है कि आप भोजन के बिना नहीं रह सकते, इसलिए आप किसी और जगह चले जाएं।”*

*अपनी पत्नी की बात सुनकर शोभना ने बोला कि, “अब मैं भी इस व्रत का पालन ज़रूर करूंगा, चाहे इसका परिणाम कुछ भी हो, ईश्वर की इच्छा से जो कुछ भी होगा, अच्छा होगा।” और इस प्रकार शोभना ने अपने मन में एकादशी व्रत को करने का प्रण ले लिया और एकादशी के दिन व्रत का विधिपूर्वक पालन किया। दिन ढलने तक अत्यंत दुर्बल होने के कारण शोभना का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा और रात्रि समाप्त होने तक शोभना ने अपने प्राण त्याग दिए।*

*जब राजा मुचुकुंद को इस बात का पता चला तो उन्होंने शोभना का अंतिम संस्कार कर दिया, इस प्रकार अपने पति के देहांत के पश्चात् चंद्रभागा अपने पिता के महल में ही रहने लगी।*

*चूंकि शोभना की मृत्यु एकादशी व्रत का पालन करते हुए हुई थी, इसलिए उससे प्राप्त पुण्यफल स्वरूप वह अगले जन्म में मंदराचल पर्वत की चोटी के राज्य का शासक बना। यह कोई सामान्य नगर नहीं था, वह देवनगरी के समान था। उसकी दीवारों पर रत्न जड़े हुए थे, राजा शोभना रत्न जड़ित सिंहासन पर विराजमान होकर इंद्रदेव के ही समान प्रतीत होते थे।*

*कथा यहीं समाप्त नहीं हुई, राजा शोभना को राजपाट तो मिला, लेकिन वह स्थाई नहीं था, चलिए जानते हैं कि किस प्रकार राजा का राजपाट स्थाई हुआ-*

*एक बार राजा शोभना के राज्य में एक बार सोमशर्मा नामक ब्राह्मण आया और राजा को देखकर वह अत्यंत चकित हो गया।*
*उसके चकित होने का कारण यह था कि वह राजा मुचुकुंद के राज्य से आ रहा था और वह शोभना को पहचान गया था। राजा शोभना ने भी उसका आदर-सत्कार किया, इसके पश्चात् ब्राह्मण ने जब शोभना को उसके पूर्व जन्म के बारे में बताया तो उन्होंने अपनी पत्नी चंद्रभागा के बारे में पूछा।*

*सोमशर्मा ने उत्तर देते हुए कहा, हे राजन, वहां सब कुशल मंगल है। लेकिन आपको इस राज्य की प्राप्ति किस प्रकार हुई। इसके बाद राजा शोभना ने बताया कि, मुझे इसकी प्राप्ति एकादशी व्रत के फलस्वरूप हुई है। लेकिन मैंने यह व्रत बिना किसी श्रद्धा के किया था, इसलिए मेरा यह राज्य अस्थायी है। यदि आप मुचुकुंद और चंद्रभागा से सब वृत्तांत कहें तो यह स्थिर हो सकता है। ऐसा सुनकर उस श्रेष्ठ ब्राह्मण ने अपने नगर लौटकर चंद्रभागा और राजा मुचुकुंद को सारा वृतांत बताया।*

*ब्राह्मण के वचन सुनकर चंद्रभागा बड़ी प्रसन्न हुई और बोली, कि हे ब्राह्मण! ये सब बातें आपने प्रत्यक्ष देखी हैं या स्वप्न की बातें कर रहे हैं।*

*ब्राह्मण कहने लगा कि हे पुत्री ! मैं स्वयं तुम्हारे पति से मिलकर आ रहा हूँ। उनका नगर देवताओं के नगर से भी अधिक सुंदर है।*

*चंद्रभागा ने अपने पिता से आशीर्वाद लिया और ब्राह्मण से साथ अपने पति के नगर को स्थाई करने का उपाय खोजने उस सुंदर नगर की ओर निकल पड़ी। पर्वत की तलहटी में वामदेव ऋषि का आश्रम था। उन्होंने ऋषि को प्रणाम किया और अपनी व्यथा कह सुनाई। उसकी व्यथा सुनकर ऋषि वामदेव ने वेदों से कुछ मंत्रों का उच्चारण किया और उसका अर्घ्यजल चंद्रभागा पर छिड़क दिया।*

