Fight for the truth

Fight for the truth जो नकल करेगा ,
वह मार खायेगा ।
- बाबा जयगुरुदेव

जयगुरूदेव प्रेमियों।आज संगत की हालात पर कुछ बात करने आया हूं। इस दिल के टसन का जज़्बात रखने आया हूं।ये उदासी का आलम क्या...
06/07/2023

जयगुरूदेव प्रेमियों।

आज संगत की हालात पर कुछ बात करने आया हूं।
इस दिल के टसन का जज़्बात रखने आया हूं।
ये उदासी का आलम क्या तेरी तरफ नहीं है मेरे दोस्त
बिखरने पर तुमसे कुछ सवालात करने आया हूं।।

परम पूज्य बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने एक कहानी सुनाई है; शिकार की तलाश मे एक राजा जंगल की ओर जा रहा था , साथ मे उसका प्रिय सलाहकार मंत्री भी मौजूद था ! जंगल के एक ओर घास-फूस की एक झोपड़ी बनी थी, जहाँ एक महात्मा जी संसारी वैभव को त्याग कर, राम-नाम की लौ मे ध्यान-मग्न थे ! उनके चेहरे का तेज अनायास ही राजा को अपनी ओर खींच रहा था ! राजा उनकी ओर चल पड़ा ! पहुँचकर दंड-वत प्रणाम किया! महात्मा जी की मुद्रा भंग हुई, और बड़े प्यार से पूछा, राजन..,इतने सुनसान और वीरान जंगल में तुम यहाँ कैसे..? राजा ने कहा, शिकार की तलाश मे इधर से गुजर रहा था, तभी...!! सुनो राजन.., महात्मा जी उसकी बात बीच में ही काटते हुए बोल पड़े, जीव-हत्या पाप है,इस घिनौने कृत की सज़ा भगवान कभी माफ़ नही करता ! राजा अपराध मुद्रा में हाथ जोड़कर खड़ा हो गया, और प्रार्थना किया कि आप तो भूत-भविष्य और वर्तमान सबकी खबर रखते हैं, कृपा कर मेरे जीवन में होने वाली घटनाओं के बारे मे मुझे अवगत करा दीजिए, जिससे मैं सावधान रहूं..! ध्यान से सुनो राजन.., मैं सबका हित चाहता हूँ,मैं यह अच्‍छी तरह से जानता हूँ कि तुम आने वाले कल में मेरी बात को नज़र अंदाज कर दोगे, पर मैं तुझे बताऊँगा ज़रूर..., ताकि तुम भविष्य में यह नही कह सकते कि मुझे किसी ने बतलाया नही था !

हे राजन, तुम अब कभी शिकार करने इस जंगल में मत आना,लेकिन तुम आओगे ज़रूर..! अगर जंगल में आ भी गये तो एक बहुत ही खुशनुमा घोड़ा मिलेगा, उसे अपने राज्य मे मत ले जाना, लेकिन तुम ले जाओगे ज़रूर..! अगर अपने राज्य में ले भी गये तो उसकी सवारी मत करना, लेकिन तुम करोगे ज़रूर..! अगर उस खुशनुमा घोड़े की सवारी भी कर लिया तो किसी अन्य राज्य के सीमा मे मत जाना, लेकिन तुम जाओगे ज़रूर.., अगर तुम दूसरे राज्य मे चले भी गये तो किसी राजकुमारी से विवाह मत करना, लेकिन तुम करोगे ज़रूर.., और राजन वही आपकी मौत लिखी है, यह महात्मा जी का उत्तर था ! राजा महात्मा जी का शुक्रिया कर वापस अपने महल में आ गया !

