19/06/2026
■ श्रीपराशराचार्याष्टकम् (श्री पराशर अष्टकम्)
● वेदव्यास के पिता, विष्णु पुराण के रचयिता, महर्षि वशिष्ठ के कुल में उत्पन्न और शक्ति मुनि के पुत्र — महर्षि पराशर भगवान विष्णु के परम भक्त, तपस्वी, ब्रह्मनिष्ठ और लोककल्याणकारी महान ऋषि थे। उनकी कृपा और ज्ञान से आज भी हम वेद-पुराणों का अमृत प्राप्त कर रहे हैं।
● इसी दिव्य महर्षि की स्तुति में रचित यह श्रीपराशराचार्याष्टकम् अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली है। इसमें महर्षि पराशर के तप, तेज, ज्ञान, भक्ति और वैराग्य के दिव्य गुणों का सुंदर वर्णन किया गया है।
● जो भक्त श्रद्धा और प्रेम से इसका नियमित पाठ करता है, उसे भगवान विष्णु की अटूट भक्ति प्राप्त होती है।
👉 आइए, हम सभी इस पावन अष्टकम के माध्यम से महर्षि पराशर ऋषि के चरणों में अपना शीश नवाते हैं।
■ श्रीपराशराचार्याष्टकम्...✍️
वशिष्ठकुलसम्भूतं शक्तेः पुत्रं महात्मनः ।
व्यासतातं मुनीन्द्रं तं पराशरमहं भजे ॥१॥
श्रीसेवितपादाम्भोजं सर्वदिक्षु प्रथितं परम् ।
विष्णुपुराणवक्तारं प्रियंवदं पराशरमहं भजे ॥२॥
तपोराशिं महातेजं ब्रह्मनिष्ठं जितेन्द्रियम् ।
तरुणादित्यसन्निभं पराशरमहं भजे ॥३॥
वेदान्तविदां वरिष्ठानां वन्दितं महामते ।
मुनिश्रेष्ठं दयासिन्धुं पराशरमहं भजे ॥४॥
सर्वशाखार्थसम्पन्नं शुभदं लोकपावनम् ।
शाश्वतधर्मगोप्तारं पराशरमहं भजे ॥५॥
लोकानुग्रहकर्तारं सागरधीरचेतसं ।
भवबन्धविमोचकं तं पराशरमहं भजे ॥६॥
ज्ञानभक्तिविरागार्णवपूर्णचन्द्रोपमं विभुम् ।
वैष्णवाग्र्यं पराशराचार्यं भजाम्यहं भक्तितः ॥७॥
इत्यष्टकमिदं पुण्यं पराशरमुनेः शुभम् ।
यः पठेच्छ्रद्धया युक्तो विष्णुभक्तिं स विन्दति ॥८॥
- वैदिक संग्रह
#अर्थात - जो वशिष्ठ ऋषि के कुल में उत्पन्न हुए हैं, जो महात्मा शक्ति के पुत्र हैं और जो वेदव्यास के पिता हैं — ऐसे मुनीन्द्र (मुनियों में श्रेष्ठ) पराशर को मैं भक्ति सहित प्रणाम करता हूँ। ॥१॥
जिनके चरणकमल लक्ष्मी जी द्वारा सेवित हैं, जो सभी दिशाओं में विख्यात हैं, विष्णु पुराण के प्रवक्ता और प्रिय वचन बोलने वाले हैं — ऐसे पराशर मुनि को मैं भक्ति सहित प्रणाम करता हूँ। ॥२॥
जो तपस्या के महान भंडार हैं, अत्यन्त तेजस्वी हैं, ब्रह्म में निष्ठा रखने वाले, इन्द्रियों को जीतने वाले और तरुण सूर्य के समान तेज वाले हैं — ऐसे पराशर मुनि को मैं भक्ति सहित प्रणाम करता हूँ। ॥३॥
जो वेदान्त के श्रेष्ठ विद्वानों द्वारा वन्दित हैं, महान बुद्धि वाले और दया के सागर हैं — ऐसे मुनिश्रेष्ठ पराशर को मैं भक्ति सहित प्रणाम करता हूँ। ॥४॥
जो सभी शाखाओं (वेदों) के अर्थों में सम्पन्न हैं, शुभ देने वाले, लोक को पवित्र करने वाले और शाश्वत धर्म के रक्षक हैं — ऐसे पराशर मुनि को मैं भक्ति सहित प्रणाम करता हूँ। ॥५॥
जो लोकों पर अनुग्रह करने वाले हैं, जिनका चित्त समुद्र के समान गम्भीर और धीर है, तथा संसार-बन्धन से मुक्त करने वाले हैं — ऐसे पराशर मुनि को मैं भक्ति सहित प्रणाम करता हूँ। ॥६॥
जो ज्ञान, भक्ति और वैराग्य रूपी महासागर के समान पूर्णचन्द्रमा जैसे तेजस्वी और सर्वव्यापी हैं, तथा वैष्णवों में श्रेष्ठ आचार्य हैं — ऐसे आचार्य पराशर को मैं भक्ति सहित प्रणाम करता हूँ। ॥७॥
यह पवित्र और शुभ पराशर मुनि का अष्टक है। जो श्रद्धा युक्त होकर इसका पाठ करता है, वह विष्णु भक्ति प्राप्त करता है। ॥८॥
■ समापन
● यह पवित्र अष्टकम महर्षि पराशर ऋषि की महिमा का सुंदर दर्पण है। इसमें वर्णित प्रत्येक श्लोक उनके दिव्य स्वरूप को हमारे हृदय में स्थापित करता है।
● जो कोई भी श्रद्धापूर्वक, एकाग्रचित्त होकर इसका पाठ करेगा, उसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होगी, ज्ञान-भक्ति-वैराग्य की वृद्धि होगी और संसार के बंधनों से मुक्ति का मार्ग सुगम होगा।
👉 पराशर ऋषि की कृपा सर्वदा हमारे ऊपर बनी रहे।
🌻जय पराशर ऋषि🌻