*उस महान ऋषि के अनुष्ठानों के प्रभाव से चंद्रभागा को अनेक एकादशियों का पुण्यफल प्राप्त हुआ और उसका शरीर दिव्य बन गया। चंद्रभागा अपने पति के नगर में पहुंची और राजा शोभना उसे देखकर हर्षित हो गए। अपने पति से मिलकर चंद्रभागा ने अपने एकादशी का अर्जित किया हुआ पुण्यफल अपने पति को दे दिया। साथ ही उसने कहा कि हे स्वामी मैं 8 वर्ष की आयु से इस व्रत का श्रद्धापूर्वक पालन कर रही हूं, और इसका पुण्यफल मैं आपको प्रदान करती हूं, जिससे आपका यह राजपाट स्थाई हो जाए। इससे राजा शोभना अत्यंत प्रसन्न हुए और दीर्घकाल तक उन्होंने सुखपूर्वक शासन किया।*

*जो व्यक्ति इस कथा का श्रवण करता है वह पापों से मुक्त हो जाता है और पुण्य का भागी बनता है।*

🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜

*रमा एकादशी व्रत -आज है जी*

*👉आप भी गोसेवा में शामिल हो जाईये जी*

(सेवा का संकल्प हेतु आपका नाम जन्मस्थान व गोत्र लिखें)

*1-एक बड़ी गाड़ी हरे चारे की सेवा -21 मन -2700/*

*2-एक छोटी गाड़ी हरे चारे की सेवा-11 मन -1400/*

*3-एक तांगा हरे चारे की सेवा-5 मन -650/*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*गोपी.रसोई हेतु बैंक डिटेल*

*Name- VANDNA SHARMA*
*Punjab National Bank*
*Account Number- 4902000100029612*
*IFSC - PUNB0490200*
*Address - purana Sahar vrindavan*

*🛟पेटीएम /गूगल पे /फोन पे -7983669621🛟*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️

📢📢*पुत्री का विवाह करने से पूर्व वर में 7 गुण देखें*- *आदौ कुलं परीक्षेत ततो विद्यां ततो वयं शीलं धनं ततो रूपं देशं पश्च...
04/09/2024

📢📢*पुत्री का विवाह करने से पूर्व वर में 7 गुण देखें*

- *आदौ कुलं परीक्षेत ततो विद्यां ततो वयं शीलं धनं ततो रूपं देशं पश्चाद्विवाहयेत् ||*

*कन्या वरयेत रूपं, माता वित्तं, पिता श्रुतम्, बान्धवा: कुलमिच्छन्ति, मिष्टान्नमितरे जना: ||*

*1: 👉 कुल ---लड़के के माता-पिता दादा-दादी नाना-नानी कैसे थे कहाँ के थे?*

*2: 👉 योग्यता ---लड़के की शिक्षा क्या है?*
*अपने परिवार का पालन करने की योग्यता रखता है या नहीं!*

*3:👉अवस्था ---लड़के की आयु में बहुत अन्तर तो नहीं है!*

*4:👉शील-- बात-बात में पिनकता तो नही अर्थात मुंह फुलाने वाला नक चढा़ तो नही है धीर-गम्भीर प्रसन्न-चित्त व्यवहारिक मैत्री-शील वाला हो।*

*5: 👉धन --बढ़ाने की प्रवृति है या पैसा पानी की तरह बहाता तो नहीं है!*
*6: 👉रूप---- लड़के का रंग-रूप-कद-काठी बेटी अनुकूल है कि नहीं!*
*7: 👉 देश ,--किस देश, प्रान्त, नगर, सेक्टर, में रहता है और वहां का रहन सहन कैसा है।।।।।।।।*

*जबकि आजकल ---कन्या --रूप, माता ---धन, पिता ---- भौकाल अर्थात वर के आगे पीछे 10 गाडियों का काफिला वाला, कुटुंब जन ---कुल, आमन्त्रित जन परोसे जाने वाले ---पकवान देखते हैं।*
🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘

।।कृपया पढ़कर अपने मित्रों व रिश्तेदारों में शेयर कर दीजिये जी।।
*(कार्तिक मास -बृज चौरासी कोस यात्रा एवं वृन्दावन वास)*