धीरे-धीरे समय बीतता चला गया ! एक दिन मंत्री ने राजा से कहा, महाराज जंगल की सैर को बहुत दिन हो गये, दिन भर राजमहल में आपका दम नही घुटता..? राजा ने कहा , तुम्हे याद नहीं उस महात्मा ने क्या कहा था ! मंत्री ने कहा, महाराज उन्होने तो कहा था की शिकार करने मत जाना, ऐसा थोड़े न कहा था की जंगल मे मत जाना ! राजा सोच मे पड़ गया.., मंत्री ठीक ही तो कह रहा है..! वह मंत्री के साथ जंगल की ओर निकल पड़ा ! जंगल मे उसे एक बहुत ही खुशनुमा घोड़ा दिखाई दिया ! मंत्री ने कहा, महाराज देखो यह कितना सुंदर, कितना खुशनुमा घोड़ा है, इसे अपने राज्य मे ले चलो, यह अपने राज्य की शोभा को चार चाँद लगा देगा ! राजा ने कहा, अरे नही, नहीं.., तुम्हे याद नही उस महात्मा जी ने क्या कहा था..? मंत्री ने कहा, महाराज उन्होने यह कहा था कि अगर अपने राज्य में लेकर इसे चले भी गये तो इसकी सवारी मत करना ! राजा ने कहा, बात तो तुम सही ही कह रहे हो ! राजा उस घोड़े को पकड़ कर अपने राज्य के अस्तबल में बाँध दिया ! कुछ दिनों बाद, पड़ोसी मुल्क ने इस पर आक्रमण कर दिया ! राजा के सारे सिपाही युद्ध मे मारे जा चुके थे ! जीतने भी हाथी-घोड़े थे पड़ोसी मुल्क के राजा युद्ध में जीतता जा रहा था ! एक वही खुशनुमा घोड़ा शेष रह गया था ! मंत्री ने कहा, देखते क्या हो राजन, सिर पे मौत मंडरा रही है, जल्दी से इस घोड़े पे बैठकर निकल पड़ो ! राजा हरेक बार की तरह इस बार भी बोल पड़ा क्या तुम्हे यह पता नही कि महात्मा जी ने कहा था की इसकी सवारी मत करना..? मंत्री ने समझाया , महाराज उन्होने तो यह कहा था कि किसी दूसरे राज्य की सीमा में मत जाना ! राजा जैसे ही उस घोड़े पे बैठा, वह खुशनुमा घोड़ा दुश्मनों को चीरता हुआ, दो-दो राजाओं की सीमा को लाँघता हुआ एक अन्य राज्य की सीमा में जा घुसा ! वहाँ का राजा उसे सम्मान सहित अपने राज्य महल में ले गया ! उस राजा की इकलौती औलाद एक राजकुमारी थी, जिसका दिल इस राजा पर आ गया और इसने शादी का प्रस्ताव रखा ! काम मे वशीभूत राजा ने उस राजकुमारी से विवाह कर लिया, वह काम के इतना वशीभूत हो चुका था की उसे ध्यान ही नही रहा कि महात्मा जी ने क्या कहा था..? जिस राजाओं की सीमा को लाँघता हुआ यह इस राज्य की सीमा मे आया था, उन दोनो ने इस पर आक्रमण कर दिया और वहीं पर उसकी मृत्यु हो जाती है...!

अब इस कहानी के तथ्यों पर हम प्रकाश डालना चाहेंगे..! वर्तमान स्थिति में उस राजा का किरदार हम और आप निभा रहे हैं, और मंत्री की भूमिका में, ये गद्दी पर बैठे महाराज लोग हैं। बाबा जी ने कहा कि "बच्चों यह सूरज जो पूरब में उगता है, कोई कहे कि पश्चिम मे निकलने लगा है, तो इसे मान लेना, लेकिन मेरी एक भी बात इधर से उधर नही होने वाली ! मैं परिवर्तन करने आया हूँ और इसे पूरा करके ही जाऊँगा, चाहे मुझे चार सौ साल तक क्यों न रहना पड़े..!" अब उपर्युक्त कहानी के पात्र में जो मंत्री था और आज जो महाराज बने घूम रहे हैं, हमें आपको भ्रमित करने में लगे हैं। कुछ महाराजोें ने कह दिया कि अरे बाबा जी ने ऐसा थोड़े ही कहा था कि मैं इसी शरीर में चार सौ वर्ष रहूंगा। यह देखो वसीयत, मेरे नाम गद्दी कर गए। यह देखो वसीरतगंज की वीडियो, मुझे नाम पॉवर दे गए। अब हम आप उस राजा की तरह दिमाग लगाते हैं कि अरे हां ! बात तो ये सही कह रहे हैं। फिर हममें से कुछ लोग गुरु महाराज की बात भूल कर इन महाराजों की बातों में आ जाते हैं। किसी ने कह दिया कि हमारे सपने में गुरु महाराज आए और बोले कि बच्चू अब टाट उतार दो। हम इनके सपनों की बात पर विश्वास तो कर लेते हैं , पर गुरु महाराज की कही बात कि "जो टाट उतार दे उस पर भूल कर भी कभी भरोसा मत करना" उस राजा की तरह इन मंत्रियों की बातों में आ कर भूल जाते हैं।

