Jama Masjid, Sarisab Pahi

Jama Masjid, Sarisab Pahi Jama masjid in sarisab pahi darzi tola Madhubani district of Bihar State in India. It is located north from National Highway-57.

बच्चों के लिए कुछ इस्लामिक रोचक तथ्य1. अल्लाह के 99 नाम है और हर नाम का एक खास मतलब है2. मक्का एक ऐसी जगह है जहां पर सिर...
03/08/2020

बच्चों के लिए कुछ इस्लामिक रोचक तथ्य

1. अल्लाह के 99 नाम है और हर नाम का एक खास मतलब है
2. मक्का एक ऐसी जगह है जहां पर सिर्फ मुसलमानों को ही जाने की इजाजत है।
3. मस्जिद वो जगह होती है जहां पर भी इबादत की जाती है।
4. मुसलमान का मतलब होता है जो अपनी ख्वाहिशों और जज्बात को अल्लाह के लिए कुर्बान कर दे।
5. हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आखिरी पैगंबर है अब उनके पास कोई पैगंबर या सन्देष्टा नहीं आएगा।

आप सभी को बकरीद मुबारकबाद
01/08/2020

आप सभी को बकरीद मुबारकबाद

BY WIKIPEDIAबकरीद (अरबी में عید الاضحیٰ; ईद-उल-अज़हा अथवा ईद-उल-अद्'हा - जिसका मतलब क़ुरबानी की ईद) इस्लाम धर्म में विश्...
29/07/2020

BY WIKIPEDIA

बकरीद (अरबी में عید الاضحیٰ; ईद-उल-अज़हा अथवा ईद-उल-अद्'हा - जिसका मतलब क़ुरबानी की ईद) इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का एक प्रमुख त्यौहार है। रमजान के पवित्र महीने की समाप्ति के लगभग ७० दिनों बाद इसे मनाया जाता है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार हज़रत इब्राहिम अपने पुत्र हज़रत इस्माइल को इसी दिन खुदा के हुक्म पर खुदा कि राह में कुर्बान करने जा रहे थे, तो अल्लाह ने उसके पुत्र को जीवनदान दे दिया जिसकी याद में यह पर्व मनाया जाता है। इस शब्द का बकरों से कोई संबंध नहीं है। न ही यह उर्दू का शब्द है। असल में अरबी में 'बक़र' का अर्थ है बड़ा जानवर जो जि़बह किया (काटा) जाता है। उसी से बिगड़कर आज भारत, पाकिस्तान व बांग्ला देश में इसे 'बकरा ईद' बोलते हैं। ईद-ए-कुर्बां का मतलब है बलिदान की भावना। अरबी में 'क़र्ब' नजदीकी या बहुत पास रहने को कहते हैं मतलब इस मौके पर अल्लाह् इंसान के बहुत करीब हो जाता है। कुर्बानी उस पशु के जि़बह करने को कहते हैं जिसे 10, 11, 12 या 13 जि़लहिज्ज (हज का महीना) को खुदा को खुश करने के लिए ज़िबिह किया जाता है। कुरान में लिखा है : हमने तुम्हें हौज़-ए-क़ौसा दिया तो तुम अपने अल्लाह के लिए नमाज़ पढ़ो और कुर्बानी करो।

त्याग का उत्थान

बकरीद का त्यौहार हिजरी के आखिरी महीने जुल हिज्ज में मनाया जाता है। पूरी दुनिया के मुसलमान इस महीने में मक्का सऊदी अरब में एकत्रित होकर हज मनाते है। ईद उल अजहा भी इसी दिन मनाई जाती है। वास्तव में यह हज की एक अंशीय अदायगी और मुसलमानों के भाव का दिन है। दुनिया भर के मुसलमानों का एक समूह मक्का में हज करता है बाकी मुसलमानों के अंतरराष्ट्रीय भाव का दिन बन जाता है। ईद उल अजहा का अक्षरश: अर्थ त्याग वाली ईद है इस दिन जानवर की कुर्बानी देना एक प्रकार की प्रतीकात्मक कुर्बानी है।

हज और उसके साथ जुड़ी हुई पद्धति हजरत इब्राहीम और उनके परिवार द्वारा किए गए कार्यों को प्रतीकात्मक तौर पर दोहराने का नाम है। हजरत इब्राहीम के परिवार में उनकी पत्नी हाजरा और पुत्र इस्माइल थे। मान्यता है कि हजरत इब्राहीम ने एक स्वप्न देखा था जिसमें वह अपने पुत्र इस्माइल की कुर्बानी दे रहे थे हजरत इब्राहीम अपने दस वर्षीय पुत्र इस्माइल को ईश्वर की राह पर कुर्बान करने निकल पड़े। पुस्तकों में आता है कि ईश्वर ने अपने फरिश्तों को भेजकर इस्माइल की जगह एक जानवर की कुर्बानी करने को कहा। दरअसल इब्राहीम से जो असल कुर्बानी मांगी गई थी वह थी उनकी खुद की थी अर्थात ये कि खुद को भूल जाओ, मतलब अपने सुख-आराम को भूलकर खुद को मानवता/इंसानियत की सेवा में पूरी तरह से लगा दो। तब उन्होनें अपने पुत्र इस्माइल और उनकी मां हाजरा को मक्का में बसाने का निर्णल लिया। लेकिन मक्का उस समय रेगिस्तान के सिवा कुछ न था। उन्हें मक्का में बसाकर वे खुद मानव सेवा के लिए निकल गये।

इस तरह एक रेगिस्तान में बसना उनकी और उनके पूरे परिवार की कुर्बानी थी जब इस्माइल बड़े हुए तो उधर से एक काफिला (कारवां) गुजरा और इस्माइल का विवाह उस काफिले (कारवां) में से एक युवती से करा दिया गया फिर प्ररांम्भ हुआ एक वंश जिसे इतिहास में इश्माइलिट्स, या वनु इस्माइल के नाम से जाना गया। हजरत मुहम्मद साहब का इसी वंश में जन्म हुआ था। ईद उल अजहा के दो संदेश है पहला परिवार के बड़े सदस्य को स्वार्थ के परे देखना चाहिए और खुद को मानव उत्थान के लिए लगाना चाहिए ईद उल अजहा यह याद दिलाता है कि कैसे एक छोटे से परिवार में एक नया अध्याय लिखा गया।

मसल्लाह एक लाइक तो बनता है।
28/07/2020

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ये फोटो कुछ साल पहले की है।
27/07/2020

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09/03/2019

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माशाल्लाह आप लोगो की दुवा से दो मजिल की मस्जिद बन रही है|नात शरीफ 👇 https://youtu.be/qdEv0xcvwDU
04/03/2019

माशाल्लाह आप लोगो की दुवा से दो मजिल की मस्जिद बन रही है|
नात शरीफ 👇
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https://youtu.be/O5v60X8CQKs
24/09/2018

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खुसबू नबी की शहर की आई कभी कभी(Full). भारत खुशहाल हमारा है. Tabish rehan naat sharif. Madarsa Islamia Sarisab Pahi Jalsa 2016. ...

https://youtu.be/t7BIhIctm8g
24/09/2018

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शराफत के असुलो से बगावत करने लगते हैं(Full). Tabish Rehan Naat Sharif. Madarsa Islamia Sarisab Pahi Jalsa 2016.

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