*👉【गोपी रसोई वृंदावन के आयोजन में कार्तिक माह में निकाली जाने वाली चौरासी कोस यात्रा में जल्दी ही अपना रजिस्ट्रेशन करा लीजिये】*
*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️

*1👉-दिनाँक 09 नवम्बर से 15 नवम्बर 2024*
*2👉-दिनाँक 11 दिसम्बर से 17 दिसम्बर 2024*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*👉वातानुकूलित आवास,डबलबेड कमरे ,शुद्ध भोजन एवं कार से चौरासी कोस यात्रा*
*👉(सम्पूर्ण खर्च-15000/*)

*👉रजिस्ट्रेशन आरम्भ-सम्पर्क सूत्र-काल /व्हाट्सएप-7983669621*
*(स्थान सीमित हैं जी)*
〰️〰️🥉🥉〰️〰️〰️🥉🥉〰️〰️〰️

🔥🔥 *【आज सोमवती अमावस्या है जी।आईये पढ़ते हैं सोमवती अमावस्या व्रत कथा】**एक समय की बात है किसी गांव में एक ब्राह्मण रहता थ...
02/09/2024

🔥🔥 *【आज सोमवती अमावस्या है जी।आईये पढ़ते हैं सोमवती अमावस्या व्रत कथा】*

*एक समय की बात है किसी गांव में एक ब्राह्मण रहता था जिसकी एक कन्या थी। सर्वगुण समपन्न होने के बाद भी उस कन्या का विवाह नहीं हो पा रहा था। एक बार एक साधु महाराज ब्राह्मण के घर आये और कन्या के स्वभाव से काफी प्रसन्न हुआ। उन्होंने उस कन्या को लंबी आयु का वरदान भी दिया।*

*तब ब्राह्मण ने साधु से अपनी कन्या के विवाह में आ रही बाधाओं का समाधान जानना चाहा। साधु ने कहा कि कन्या के हाथ में विवाह रेखा ही नहीं है।*
*तब साधु ने उपाय बताते हुए कहा कि पास के गांव में एक सोना नाम की धोबिन अपने परिवार संग रहती है। अगर आपकी कन्या उस धोबिन की सेवा करे और खुश होकर धोबिन उसे अपना सुहाग दे तब आपकी कन्या का विवाह हो सकता है।*

*साधु महाराज के कहे अनुसार कन्या धोबिन के घर जाकर उसकी सेवा करने लगी। वो रोज सुबह सूर्योदय से पहले धोबिन के घर जाती और वहां सारा काम कर उसके उठने से पहले ही घर वापस आ जाती। घर का सारा काम हुआ देख धोबिन को बड़ी खुशी मिलती। क्योंकि उसे लगता था कि ये सारा काम उसकी बहु कर रही है।*

*एक दिन उसने अपनी बहू से कहा कि तुम कितनी अच्छी हो सुबह जल्दी उठकर ही सारा काम निपटा देती हो।*

*तब बहू ने उससे कहा कि नहीं है मैं तो सोती रहती हूं। मुझे लगा कि आप ही ये सारा काम कर रही हैं। तब दोनों के मन में सवाल उठा कि आखिर कौन ऐसा कर रहा है?*

*अगले दिन यह जानने के लिए दोनों इंतजार करने लगी तभी उन्होंने देखा कि एक कन्या घर में मुंह छिपाकर आती है और सारा काम करती है और चुपचाप चली जाती है।तब धोबिन ने उससे पूछा कि तुम कौन हो? और ऐसा क्यों कर रही हो?*

*कन्या ने धोबिन को सारी कहानी सुनाई। इस पर सोना कन्या की मदद करने के लिए तैयार हो गई।*

*अगला दिन सोमवती अमावस्या का दिन था और सोना को इस बात की जानकारी थी कि अगर उसने कन्या को अपना सुहाग दिया तो उसके पति की मृत्यु हो जाएगी, लेकिन फिर भी उसने व्रत भी रखा और कन्या के घर जाकर उसकी मांग में अपना सिंदूर लगा दिया।*

*ऐसा करते ही धोबिन के पति की मृत्यु हो गई। घर लौटते वक्त सोना ने पीपल के पेड़ की परिक्रमा की और अपना व्रत पूरा किया। जब वह घर लौटी तो उसने देखा कि उसका पति जिंदा हो गया। कहते हैं तभी से सोमवती अमावस्या व्रत का महत्व काफी बढ़ गया*
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁

*व्रत एवं पूजा विधि*

*सोमवती अमावस्या के दिनब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें।*
*इस दिन गंगा स्नान जरूर करना चाहिए। यदि आप नदी में स्नान नहीं कर सकते हैं तो घर में ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल डालकर नहा लें।*

*स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें।*
*फिर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।*
*संभव हो तो इस दिन शिव मंदिर भी जरूर जाएं।*
*इस दिन अपनी क्षमतानुसार दान भी जरूर करें।*

*पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध भी कर सकते हैं।*

*इस दिन विवाहित स्त्रियां पीपल के पेड़ की पूजा करती हैं।*

*पीपल के वृक्ष पर दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन इत्यादि चीजें चढ़ाई जाती हैं और वृक्ष के चारों ओर 108 बार धागा लपेट कर पेड़ की परिक्रमा की जाती है।*

*कुछ अन्य परम्पराओं में इस दिन भंवरी देने का भी विधान होता है।*
*धान, पान और खड़ी हल्दी को मिलाकर उसे तुलसी के पेड़ को चढाया जाता है।*
🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘

।।कृपया पढ़कर अपने मित्रों व रिश्तेदारों में शेयर कर दीजिये जी।।
*(कार्तिक मास -बृज चौरासी कोस यात्रा एवं वृन्दावन वास)*

*👉【गोपी रसोई वृंदावन के आयोजन में कार्तिक माह में निकाली जाने वाली चौरासी कोस यात्रा में जल्दी ही अपना रजिस्ट्रेशन करा लीजिये】*
*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️

*1👉-दिनाँक 09 नवम्बर से 15 नवम्बर 2024*
*2👉-दिनाँक 11 दिसम्बर से 17 दिसम्बर 2024*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*👉वातानुकूलित आवास,डबलबेड कमरे ,शुद्ध भोजन एवं कार से चौरासी कोस यात्रा*
*👉(सम्पूर्ण खर्च-15000/*)

*👉रजिस्ट्रेशन आरम्भ-सम्पर्क सूत्र-काल /व्हाट्सएप-7983669621*
*(स्थान सीमित हैं जी)*
〰️〰️🥉🥉〰️〰️〰️🥉🥉〰️〰️〰️

🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥*【कल सोमवती अमावस्या है जी।आईये पढ़ते हैं सोमवती अमावस्या व्रत कथा】**एक समय की बात है किसी गांव में एक ब्राह्म...
01/09/2024

🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥

*【कल सोमवती अमावस्या है जी।आईये पढ़ते हैं सोमवती अमावस्या व्रत कथा】*

*एक समय की बात है किसी गांव में एक ब्राह्मण रहता था जिसकी एक कन्या थी। सर्वगुण समपन्न होने के बाद भी उस कन्या का विवाह नहीं हो पा रहा था। एक बार एक साधु महाराज ब्राह्मण के घर आये और कन्या के स्वभाव से काफी प्रसन्न हुआ। उन्होंने उस कन्या को लंबी आयु का वरदान भी दिया।*

*तब ब्राह्मण ने साधु से अपनी कन्या के विवाह में आ रही बाधाओं का समाधान जानना चाहा। साधु ने कहा कि कन्या के हाथ में विवाह रेखा ही नहीं है।*
*तब साधु ने उपाय बताते हुए कहा कि पास के गांव में एक सोना नाम की धोबिन अपने परिवार संग रहती है। अगर आपकी कन्या उस धोबिन की सेवा करे और खुश होकर धोबिन उसे अपना सुहाग दे तब आपकी कन्या का विवाह हो सकता है।*

*साधु महाराज के कहे अनुसार कन्या धोबिन के घर जाकर उसकी सेवा करने लगी। वो रोज सुबह सूर्योदय से पहले धोबिन के घर जाती और वहां सारा काम कर उसके उठने से पहले ही घर वापस आ जाती। घर का सारा काम हुआ देख धोबिन को बड़ी खुशी मिलती। क्योंकि उसे लगता था कि ये सारा काम उसकी बहु कर रही है।*

*एक दिन उसने अपनी बहू से कहा कि तुम कितनी अच्छी हो सुबह जल्दी उठकर ही सारा काम निपटा देती हो।*