एक महाराज जी को मौका मिला तो वह जिंदा मुर्दा का खेल शुरू कर दिया, क्योंकि संगत का एक बहुत बड़ा तबका गुरु महाराज को हाजिर नाजिर समझने वाले थे। इस महाराज ने गुरु महाराज की ऐसी नकल करी, और कहा कि कौआ कौआ की बोली को पहचान लेता है तुम कैसे हो कि अपने गुरु की आवाज़ नहीं पहचान पा रहे हो? फिर क्या था? कुछ हाजिर नाजिर वालों का भटकाव इनके पास भी हो गया। हम गुरु महाराज के उन वचनों को भूल गए , जो हमें पढ़ाया गया था कि "बच्चों ! मै उसी रूप में मिलूंगा। यहां भी और वहां भी। यदि किसी और रूप में आ गया तो तुम हमें पहचानोगे कैसे..?

अब तक चौथा वाला महाराज भी जाल लेकर तैयार खड़ा था। जो मछलियां ऊपर के तीन लहरों को छलांग लगा चुकी थी, उसे भ्रम के जाल में उलझाने को आतुर था। यह महाराज अच्छी तरह जानता था कि गुरु बन कर मेरे बनाए भ्रम के जाल में फांसना इन्हें मुश्किल है। इसलिए इसने खुद को गुरु के चरणों की धूल कहा। और फिर धीरे से राधा स्वामी दयाल बन कर , प्रेमियों को, गुरु महाराज की दया और दुआ से दूर कर दिया। जब कभी इस महाराज के भाषणों पर नजर चल जाती है तो अब तो ये यहां तक कहने लगे हैं कि जब कोई तुम्हारा साथ न दे, तुम्हारे कंधे पर कोई हाथ न दे, मुझे पुकारना, मैं तुम्हारी मदद करूंगा। इनके कार्यक्रमों में बाबा जयगुरूदेव जी दयाल की दया हो के उद्घोषणा की जगह सदगुरु श्री दयाल की दया हो के नारे सुनने को मिलते हैं। जबकि गुरु महाराज ने कहा कि बच्चा जिसने तुम्हें नामदान दिया है, सिर्फ वही तुम्हारी संभाल कर सकता है। कोई दूसरा तुम्हारी कुछ भी मदद नहीं कर सकता । तुम हमको देखना, मैं तुमको देख रहा हूं, हम दोनों के बीच किसी तीसरे को खड़ा कर दिया तो धोखा हो जाएगा।

अब आप दिमाग लगाते रहो उस राजा की तरह। और भ्रमित होते रहिए उस मंत्री के द्वारा। उस महात्मा जी ने तो साफ साफ बता दिया कि, " 'देखो बच्चों, रहना तुम होशियार, ठगों ने आन बिछाया जाल'। तुम बहुत संभल कर रहना। आगे ये संगत सैलाब का रूप लेगी, फिर कटनी होगी फिर छटनी होगी ! यदि नहीं माने तो चटनी भी होगी। पहले हथौड़ा चलेगा, यदि नहीं संभले तो घन चलेगा, और फिर तुम्हारा कचूमर निकल जाएगा। तुम मेरे खेल को देख कर भ्रमित मत हो जाना, ऐसा चमत्कार होगा की विश्व के लोग नमस्कार करेंगे। जो मुठ्ठी भर लोग बचेंगे, परिवर्तन उन्ही लोगों के द्वारा करा दिया जाएगा,.., अब आप दिमाग़ लगाते रहो उस राजा की तरह..., और भ्रमित होते रहिए उन मंत्रियों के द्वारा। मर्जी आपकी है।

सादर जयगुरूदेव🙏

अफवाहों पर ध्यान मत दें। कार्यक्रम निरस्त नहीं हुआ है..! क्या हुआ रतन लाल जी? क्या हाल चाल है आपका? कार्यक्रम तो रद्द हो...
04/07/2023

