श्री कृष्णा जन्माष्ठमी महोत्सव

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श्री कृष्णा जन्माष्ठमी महोत्सव From Khutauna go ahead Chharapatti Chowk, Hanuman Nagar. Then You can go to Jatti Baba Asthan by Hanuman Nagar road.

24/09/2023

याद रखें कि कल से नया फेसबुक नियम (उर्फ... नया नाम मेटा) शुरू हो रहा है, जहां वे आपकी तस्वीरों का उपयोग कर सकते हैं। मत भूलो कि अंतिम तिथि आज है!!! मैं फेसबुक या फेसबुक से जुड़ी किसी भी इकाई को अपने अतीत और भविष्य के चित्रों, सूचनाओं, संदेशों या प्रकाशनों का उपयोग करने की अनुमति नहीं देता।
इस बयान के साथ, मैं फेसबुक को सूचित करता हूं कि इस प्रोफ़ाइल और/या इसकी सामग्री के आधार पर मेरे खिलाफ खुलासा, प्रतिलिपि, वितरण या कोई अन्य कार्रवाई करना सख्त वर्जित है। निजता का उल्लंघन करने पर कानून द्वारा दंडित किया जा सकता है
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सांझा ना करें। कॉपी और पेस्ट।
आगे बढ़ने का तरीका यहां बताया गया है:
इस संदेश में कहीं भी अपनी उंगली रखें और "कॉपी" दिखाई देगा। "कॉपी करें" पर क्लिक करें। फिर अपने पेज पर जाएं, एक नई पोस्ट बनाएं और रिक्त फ़ील्ड में कहीं भी अपनी उंगली रखें। 'पेस्ट' पॉप अप होगा और पेस्ट पर क्लिक करें।
यह सिस्टम को बायपास कर देगा....
जो कुछ नहीं करता, वह जाहिर तौर पर सहमत होता है।

24/09/2023
28/08/2021

मेरे प्यारे दोस्तों!
आइये हम हमारे लड्डू गोपाल के जन्म का खुशियाँ बड़े धूम-धाम से मनाते हैं।

जट्टी बाबा के स्थान में श्री कृष्णा जन्माष्टमी महोत्सव का चौथा साल
26/09/2018

जट्टी बाबा के स्थान में श्री कृष्णा जन्माष्टमी महोत्सव का चौथा साल

Jatti baba sthan,  At-Hanuman nagar, P.S-Khutauna,Dist- Madhubani (Bihar)
27/07/2018

Jatti baba sthan, At-Hanuman nagar, P.S-Khutauna,Dist- Madhubani (Bihar)

यदा यदा ही धर्मस्य, ग्लानिर्भवति भारत |अभ्युत्थानम् धर्मस्य, तदात्मनं सृजाम्यहम् || गीता 4/7   अर्थ : हे अर्जुन ! जब-जब ...
16/05/2018

यदा यदा ही धर्मस्य, ग्लानिर्भवति भारत |

अभ्युत्थानम् धर्मस्य, तदात्मनं सृजाम्यहम् || गीता 4/7



अर्थ : हे अर्जुन ! जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं प्रकट होता हूँ ।। 7 ।।



व्याख्या: मनुष्य में धर्म और अधर्म दोनों ही प्रवृत्तियाँ होती है। कभी भीतर धर्म बढ़ता है और कभी अधर्म।। कभी हम धार्मिक जैसा बर्ताव करते हैं और कभी अधार्मिक जैसा। लेकिन जब व्यक्ति के अंदर अधर्म का भाव आता है तब उसके मन में उस अधर्म को न करने की एक लहर भी ज़रूर आती है, भले वो उसको ध्यान दे या न दे और अधर्म करने पर बार-बार दिल यह ज़रूर कहता रहता है कि जो कर रहे हो, वो गलत है। ऐसा नहीं कि जब कुछ बड़ा अधर्म करेंगे तभी अंदर की आवाज़ आएगी, ये तो किसी का पेन चुरा लेने पर भी आएगी। ये आवाज़ तब-तब आएगी जब-जब आप कोई भी अधर्म करोगे। लोग इसी आवाज़ को नज़रअंदाज़ करके अधर्म करते हैं। ये अंदर की आवाज़ कुछ और नहीं बल्कि हमारी चेतना में बैठे कृष्ण की प्रेरणा है, जो हमें अधर्म न करने की सलाह देती रहती है यही भगवान् कह रहे है कि जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होगी तब-तब मैं प्रकट होता हूँ । यही उनके प्रकट होने की प्रक्रिया है क्योंकि वो तो अपनी प्रेरणाओं से हर व्यक्ति के अंदर अपनी अनुभूति का अहसास कराते ही रहेंगे ।

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