*तब बहू ने उससे कहा कि नहीं है मैं तो सोती रहती हूं। मुझे लगा कि आप ही ये सारा काम कर रही हैं। तब दोनों के मन में सवाल उठा कि आखिर कौन ऐसा कर रहा है?*

*अगले दिन यह जानने के लिए दोनों इंतजार करने लगी तभी उन्होंने देखा कि एक कन्या घर में मुंह छिपाकर आती है और सारा काम करती है और चुपचाप चली जाती है।तब धोबिन ने उससे पूछा कि तुम कौन हो? और ऐसा क्यों कर रही हो?*

*कन्या ने धोबिन को सारी कहानी सुनाई। इस पर सोना कन्या की मदद करने के लिए तैयार हो गई।*

*अगला दिन सोमवती अमावस्या का दिन था और सोना को इस बात की जानकारी थी कि अगर उसने कन्या को अपना सुहाग दिया तो उसके पति की मृत्यु हो जाएगी, लेकिन फिर भी उसने व्रत भी रखा और कन्या के घर जाकर उसकी मांग में अपना सिंदूर लगा दिया।*

*ऐसा करते ही धोबिन के पति की मृत्यु हो गई। घर लौटते वक्त सोना ने पीपल के पेड़ की परिक्रमा की और अपना व्रत पूरा किया। जब वह घर लौटी तो उसने देखा कि उसका पति जिंदा हो गया। कहते हैं तभी से सोमवती अमावस्या व्रत का महत्व काफी बढ़ गया*
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁

*व्रत एवं पूजा विधि*

*सोमवती अमावस्या के दिनब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें।*
*इस दिन गंगा स्नान जरूर करना चाहिए। यदि आप नदी में स्नान नहीं कर सकते हैं तो घर में ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल डालकर नहा लें।*

*स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें।*
*फिर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।*
*संभव हो तो इस दिन शिव मंदिर भी जरूर जाएं।*
*इस दिन अपनी क्षमतानुसार दान भी जरूर करें।*

*पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध भी कर सकते हैं।*

*इस दिन विवाहित स्त्रियां पीपल के पेड़ की पूजा करती हैं।*

*पीपल के वृक्ष पर दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन इत्यादि चीजें चढ़ाई जाती हैं और वृक्ष के चारों ओर 108 बार धागा लपेट कर पेड़ की परिक्रमा की जाती है।*

*कुछ अन्य परम्पराओं में इस दिन भंवरी देने का भी विधान होता है।*
*धान, पान और खड़ी हल्दी को मिलाकर उसे तुलसी के पेड़ को चढाया जाता है।*
🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘

।।कृपया पढ़कर अपने मित्रों व रिश्तेदारों में शेयर कर दीजिये जी।।
*(कार्तिक मास -बृज चौरासी कोस यात्रा एवं वृन्दावन वास)*

*👉【गोपी रसोई वृंदावन के आयोजन में कार्तिक माह में निकाली जाने वाली चौरासी कोस यात्रा में जल्दी ही अपना रजिस्ट्रेशन करा लीजिये】*
*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️

*1👉-दिनाँक 09 नवम्बर से 15 नवम्बर 2024*
*2👉-दिनाँक 11 दिसम्बर से 17 दिसम्बर 2024*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*👉वातानुकूलित आवास,डबलबेड कमरे ,शुद्ध भोजन एवं कार से चौरासी कोस यात्रा*
*👉(सम्पूर्ण खर्च-15000/*)

*👉रजिस्ट्रेशन आरम्भ-सम्पर्क सूत्र-काल /व्हाट्सएप-7983669621*
*(स्थान सीमित हैं जी)*
〰️〰️🥉🥉〰️〰️〰️🥉🥉〰️〰️〰️

*राधे राधे जी*             *👉आज कान्हा जी की छठी पूजन है जी**🍁कढ़ी-चावल  प्रसाद की सेवा है जी🍁*〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️🏵️🏵️...
31/08/2024

*राधे राधे जी*

*👉आज कान्हा जी की छठी पूजन है जी*

*🍁कढ़ी-चावल प्रसाद की सेवा है जी🍁*

〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️

*(भगवान बालगोपाल का छठी पूजन* )

