Thachi valley of God

Thachi valley of God This Page is inspired form The preposterous Beauty of Himalyaz .

हम Spiritual tourism के माध्यम से आध्यात्मिक यात्रा को दुनिया तक पहुँचाने वाले bilingual creator हैं
91k से ज्यादा likes और 192k Followers के साथ हमारी community लगातार बढ़ रही है
Collaboration के लिए संपर्क करें [email protected] 7018163965 whose environment is serene like the austerity ofLord Shiva & Lord Budhha...
It is the habitation of Gods/Goddess which are relaxing in their aust

erity. This Page is a way to Reach the intact Beauty Of The Himalyaz And the Spiritual sensation of Lord .

27/08/2026

निंदा संसार का नियम है
प्रशंसा तो लोग मजबूरी और स्वार्थ से करते हैं

27/08/2026
🌺 119 दिवसीय चातुर्मास व्रत संकल्प — 33वाँ दिन 🌺🙏 भगवान श्रीहरि नारायण को समर्पित 🙏25 जुलाई 2026 से प्रारंभ हुए इस 119 द...
26/08/2026

🌺 119 दिवसीय चातुर्मास व्रत संकल्प — 33वाँ दिन 🌺
🙏 भगवान श्रीहरि नारायण को समर्पित 🙏
25 जुलाई 2026 से प्रारंभ हुए इस 119 दिवसीय चातुर्मास व्रत का आज 26 अगस्त को 33वाँ दिन है।
🌿 आज का व्रत-संकल्प — श्रीहरि के दिव्य नामों का स्मरण 🌿
आज के दिन भगवान विष्णु के अनेक पवित्र नामों का स्मरण करते हुए अपने मन, वाणी और कर्म को श्रीहरि के चरणों में समर्पित करें।
🙏 आज का श्लोक — विष्णु पुराण
ॐ वासुदेवं हृषीकेशं वामनं जलशायिनम्।
जनार्दनं हरिं कृष्णं श्रीवक्षं गरुडध्वजम्॥
वाराहं पुण्डरीकाक्षं नृसिंहं नरकान्तकम्।
अव्यक्तं शाश्वतं विष्णुमनन्तमजमव्ययम्॥
नारायणं गदाध्यक्षं गोविन्दं कीर्तिभाजनम्।
गोवर्धनोद्धरं देवं भूधरं भुवनेश्वरम्॥
🌿 सरल अर्थ:
हे प्रभु! आप वासुदेव, हृषीकेश, वामन, जनार्दन, हरि, कृष्ण, नारायण, गोविन्द और विष्णु आदि अनंत नामों से पूजित हैं।
आप शाश्वत, अनंत, अजन्मा और अविनाशी परमात्मा हैं। आप सम्पूर्ण जगत के आधार और भुवनेश्वर हैं।
🕉️ व्रत से संबंध
चातुर्मास व्रत केवल उपवास का नाम नहीं है। यह मन, वाणी और कर्म को भगवान श्रीहरि के चरणों में समर्पित करने की साधना है।
आज का संकल्प—
“हे श्रीहरि नारायण!
मेरे इस 119 दिवसीय चातुर्मास व्रत को भक्ति, सेवा, संयम और नाम-स्मरण के साथ पूर्ण करने की शक्ति प्रदान करें।
मेरे मन को निर्मल करें और मेरे प्रत्येक सत्कर्म को आपके चरणों में समर्पित करने की भावना प्रदान करें।”
🌺 आज का जाप:
॥ ॐ नमो नारायणाय ॥
🙏 श्रीहरि नारायण की कृपा से हमारा 119 दिवसीय चातुर्मास व्रत संकल्प निरंतर चलता रहे।
🪷 थाची वैली ऑफ गॉड परिवार 🪷
भक्ति • सेवा • संस्कार • सनातन संस्कृति 🙏

*मनुष्य मृत्यु के बाद स्वर्ग मिलेगा, इस उम्मीद में पूरी जिंदगी बहुत कुछ करता रहता है।*कोई उपवास करता है,कोई दान-पुण्य कर...
25/08/2026

