Singheshwar Temple

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नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय ॥ भावार्थ :जो शिव ना...
19/10/2018

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय ॥

भावार्थ :
जो शिव नागराज वासुकि का हार पहिने हुए हैं, तीन नेत्रों वाले हैं, तथा भस्म की राख को सारे शरीर में लगाये हुए हैं, इस प्रकार महान् ऐश्वर्य सम्पन्न वे शिव नित्य–अविनाशी तथा शुभ हैं। दिशायें जिनके लिए वस्त्रों का कार्य करती हैं, अर्थात् वस्त्र आदि उपाधि से भी जो रहित हैं; ऐसे निरवच्छिन्न उस नकार स्वरूप शिव को मैं नमस्कार करता हूँ। ।

॰॰ हर हर महादेव ॰॰दुर्गा पूजा के मद्देनज़र आज मंदिर व्य्स्थापक रवि कुमार झा 'संत' के अध्यक्षता मे सिंघेश्वर के अलग अलग य...
12/10/2018

॰॰ हर हर महादेव ॰॰
दुर्गा पूजा के मद्देनज़र आज मंदिर व्य्स्थापक रवि कुमार झा 'संत' के अध्यक्षता मे सिंघेश्वर के अलग अलग युवा संगठनों के जूझारू समाजसेवी युवाओं की बैठक हुई। जिसमें निर्णय लिया गया की सभी संगठन मिल कर पूरे मंदिर और अग़ल बग़ल के रास्ता का साफ़ सफ़ाई करेंगे। आपसे भी अपील हैं बाबा सिंघेश्वर मंदिर के स्वक्षता मे अपना श्रमदान दें। सम्भव हो तो सुबह 6 बजे मंदिर परिसर पहुँचे।

10/02/2018
सिंघेश्वर स्थान: हमारे क्षेत्र का धरोहर से कम नहीं.. हमारे यहाँ सभी धर्म-जाति के लोग किसी न किसी तौर से जुड़े हुए हैं इस ...
06/02/2018

सिंघेश्वर स्थान: हमारे क्षेत्र का धरोहर से कम नहीं.. हमारे यहाँ सभी धर्म-जाति के लोग किसी न किसी तौर से जुड़े हुए हैं इस धरोहर से... बहुत जल्द सिंघेश्वर महोत्सव और प्रसिद्ध सिंघेश्वर मेला का आयोजन होने वाला है.. जिला प्रशासन, मंदिर न्यास समिति के साथ हर एक जिलावासी का कर्तव्य हैं कि साफ़ सुथरे वातावरण मे मेला का स्वागत करे. धार्मिक भावनाओं से पूर्ण यह महोत्सव पुरे देश मे अपने मुकाम पर पहुंचे. हर हर महादेव

बाबा सिंघेस्वर के लिए स्वेक्षा दान के लिए भारतीय स्टेट बैंक के सौजन्य से ऑनलाइन दान की सुविधा उपलब्ध करवाई गयी हैं.. कृप...
04/01/2018

बाबा सिंघेस्वर के लिए स्वेक्षा दान के लिए भारतीय स्टेट बैंक के सौजन्य से ऑनलाइन दान की सुविधा उपलब्ध करवाई गयी हैं.. कृपया नीचे दिए लिंक पर क्लिक कर आप दान कर सकते हैं.. हर हर महादेव! !
आइये सभी मिल कर विकसित मधेपुरा के क्षेत्र एक कदम आगे बढ़ाये..
http://www.singheshwartemple.org/

NEWS: यह मंदिर गवाह है सनातन और बौद्ध धर्म के समागम का: सिंहेश्वर के प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर के बाहरी उत्तरी दीवार पर ...
28/03/2017

NEWS: यह मंदिर गवाह है सनातन और बौद्ध धर्म के समागम का: सिंहेश्वर के प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर के बाहरी उत्तरी दीवार पर उत्कीर्ण महात्मा बुद्ध की प्रतिमा के स्थान पर भगवान् बुद्ध की नयी संगमरमर की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
इस बावत मंदिर न्यास समिति के सचिव सह उप विकास आयुक्त मिथिलेश कुमार ने बताया कि प्रतिमा निर्माण के लिए बनारस के मूर्तिकार को आदेश दिया जा चुका है।