*👉माता देवकी के यहां मथुरा में आज होगा छठी पूजन*

*👉यशोदा मैया के यहां गोकुल और नंदगांव में कल 1 सितंबर को होगा छठी पूजन*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*हिंदू धर्म में जब बच्चे का जन्म होने के 6 दिन बाद छठी का पर्व मनाया जाता है. इस दिन बच्चे को7 स्नान कराने के बाद नए कपड़े पहनाए जाते हैं. इसके बाद पूरे विधि विधान से पूजा पाठ किया जाता है. इस दिन षष्ठी देवी की विधि विधान से पूजा की जाती है और अच्छी सेहत की कामना की जाती है*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*विधि*

*👉श्रीकृष्ण की छठी पूजन के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए*

*👉चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर प्रभु (गोपाल जी) को विराजमान करें*

*👉इसके बाद लड्डू गोपाल का पंचामृत से स्नान करें और नए वस्त्र पहनाकर स्थापित करें*

*👉इसके बाद लड्डू गोपाल को रोली या पीले चंदन का तिलक करें. साथ ही फूल माला अर्पित करें और दीपक जलाकर आरती करें*

*👉कान्हाजी को माखन मिश्री के साथ कढ़ी चावल का भोग लगाएं. उसके बाद सभी में प्रसाद का वितरण करें*

*👉आज कढ़ी चावल एवं बच्चों के खिलौने दान करें*
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁
*छठी मैया का पूजन मंत्र एवं स्तोत्र*

नमो देव्यै महादेव्यै सिद्ध्यै शान्त्यै नमो नम:।
शुभायै देवसेनायै षष्ठी देव्यै नमो नम: ।।
वरदायै पुत्रदायै धनदायै नमो नम:।
सुखदायै मोक्षदायै षष्ठी देव्यै नमो नम:।।
शक्ते: षष्ठांशरुपायै सिद्धायै च नमो नम:।
मायायै सिद्धयोगिन्यै षष्ठी देव्यै नमो नम:।।
पारायै पारदायै च षष्ठी देव्यै नमो नम:।
सारायै सारदायै च पारायै सर्व कर्मणाम।।
बालाधिष्ठात्री देव्यै च षष्ठी देव्यै नमो नम:।
कल्याणदायै कल्याण्यै फलदायै च कर्मणाम।
प्रत्यक्षायै च भक्तानां षष्ठी देव्यै नमो नम:।।
पूज्यायै स्कन्दकांतायै सर्वेषां सर्वकर्मसु।
देवरक्षणकारिण्यै षष्ठी देव्यै नमो नम:।।
शुद्ध सत्त्व स्वरुपायै वन्दितायै नृणां सदा।
हिंसा क्रोध वर्जितायै षष्ठी देव्यै नमो नम:।।
धनं देहि प्रियां देहि पुत्रं देहि सुरेश्वरि।
धर्मं देहि यशो देहि षष्ठी देव्यै नमो नम:।।
भूमिं देहि प्रजां देहि देहि विद्यां सुपूजिते।
कल्याणं च जयं देहि षष्ठी देव्यै नमो नम
🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘

।।कृपया पढ़कर अपने मित्रों व रिश्तेदारों में शेयर कर दीजिये जी।।
*(कार्तिक मास -बृज चौरासी कोस यात्रा एवं वृन्दावन वास)*

*👉【गोपी रसोई वृंदावन के आयोजन में कार्तिक माह में निकाली जाने वाली चौरासी कोस यात्रा में जल्दी ही अपना रजिस्ट्रेशन करा लीजिये】*
*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️

*1👉-दिनाँक 09 नवम्बर से 15 नवम्बर 2024*
*2👉-दिनाँक 11 दिसम्बर से 17 दिसम्बर 2024*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*👉वातानुकूलित आवास,डबलबेड कमरे ,शुद्ध भोजन एवं कार से चौरासी कोस यात्रा*
*👉(सम्पूर्ण खर्च-15000/*)

*👉रजिस्ट्रेशन आरम्भ-सम्पर्क सूत्र-काल /व्हाट्सएप-7983669621*
*(स्थान सीमित हैं जी)*
〰️〰️🥉🥉〰️〰️〰️🥉🥉〰️〰️〰️

🏵️*(संस्कार ! मायके के:)**पिता की तरफ से बेटी को अदभुत भेट*        *विवाह के बाद, पहली बार मायके आयी बेटी का स्वागत सप्त...
30/08/2024

