देव श्री सुनानी नाग जी को समर्पित।

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देव श्री सुनानी नाग जी को समर्पित। जय देव श्री सुनानी नाग जी।
कोठी थाच डाकघर कलहनी उप तहसील बागाचनोगी जिला मंडी हि.प्र.।

नारायण हरि भक्ति की, प्रथम यही पहचाँन ।आप अमानी है रहै, देत और को मान ।।सबसे पहली पहचान भक्ति की यही है कि वह स्वयं मान ...
20/01/2024

नारायण हरि भक्ति की, प्रथम यही पहचाँन ।
आप अमानी है रहै, देत और को मान ।।

सबसे पहली पहचान भक्ति की यही है कि वह स्वयं मान नहीं चाहता और दूसरों को मान देता है।
जय देवा।

19/10/2022
21/08/2022

जय देव श्री सुनानी नाग जी की।
जय हो शेषा!

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10/07/2022

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देव समाज -सेवा भाव जय देव श्री सुनानी नाग जी। हमारा गाँव हमारा गौरव।                थाच ऋषि कश्यप जी के वंशज हैं गाँव था...
06/06/2022

देव समाज -सेवा भाव
जय देव श्री सुनानी नाग जी।
हमारा गाँव हमारा गौरव।
थाच
ऋषि कश्यप जी के वंशज हैं गाँव थाच वासी।
देव श्री सुनानी नाग जी हैं इस गाँव के कुल देवता।
कमैडाधार की गोद में वसा है गांव थाच।
समतल स्थान होने के कारण इस स्थान को थाच नाम पुराने समय में ही दिया गया है। पुरातन समय से ही गाँव को थाच कहा गया है।
पुरातन ऐतिहासिकता के कई अनूठेपन के पहलू जुड़े हैं इस स्थान से।
सैंकड़ों वर्ष पूर्व निर्मित एक पुराना घर आज भी है विद्यमान। इस घर को मुल घर की दी जाती है संज्ञा ।
देव श्री सुनानी नाग जी के इस स्थान पर आगमन से पूर्व यहाँ एक तरफ मलेछों व राणाओं का भी रहा है अधिपत्य।
देव श्री सुनानी नाग जी गाँव डगैल वासी के सामान के किलटे में पिंडी स्वरूप में अपने मुल मंदिर चुराग से आए थे। जगह जगह एक साधारण पथ्थर समझकार किलटे से फेंकने के बाबजूद भी उसी किलटे के सामान के बीच में आते रहे और अंततः गाँव थाच में वस गए।
प्राचीन समय में अनाज के भंडारण( भू -राजस्व) एकत्रण का रहा है केंद्र ।
कमैडाधार की सतीरी गुफा से एक दानवीर देवता से आयोजनो हेतू बर्तनों के लेन - देन की कहानी भी जुड़ी है गांव थाच से।
देव श्री सुनानी नाग जी के हुम (जाग) की है अलग अनूठी परम्परा व पहचान । इस जाग को नाग हूम से जाना जाता है।