अफवाहों पर ध्यान मत दें। कार्यक्रम निरस्त नहीं हुआ है..! क्या हुआ रतन लाल जी? क्या हाल चाल है आपका? कार्यक्रम तो रद्द हो गया आपका। कल गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व की गरिमा को समझते हुए, आपकी चुलबुली हरकतों पर कुछ भी लिखना मेरी शान के खिलाफ था। इस कारण खामोशी का अलंकार पहनकर गुरु के चरणों में फरियाद कर रहा था। पर आप तो बड़ा गरज रहे थे। संगत के जयचंद जी , आप तो ऐसे गरजे की बरस भी न पाए। जो गरजते हैं वो बरसते नहीं, बच्चपन में जरूर पढ़ा होगा आपने। पानी बीच मीन प्यासी, मोहे सुनत सुनत आवे हांसी। आप तो प्यासे रह गए। प्यासे के प्यासे। ऐसे प्यासे कि गुरु पूर्णिमा का कार्यक्रम खुद तो मना ही नहीं पाए, लखों प्रेमियों को मनाने से वंचित भी कर दिया। निर्लज।

आपके कारनामों का पर्दाफाश कम से कम उत्तर प्रदेश में तो जरूर हो गया है। कभी आप माननीय योगी जी को भोगी बोलते हैं, कभी मोदी जी पर व्यंग करते हैं। 1 करोड़ में बाबा जयगुरूदेव जी को बेच कर अमेरिका के हाथों मार डालने की बात करते हैं, और खुद बाबा जयगुरूदेव बनकर संगत के भोले भाले प्रेमियों को लूटने का काम भी करते हैं। और आपकी चेली.. शिप्रा। वो तो आपके नक्शे कदम पर बखूबी चल रही है। एक स्त्री हो कर उसे बोलने की तमीज भी नहीं है। वह सपोज सपोज़ कह के किसी की बहनिया दूसरे के साथ भगा देती है तो किसी की बीबी को भी भगा देती है। जैसे तुम वैसी तेरी चेली।

भारत जैसे धार्मिक देश में जहां एक ओर अतिथि देवो भवः की परंपरा है, जहां किसी फकीर महात्मा के चरण अपने घर में पड़ने पर अपने आप को लोग धन्य समझते हैं, उसी देश के उत्तर प्रदेश में आपको सत्संग के लिए 2 गज जमीन भी कोई नहीं देना चाहता। आपके कार्यक्रम को प्रशासन भी निरस्त कर देता है। जिस नैमिष में करोड़ों की जमीन खरीद कर संगत को सतयुग के सपने दिखा रहे हैं, उसी नैमिष की धरती पर आप कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं कर पाते। क्योंकि नैमिष की आम जनता भी आपकी धांधली से अच्छी तरह वाकिफ हो गई है। आपके लोग सुबह सुबह जब फ्रेश होने के लिए वहां की जनता के खेतों में जाते हैं तो मोटे मोटे डंडों से वो स्वागत के लिए तैयार बैठे होते हैं। शर्म करो रतन लाल जी, आज आम आदमी भी आपके चरित्र से चीर परिचित हो गया है। सत्संगी तो सत्संगी, एक आम गैर सत्संगी भी आपको फूटी कौड़ी नहीं देखना चाहता। इसी से समझ लीजिए कि आपकी औकात क्या है..?

आपका गुरु पूर्णिमा का कार्यक्रम मिर्जापुर में जब निरस्त हुआ तो आनन फानन में झूठ का सहारा लेकर, सिर्फ 1000 लोगों के सम्मिलित होने का आवेदन दे कर, प्रशासन से परमिशन ले लिया, और कार्यक्रम को सोनभद्र में स्थांतरित किया। आपने तो सोच लिया था कि अब किसी की मजाल नहीं जो कार्यक्रम को रद्द कर सके। और फिर आ गए अपने मूल औकात पर। लगे गरजने कि, " किसी की हिम्मत ही नहीं है इस हिंदुस्तान में, ऐसा कोई पैदा ही नहीं हुआ जो इस कार्यक्रम को रोक दे। मिर्जापुर का कार्यक्रम तो पहले चार दिन का था,वही कार्यक्रम अब सोनभद्र में 7 दिन का हो गया है। यह है असली की पहचान। यह है सत्य की जीत। अंततः विजय धर्म की ही होती है।" अब क्या हुआ रतन लाल जी, आपके सर मुड़ाते ही ओले पड़ गए। आपकी झूठी विजय, आपका झूठा धर्म ऐसा धराशाई हुआ कि आपको सोनभद्र से 1 दिन उपरांत ही तंबू और बंबू उखाड़ना पड़ा। आपका गियर अब फंस चुका है रतन लाल जी। इस बात को आप समझ लीजिए। अब आप गुस्से में उत्तर प्रदेश के प्रशासन पर थूकने जैसे शब्दों का प्रयोग कर अपने घटियापन का खुलेआम परिचय दे रहे हैं। आपकी फाइल तैयार हो रही है। शिशुपाल की तरह आपके गुनाहों की लिस्ट अब बहुत लंबी हो गई है। यदि अब भी अपने गुनाहों से तौबा नहीं किए, तो आपके प्रिय भाई रामरहीम और बाबा रामपाल जेल में बड़ी मुद्दत से आपका इंतजार कर रहे हैं।