🏵️*(संस्कार ! मायके के:)*

*पिता की तरफ से बेटी को अदभुत भेट*

*विवाह के बाद, पहली बार मायके आयी बेटी का स्वागत सप्ताह भर चला।*

*सम्पूर्ण सप्ताह भर बेटी को जो पसन्द है, वही सब किया गया, वापिस ससुराल जाते समय, पिता ने बेटी को एक अति सुगंधित अगरबत्ती का पुडा दिया, और कहा, की, बेटी तुम जब ससुराल में पूजा करने जाओगी तब यह अगरबत्ती जरूर जलाना,*

*माँ ने कहा, बिटिया प्रथम बार मायके से ससुराल जा रही है, तो ऐसे कोई अगरबत्ती जैसी चीज कोई देता है भला,*

*पिता ने झट से जेब मे हाथ डाला और जेब मे जितने भी रुपये थे वो सब बेटी को दे दिए,*

*ससुराल में पहुंचते ही सासु माँ ने बहु के मात-पिता ने बेटी को बिदाई में क्या दिया यह देखा, तो वह अगरबत्ती का पुडा भी दिखा, सासु माँ ने मुंह बना कर बहु को बोला कि , कल पूजा में यह अगरबत्ती लगा लेना,*

*सुबह जब बेटी पूजा करने बैठी तो वह अगरबत्ती का पुडा खोला, उसमे से एक चिट्ठी निकली,*

*_लिखा था....*

*!! "बेटा यह अगरबत्ती स्वतः जलती है, मगर संपूर्ण घर को सुगंधी कर देती है, इतना ही नही तो, आजु-बाजू के पूरे वातावरण को भी अपनी महक से सुगंधित एवम प्रफुल्लित कर देती है....!!*

*हो सकता ह की तूम कभी पति से कुछ समय के लिए रुठ जाओगी, या कभी अपने सास-ससुरजी से नाराज हो जाओगी, कभी देवर या ननद से भी रूठोगी, कभी तुम्हे किसी से बाते सुननी भी पड़ जाए, या फिर कभी अडोस-पड़ोसियों के वर्तन पर तुम्हारा दिल खट्टा हो जाये, तब तुम मेरी यह भेंट ध्यान में रखना,*

*_अगरबत्ती की तरह जलना, जैसे अगरबत्ती स्वयं जलते हुए पूरे घर और सम्पूर्ण परिसर को सुगंधित और प्रफुल्लित कर ऊर्जा से भरती है, ठीक उसी तरह तुम स्वतः सहन कर तेरे ससुराल को अपना मायका समझ कर सब को अपने व्यवहार और कर्म से सुगंधित और प्रफुल्लित करना...._*

*बेटी चिट्ठी पढ़कर फफकर रोने लगी, सासूमा लपककर आयी, पति और ससुरजी भी पूजा घर मे पहुंचे जहां बहु रो रही थी।*

*"अरे हाथ को चटका लग गया क्या?, ऐसा पति ने पूछा।*

*"क्या हुआ यह तो बताओ, ससुरजी बोले।*

*सासूमाँ आजुबाजुके सामान में कुछ है क्या यह देखने लगी,*

*तो उन्हें पिता द्वारा सुंदर अक्षरों में लिखी हुई चिठ्ठी नजर आयी, चिट्ठी पढ़ते ही उन्होंने बहु को गले से लगा लिया, और चिट्ठी ससुरजी के हाथों में दी, चश्मा ना पहने होने की वजह से, चिट्ठी बेटे को देकर पढ़ने के लिए कहा।*

*सारी बात समझते ही संपूर्ण घर स्तब्ध हो गया।*

*"सासु माँ बोली अरे, यह चिठ्ठी फ्रेम करानी ह, यह मेरी बहु को मिली हुई सबसे अनमोल भेंट है, पूजा घर के बाजू में में ही इसकी फ्रेम होनी चाहिए,*

*और फिर सदैव वह फ्रेम अपने शब्दों से, सम्पूर्ण घर, और अगल-बगल के वातावरण को अपने अर्थ से महकाती रही, अगरबत्ती का पुडा खत्म होने के बावजूद भी.......*

*इसे कहते है,....*

*!! संस्कार....... मायके के !*

*पोस्ट अच्छी लगी हो तो शेयर जरूर करें।।*

****************************************
🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘🚘

।।कृपया पढ़कर अपने मित्रों व रिश्तेदारों में शेयर कर दीजिये जी।।
*(कार्तिक मास -बृज चौरासी कोस यात्रा एवं वृन्दावन वास)*