*मनुष्य मृत्यु के बाद स्वर्ग मिलेगा, इस उम्मीद में पूरी जिंदगी बहुत कुछ करता रहता है।*
कोई उपवास करता है,
कोई दान-पुण्य करता है,
कोई तीर्थयात्रा करता है,तो
कोई भगवान से मन्नतें माँगता है।
कभी-कभी लगता है, *जैसे स्वर्ग भी कोई नई हाउसिंग सोसायटी हो—जहाँ एक छोटा-सा फ्लैट पाने के लिए जीवन भर पुण्य के अंक जमा करने पड़ते हैं!*
लेकिन एक पल ठहरकर यह भी सोचिए…
क्या पता, शायद हम पहले से ही स्वर्ग में जी रहे
सुबह उठते ही एक बार अपने आसपास ध्यान से देखिए।
एक बटन दबाते ही अँधेरा रोशनी में बदल जाता है।
दूसरा बटन दबाते ही पंखा चल पड़ता है।
तीसरा बटन दबाते ही ठंडी हवा पूरे कमरे में फैल जाती है।
नल खोलते ही पानी बहने लगता है।
गैस जलाते ही कुछ ही मिनटों में खाना तैयार हो जाता है।
जेब से मोबाइल निकालते ही पूरी दुनिया आपकी हथेली में आ जाती है।
हजारों किलोमीटर दूर रहने वाले आपके प्रियजन भी कुछ ही सेकंड में आपके सामने दिखाई देने लगते हैं।
इतनी सारी अद्भुत सुविधाएँ हमारे पास हैं…लेकिन हम उन्हें बहुत सामान्य मान चुके हैं।
हम ऐसे व्यवहार करते हैं, जैसे यह सब हमारा जन्मसिद्ध अधिकार हो।
*एक बार कल्पना कीजिए…*
अगर दो सौ साल पहले का कोई राजा आज आपके घर आ जाए, तो शायद वह अपने महल में वापस जाने के लिए भी तैयार न हो।
वह हैरानी से पूछेगा—
“यह क्या है?”— गर्म पानी!
“और यह?”— ठंडी हवा!
“यह क्या है?”
— पूरे संसार की जानकारी!
“और यह?”— दस मिनट में घर पहुँच जाने वाला खाना!
शायद वह कुछ देर चुप रहेगा और फिर मुस्कुराकर कहेगा—
“मैंने पूरी जिंदगी राज किया, युद्ध जीते, अपार संपत्ति हासिल की… लेकिन ऐसी सुविधाएँ मुझे कभी नहीं मिलीं।”
और यह सच भी है।
*आज एक सामान्य इंसान के पास कई ऐसी सुविधाएँ हैं, जो पुराने जमाने के सबसे शक्तिशाली राजाओं के पास भी नहीं थीं।*
फिर भी…हम खुश नहीं हैं।
क्योंकि इंसान के पास जो चीज होती है, उसकी कीमत धीरे-धीरे कम होती जाती है।
AC चल रहा है-खुशी नहीं होती।
AC बंद हो जाए, तभी परेशानी महसूस होती है।
मोबाइल है—खुशी नहीं होती।
नेटवर्क चला जाए तो लगता है जैसे पूरी दुनिया खत्म हो गई।
अपना घर है—संतोष नहीं है।
पड़ोसी का घर बड़ा है, इसका दुख है।
अपनी गाड़ी है—तृप्ति नहीं है।
दूसरे की गाड़ी बड़ी है, इसकी चिंता है।
*यानी इंसान अपने ही स्वर्ग में खड़ा होकर…दूसरे के स्वर्ग से अपनी तुलना करके दुखी होता रहता है।*
लेकिन इसी धरती पर एक दूसरी दुनिया भी मौजूद है।
आज भी लाखों लोग एक घड़े पानी के लिए घंटों लाइन में खड़े रहते हैं।
लाखों परिवारों के पास पक्का घर तक नहीं है।
दिन में दो वक्त का खाना मिलेगा या नहीं, यह भी निश्चित नहीं है।
बच्चों के सपने स्कूल की दहलीज तक पहुँचने से पहले ही टूट जाते हैं।
कई लोगों के पास शरीर ढकने के लिए भी पर्याप्त कपड़े नहीं हैं।
हम जिन चीजों को “सामान्य” समझते हैं…
वही सुविधाएँ किसी और के लिए जिंदगी का सबसे बड़ा सपना हैं।
हमें AC का रिमोट न मिले तो गुस्सा आता है।
उन्हें धूप से बचने के लिए पेड़ की छाया भी नसीब नहीं होती।
हम डाइट चार्ट खोजते हैं।
वे यह सोचते हुए सो जाते हैं कि अगला खाना कब और कहाँ से मिलेगा।
*तब समझ में आता है…स्वर्ग और नरक शायद मृत्यु के बाद मिलने वाली जगहें नहीं हैं।*
वे यहीं हैं।
इसी धरती पर।
इसी शहर में।
इसी सड़क पर।
कभी-कभी तो…
एक ही दीवार की दो तरफ।
एक घर का बच्चा अपना नया मोबाइल थोड़ा धीमा होने पर परेशान हो जाता है।
सामने वाले घर का बच्चा ऑनलाइन पढ़ाई करने के लिए मोबाइल न होने पर रोता है।
एक व्यक्ति गर्म पानी पाँच मिनट देर से आने पर शिकायत करता है।
दूसरा व्यक्ति आज पानी मिल गया, इतना ही कहकर भगवान को धन्यवाद देता है।
*फर्क सिर्फ परिस्थितियों में नहीं है..फर्क दृष्टिकोण में भी है।*
कुछ लोगों ने कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कुराना सीख लिया है।
और कुछ लोग सारी सुविधाएँ होने के बावजूद शिकायतों से बाहर नहीं निकल पाते।
*इंसान की सबसे अजीब आदत है वह रोज यह गिनता है कि उसके पास क्या नहीं है…*
लेकिन कभी यह नहीं गिनता कि उसके पास क्या-क्या है।
*आज रात सोने से पहले सिर्फ पाँच चीजें लिखकर देखिए—*
आज मैं साँस ले रहा हूँ।
आज मेरे पास पीने के लिए पानी है।
आज मुझे खाना मिला।
आज मेरे पास रहने के लिए एक घर है।
आज मेरे अपने लोग मेरे साथ हैं।
शायद…आपकी जिंदगी को देखने का नजरिया ही बदल जाए।
शायद “स्वर्ग” कोई जगह नहीं है…
एक अनुभव है।
और उसी तरह “नरक” भी कोई जगह नहीं है…
बल्कि जो मिला है उसे भूलकर लगातार शिकायतों में जीना ही नरक है।
*जो हमारे पास है, उसके लिए कृतज्ञ होना—स्वर्ग है। जो मिला है उसे भूलकर, जो नहीं मिला उसकी शिकायत करते रहना—नरक है।*
मृत्यु के बाद क्या होता है, यह कोई निश्चित रूप से नहीं जानता।
लेकिन जीते-जी हमें यह सुंदर धरती मिली है।
साँस लेने के लिए हवा मिली है।
पीने के लिए पानी मिला है।
खाने के लिए अन्न मिला है।
प्यार करने वाले लोग मिले हैं।
और एक बटन दबाते ही मिलने वाली अनगिनत सुविधाएँ मिली हैं।
इतना सब होने के बावजूद अगर हम हमेशा दुखी रहें…तो इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा?
*शायद भगवान भी मुस्कुराकर कहते होंगे—*
“मैंने तुम्हें स्वर्ग में ही रखा है…
लेकिन तुमने वहाँ भी शिकायतों का दफ्तर खोल रखा है!”
*इसलिए..*
*आज से शिकायतें मत गिनिए।कृतज्ञताएँ गिनिए।*
क्योंकि…कृतज्ञता से भरे हृदय में ही सच्चा स्वर्ग होता है।
🙏 🙏🙏🙏🙏🏻🙏🏻

🌺 119 दिवसीय चातुर्मास व्रत संकल्प — 32वाँ दिन 🌺भगवान श्रीहरि नारायण को समर्पितआज के व्रत-संकल्प में विष्णु पुराण से भगव...
25/08/2026

🌺 119 दिवसीय चातुर्मास व्रत संकल्प — 32वाँ दिन 🌺
भगवान श्रीहरि नारायण को समर्पित
आज के व्रत-संकल्प में विष्णु पुराण से भगवान विष्णु के दिव्य नामों का स्मरण करें। विष्णु पुराण में भगवान के नामों का स्मरण और स्तुति भक्त के लिए अत्यंत पवित्र मानी गई है।

ॐ वासुदेवं हृषीकेशं वामनं जलशायिनम्।
जनार्दनं हरिं कृष्णं श्रीवक्षं गरुडध्वजम्॥
वाराहं पुण्डरीकाक्षं नृसिंहं नरकान्तकम्।
अव्यक्तं शाश्वतं विष्णुमनन्तमजमव्ययम्॥
नारायणं गदाध्यक्षं गोविन्दं कीर्तिभाजनम्।
गोवर्धनोद्धरं देवं भूधरं भुवनेश्वरम्॥
🌿 सरल अर्थ
हे प्रभु! आप वासुदेव, हृषीकेश, वामन, जनार्दन, हरि, कृष्ण, नारायण, गोविन्द और विष्णु आदि अनंत नामों से पूजित हैं।
आप ही शाश्वत, अनंत, अजन्मा और अविनाशी परमात्मा हैं। आप सम्पूर्ण जगत के आधार और भुवनेश्वर हैं।
🕉️ व्रत से संबंध
चातुर्मास का यह संकल्प केवल उपवास का नाम नहीं, बल्कि मन, वाणी और कर्म को श्रीहरि के चरणों में समर्पित करने का साधना-पथ है।
आज हम संकल्प लें—
“हे श्रीहरि नारायण!
मेरे इस 119 दिवसीय चातुर्मास व्रत को अपनी भक्ति, सेवा, संयम और नाम-स्मरण से पूर्ण करने की शक्ति प्रदान करें।
मेरे मन को निर्मल करें और मेरे प्रत्येक सत्कर्म को आपके चरणों में समर्पित करने की भावना दें।”
🌺 आज का जाप:
॥ ॐ नमो नारायणाय ॥
🙏 श्रीहरि नारायण की कृपा से 119 दिवसीय चातुर्मास व्रत संकल्प निरंतर चलता रहे।
थाची वैली ऑफ गॉड परिवार
🪷 भक्ति • सेवा • संस्कार • सनातन संस्कृति 🪷

🪷 जब श्रीहरि ने शिवजी को अर्पित किया अपना कमलनयन— भक्ति, त्याग और हरि-हर एकत्व की अद्भुत कथा —🙏🌿 थाची वैली ऑफ गॉड 🌿🙏पुरा...
24/08/2026

🪷 जब श्रीहरि ने शिवजी को अर्पित किया अपना कमलनयन

— भक्ति, त्याग और हरि-हर एकत्व की अद्भुत कथा —

🙏🌿 थाची वैली ऑफ गॉड 🌿🙏

पुराणों में एक अत्यंत अद्भुत प्रसंग आता है

🌺 जब श्रीहरि ने अपना नेत्र अर्पित कर दिया

लिङ्ग महापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 98 में वर्णन है कि भगवान विष्णु ने भगवान शिव की सहस्रनाम से पूजा करते हुए कमल-पुष्प अर्पित किए।

शिवजी ने श्रीहरि की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए एक कमल-पुष्प छिपा दिया।

जब भगवान विष्णु ने देखा कि एक कमल कम है, तो उन्होंने विचार किया—

“मेरा नेत्र भी तो कमल के समान है।”

और उन्होंने अपना कमलनयन ही भगवान शिव को अर्पित कर दिया। 🙏

📜 लिङ्ग पुराण का श्लोक

पुष्पमेकं तु संहृत्य परीक्षार्थं महेश्वरः।
विष्णुस्तदेकं नयनमुत्पाट्याभ्यर्चयत्॥

भावार्थ:
भगवान महेश्वर ने श्रीहरि की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए एक पुष्प हटा लिया। तब भगवान विष्णु ने उस पुष्प के स्थान पर अपना एक नेत्र अर्पित करके भगवान शिव की पूजा पूर्ण की।

श्रीहरि की इस अनन्य भक्ति और पूर्ण समर्पण से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें सुदर्शन चक्र प्रदान किया।

🌺 हरि और हर — विरोध नहीं, एकत्व

इस प्रसंग का सबसे सुंदर संदेश यही है कि—

जहाँ श्रीहरि शिव की आराधना करते हैं, वहीं शिव भी श्रीहरि की भक्ति से प्रसन्न होते हैं।

सनातन परम्परा हमें देवताओं के बीच भेद और विवाद नहीं, बल्कि परस्पर सम्मान, प्रेम और एकत्व का संदेश देती है।

📖 ऋग्वेद 1.164.46

एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति।

अर्थ:
सत्य एक है, ज्ञानीजन उसे अनेक नामों और स्वरूपों से पुकारते हैं।

यही व्यापक सनातन भाव हमें हरि में हर और हर में हरि के दर्शन कराता है। 🪷🔱

🌿 बड़े देव विष्णु मतलोडा की दिव्य परम्परा

थाची घाटी की देवभूमि में बड़े देव भगवान विष्णु मतलोडा के प्रति श्रद्धा इसी सनातन देव-परम्परा की जीवंत अभिव्यक्ति है।

बड़े देव हमारे लिए केवल आराध्य देव नहीं, बल्कि—

🌿 हमारी आस्था
🌿 हमारी देव-परम्परा
🌿 हमारी संस्कृति
🌿 और हमारी सामूहिक चेतना के आधार हैं।

आइए, हम अपनी प्राचीन देव परम्पराओं का सम्मान करें और आने वाली पीढ़ियों तक इस अमूल्य सनातन विरासत को पहुँचाएँ।

🙏 जय बड़े देव विष्णु मतलोडा!
🪷 जय श्रीहरि नारायण!
🔱 हर हर महादेव!
🌺 हरि ॐ तत्सत्।

— थाची वैली ऑफ गॉड
देवभूमि की परम्परा • सनातन संस्कृति • हमारी आस्था 🌿

Address

Devashram Butwara PO Thachi Distt Mandi
Mandi
175121

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Thachi valley of God posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share