Shri Batuk Bheravnath Mandir Ludhiana

Shri Batuk Bheravnath Mandir Ludhiana ।।।....सत्य सनातन धर्म की जय....।।।

श्री बटुक भैरवनाथ मंदिर (भैरवधाम)
लुधियाना (पंजाब)

कालभैरव भगवान शिव के उग्र, रहस्यमय और अत्यंत शक्तिशाली स्वरूप हैं। उन्हें समय, मृत्यु, भय और न्याय का अधिपति माना जाता ह...
29/04/2026

कालभैरव भगवान शिव के उग्र, रहस्यमय और अत्यंत शक्तिशाली स्वरूप हैं। उन्हें समय, मृत्यु, भय और न्याय का अधिपति माना जाता है। कालभैरव को साधारण देवता नहीं, बल्कि साधक के आंतरिक अंधकार को नष्ट करने वाला जाग्रत तत्व कहा गया है। वे रक्षा भी करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर संहार भी। इसी कारण उन्हें रक्षक और दंडाधिकारी दोनों रूपों में पूजा जाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार जब ब्रह्मा में अहंकार बढ़ गया और उन्होंने स्वयं को सर्वोच्च घोषित किया, तब शिव ने अपने ललाट से कालभैरव को प्रकट किया। कालभैरव ने ब्रह्मा का पंचम सिर काटकर अहंकार का नाश किया। इसी घटना के कारण वे अहंकार-विनाशक और धर्म-रक्षक माने जाते हैं। उनके हाथ में खप्पर और त्रिशूल इसी रहस्य का प्रतीक हैं।
कालभैरव का संबंध सीधे “काल” से है, जिसका अर्थ केवल मृत्यु नहीं बल्कि समय का प्रवाह भी है। वे भूत, वर्तमान और भविष्य के बंधनों से परे हैं। जो साधक कालभैरव की उपासना करता है, उसके जीवन से अनावश्यक भय, असमय संकट और मानसिक अस्थिरता धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है। माना जाता है कि कालभैरव की कृपा से व्यक्ति समय के विपरीत प्रभावों से भी सुरक्षित रहता है।
कालभैरव का वाहन श्वान है। श्वान को केवल जानवर के रूप में नहीं, बल्कि चेतना, निष्ठा और जागरूकता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। यह संकेत देता है कि कालभैरव की साधना करने वाला व्यक्ति सदैव सजग, अनुशासित और सत्य के मार्ग पर रहने वाला होना चाहिए। श्वान को भोजन कराना कालभैरव की प्रसन्नता का सरल माध्यम माना जाता है।
तांत्रिक परंपरा में कालभैरव का स्थान अत्यंत उच्च है। वे तंत्र, मंत्र और गुप्त विद्याओं के स्वामी हैं। भूत-बाधा, प्रेत-बाधा, अचानक आने वाले संकट, शत्रु भय और ग्रहजनित पीड़ाओं में कालभैरव की साधना को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। रात्रि काल में, विशेषकर अष्टमी, अमावस्या और कालाष्टमी को की गई उपासना शीघ्र फल देती है।
कालभैरव के आठ प्रमुख स्वरूप माने जाते हैं जिन्हें अष्ट भैरव कहा जाता है। ये आठों दिशाओं की रक्षा करते हैं और अलग-अलग प्रकार की सिद्धियाँ तथा सुरक्षा प्रदान करते हैं। काशी क्षेत्र में इन अष्ट भैरवों की विशेष मान्यता है।
काशी में कालभैरव को कोतवाल कहा जाता है। यह मान्यता है कि काशी में प्रवेश करने वाला प्रत्येक व्यक्ति कालभैरव की सीमा में आता है और बिना उनकी अनुमति के कोई भी साधना या निवास पूर्ण फल नहीं देता। यही कारण है कि काशी यात्रा में कालभैरव दर्शन को अनिवार्य माना गया है।
कालभैरव का एक अत्यंत प्रसिद्ध मंत्र है जिसका जप भय नाश, आत्मबल वृद्धि और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा के लिए किया जाता है। यह मंत्र साधक के भीतर छिपी हुई शक्ति को जाग्रत करता है और उसे निर्भय बनाता है। मंत्र जप के साथ संयम, शुद्ध आचरण और अनुशासन का पालन आवश्यक माना गया है।
सार रूप में कालभैरव को भय उत्पन्न करने वाला नहीं, बल्कि भय से मुक्त करने वाला देव कहा गया है। वे कठोर हैं, लेकिन न्यायप्रिय हैं। जो व्यक्ति सच्चे भाव, अनुशासन और श्रद्धा से उनकी उपासना करता है, उसके जीवन में अस्थिरता, डर और बाधाएँ अधिक समय तक टिक नहीं पातीं।

ॐ बम बटुक भैरव नमः श्री बटुक भैरवनाथ मंदिर (भैरवधाम) लुधियाना      #जयमांछिन्नमस्तिके    #जयमाँजसोल  #जयमाँकाली  #आदेश_ब...
29/04/2026

