जय माँ घटाशनी

जय माँ घटाशनी ||माँ राज राजेश्वरी कांढी घटाशनी जी को समर्पित||
बदार घाटी की सात बहनों में से एक ।।सेन राजवंश की कुलदेवी ।।मंदिर-शिवाबदार ।।मंडी ।।हिमाचल ।।

कहतें हैं कि मण्डी जिला के बदार घाटी की में स्थित सात देवी बहनें बंगाल के गौड़ देश से आई हैं। एक बार सातों बहनें तीर्थ नहाने के उद्देश्य से गौड़ देश जा रही थी। रास्ते में उन्हे एक तिल का दाना मिला। छ बहनों ने मिल बांट कर वह तिल का छोटा सा दाना खा लिया। सातवीं बहन जो की सबसे छोटी थी उनको तिल खाने को नहीं मिला इसलिए वह नाराज हो गई। उसे मनाने के लिए बाकी छ बहनों ने अपने दाँतों से खुर्च कर उसे थोड़ा थोड़

ा तिल दे दिया।। इसकी वजह से सातवीं बहन को सबसे ज्यादा तिल का हिसा खाने को मिल गया। ऐसा माना जाता है कि सात बहनों के इस आपसी अटूट प्रेम की वजह से उन्हे देव योनि प्राप्त हो गई।
छोटी अर्थार्त सातवीं बहन द्वारा ज्यादा तिल का हिसा खाने के कारण बाकि बहनों ने उन्हे बड़ी देवी का स्थान दे दिया।
हर एक देवी का स्थान उसी तरह निर्धारित हो गया जितना तिल का हिसा उन्होने खाया था।
माँ घटाशनी जी छठे स्थान पर पूजी जाती हैं।
माँ का मन्दिर गांव शिवाबदार में स्थित है। कहते हैं इसी गांव में मण्डी के 12वें राजा बाण सेन का जन्म हुआ था। माँ के आशीर्वाद से उन्होने अपनी प्रथम रियासत की स्थापना यंही से की थी। राजा बाण सेन ने माँ घटाशनी जी को अपनी कुल देवी माना था।
इसी वजह से राजों ने माँ घटाशनी जी को राज राजेश्वरी नाम भी दिया है।
जब रियासत को मण्डी स्थानांतरित किया गया तो माँ घटाशनी जी का दुसरा मन्दिर मण्डी के दम दमा महल में भी राजाओं द्वारा बनाया गया जँहा रानिया माँ की पूजा आराधना किया करती थी ।

21/05/2026

गूर पुजारी,,की जोड़ी,,।।

19/05/2026

उत्तरप्रदेश राज्य के सहारनपुर में आदिशक्ति माँ घटाशनी जब भक्त के घर अतिथ्य के लिए विराजमान हुई तो यह क्षण उनके लिए अविस्मरणीय रहा,,।। उन्होंने यह कभी नहीं सोचा होगा कि देव भूमि हिमाचल से उतरप्रदेश राज्य तक की यह दूरी उनकी आस्था के आगे कम पड़ जाएगी,।।
माँ घटाशनी से उनके सभी भक्तों की कल्याण की मंगल कामना करते हैं।
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गांव मासड़ में विराजमान,,परमेश्वर पराशर जी ।। प्रभु शुकदेव जी ।। माँ घटाशनी ।। माँ बूढ़ी बछवारन,,।।✨✨🌺🌺✨✨🌺🌺✨✨🌺🌺
12/05/2026

गांव मासड़ में विराजमान,,
परमेश्वर पराशर जी ।। प्रभु शुकदेव जी ।। माँ घटाशनी ।। माँ बूढ़ी बछवारन,,।।
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माँ का दरबार,,,,।।
11/05/2026

माँ का दरबार,,,,।।

10/05/2026
10/05/2026

गोहर से आए भक्त जनों द्वारा अयोजितजागरण संध्या,,,
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09/05/2026
आज माँ घटाशनी जी के दरबार में गंगा पूजन का आयोजन बड़े ही हर्षोउल्लास से किया गया,,जिसमें विभिन देव कमेटियांदेव कमेटी परा...
09/05/2026

आज माँ घटाशनी जी के दरबार में गंगा पूजन का आयोजन बड़े ही हर्षोउल्लास से किया गया,,जिसमें विभिन देव कमेटियां
देव कमेटी पराशर ऋषि बाँहदी
देव कमेटी शुकदेव ऋषि थट्ठा
देव कमेटी माता बगलामुखी बाखली
देव कमेटी माँ मेहनी
देव कमेटी माँ धारा नागन
देव कमेटी माँ निसु पाराशरी
कमेटी सदस्य माँ सोना सिंहासन
देव कमेटी माँ बूढ़ी बछवारन विशेष रूप से सम्मलित रहीं।
साथ ही वर्तमान व पूर्व विधायक द्रंग विधान सभा,,
समाजसेवी उदयानंद शर्मा जी, व वो परिवार भी शामिल हुए जिन्होंने माँ घटाशनी को आतिथ्य के लिए इस दौरे में अपने घर
आमंत्रित किया था,,।।
साथ में अन्य गणमान्य लोग भी इस कार्ज में पधारे व मां
का आशीर्वाद प्राप्त किया । माँ घटाशनी से समस्त जगत के कल्याण की कामना करते हैं,,।।

09/05/2026

इलाका बदार की सात देवी बहनों की भारथा में एक पंक्ति का निरंतर बखान किया जाता है कि प्राचीन समय में तीर्थ नहाने के उद्देशय से सात बहनें गौड़ देश गई थी। गौड़ देश बंगाल राज्य का हिसा है| प्राचीन गौड़ देश की प्रमुख नदी गंगा थी।
देवियों की गौड़ देश की वे पुरातन कथाएं, हमारे पूर्वजों की श्रद्धा का प्रतीक हैं।
आज माँ घटाशनी का यह गंगा स्नान, हमारे इतिहास की धरोहर को फिर से जीवंत करने का एक अनमोल अवसर बन गया। जब हम हरिद्वार में गंगा के किनारे उनके पवित्र स्नान का साक्षी बने, तो ऐसा लगा मानो हमारे पुरखों की आस्था, उनकी तपस्या और उनकी कहानियाँ, एक बार फिर हमारे दिलों में जाग उठी हों। यह स्नान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारे सांस्कृतिक गर्व और पहचान का प्रतीक बन गया है, जिसने हमें अपने बीते समय से जोड़कर, एक नए प्रकाश की ओर अग्रसर किया।।

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