10/03/2026
बड़ा देव ,माता दुलासन जी और देव श्री भुजा ऋषि जी की पावन यात्रा आज अपनी हार सीमा में पहुंच कर संपन्न हो रही है। 12 फरवरी को मंडी शिवरात्रि महोत्सव के लिए प्रस्थान करने के बाद लगभग 26 दिनों तक चली इस दिव्य यात्रा का आज 10 मार्च को मंगलमय समापन हो रहा है।
विशेष बात यह रही कि लगभग 12 वर्षों के बाद शाड़खा हार के साथ यह देव यात्रा संपन्न हुई, जिसने इस पूरे उत्सव को और भी ऐतिहासिक और यादगार बना दिया। इस पावन यात्रा में बड़ा देव के साथ माता दुलासन जी और देव श्री भुजा ऋषि जी भी साथ रहे, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भक्ति का वातावरण बना रहा।
मंडी शिवरात्रि की ओर जाते समय प्रभु की यह पावन देव यात्रा जागर, बस्तान और 9 मील होते हुए मंडी नगरी पहुंची, जहां प्रभु ने ऐतिहासिक 500वीं अंतरराष्ट्रीय मंडी शिवरात्रि महोत्सव में अपनी पावन उपस्थिति दर्ज करवाई। मंडी नगरी में 15 से 22 फरवरी तक प्रभु विराजमान रहे और हजारों श्रद्धालुओं को अपने दिव्य दर्शन देकर आशीर्वाद प्रदान किया।
23 फरवरी को प्रभु की घर वापसी यात्रा आरंभ हुई, जो पंडोह, बस्तान, गोहर और चैल चौक होते हुए रोहांडा की ओर अग्रसर हुई। वहां से यह पावन यात्रा ज्यूणी घाटी की ओर बढ़ी और पुनः गोहर पहुंची। इसके बाद देवधार में विराजमान होकर प्रभु ने भक्तों को अपने पावन दर्शन दिए और अब यह दिव्य यात्रा अपने अंतिम पड़ाव को पूर्ण करते हुए अपने मूल स्थान में पधार रही है।
सदियों से चली आ रही देव संस्कृति की यह परंपरा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और लोक संस्कृति की जीवंत धरोहर है। जहां-जहां प्रभु का पड़ाव हुआ, वहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण जयकारों, भक्ति और श्रद्धा से गूंज उठा।
अब इस मंगलमयी यात्रा के पूर्ण होने के साथ ही प्रभु अपने स्थान में पधार रहे हैं। भक्तजन प्रभु के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं और देवभूमि की इस महान परंपरा का हिस्सा बनकर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं।