Alpha Prayer Tower

Alpha Prayer Tower John 3: 16
For God so loved the world, that he gave his only begotten Son, that whosoever believeth in him should not perish, but have everlasting life.

07/08/2026

*✝️🛐रोज़ की रोटी।✝️🛐*

*ईमान वह नहीं है जो फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सएप पर है, विश्वास वह है जो हक़ीक़त की सख़्त ज़मीन पर नज़र आए।* ईमान की परख, लाल समुंदर के साहिल, शेरों की मांद, और आग़ के भट्टे, में होती है। *जो चार दिन के मरे हुए लाज़र की कब्र भी कायम रहे, ईमान उसी का नाम है।* ऐसा माना जाता है कि मौत का डर सबसे बड़ा डर है, उस दहलीज़ तक तो कभी-कभी साया भी साथ नहीं निभाता। पॉलूस बड़े दुख के साथ लिखता है, मेरे आख़िरी प्रत्युत्तर के समय किसी ने मेरा साथ नहीं दिया। *भजन 48:14 में लिखा है, वह परमेश्वर सदा सर्वदा हमारा परमेश्वर है, वह मृत्यु तक हमारी सहायता करेगा। ख़ुदा हमारे अंदर कुछ और नहीं, बस ऐसे ही चट्टान के जैसा मज़बूत ईमान देखना चाहता है।* मैं और मेरी पत्नी रोज़ ही दुआ में कहते हैं, ख़ुदा आप यहां तक लेकर आए हैं, आप ही दिल की आख़िरी धड़कन, और सांस तक हमारी रहनुमाई करेंगे। *ख़ुदा साथ है, तो लाल समुंदर दो भाग हो जाएगा, वो है तो शेरों के मुंह बंद हो जाएंगे, वो साथ है तो आग़ के भट्टे में भी टहलने का तज़ुर्बा हासिल होगा। बीमारी है तो शिफ़ा है, समस्याएं हैं तो समाधान है, शैतानी हमले हैं तो, आश्चर्यकर्म हैं।— बिशप डॉ० हैरिस वॉल्टर।*

*🙏शालोम।😇*

06/08/2026

*💒रोज़ की रोटी।💒*

*ख़ुदा ने जो कुछ किया और करता है, उसके पीछे एक मक़सद ज़रूर होता है।* ख़ुदा ने फ़रमाया आदम का अकेला रहना अच्छा नहीं, मैं उसके लिए एक सहायिका बनाऊंगा जो उससे मेल खाए। *हव्वा को बनाने का मक़सद सिर्फ़ वैवाहिक जीवन नहीं था, एक साथी जिसके साथ आदम मानसिक और आत्मिक संगति कर सके।* ख़ुदा ने कलीसिया को सिर्फ़ इबादत करने के लिए नहीं बनाया है। यूनानी शब्द इक्लिज़िया का मतलब है विश्वासियों का समूह। *एक ऐसा समूह जो मानसिक और आत्मिक सहभागिता में रहता है। जहां ख़ुशियों और दुखों को बांट लिया जाता है।* जहां हंसने वालों के साथ हंसा, और रोने वालों के साथ रोया जाता है। कलीसिया का अर्थ है जहां ज़ख़्मों पर मरहम लगाने वाले, और बहते आंसुओं को पोंछने वाले हैं। *जो परमेश्वर की सहभागिता में है, वो ही लोगों की संगति में रहता है। लेकिन अफ़सोस कलीसिया अपने मक़सद से भटक गई है, अब मेल मुलाक़ात की वो अहमियत नहीं रही। दोस्तों और रिश्तेदारों की जगह, टीवी और मोबाइल ने ले ली है।— बिशप डॉ० हैरिस वॉल्टर।*

*🙏शालोम।😇*

03/08/2026

Psalm 92 : 12
The righteous shall flourish like the palm tree: he shall grow like a cedar in Lebanon.

03/08/2026

भजन संहिता 92:12
धर्मी लोग खजूर की नाईं फूले फलेंगे, और लबानोन के देवदार की नाईं बढ़ते रहेंगे।

29/07/2026

🙏🏻 Praise the Lord 🙏🏻
🌝 Good Morning 🌝
आमोस 5:14
हे लोगो, बुराई को नहीं, भलाई को ढूंढ़ो, ताकि तुम जीवित रहो; और तुम्हारा यह कहना सच ठहरे कि सेनाओं का परमेश्वर यहोवा तुम्हारे संग है।

Seek good, not evil, that you may live. Then the LORD God Almighty will be with you, just as you say he is.

