श्री चतुर्भूज राम मंदिर, माण्डव

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श्री चतुर्भूज राम मंदिर, माण्डव संसार की अदभूत एवं एकमात्र ११५० वर्ष पुरानी श्रीराम प्रभु की चारभुजा वाली प्रतिमा। .....श्रीरामजी का वह रूप जिसके दर्शन मात्र से रावण को मो़क्ष प्राप्त हुआ.....

💐 शोक संदेश💐चतुर्भुज श्रीराम जी के सेवादार गयाप्रसाद (गया काकाजी) का आज देवलोक गमन हो गया है।प्रभु पुण्यात्मा (अपने सेवक...
25/04/2026

💐 शोक संदेश💐
चतुर्भुज श्रीराम जी के सेवादार गयाप्रसाद (गया काकाजी) का आज देवलोक गमन हो गया है।
प्रभु पुण्यात्मा (अपने सेवक) की श्रीचरणों में स्थान देवें।
ॐ शान्ति

25/03/2026
श्री गणेश ही प्रकृति हैगणेश के वास्तविक  स्वरुप को भुला  देने का असर प्रकृति के साथ हमारे रिश्तों पर पड़ा है। आज प्रकृति ...
07/09/2024

श्री गणेश ही प्रकृति है
गणेश के वास्तविक स्वरुप को भुला देने का असर प्रकृति के साथ हमारे रिश्तों पर पड़ा है। आज प्रकृति और अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से रूबरू हैं और इस संकट में हम उसके साथ नहीं, उसके खिलाफ खड़े हैं। गणेश के अद्भुत स्वरुप को समझना और पाना है तो उसके लिए उनके मंदिरों और मूर्तियों की स्थापना और भजन-कीर्तन का कोई अर्थ नहीं। गणेश हम सबके भीतर हैं। प्रकृति, पर्यावरण और जीवन को सम्मान और संरक्षण देकर हम अपने भीतर के गणेश को जगा सकते हैं !
#गणेशचतुर्थी

01/08/2024

बहुत सी जगह देखने को मिलता है श्रृंगार के आडंबर में भगवान की मूल मुर्ति के स्वरूप को अलग-अलग रूप में प्रदर्शित किया जाता है
जोकि बिल्कुल गलत है
शिव को शिव,ही रहने दो

29/07/2024

हमारा विनाश कब व कैसे शुरू हुआ था?
1. हमारा विनाश उस समय से शुरू हुआ था, जब हरित क्रांति के नाम पर देश में रासायनिक खेती की शुरूआत हुई और हमारा पौष्टिक वर्धक, शुद्ध भोजन विष युक्त कर दिया गया।

2. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन देश में जर्सी गाय लायी गई और भारतीय स्वदेशी गाय का अमृत रूपी दूध छोड़कर जर्सी गाय का विषैला दूध पीना शुरु किया था।

3. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन भारतीयों ने दूध, दही, मक्खन, घी आदि छोड़कर शराब पीना शुरू किया था।

4. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन देशवासियों ने गन्ने का रस छोड़कर पेप्सी, कोका कोला पीना शुरु किया था, जिसमें 12 तरह के कैमिकल होते हैं और जो कैंसर, टीबी, हृदय घात का कारण बनते हैं।

5. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन देशवासियों ने शुद्ध देशी तेल खाना छोड़ दिया था और रिफाइंड आयल खाना शुरू किया था, जो रिफाइंड ऑयल हृदयघात आदि का कारण बन रहा है।

6. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन देश के युवाओं ने नशा शुरू किया था। बीडी, सिगरेट, गुटखा, गांजा, अफीम, आदि शुरू किया था, जिससे कैंसर बढ रहा है।

7. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन देश में हजारों नकली दवाओं का व्यापार शुरु हुआ और नकली दवाओं से लोग मर रहे हैं।

8. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन देशवासियों ने अपने स्वदेशी भोजन छोड़कर पीजा, बर्गर, जंक फूड खाना शुरू किया था, जो अनेक बीमारियों का कारण बन रहा है।

9. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन लोगों ने अनुशासित और स्वस्थ दिनचर्या को छोड़कर मनमानी दिनचर्या शुरू की थी।

10. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन लोगों ने घरों में एलुमिनियम के बर्तन व घर में फ्रिज लाया था।

11. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन भारतीय जीवन शैली को छोड़कर विदेशी जीवन शैली शुरू की थी।

12 .हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन लोगों ने स्वस्थ रहने का विज्ञान छोड दिया था और अपने शरीर के स्वास्थ्य सिद्धांतों के विपरीत कार्य करना शुरू किया था ।

13. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन देश का अधिकतर युवा / युवतियां व्यभिचारी बनकर व्यभिचार करना, गर्भ निरोधक गोलियां खाना, लाखों युवतियां हर साल गर्भाशय कैंसर से मरती हैं।

14. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन लोगों ने अपने बच्चों को टीके लगवाना शुरू किया था और यह विचार कभी भी नहीं किया था कि टीकों का बच्चों के शरीर पर भविष्य में क्या प्रभाव पडेगा?

15. इस शरीर की कुछ सीमा है, कुछ मर्यादा है, कुछ स्वस्थ सिद्धांत हैं, लेकिन मनमाने आचरण के कारण शरीर की बर्बादी की है।

नोट :- हमारे विनाश के अनेक कारण हैं। आज लोगों को सिर्फ रोना ही दिखाई दे रहा है, उन्हें यह भी देखना चाहिए कि लोग कैंसर, टीबी, हृदय घात, शुगर, किडनी फेल, BP High, BP Low, अस्थमा आदि गंभीर बीमारियों से मर रहे है @हाइलाइट

26/07/2024

जब भोलेनाथ तपती गर्मी के महिने में तुम्हारे राह देख रहे थे,तब तुम पीपल के नीचे पत्ते खेल रहे थे।
और जब श्रावण में पानी ही पानी है
तब तुम...भक्त बने
#भोले सब जानता है #

03/07/2024

तथाकथित कुकुरमुत्ते की तरह बढ़ रहे स्वघोषित बाबाओ के लिए अब देश में धर्म संसद होना चाहिए
जिसमें वास्तविक सनातनी संत, धर्माचार्य होना चाहिए ।।

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