हमारा गाँव हमारा गौरव
सिराज घाटी के वेहद रमणीय स्थल कमैडाधार की गोद में वसा गाँव थाच अपने अनूठे पुरातन इतिहास के लिए जाना जाता है। गांब थाच ग्रांम पंचायत कलहनी में स्थित है।
कश्यप गोत्रीय गाँव थाच वासी ऋषि कश्यप के वंशज हैं। यह एक जबरदस्त संयोग ही कहा जा सकता है। यहाँ के लोगों के कुल देवता देव श्री सुनानी नाग जी भी स्वयं ऋषि कश्यप के ही वंश से आते हैं। चूकी समस्त नागों को पुराणो के अनुसार कश्यप ऋषि के वंश से ही माना जाता है। इस संयोग पर थाच वासी अपने आप को गौरवान्वित भी महसूस करते हैं।
पुरातन समय से ही इस गाँव को थाच कहा जाता है। इसके पिछे इस स्थान का समतल होना भी एक पहलू माना गया है। इसलिए इस स्थान को थाच नाम दिया गया ऐसी भी मान्यता है।
गांब थाच में सैंकड़ों वर्ष पूर्व निर्मित एक मूल घर आज भी कायम है। कहा जाता है कि यह गांव थाच का प्रथमी घर है। इसी घर से थाच के लोगों के वंश की शुरूआत मानी जाती है। यह घर प्रथमी घर कहलाता है। इस घर में प्राचीन काल से ही देव जहल विराजमान रहते हैं। इस घर में देव जहल की वहुत ही प्राचीन मूर्तियाँ विराजमान है। देव जहल हेतू भ्रादरपद यानी भद्र के पूरे महिने में विशेष रुप से हर संध्या वेला में दीया जलाया जाता है।
किवदन्तीयों के अनुसार देव श्री सुनानी नाग जी के आगमन से पूर्व यहाँ एक तरफ राणाओं व मलेछों का अधिपत्य भी था। ऐसा कहा जाता है की देव श्री सुनानी नाग जी के आगमन के बाद राणाओं व मलेछों को यह स्थान छोडना पड़ा या वे समाप्त हो गए।
इस गाँव में देव श्री सुनानी नाग जी के वास करने की एक रोचक कहानी ही रही होगी ऐसा माना जाता है। पडोस के गाँव डगैल का एक बांशिदा अपने काम काज के सिलसिले में दूसरे क्षेत्र गया हुआ था। कई महिनो के बाद जब घर वापसी हुई तो वह करसोग के चुराग होता हुआ पैदल आ रहा था। चुराग नामक स्थान से देव श्री सुनानी नाग जी उनके किलटे में पींडी स्वरूप सामान के रूप में आ गए। यह डगैल वासी इसे साधारण पथ्थर समझकर फैंक देता था। परंतु यह पींडी बार बार इसके सामान में आती रही। अंततः जब यह शख्स गाँव थाच पहुँचा तो इस पथ्थर की पींडी को फिर अपने किलटे में पाया फिर उ को वहीं फैंक दिया। कहते हैं कि इसके बाद पिंडी स्वरूप देव श्री सुनानी नाग जी ने थाच नाम के इस स्थान को अपने रहने के लिए चुना। देव जहल जी खेल कर कहते हैं दाहिना जगह मेरे भाइडु की है यहाँ यानी नाग जी की।
गांव थाच के लोगों का पुरातन इतिहास कमैडाधार की सतीरी गुफा के दानवीर देवता से भी जुडा है जो समय समय पर गाँव वालो को आयोजनो के समय बर्तन भी मुहैया करवाता था।
किवदन्तीयों के अनुसार पुरातन समय में गांब थाच को राजाओं के शासनकाल के समय अनाज के भंडारण का केंद्र माना जाता था। इलाके के समस्त लोगों के भू -राजस्व के तौर पर इकठ्ठा अनाज को इस स्थान पर रखा जाता था।
हमारे कुलज देवता देव श्री सुनानी नाग जी के जाग (हूम )की अपने आप में अनूठी परम्परा रही है। इसे विशेष रुप से नाग होम (हूम) के नाम से जाना जाता है। यह जाग अपने आप में एक विशेष पहचान रखती है। जिसे यहाँ की अनुठी देव परंपरा की मिसाल कहे तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
देव आदेश से पिछला हूम यानी जाग मंघर महीने दिसंबर 1991 में हुआ था । इससे पूर्व की जागो का विवरण भी इतिहास में दर्ज है। जब देव आदेश होता है तो तब जाग आयोजित की जाती है।
वर्तमान में यह गांव सड़क सुविधा से जुड़ गया है। थाच बागी के नाम से सड़क बनी है। यहाँ के लोग इस सड़क के किसी प्रोजेक्ट के अधीन चौडीकरण व पक्की होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। गाँव के अधिकांश लोग किसान है और खेतीबाड़ी में खुब मेहनत करते हैं। फसलों की अच्छी पैदावार के लिए भी थाच गांव जाना जाता है। यहाँ की भूमि बहुत उपजाऊ है। लोगों को अनाज की कमी प्रभू कृपा से कभी नहीं महसूस होती ।
यहाँ से बड़ा देव कमरूनाग जी व माता शिकारी जी की पहाडियो का नजारा आसानी से देखा जा सकता है।
धन्यवाद।
जय देव श्री सुनानी नाग जी।
देव समाज -सेवा भाव।

फोटो क्रेडिट ---राज ठाकुर डगैल।

03/06/2022

देव समाज
सेवा भाव ।।

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