26/09/2025
*समेलिया साथरी: विशनोई समाज की अमूल्य धरोहर*
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भीलवाड़ा जिले की मांडल तहसील के समीप मेजा बाँध क्षेत्र में स्थित समेलिया साथरी विशनोई समाज की एक प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक साथरी है।
*निर्माण एवं स्थापत्य*
इस साथरी का निर्माण वि.सं. 1637 (सन् 1581 ई.) में महंत अज्ञानदास जी द्वारा करवाया गया था। साथरी का स्थापत्य अत्यंत भव्य और विशिष्ट है— नींव की गहराई उन्नीस गज है। ऊँचाई इक्कीस गज है। और साथरी का घेरा पचास फुट लंबा-चौड़ा है। परकोटे की दीवारों की चौड़ाई साढ़े तीन फुट है। साथरी परिसर में कई महत्वपूर्ण भाग हैं— श्री गुरु जांभोजी का मुख्य ज्योति स्थल। नोबतखाना, रथशाला, घुड़साल, सूरजपोल द्वार आदि। साथरी की भीतरी दीवारों पर आकर्षक रंगीन भित्ति चित्रकारी की गई है, जो आज भी इसकी शोभा बढ़ाती है। साथरी के चारों ओर सुरक्षात्मक परकोटा (चारदीवारी) निर्मित है।
*जम्भ सरोवर : पवित्र जलधाम*
साथरी के समीप ही जम्भ सरोवर स्थित है। यह सरोवर मेवाड़ के विशनोई समाज के लिए उतना ही पवित्र माना जाता है जितनी हिंदुओं के लिए गंगा नदी। इस सरोवर के संबंध में मान्यता है कि यहाँ स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि महाराणा सांगा की माता रतन कुंवरी झाला ने मेले के अवसर पर इस सरोवर की सीढ़ियाँ (पैड़ियाँ) बनवाई थीं, जो आज भी विद्यमान हैं।
*धार्मिक व सामाजिक महत्व*
समेलिया साथरी सदियों से मेवाड़ विशनोई समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। इस साथरी के नाम पर 186 बीघा भूमि दान स्वरूप है। साथरी निर्माण के पश्चात यहाँ प्रतिवर्ष दो विशाल धार्मिक मेले भरते है। यह साथरी केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक धरोहर के रूप में भी समाज की गौरव-गाथा का प्रतीक है।
*वर्तमान स्थिति एवं संरक्षण प्रयास*
समय के साथ-साथ मेजा बाँध का क्षेत्र डूब में आने से साथरी को भारी क्षति पहुँची। लंबे समय तक साथरी में होम ज्योति बंद हो गई थी। जलभराव और उपेक्षा के कारण साथरी धराशायी होने की कगार पर पहुँच गई थी। उसके बाद पूर्व महंत स्वामी चंद्रप्रकाश जी के शिष्य महंत स्वामी भगवानप्रकाश जी ने साथरी की जिम्मेदारी संभाली।स्वामी जी ने यहाँ पुनः होम ज्योति प्रारंभ की। साथरी संरक्षण हेतु एक ट्रस्ट की स्थापना की गई। जनसहयोग से साथरी के जीर्णोद्धार कार्य शुरू किए गए, जिनमें— परकोटे की दीवारों का पुनर्निर्माण करवाया गया। साथरी एवं अन्य इमारतों की मरम्मत की गई। साथरी परिसर में मिट्टी का भराव कराया गया। धार्मिक गतिविधियों को पुनः आरंभ किया गया।
*निष्कर्ष*
समेलिया साथरी केवल एक साथरी नहीं, बल्कि मेवाड़ विशनोई समाज की चार सौ वर्षों से अधिक प्राचीन आध्यात्मिक धरोहर है। यहाँ का जम्भ सरोवर, साथरी की भव्य स्थापत्य कला, और गुरु जाम्भोजी की स्मृतियाँ इसे विशिष्ट बनाती हैं। आज भी समाज की आस्था, भक्ति और सेवा-भावना इस धाम के संरक्षण में निरंतर योगदान दे रही है।
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