23/08/2026
सावन चौथे सोमवार पर होगा सहस्रार्चन
भगवान शिव पर शिव सहस्रनाम (1008 नाम) का पाठ करते समय प्रत्येक नाम के साथ एक-एक कलश जल बिल्वपत्र (बेलपत्र), पुष्प या अक्षत (चावल) शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है। इसे सहस्रार्चन या सहस्रनाम पाठ भी कहते हैं। शुद्ध मन और तन के साथ यह अनुष्ठान किया जाता है।तैयारी और सामग्रीस्थान: शिवालय (शिव मंदिर)।सामग्री: 1008 (या यथासंभव) साफ़ बेलपत्र, पुष्प, अक्षत, जल, और दीपक।समय: सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।विधिप्रथम चरण: शिवलिंग के सामने बैठकर दीप प्रज्वलित करें। पहले जल या पंचामृत से स्नान कराएं।द्वितीय चरण: 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का स्मरण कर संकल्प लें।तृतीय चरण: शिव सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ शुरू करें। हर एक नाम (या श्लोक के प्रत्येक पद) के उच्चारण के बाद "नमः" बोलते हुए एक बेलपत्र या पुष्प शिवलिंग पर समर्पित करते जाएं।अंतिम चरण: पाठ पूरा होने के बाद भगवान शिव की आरती करें, भूलचूक के लिए क्षमा मांगें और प्रसाद बांटें।यदि आप चाहें तो मैं आपको शिव सहस्रनाम के आरंभिक नाम, पूजा का विशेष संकल्प या नियमों के बारे में और विस्तार से जानकारी दे सकता हूँ।