महात्मा को भगवान बनाने का साक्ष्य है सिंहेश्वर का शिव मंदिर: कोसी की विभीषिका यहाँ के ऐतिहासिक धरोहरों को लील चुकी है। इस क्षेत्र में बिरले धरोहर ही दृश्य हैं, शेष या तो कोसी मैया बहा ले गयी है या फिर अपार बालुका राशि के नीचे कहीं दबी होगी। सिंहेश्वर का शिव मंदिर प्राचीन है और श्रृंगी ऋषि, जिन्होंने राजा दशरथ के लिए पुत्रेष्ठी यज्ञ करवाया, द्वारा स्थापित माना जाता रहा है। यह मंदिर एक और ऐतिहासिक और धार्मिक तथ्य का आज भी गवाह है कि महात्मा बुद्ध को अवतार मानकर उन्हें भगवान् का दर्जा देकर बौद्धों को सनातनी बना या मान कर इस क्षेत्र में पुनः सनातन धर्म की पुनर्स्थापना की गयी थी।

उत्कीर्ण है भगवान बुद्ध की प्रतिमा: सिंहेश्वर के प्राचीन मंदिर का निर्माण और जीर्णोधार एक व्यवसायी हरी चरण चौधरी ने करवाई थी। पुनर्निर्माण की परंपरा रही है कि इसके धार्मिक प्रतीकों और प्रतिमाओं को अक्षुण रखा जाता है। वर्तमान मंदिर चौकोर है और बीच में स्थित बाबा भोले का मंदिर है। शिव मंदिर के बाहरी दीवार पर अन्य देवी देवताओं के अतिरिक्त भगवान् बुद्ध की प्रतिमा भी उत्कीर्ण है। भगवान बुद्ध की इस प्रतिमा का पूजन लोग भक्तिभाव से करते रहे हैं।

क्या है मान्यता?: यहाँ श्रद्धालुओं और विद्वानों के बीच यह मान्यता भी है कि महिषी के विख्यात विद्वान मंडन मिश्र और उनकी विदुषी पत्नी भारती बौद्ध धर्मी थे। सनातन धर्म के नायक शंकराचार्य ने उन्हें शास्त्रार्थ की चुनौती दी थी। शर्त यह भी तय हुआ कि जो पराजित होगा वह विजेता धर्म का अनुयायी बन जायेगा। शास्त्रार्थ हुआ और अंततः मंडन मिश्र एवं भारती पराजित हो गए। वे बौद्ध से सनातनी बने। लेकिन जन सामान्य को सनातनी बनाना मुश्किल था। परिणामतः धार्मिक मंत्रणा और विचार विनिमय के बाद महात्मा बुद्ध को भगवान का एक अवतार मान लिया गया। बौद्ध मठों को तांत्रिक पीठों का रूप दिया जाने लगा और इसी क्रम में मंदिरों में भगवान बुद्ध की प्रतिमा उत्कीर्ण की जाने लगी। बाद में कोसी की विभीषिका ने अन्य मंदिरों को तो धीरे धीरे लील लिया। लेकिन सिंहेश्वर के शिव मंदिर के बाहरी दीवार पर आज भी उत्कीर्ण की गयी भगवान् बुद्ध की प्रतिमा विराजमान है। http://www.madhepuratimes.com/2017/03/idol-of-buddha-in-singheshwar-temple.html

* यह मंदिर गवाह है सनातन और बौद्ध धर्म के समागम का : सिंहेश्वर के प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर के बाहरी उत्तरी दीवार पर उत्कीर्ण महात्मा...

25/10/2016

विश्वास: ॐ गुरुवे नमः ।अरण्यन वन में देव लोक शिवधाम से अज्ञात भेष में महादेव को उनकी तलाश में आये देव इंद्र और विस्णु ने हिरण वेश में यहाँ तलाशा तो उनके हाथ में श्रृंग रह गया तो उसकी यही पर स्थापना कर वे दोनों देव लोक चले गए ।उनकी के नाम पर कलांतरण में सृंगहेश्वर पड़ा जो अब सिंघेश्वर है यही पर श्रृंगी रिषी ने महाराज दशरथ के लिए पुत्र अंगिस्थि यघ किया ।अभी भी मंतयव है जिनका विवाह इस मंदिर प्रागण में होता है अगर वो शिव वाश हो तो अवश्य उनको प्रथम संतान पुत्र ही होता है ।साथ ही यहाँ की शिवलिंग का रंग कजली भूरा और काला साथ ही यदि शिव लिंग किशी कारणवश खंडित हो तो उसके चिन्ह गायब हो जाते है साथ ही माना जाता है की यह ब्र्ह्मा विष्णु शिव विराजमान है ।अस्तु ।हर हर महादेव।

बिहार पर्यटन विभाग और मधेपुरा प्रशासन के दुवारा तीन दिवसीय श्री सिंघेवर महोत्सव में आप सपरिवार आमंत्रित हैं. अपने परिवार...
09/03/2016

बिहार पर्यटन विभाग और मधेपुरा प्रशासन के दुवारा तीन दिवसीय श्री सिंघेवर महोत्सव में आप सपरिवार आमंत्रित हैं. अपने परिवार के साथ आनंद ले भक्तिमय माहोल में..

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