जय माँ चामुण्डा ! जय माँ मङ्गला !! जय माँ दुर्गा !!! 🙏
चामुण्डे ! मङ्गले ! दुर्गे ! पचही ग्राम वासिनी । त्वं देवि जगन्माता , त्रिधायै नमोऽस्तु ते ।।
"लगभग" १२ वीं शताब्दी में मधुबनी जिलाकऽ पचही ग्राम मऽ "स्वनामधन्य". - " दैशिकेन्द्र" - वर्धमान उपाध्याय "महाभाग" विख्यात सिद्ध साधक भेलाह ! "मिथिला" मऽ प्रत्यक्ष साक्षात् -सदेह-साकार- 🚩"चामुण्डा"🚩 कऽ अवतरणकऽ नित्य लील
ा परम्परा रहल अछि !
उपाध्यायजी कऽ "साधना-तप"- सऽ अभिभूत भऽ . वरदान- स्वरूप जगत कल्याणक निमित्तकऽ " त्रिपुरा" स्वयं तीन टा .पुत्रीकऽ रूप मऽ लोक -लीला हेतु "अवतरित" भेली ! तिनु. कन्या. कऽ. नाम -- 🙏"श्री चामुण्डा, जय मङ्गला, आओर. जय दुर्गा.🙏 राखल गेल!. साक्षात् जगदम्बा. होयबाक कार णे. हुनकर तेज. अलौकिक आओर अवर्णनीय छल. !
एक दिन अपन पिता कऽ पूजन हेतु फुल तोरै लऽ. पुष्प वाटिका🌹 तिनु बहिन.गेल. रहथि, ताहि काल मऽ मुगल (सैनिककऽ)🥷 पलटन कऽ दृष्टि पड़ल आ ओ घेरबाक प्रयाश केलक !
तत्क्षण् -तिनु कन्याकऽ आज्ञा सऽ पृथ्वी🌍 फाटि (विदिर्ण) गेल, पृथ्वी कऽ गर्भ में तिनु शक्ति. समाहित भऽ गेली , पृथ्वी कऽ फटला सऽ भयंकर गर्जना कऽ. सङ्ग. भीषण वज्रपात🌩️ होमय लागल ! सब मुगल सैनिक सव. दल-बल- संग भस्मीभूत भऽ गेल, प्रकृति में घोर- वात् -क्षोभ उत्पन्न भेल, पुरा उपवन अन्हार मऽ परिवर्तित भऽ गेल !
घुरि कऽ नैय एला पर ग्रामीण सव अति चिंतित भऽ सगरै ताकय लागलखिन्ह! निशा-भाग मऽ प्रत्यक्ष रुप मऽ स्वयं भगवती शोकाकुल अपन पिताजी कऽ समक्ष उपस्थित भऽ हुनका पूर्व वरदान वचन कऽ स्मरण करबैत सब वृतांत कहलखिन्ह ! तदुपरांत उपाध्याय जी संग सब समाज निर्दिष्ट भूमिस्थ स्थलऽ , (स्थान पर तीनु जगदम्बाकऽ तीन ठाम बहुत. रास सघन केश देखलथि, ओहिठाम पीड़ीकऽ🙏निर्माण कऽ अर्चन-पूजन,यजन होयत अछि *कन्यापूजन, "बलि- प्रदान" आओर सप्तशती,, देवीभागवत कऽ पारायण एवं नवाह🚩 होयत अछि !
नित्य प्रति असंख्य चमत्कार कऽ अनुभूति-परक कथा......... क्रमशः-