आप सभी को गुरु पूर्णिमा महापर्व की ढेर सारी हार्दिक मंगल शुभकामनाएं। मालिक की दया हम सभी प्रेमियों पर बनी रहे, यही उनके ...
03/07/2023

आप सभी को गुरु पूर्णिमा महापर्व की ढेर सारी हार्दिक मंगल शुभकामनाएं। मालिक की दया हम सभी प्रेमियों पर बनी रहे, यही उनके पावन पवित्र चरणों में शीश नवाकर बारंबार प्रार्थना करता हूं। हैप्पी गुरुपूर्णिमा🙏

जयगुरूदेव।जिस रतन लाल को अंधभक्त गुरु लीला का महानायक घोषित करने में लगे थे, उस ढोंगी बाबा का गुरु महाराज ने ऐसा गियर फस...
30/06/2023

जयगुरूदेव।

जिस रतन लाल को अंधभक्त गुरु लीला का महानायक घोषित करने में लगे थे, उस ढोंगी बाबा का गुरु महाराज ने ऐसा गियर फसा दिया कि उसकी स्थिति धोबी का कुत्ता न घर का, न घाट का, वाला हो गया।

प्राप्त सूचना के अनुसार ढोंगी बाबा रतन लाल का पर्दाफाश हो चुका है। उत्तर प्रदेश की सरकार भारत की भोली भाली जनता के खून पसीने की कमाई को इन ढोंगी बाबाओं की झोली में जाने नहीं देना चाहती है। इस कारण इन बाबाओं के कार्यक्रम को उत्तर प्रदेश की सरकार सीधे निरस्त कर दे रही है।

ढोंगी बाबा रतन लाल ने इस बार गुरु पूर्णिमा के नाम पर करोड़ों रुपए की उगाही करने के लिए वनस्थली महाविद्यालय, मिर्जापुर , उत्तर प्रदेश में 1 से 5 जुलाई 2023 तक शुभ मुहूर्त रखा था। गियर ऐसा फंसा कि जब वहां पर भोली भाली प्रेमियों के गाड़ियों के चक्के ज्ञातव्य स्थान के लिए घूम चुके थे, ऐन मौके पर प्रशासन ने कार्यक्रम को निरस्त कर दिया। अब ढोंगी बाबा रतन लाल कार्यक्रम को निरस्त न करने की पैरवी के लिए अधिकारियों के सामने नाक तक रगड़ रहे हैं। इसी को कहते हैं गियर फसना। अब अचानक से इस कार्यक्रम की तैयारी दूसरी जगह करने पर रातों रात उतनी तैयारी नहीं हो सकती क्योंकि सारी व्यवस्था का सामान यहां पहुंचाया जा चुका था।

गुरु लीला का महानायक धोबी का कुत्ता बन कर आज घूम रहा है। प्रेमियों, आप अब भी होश में आ जाओ। इतने अंधभक्त बन कर मत घूमो। अभी समय बार बार तुम्हें इशारा कर रहा है। अगर आज नहीं संभले तो चिड़िया चुग गई खेत वाली कहानी तुम्हारे ऊपर घटित होगी। फिर शिवाय आंसू बहाने के तुम्हारे पास कुछ भी अन्यत्र नहीं बचेगा।

जयगुरूदेव शाकाहारी परिवर्तन इस पेज Fight for the truth के माध्यम से आपसे निवेदन करती है कि इस वक्त रतन लाल जैसे और भी बने गुरु लीला के महानायकों से दूर रहें। परदे पर भले ही वो अपने हाव भाव से महानायक दिखने की अदाकारी करते हैं, पर पर्दे के पीछे इनके जैसा कोई खलनायक नहीं है।

