RamSharnam Privar

RamSharnam Privar वृद्धि-आस्तिक भाव की, शुभ मंगल संचार।
अभ्युदय सद् - धर्म का , राम नाम विस्तार॥

𑁍 “दीपावली” के शुभ पर्व की सभी साधकों को हार्दिक बधाई 𑁍
21/10/2025

𑁍 “दीपावली” के शुभ पर्व की सभी
साधकों को हार्दिक बधाई 𑁍

राम राम जी !!! वीरवार , 2 अक्टूबर 2025                                                                                प्...
02/10/2025

राम राम जी !!!
वीरवार , 2 अक्टूबर 2025
प्रात: काल की सभा मे पूज्य श्री कृष्ण जी महाराज (पिता जी) और पूज्य श्री रेखा जी महाराज (माँ जी) के सानिध्य मे ऋषि नगर लुधियाना, में दस दिन से चल रहे रामायण ज्ञान यज्ञ, सेवा यज्ञ और जप यज्ञ की पूर्णाहुति श्री रामायण जी में भरत-मिलाप-काण्ड में चौपाइयों से की गई।

जिस मे हजारों की संख्या में साधकों ने शामिल होकर गुरुजनों का आशीर्वाद लिया।

पूज्य श्री रेखा जी महाराज (माँ जी) द्वारा श्री रामायण जी का गायन अद्धभुत था।

सभी साधक माँ जी द्वारा गाए भजन "सभी मिल मंगल गाओ रे अवध में राम आये हैं" भावविभोर होउठे।

पूज्य श्री पिता जी महाराज ने रामायणसार में भरत-मिलाप-काण्ड में से चौपाईयों का वर्णन करते हुए कहा कि:

जब माँ सीता जी को रावण की कैद से मुक्त कराया गया तो राम जी ने कहा सीता पालकी से चलकर आए क्योंकि:

विपत समर विवाह यज्ञ में जो, पति सह नारी जब भी है सो । उचित नही उस पर हो घेरा, चरित्र आदर है बहुतेरा॥

पतिव्रता शुभशीला नारी, धर्मरता जो गुण गण-क्यारी।
उन पर बन्धन नही सुहाते, उनके घेरे चरित कहाते ॥

पत्नी जो होती है वह धर्मपरायणता होती है यदि वो किसी समर में जाए, विवाह में जाए, कहीं भी जाए उसका चरित्र ही उसकी साख होती है वहां कोई पर्दों और दीवारों की ज़रूरत नही हुआ करती।

[ अपने अपनों पै जब आते, भेद-भाव नही रक्खे जाते ]

पूज्य पिता जी ने कहा:, कि जब अपनों पर बात आती है
तब भेद-भाव नही नही रखने चाहिए।

राम जी कहते हैं कि सीते जो मेरा कर्तव्य था जो एक
पत्नी का पति होने के नाते जो मेरा फर्ज़ था वो मैने निभाया।

शत्रु-हनन कर तुझे छुड़ाया, मैंने पतित्व ठीक निभाया ।
पुरुषार्थ से होता जो भी, किया गया मुझ से तो सो भी॥

सफल हुआ पुरुषार्थ मेरा, सर्व बन्धन कट गया तेरा॥
अब जहाँ तुम चाहो वहां तुम जा सकती हो ।

राम जी के ऐसे वचन सुनकर माँ सीता आवेश में आ जाती हैं ओर कहती हैं:

करो विश्वास न हूँ मैं वैसी, कही गई हूँ तुझ से जैसी ।
लख कर कोई चरित-विहीना, सबको कहना कुलटा हीना ॥

स्त्रीमात्र को दोष लगाना, कर्म निपट यह है अनजाना ।
मेरे मन के हो कर भेदी, फिर क्यों होते हो यों खेदी ॥

यदि तव संशय मैं लख लेती, तो तन वहीं भस्म कर देती।
ओछे नरवत् हो कर कोपी, अनहोनी मुझ पर आरोपी ॥

जनक-सुता मैं भी कहलाऊँ, दोष का संशय सह न पाऊँ ।
पास खड़े लक्ष्मण को बोली, मेरी तो अति दुर्गति हो ली ॥

अपवाद मिथ्या सहा न जाता, जीना जग में मूल न भाता ।
अच्छा यही है मैं जल जाऊँ, तन अपने को भस्म बनाऊँ ॥

राम जी की आज्ञा पा कर लकड़ी चीनी जाती है
जब माँ सीता जी ने उस अग्नि में प्रवेश किया:,

मंत्र-मुग्ध समा वह ज्वाला, शान्त हुई सह ज्वाला माला ।
सिया प्रकट हुई तब त्यों ही, सोना कुन्दन होता ज्यों ही ॥

