07/05/2020
कैसे होते है दुश्मन धनु लग्न वालों के
धनु लगन का स्वामी बृहस्पति होता है यह गुरु की अग्नि तत्व राशि है यहाँ आपको तपना है गुरु यहाँ आपको मेहनत के लिए प्रेरित करता है लग्नेश और मन का स्वामी गुरू ही है जैसी आत्मा है वैसा ही निर्मल मन होता है !
कमजोर गुरु और ताक़तवर गुरु में क्या अंतर होता है गुरु धन संतान पति भाग्य कर्म और लाभ इन चीज़ों का कारक होता है अगर आपकी कुंडली में अच्छा हुआ तो यह भाव अच्छे हो जायँगे नहीं तो कमजोर हो जायगे !
भाव स्वामी अपनी स्थिति के अनुसार आपको फल करेगा लकिन उतना अच्छा नहीं आप बोलोगे वो ग्रह अच्छा था फिर भी उतना अच्छा परिणाम नहीं आया क्योकि कारक कमजोर है गुरु अगर कमजोर होगा वो कुछ नहीं करेगा आपको पूजा पाठ में लगा देगा !
अगर स्ट्रांग हुआ आपको पैसा देगा अच्छी जगह शादी करवाएगा ,भाग्य को और कर्म को चमका देगा आपको आपकी मेहनत का फल देगा प्रतिभाशाली बना देगा आपके सम्बन्ध काफी उच्च वर्ग से करवा देगा । क्योकि भगवान् शिव ने बृहस्पति को कुंडली में 12 भाव में से 6 भाव का अधिकार दिया है 6 भाव आप अकेले रूल करोगे ।दोस्तों धनु लगन के लोगो की वाणी कड़वी होती है वो बहुत कड़वा बोलते है
अगर शनि वाणी स्थान पर राहु और बुध के साथ हुआ और गुरु 8 भाव में ऐसा इंसान काली जुबान हो जाता है और अगर चंद्रमा भी शनि राहु बुध के साथ हुआ दूसरे भाव में फिर तो जो बुरा बोल दिया वो होना ही होना है
8 भाव का स्वामी चंद्रमा, शनि ,वाणी का कारक बुध और उसके साथ राहु इंसान को काली जुबान बना देता है !
शुक्र की वृष राशि 6 भाव में है और 6 से 6 भाव मे तुला राशि (11 भाव में )
शुक्र यहा अच्छा फल नहीं करता औरतो से गलत सम्बन्ध इनको बदनामी देते है यह कई बार बहक जाते है और अनेतिक सम्बन्ध बना लेते है फिर इनकी बदनामी का कलंक इनको अंदर ही अंदर तड़पाता है और कई बार यह आत्महत्या करने तक की कोशिश भी कर बैठते है स्त्री पक्ष से इनको नुक्सान होता है इनको बर्बाद करने में कोई गलत सम्बन्ध कोई कसर नहीं छोड़ते और यह मन ही मन में खुद को कोसते रहते है और इनका बीता हुआ कल आज को ख़राब कर देता है !
शुक्र रोग का स्वामी है इसलिए गलत सम्बन्ध से जितना हो उतना दूर रहे अगर यहाँ से बच गये फिर तो आप अपने दुश्मन से निपट सकते हो ।