जयगुरूदेव🙏

जयगुरूदेव।थोड़े से सेवक शंकरचार्य के बौद्ध मजहब का हिंदुस्तान से जड़ से नाश कर दिया था, एवम चार पीठ स्थापित कर अपने गुरु...
25/06/2023

जयगुरूदेव।

थोड़े से सेवक शंकरचार्य के बौद्ध मजहब का हिंदुस्तान से जड़ से नाश कर दिया था, एवम चार पीठ स्थापित कर अपने गुरु का नाम पूरे जगत में कर दिया था। यह ऐसे समय हुआ जब बौद्ध धर्म का दबदबा था। उस वक्त इस मजहब में नाना प्रकार की बुराइयां आ गई थी, मानवता खत्म हो गई थी। और अभी सिर्फ 130 साल पूर्व स्वामी विवेकानंद ने अकेले ही अपने गुरु रामकृष्ण परम हंस का नाम पूरे जगत में कर दिया। यह भी ऐसे समय हुआ, जब ब्रिटिश शासकों और ईसाई मिशनरियों का एक वर्ग भारत की अवमानना और पाश्चात्य संस्कृति की श्रेष्ठता साबित करने में लगा हुआ था।

विवेकानंद तो इकलौते थे, शंकराचार्य के सेवक तो थोड़े थे। वे थोड़े थे, इकलौते थे। और बाबा जयगुरूदेव के अनुयाई.... करोड़ों...! एक करोड़ तो सिर्फ टाट बोरा वाले ही हो गए, और हम जैसे करोड़ों..! हमने क्या किया..? हमने अपने गुरु के लिए क्या किया..? कभी गुरु के प्रति हमने अपनी उपलब्धि पर विचार किया है..? विचार करना.. हमारी उपलब्धि क्या है..? हमारी उपलब्धि है; गुरु महाराज की लगी लगाई बगिया को उजाड़ देना। हमारी उपलब्धि है; संगत को फाड़ फाड़ कर देना। हमारी उपलब्धि है; नफरत के बीज। हमारी उपलब्धि है; पतन। हमारी उपलब्धि है; जगह जगह कुकुरमुत्ते की तरह उगने वाले ढोंगी मठाधीश। हमारी उपलब्धि है; रामपाल, रामरहीम जैसे ढोंगी बाबाओं में विलय। वे थोड़े थे, इसलिए उनकी उपलब्धि थोड़ी थी, हम करोड़ों हैं, इसलिए हमारी उपलब्धि थोड़ी ज्यादा है। यही स्वर्णिम इतिहास लिखा जायेगा; हमारी और तुम्हारी उपलब्धि पर..! कुछ तो शर्म करो प्रेमियों..! क्या यही उपलब्धि ले कर तुम ऊपर जाना चाहोगे..?

याद रखना, अंत समय में न पंकज यादव काम आयेंगे, न ही उमाकांत जी काम आने वाले हैं। न ही रतन लाल जी आपकी जीवात्मा की संभाल कर पाएंगे, न ही आनंद जौहरी जी करने वाले हैं। यह जो उपलब्धियों का पहाड़ खड़ा है, यह इन्हीं मठाधीशों की देन है। इनको तुमसे एक पैसे का नहीं मतलब, इनको सिर्फ तुम्हारे धन से मतलब है। इनको सिर्फ तुम्हारे मान सम्मान से मतलब है। पर दुःख इस बात का है कि हम अब तक उनके इस मतलब को नहीं समझ पाए हैं। इनके इस मतलब को समझने के लिए हमें और आपको मिलकर इन्हें आजमाना होगा। पर दुःख इस बात का भी है कि तुम्हें आजमाना भी नहीं आता।