जनता ने सो देखी सीता, पतित पावनी परम पुनीता ।
भाव भरी भगवती भवानी, जगन्मात जगदम्बा जानी ॥

पूज्य श्री पिता जी महाराज जी ने सभी सेवकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि:

सेवक कहे नाम के भूखे , लगते दाम उन्हें रूखे सूखे

[जो जन मन से सेवा साधे , स्वार्थ तज कार्य आराधे
सुर-सम्पत भी कभी ना चाहे , तन मन धन दे धर्म कमाये
महावीर कर्मी महा त्यागी , भक्तराज वह है बड़भागी
ऐसे सेवक सुजन सहारे , होते कार्य जग मे सारे
जाती देश की सब बन आती , धर्म कर्म खेती फल लाती
कठिन कर्म है सेवक होना, सत्य धर्म हित तन तक खोना
होना कभी न स्वामी द्रोही, स्वार्थी लम्पट क्रोधी मोही]
पूज्य श्री रेखा जी महाराज (माँ जी) ने रामायण-परिषट में
श्री स्वामी जी महाराज जी के दोहे:

रामायण कली कमल में,
है सुगन्ध मकरन्द।
हो नहीं कभी मन्द यह,
याचे सत्यानन्द ।।

रामायण पारायण सेती , फलती पुण्य कर्म की की खेती विघ्न हरण हो रहे न बाधा , जावे परम देव आराधा Asking कलि कमल मे , है सुगन...
02/10/2025

रामायण पारायण सेती , फलती पुण्य कर्म की की खेती
विघ्न हरण हो रहे न बाधा , जावे परम देव आराधा

Asking कलि कमल मे , है सुगन्ध मकरन्द ।
हो नही कभी मन्द यह , याचे सत्यानन्द ॥

पूज्य पिताजी महाराज और पूजनीय माँजी महाराज
के सानिध्य मे हुई रामायण ज्ञान यज्ञ की पूर्णाहूति की
सभी साधकों को बधाई।

राम राम जी !!! पूज्य बड़े पिताजी के जन्मोत्सव (2 अक्टूबर)की सभी साधकों को हार्दिक बधाई Guruvar would also have become a b...
02/10/2025

राम राम जी !!!
पूज्य बड़े पिताजी के जन्मोत्सव (2 अक्टूबर)
की सभी साधकों को हार्दिक बधाई

Guruvar would also have become a blessing who is father and mother.

The relation of Guru and disciple is with all of us and this relationship with you is unbreakable.

Along with being a guru, you considered all of us not only as disciples but also as your children and played the role of a father and gave utmost love and affection.

The founder of 'Shree Ram Sharnam' Gohana, the embodiment of service, simran and devotion, Hansraj ji was born on 2 October 1916 in a prosperous Vij family in Mandi Chinot district Jhang (Pakistan).

He had received Sanatani Sanskars, faith in God and devotion in 'Gudhti' only because his father Shri Gopal Das and mother Shrimati Laxmi Devi were of very religious nature and were fully interested in the work of Dharma Karma.

Pita ji was only eight years old when his father's shadow rose from his head, but who knew that this son without a father would eventually become famous as the 'father' of his devotees.

Under the tutelage of his grandfather Shri Barkat Shah, he learned to keep business and accounts in order and with it worldly wisdom. He also learned the habit of doing even the smallest tasks with promptness and also got the values ​​of hard work and honesty from him. In the personality of the devotee, there is the spiritual practice of a seeker, the hard labor of a farmer and the professional acumen like that of a Bania.

By great coincidence, one gets the contact and proximity of a true Guru.

Those disciples are very fortunate who get the blessings of their guru.
One such supremely fortunate devotee was Hansraj ji who received immense affection, affection, trust and protection from his Gurudev Shri Swami Satyanand Maharaj and whose blessings remained on him forever.

In the year 1934, when he was only 18 years old, Swami Satyanand ji had come to Chak Jhumra.

The devotee immediately reached the Arya Samaj temple where Swamiji was staying.

There was silence for some time.

Perhaps the time set by destiny had come in which the fate of man is sure to rise.

At that very moment he took initiation from Swamiji Maharaj on the name of Ram and completely surrendered himself at his feet.

Giving his blessings, Gurudev said, "Spiritual earnings are useful for birth after birth. Just as the money deposited in the bank is returned with interest, Naam Jaap is the capital deposited in that bank whose bankruptcy never comes.

Earn a lot of that income, worship and meditate a lot, do simran. Simran removes bad qualities, business progresses.

