22/05/2026
नमस्ते 🙏 जब समुद्र मंथन से घातक हलाहल विष निकला और सृष्टि विनाश के कगार पर थी, तब भगवान शिव ने बिना किसी अहंकार के पूरे विष को पी लिया। माता पार्वती दौड़ी आईं और अपने प्रेम से शिव के गले को थाम लिया। आज शिव जी हमें सिखा रहे हैं — अहंकार सबसे बड़ा विष है। जो खुद को सबसे बड़ा समझता है, वो सबसे पहले खुद को नष्ट कर लेता है। ईर्ष्या, घमंड और तुलना छोड़ दो। कृतज्ञता अपनाओ और सब कुछ शिव को समर्पित कर दो। 🕉️ Save करें अगर यह लीला छू गई 🕉️ Comment में “हर हर महादेव” लिखें 🕉️ Share करें किसी ऐसे व्यक्ति के साथ जो अहंकार में फँसा हुआ है जय भोलेनाथ 🕉️ जय माँ पार्वती 💙