Amos 5:14
God bless you 🙌🏻

27/07/2026

*🌿🍁रोज़ की रोटी।🍁🌿*

*विश्वास और आशीष सिक्के के दो पहलू जैसे हैं। इन्हें कभी अलग नहीं किया जा सकता, विश्वास है तो आशीषें हैं, आशीषें हैं तो विश्वास और मज़बूत हो जाता है। विश्वास करना आपका काम है, और बरकत देना ख़ुदा का।* ईमान और बरकत, रिले रेस के बैटन के जैसे हैं, जिसे आगे वाले के हवाले करना आपकी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है। इब्राहिम ने ख़ुदा पर ईमान रखा, वह विश्वास में इतना मज़बूत था, कि अपने एकलौते बेटे को बलिदान करने से भी पीछे नहीं हटा। इब्राहिम की मौत के साथ, उसका विश्वास भी ख़त्म नहीं हुआ। बल्कि वह इज़हाक और याकूब और उनके वंशों में भी बढ़ता गया। इसलिए इब्राहिम को विश्वासियों का पिता कहा जाता है। *आशीष पाना ही काफ़ी नहीं है, दूसरों के लिए आशीष की वजह बनना भी ज़रूरी है।* इब्राहीम से इज़हाक, और इज़हाक से याक़ूब तक आशीष का सिलसिला निरंतर चलता रहा। लाबान ने याकूब से कहा, मैने अनुभव से जान लिया है कि, यहोवा ने तेरे कारण मुझे आशीष दी है (उत्पत्ति 30:27)। *आप विश्वासी हैं, तो क्या आपकी वजह से कोई विश्वास में आया है? आप आशीषित हैं, तो क्या आप दूसरों के लिए आशीष की वजह हैं?— हैरिस वॉल्टर।*

*👍शालोम।😇*

27/07/2026
22/07/2026

*🍃🪻रोज़ की रोटी।🪻🍃*

*पाक कलाम हुक्म न मानने के परिणामों से भरा पड़ा है।* आदम और हव्वा ने ख़ुदा के हुक्म को नहीं माना, और उसके भयानक परिणाम भुगतने पड़े। सुलेमान के बाद इस्राएल में गुनाह और बुत परस्ती बढ़ती गई, लोगों ने ख़ुदा की चेतावनी को नज़रंदाज़ किया, और ख़ुदा ने उनको अश्शुरियों की गुलामी में भेज दिया। यहूदियों के गुनाहों की वजह से यरूशलेम पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया, और यरूशलेम का मंदिर भी नाश हो गया। बात यहीं नहीं रुकी, यहूदियों ने फिर गुनाह किया और समझने के बाद भी नहीं माना, और सत्तर साल की गुलामी में भेज दिया गया। मसीह यीशु ने दावे के साथ कहा था, यरूशलेम पूरी तरह बर्बाद कर दिया जाएगा, मीका नबी ने भविष्वाणी की थी, तुम्हारे कारण सिय्योन जोतकर खेत बनाया जाएगा, और यरूशलेम डीह ही डीह हो जाएगा (मीका 3:12) लेकिन लोगों ने इसे भी नज़रअंदाज़ कर दिया और सन सत्तर एo डीo तक रोमियो ने यरूशलेम को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। *अब हमारी बारी है, मसीहा के दूसरे आगमन की नबूवतें पूरी होने लगी हैं, अगर चिन्हों को नज़रंदाज़ किया, तो भारी कीमत चुकानी पड़ेगी, नर्क की आग हुक्म न मानने वालों के इंतज़ार में है। यहूदियों को तो बार-बार मौका दिया गया, लेकिन हमारे पास सिर्फ़ और सिर्फ़ एक ही अवसर है।— बिशप डॉ० हैरिस वॉल्टर।*

*🙏शालोम😇*

19/07/2026

*💕✝️रोज़ की रोटी।✝️💕*

*लोग मसीह यीशु के बारे में बहुत कुछ जानते हैं, अहम सवाल यह है उसे समझते कितना हैं?* यहूदा मसीह यीशु के साथ, लगभग साढ़े तीन साल तक रहा। उसे तो शायद यीशु के एक-एक उपदेश, जुबानी याद होंगे। सुना तो सही, याद भी कर लिए, लेकिन समझा नहीं। मत्ती के सत्ताईसवें अध्याय के चौथे पद में लिखा है, और कहा, मैने निर्दोष को घात करने के लिए पकड़वाकर पाप किया है। उसने वो चाँदी के सिक्के भी मंदिर में फेंक दिए। *उसको अपने गुनाह का एहसास तो था ही, उसके अंदर पश्चाताप की भावना भी थी।* आगे लिखा है, उसने जाकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। काश वो रविवार की सुबह तक रुक जाता, *यीशु का मुर्दों में से जी उठना, उसकी आत्मग्लानि को खत्म कर देता।* यीशु के साथ रहकर भी, वो यीशु को समझ नहीं पाया। *उसने यीशु को बेचकर ग़लती की, आत्महत्या कर के उससे भी बड़ी ग़लती की। अगर वो यीशु के पास लौट आता, तो यीशु उसको गले से लगा लेता। उसके मुआफ़ी के जज्बे के आगे, समुंदर भी एक कतरे के बराबर है। उसकी मुहब्बत की तुलना में, आसमां भी ज़र्रे के जैसा है। आप जब भी उसके पास लौटकर आएं, उसका दरवाज़ा खुला पाएंगे।— बिशप डॉ० हैरिस वॉल्टर।*

*🙏शालोम।😇*

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