The mind gets peace and strength, fearlessness is communicated. Make service the basis of life and remember, the higher the servant.

The son of devotee Hansraj ji Maharaj and late Kaushalya Devi ji, Shri Krishna ji, like his revered mother and father, is very humble, soft spoken, easy and simple.

He got the support of a true saint from the very first touch of his father.

How fortunate is the child Krishna, brought up in such a spiritual and Ramamay environment, whom Swami Satyanand ji cradles in his arms, caressed him on his lap and fulfills his childish desires.

The biggest irony of life is that for those whom we love, in whose pure shadow we sit and maintain our lives, it never strikes for them that they can be separated from us at any time.

“We used to think the same way about father, but on September 4, 2014, father finally got absorbed in Ram forever.

Lakhs of his devotees felt the sad feeling that the shadow of his father had been lifted from his head. In the last two years there has not been a moment when all the worshipers of the name of Ram in the formless form of Father have not been blessed. The mighty light merged into the eternal flame.

Pujya pita ji established Swami Satyanand Public School, Swami Satyanand Hospital and Sanjeevani (Natural Healing Center) at Shree Ram Sharnam Gohana. Apart from this, Ram Sharnam Hospital in Amritsar, Mata Kaushalya Hospital in Abohar, Sewa Sadan near Dayanand Medical Hospital in Ludhiana have today become the places of unmatched service.

𑁍 राम राम जी 𑁍𑁍 रामायण ज्ञान यज्ञ 𑁍 1 अक्तूबर  2025 𑁍𑁍 “नज़दीक आयकर भवन”, ऋषि नगर, लुधियाना 𑁍
01/10/2025

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30/09/2025

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30/09/2025

राम राम जी...

मंगलावार , 30 सितम्बर , 2025

पूज्य पिताजी महाराज एवं पूज्य माँ जी महाराज
के पावन सानिध्य मे ऋषि नगर लुधियाना मे
चल रहे रामायण-ज्ञान-यज्ञ मे आज श्री सुन्दरकाण्ड
पाठ की पूर्णाहुति की गई।

पूज्य पिता जी ने आज के शुभ दिवस पर सभी
के लिए जन कल्याण हेतु गुरुजनों
से कृपा, मेहर और आशीर्वाद की प्रार्थना की।

उन्होने श्री सुन्दरकाण्ड जी के पाठ की चौपाइयों का
वर्णन करते हुए कहा कि:
जब हनुमान जी को माँ सीता जी का पता नही लगा
तब वह निराशा मे आ गए, मैं यहां पत्ते खाकर
अपना गुजारा तो कर लूँगा लेकिन अपने गुरु के पास
असफल होकर नही जाऊँगा। हम सब की जिंदगी मे
निराशा के बादल आते ही आते हैं (Depretion)
में चले जाते हैं। तब हनुमान जी को दिव्य-वाणी हुई
हे ! वीर हनुमान जब तक श्वास तब तक आस।

पूज्य पिता जी ने भक्त का वर्णन करते
हुए कहा कि भक्त कैसा होना चाहिए ?

[ जगत् में होते भक्त बहुतेरे,
कोप कपट कली मल के डेरे
दम्भ आडम्बर रच दिखाते,
वेश केश बहु रूप बनाते
नव नव रचते मार्ग माया,
फिरते पाप कर्म की काया]

[पर जो होते भक्त सियाने, कर्म गुणों से जाते जाने ]

उन्होने कहा कि हमारे अन्दर जोश, हिम्मत, उत्साह
होना चाहिए। हनुमान जी को जब रावण के दरबार
में लेकर गए तो हनुमान जी राई भर भी नही कांपेे
मगर जोश और हिम्मत के साथ-साथ बुद्धि का भी
उपयोग करना है।

[ बुद्धि काम में जो जन लाते, पहले पूरा वार चलाते।
बनते बहुधा वही विजेता, साहसवान् जनों के नेता ]।

[राई भर हनुमान् न कांपे, थके डरे नही, न तो हांपे
डरते जो ही मरते सो ही, वीर जन को डर नही कोई]

पूज्य माँ जी महाराज द्वारा श्री सुन्दरकाण्ड पाठ की
चौपाइयों का गायन मधुर एवं अद्धभुत था ।

रामायण-ज्ञान-यज्ञ, पूर्णाहुती: शनिवार , 12 अक्टूबर को
प्रातः 8:00 से 10:00 से बजे होगी।

𑁍 राम राम जी 𑁍𑁍 रामायण ज्ञान यज्ञ 𑁍 29 सितम्बर  2025 𑁍𑁍 “नज़दीक आयकर भवन”, ऋषि नगर, लुधियाना 𑁍
29/09/2025

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