22/05/2026
गुरू भक्ति के आवश्यक पाँच अँग
1 - सत्संग में जाकर गुरु के वचनों को श्रद्धा और भक्ति के साथ सुनो, यह शब्द भक्ति है ।
2 - गुरु के चरणों को हाथ लगाओ और उन पर मस्तक धरो, यह स्पर्श -भक्ति है ।
3 - आँखों से गुरु का दर्शन करो, यह रूप -भक्ति है ।
4 - प्रसाद चढ़ाओ, प्रसाद लो, प्रसाद खाओ, यह रस -भक्ति है ।
5 - सतपुरूषों के समीप बैठने और उनके वायुमंडल में प्रवेश करने से भक्ति की सुगंध मिलती है, यह सुगंध -भक्ति है ।
पवित्र वचनों के सुनने से ,
चरणों के छूने से,
रूप के देखने से,
प्रसाद खाने से
जो दिव्य ज्योति गुरु के अन्दर है, वह भक्तों के अन्दर असर करने लगती है और दोनों के बीच एक तरह का असली प्रेम और परमार्थ का सम्बन्ध पैदा हो जाता है ।
जय माँ
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