*👉【गोपी रसोई वृंदावन के आयोजन में कार्तिक माह में निकाली जाने वाली चौरासी कोस यात्रा में जल्दी ही अपना रजिस्ट्रेशन करा लीजिये】*
*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️

*1👉-दिनाँक 09 नवम्बर से 15 नवम्बर 2024*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*👉वातानुकूलित आवास,डबलबेड कमरे ,शुद्ध भोजन एवं कार से चौरासी कोस यात्रा*
*👉(सम्पूर्ण खर्च-15000/*)

*👉रजिस्ट्रेशन आरम्भ-सम्पर्क सूत्र-काल /व्हाट्सएप-7983669621*
*(स्थान सीमित हैं जी)*
〰️〰️🥉🥉〰️〰️〰️🥉🥉〰️〰️〰️

29/08/2024

🚘🚘 *(ब्रज चौरासी कोस यात्रा-कार्तिक मास*)
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*जिन सज्जनों को दिनाँक 9 नवम्बर से 15 नवम्बर की यात्रा में शामिल होना है कृपया अति शीघ्र अपना रजिस्ट्रेशन करा लें ।इस यात्रा के स्थान पूरे होने वाले हैं।**
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*(आगमन एवं प्रस्थान)*

*अपनी रेलवे टिकिट इस प्रकार कराएं*

*आपको 9 नवम्बर को वृंदावन पहुंचना है।*

*यात्रा 15 नवम्बर शाम 7 बजे तक विश्राम हो जाएगी*
*आप प्रस्थान की टिकिट 15 की रात्रि 10 बजे के बाद या 16 को दोपहर तक जब भी ट्रेन उपलब्ध हो करा सकते हैं ।होटल का कमरा 16 नवम्बर दोपहर तक आपके पास रहेगा।*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*यात्रा में रजिस्ट्रेशन कैसे कराएं*
*प्रति यात्री 3100 /संस्था के खाते में या पेटीएम/g pay/फोन पे कर सकते है।*
(बाकी की राशि 12000/यही आकर नकद जमा करनी है जी)
*यात्रियों के नाम ,निवास स्थान व उम्र व्हाट्सएप करें।*

*पेमेंट की रसीद भेजने पर यहां से रजिस्ट्रेशन नम्बर या टोकन स्लिप भेज दी जाएगी*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*यात्रा में प्रदान होने वाली सुविधाएं*
*1-सभी यात्रियों को डबलबेड वातानुकूलित कमरे में आवास मिलेगा। बाथरूम अमेरिकन डिजाइन में हैं।।
*होटल में लिफ्ट की सुविधा उपलब्ध है*
*(कमरे एक दम नीट&क्लीन साफ सुथरे होते हैं।)*

2-सभी गाड़ी 7 सीटर इनोवा या अर्टिगा या स्कॉर्पियो होंगी।प्रत्येक गाड़ी में 5या 6 सवारी ही रहेंगी।।

3-अधिकतर मंदिरों में कार नजदीक तक पहुंच जाती है।पैदल चलना बिल्कुल कम ही होता है।
*4-यात्रा सातों दिन एक ही होटल में ठहरती है और सुबह प्रतिदिन एक निर्धारित रूट पर निकलकर व शाम को 7 बजे तक उसी होटल में वापिस लौट आती है।
5-हर स्थान/मन्दिर/सरोवर/ के बारे में जानकारी देने के लिए आचार्यगण व दान संकल्प कराने हेतु ब्राह्मणों की समुचित व्यवस्था।

*(स्वल्पाहार एवं भोजन आदि)*

5-सुबह की चाय 6 बजे व नाश्ता 8 बजे से 8.30 बजे तक।
9 बजे सुबह यात्रा आरम्भ -1 बजे दोपहर का भोजन एवं चाय कॉफी ।
शाम को वापिस लौट कर चाय कॉफी एवं रात्रि 8 बजे भोजन ।
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*हम अपनी ओर से बहुत आरामदायक यात्रा कराते हैं जी*
*फिर भी कोई असुविधा होने पर दूर करने का समुचित प्रयास करते हैं।*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*गोपी रसोई सेवा संस्थान वृंदावन*
*7983669621*

Address

Vrindavan
Mathura

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when haweli gopi vlogs posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category