ॐ बम बटुक भैरव नमः

श्री बटुक भैरवनाथ मंदिर (भैरवधाम) लुधियाना

#जयमांछिन्नमस्तिके #जयमाँजसोल #जयमाँकाली #आदेश_बाबा_कालभैरव_सरकार #जयश्रीमहाकाल #जयकालभैरव #हरहरमहादेव #जयमांकालरात्रि_ #जयमातादी #🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

रविवार श्रृंगार दर्शन श्री बटुक भैरवनाथ मंदिर (भैरवधाम) लुधियाना                #भैरव_आराधना    ी              ी        ...
27/04/2026

रविवार श्रृंगार दर्शन
श्री बटुक भैरवनाथ मंदिर (भैरवधाम) लुधियाना


#भैरव_आराधना ी ी

26/04/2026

रविवार आरती दर्शन
श्री बटुक भैरवनाथ मंदिर (भैरवधाम) लुधियाना


#भैरव_आराधना ी ी

शिव की तांडव शक्ति से संपूर्ण ब्रह्मांड हिल उठता है!भगवान शिव का तांडव नृत्य केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि क...
25/04/2026

शिव की तांडव शक्ति से संपूर्ण ब्रह्मांड हिल उठता है!
भगवान शिव का तांडव नृत्य केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि की ब्रह्मांडीय प्रक्रिया है। जब शिव इस नृत्य का आरंभ करते हैं, तो उनके तीसरे नेत्र से प्रकट होती है एक ऐसी अग्नि जो सृजन और विनाश दोनों की शक्ति अपने में समेटे हुए है। शिव का यह तांडव नृत्य ब्रह्मांड के चक्र को गति देता है। यह वह पल है जब अंधकार और प्रकाश का मेल होता है। उनका डमरू जब बजता है, तब सृष्टि का हर कण शिव के साथ थिरकने लगता है। तांडव की इस लय में सृष्टि को नवजीवन मिलता है। यह एक ऐसा दिव्य अनुष्ठान है जिसमें भक्ति, शक्ति और शांति का अद्भुत संगम होता है।
#भगवानशिव #तांडव #शिवशक्ति #सनातनधर्म #भक्तिमय #ॐनमःशिवाय

भैरव स्वरूप दर्शन​भैरव को भगवान शंकर का ही अवतार माना गया है, शिव महापुराण में बताया गया है—​'भैरव: पूर्णरूपो हि शंकर: प...
22/04/2026

भैरव स्वरूप दर्शन

​भैरव को भगवान शंकर का ही अवतार माना गया है, शिव महापुराण में बताया गया है—

​'भैरव: पूर्णरूपो हि शंकर: परात्मन:।
मूढ़ास्ते वै न जानन्ति मोहिता शिवमायया।।'

​'तन्त्रालोक' में भैरव शब्द की उत्पत्ति भैभीमादिभिः अवतीति भैरव अर्थात् भीमादि भीषण साधनों से रक्षा करने वाला ही 'भैरव' है, 'रुद्रयामल तन्त्र' में दस महाविद्याओं के साथ भैरव के दस रूपों का वर्णन है और कहा गया है कि कोई भी महाविद्या तब तक सिद्ध नहीं होती जब तक उनसे सम्बन्धित भैरव की सिद्धि न कर ली जाये।
​भगवान भैरव की साधना वशीकरण, उच्चाटन, सम्मोहन, स्तम्भन, आकर्षण और मारण जैसी तान्त्रिक क्रियाओं के दुष्प्रभाव को नष्ट करने के लिए की जाती है। भैरव साधना से सभी प्रकार की तान्त्रिक क्रियाओं के अनिष्ट प्रभाव नष्ट हो जाते हैं। आपकी प्रगति कभी-कभी दूसरों को अच्छी नहीं लगती और आपकी प्रगति को प्रभावित करने के लिए तान्त्रिक क्रियाओं का सहारा लेकर शत्रु आपको प्रभावित करते हैं।
​तान्त्रिक क्रियाओं के प्रभाव से व्यवसाय, नौकरी में आशानुरूप प्रगति नहीं होती। ऋण के रूप में दिया हुआ रुपया नहीं लौटता, रोग या विघ्न से आप पीड़ित रहते हैं अथवा बेकार के मुकदमोंबाजी में धन और समय की बर्बादी हो जाती है। इन सभी प्रकार के व्यवधानों के लिए भैरव साधना फलदायी मानी गई।
​भगवान भैरव का शाबर तन्त्र प्रयोग कोई सामान्य टोटका नहीं बल्कि शुद्ध तन्त्र प्रयोग है, जिसका प्रभाव तत्काल रूप से देखा जा सकता है।
​'रुद्रयामल तन्त्र' के अनुसार दस महाविद्याएँ और उनसे सम्बन्धित भैरव के नाम इस प्रकार हैं—
​१. कालिका—महाकाल भैरव
२. त्रिपुर सुन्दरी—ललितेश्वर भैरव
३. तारा—अक्षोभ्य भैरव
४. छिन्नमस्ता—विकराल भैरव
५. भुवनेश्वरी—महादेव भैरव
६. धूमावती—काल भैरव
७. कमला—नारायण भैरव
८. भैरवी—बटुक भैरव
९. मातंगी—मतंग भैरव
१०. बगलामुखी—मृत्युंजय भैरव