याद करना , कोरोना काल में रतन लाल जी का एक वीडियो बहुत वायरल हुआ था। वह कहते पाए जाते हैं कि; " कहीं कार्यक्रम तो होते नहीं, और एक एक औरत चार-चार और पांच-पांच बच्चे लेकर आई है। इनको भंडारे में रोटी देना बंद कर दो। जब यहां भोजन नहीं मिलेगा तो खुद घर भगेगी।" जरा आजमाना अपने अपने विचारों से, क्या कोई महात्मा ऐसा कह सकता है..? क्या महात्माओं की ऐसी भी वाणी होती है..? याद करना, उमाकांत जी मथुरा के जिस मंदिर को कंकड़ और पत्थर बता रहे थे, कह रहे थे; मंदिरों में चूहे घूमते हैं, बिल्लियां घूमती हैं गिलहरियों के चक्कर में, कंकड़ और पत्थरों में नहीं मिलता कुछ, अगर मिलता है कुछ तो महापुरुषों के चरणों में। जरा इसे भी आजमाना अपने अपने विचारों से, जब महापुरुषों के चरणों में ही मिलता है सब कुछ, तो ये बाबल हरियाणा में कंकड़ और पत्थरों से क्या निर्मित करने में लगे हैं..? इसे भी याद करना.. वो पंकज जी महाराज जो पवित्र मंदिर के प्रांगण में अश्लीलता के ठुमके लगवाते हैं, यह काम संतो का है क्या..? यह संतमत है या रंगमंच..? सेवादारों को भगा कर, चप्पे चप्पे पर सिक्योरिटी गार्ड का पहरा, आश्रम के रख रखाव में कुव्यवस्था, मंदिर के संगमरमर की जीर्ण हो रही अवस्था, यही रखवाला का काम है क्या..? और एक वो.., जो हो जाने के बाद अपनी ज्योतिषी की गणना करता है, गोदी मीडिया का सहारा लेता है, कभी जगह जगह भव्य मंदिर बनेगा, कह कर पलट जाता है, कभी मथुरा आश्रम पर जल्द ही अपने सत्संग का दावे करने वाला, नाम दान देने का भी वादे करने वाला, वह ज्योतिषी गणनक अपनी ही बातों से बार बार क्यों मुकर जाता है..? जिसकी ज्योतिषी की गणना ऐसी की बीच सत्संग से, किसी अपनों की अप्रिय घटना का संदेश सुन कर, सत्संग अधूरा छोड़ कर जाना पड़ जाए। इसे भी आजमाना अपने अपने विचारों से, कि काहे का संत..? जो अपनों की संभाल नहीं कर पाया, वह तुम्हारी क्या संभाल कर पाएगा..?

प्रेमियों, ज्यादा नहीं तुम सिर्फ एक वर्ष के लिए इन्हें आजमा कर देख लो। तुम इनके कार्यक्रमों में सिर्फ एक वर्ष के लिए जाना छोड़ दो। इन सब का चेहरा उतर जाएगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, फिर तुम जो कहो, मैं मान लूंगा। बस एक वर्ष के लिए ही सही, इस प्रार्थना को मान लो। अगर इतना भी नहीं कर सकते, तो इतना कर देना कि इनकी झोली में सेवा चढ़ाना तुम बंद कर देना। सिर्फ एक वर्ष के लिए। साल के सिर्फ 12 महीने के लिए। यह कोई बड़ी बात तो नहीं है। सत्य और असत्य की पहचान के लिए , नर्कों की मार से बचने के लिए, क्या तुम एक वर्ष भी नहीं दे सकते..? देखना एक वर्ष बाद.., यह आजमाइश तुम्हारी इनके प्रति आस्था को 180 डिग्री टर्न न कर दे, तो फिर कहना..!

सादर जयगुरूदेव🙏

https://youtu.be/MPLe9mUYyfI
23/06/2023

https://youtu.be/MPLe9mUYyfI

बाबा रतन लाल लड़कियों से दबवाते हैं पैर | audio viral | नकली बाबाओं का पर्दाफाशपाखंडी बाबाओं का पर्दाफाशढोंगी बाबाओं का पर...

https://youtu.be/EyXTVui2s1g
19/06/2023

https://youtu.be/EyXTVui2s1g

बाबा रतन लाल की चेली शिप्रा की दबंग गिरी | ढोंगी बाबा का पर्दाफाश | राम रहीम हनीप्रीत रतन लाल शिप्राबाबा रतन लाल की च....

18/06/2023

रतन लाल की चेली को एक भटके हुए शेर ने किया ढेर..

कहते हैं सत्य को छुपाने का जितना भी प्रयास किया गया, वह एक दिन उजागर हो ही जाता है। एक भटका हुआ गुरु भाई जो रतन लाल के यहां भटक कर चला गया था, ने नैमीशारण्य रतन लाल के आश्रम के बगीचे से एक आम तोड़ कर क्या खा लिया, बेचारे पर आफत आ गई..? उसे रतन लाल की चेली शिप्रा ने बहुत बुरी तरह से फटकार लगाई । वह भटका हुआ प्रेमी रतन लाल के नाक तले चल रहे गतिविधियों से धीरे धीरे परिचित होने लगा था। वह यह जानने लगा था कि यह ढोंगी बाबा भोले भाले प्रेमियों से चौथे यज्ञ के नाम पर जमीन खरीदने के नाम पर जो सेवा ले रहा था, उसका बंदरबाट कैसे हो रहा था। रतन लाल के खासमखास चेले जिसमें शिप्रा, राजन , विकास जैसे बहुतेरे लोग 50-50 बीघे की जमीन अपने अपने नाम से खरीद रहे थे, और इस बेचारे ने एक आम क्या तोड़ लिया, जैसे शामत आ गई..!

इस रिकॉर्डिंग को आप लोग बड़े ध्यान से सुने। इसका पार्ट 2 जल्द ही आप लोगों के समक्ष रखा जाएगा। इतने बड़े पर्दाफाश को सुनकर भी रतन लाल जैसे ढोंगी बाबाओं के तलवे चाटने से यदि आप बाज नहीं आते तो लानत है आप पर। आपके मेहनत की कमाई का कैसे ये ढोंगी बाबा बंदरबाट करते हैं और आप आस्था में इतने अंधे हो चुके कि आपको कुछ दिखाई नहीं देता।

इसलिए सचेत रहिए। यह दौर सावधानी का है। जरा सी चूक हुई और आप धड़ाम से पाताल में पहुंच जाएंगे।

जयगुरूदेव🙏

https://youtu.be/2OLDULLEOOo
12/06/2023

https://youtu.be/2OLDULLEOOo

वह बाबा जयगुरूदेव का शरीर नहीं था | पंकज तिवारी और चौधरी के ऊपर टाटधारी जगन्नाथ जी का बहुत बड़ा आरोप18 मई 2012 को जो शरीर ...

ड्राइवर साहब, कहां गया वो आपका ड्रोन वाला कैमरा..? और कहां गई वो आपकी भीड़..? आपकी सारी भीड़ उज्जैन में श्री खंड तो नहीं...
18/05/2023

ड्राइवर साहब, कहां गया वो आपका ड्रोन वाला कैमरा..? और कहां गई वो आपकी भीड़..? आपकी सारी भीड़ उज्जैन में श्री खंड तो नहीं खाने चली गई..? वो उज्जैन वाला आपकी सारी सवारी अपनी गाड़ी में भर रहा और आप ड्राइवरी में मशगूल सिर्फ आगे ताकते रह गए। यह तो धोखा हो गया आपके साथ। गुरु पूर्णिमा और दादा गुरु जी के भंडारे में तो ड्रोन से वीडियो शूट कर दिखाए जा रहे थे, कि देखो दुनियां वालों, इस भीड़ को देखो, हम हीं असली गद्दीदार हैं। अब वह भीड़ कहां उड़ गई? आपका ड्रोन वाला कैमरा कहां उड़ गया..? अब भी वक्त है। वक्त रहते बता दीजिए। आखिर क्या हुआ था गुरु महाराज के साथ? किस किस ने षड्यंत्र रचा था गुरु महाराज के साथ? संगत को सच सच बता दीजिए, वरना इस भीड़ में एक भी नहीं बचेगा, आपकी चाटुकरता करने के लिए।

हम गुरु महाराज के हैं और गुरु महाराज हमारे हैं। यह भीड़ जो गुरु पूर्णिमा और दादा गुरु जी के भंडारे में जाती है, अपने गुरुद्वारे में सजदा करने जाती है। दादा गुरु जी के चरणों में मत्था टेकने जाती है। अपने गुरु की यादों को सिमेटने जाती है। हवा का रुख आज किस ओर है,गुरु की ओर या आपकी ओर, समझ आ गया होगा आपको। अन्य कार्यक्रमों में जहां दस लाख प्रेमियों की भीड़ जाती है, जीवित गुरु के मृत्युभोज में इस बार दस हजार लोग भी नहीं पहुंचे होंगे।

झूठ का कारवां सिमटता जा रहा और सत्य का गुलिस्तां खिलता जा रहा है। भंडारे की बॉयकॉट मुहिम रंग लाने लगी है। प्रमाण आपके सामने है।

03/05/2023

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