​भैरव से सम्बन्धित कई साधनाएँ प्राचीन तान्त्रिक ग्रन्थों में वर्णित हैं, जैन ग्रन्थों में भी भैरव के विशिष्ट प्रयोग दिये हैं। प्राचीनकाल से अब तक लगभग सभी, ग्रन्थों में एक स्वर से यह स्वीकार किया गया है कि जब तक साधक भैरव साधना सम्पन्न नहीं कर लेता, तब तक उसे अन्य साधनाओं में प्रवेश करने का अधिकार ही नहीं प्राप्त होता। जिस प्रकार 'शिव पुराण' में भैरव को शिव का ही अवतार माना है उसी तरह 'विष्णु पुराण' में बताया गया है कि विष्णु के अंश ही भैरव के रूप में विश्व विख्यात हैं, दुर्गा सप्तशती के पाठ के प्रारम्भ और अन्त में भी भैरव की उपासना आवश्यक और महत्त्वपूर्ण बताई गई है


#श्री #श्रीराम #कालभैरव

21/04/2026

सुबह मंगला आरती दर्शन
श्री कोडमदेसर भेरुनाथ मंदिर (बीकानेर)

🚩🙏 हे नाथ मैं आपको भूलूं नहीं ऐसी कृपा बनाए रखना 🙏🚩

अमावस्या की घोर रात्रि…जब चंद्रमा भी अपने अस्तित्व को शून्य में विलीन कर देता है, तब साधना का सबसे शक्तिशाली द्वार खुलता...
18/04/2026

अमावस्या की घोर रात्रि…
जब चंद्रमा भी अपने अस्तित्व को शून्य में विलीन कर देता है, तब साधना का सबसे शक्तिशाली द्वार खुलता है—विशेषकर कालभैरव की उपासना के लिए।

यह वही रात्रि है जब अदृश्य शक्तियाँ प्रबल होती हैं… और जो साधक इस समय स्थिर रहता है, वही भैरव कृपा का अधिकारी बनता है।

🔱 अमावस्या की साधना की कथा

प्राचीन काल में एक तांत्रिक साधक था—जिसने अनेक देवताओं की साधना की, पर उसे वह सिद्धि नहीं मिली जिसकी उसे तलाश थी।

एक दिन एक सिद्ध योगी ने उससे कहा—
“यदि तुझे सत्य का अनुभव करना है, तो अमावस्या की रात्रि में श्मशान के समीप कालभैरव की साधना कर…”

अमावस्या की रात आई।
चारों ओर सन्नाटा…
दूर कहीं चिता जल रही थी…
कुत्तों की आवाज और हवा की सनसनाहट वातावरण को भयावह बना रही थी…

साधक ने कुशासन बिछाया, त्रिशूल स्थापित किया और भैरव का ध्यान करते हुए बैठ गया।

धीरे-धीरे उसका मन भय से कांपने लगा…
पर उसने आँखें बंद रखीं और जप प्रारंभ किया—

🔱 मूल मंत्र
॥ ॐ कालभैरवाय नमः ॥

जैसे-जैसे जप बढ़ता गया, वैसे-वैसे वातावरण बदलने लगा…
अचानक उसे लगा जैसे कोई अदृश्य शक्ति उसके चारों ओर घूम रही हो…

तभी एक तेज प्रकाश प्रकट हुआ…
और उसमें स्वयं कालभैरव प्रकट हुए—
नील वर्ण, जटाधारी, त्रिशूलधारी… और साथ में उनका वाहन काला श्वान।

भैरव ने कहा—
“जो साधक भय को जीत लेता है, वही मुझे प्राप्त करता है…”

🔱 कालभैरव स्तोत्र (अंश)
॥ देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं
व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्।
नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगम्बरं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥

🔱 साधना विधि (संक्षेप)

- अमावस्या की रात्रि में शांत स्थान या शिवालय/श्मशान समीप बैठें
- काला वस्त्र धारण करें
- सरसों के तेल का दीपक जलाएं
- काले तिल, नारियल या परंपरा अनुसार भोग अर्पित करें
- 108 या 1008 बार मंत्र जप करें
- भय आए तो भी जप न रोकें

🔱 साधना के विशेष लाभ

- धन प्राप्ति और आर्थिक स्थिरता में वृद्धि होती है
- नकारात्मक ऊर्जा, बाधा और भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है
- साधक के चारों ओर आकर्षक और शक्तिशाली आभामंडल (Aura) बनता है
- आत्मविश्वास, निर्णय शक्ति और साहस में वृद्धि होती है
- शत्रु बाधा और अदृश्य विरोधी शक्तियाँ शांत होती हैं
- तंत्र साधना में तेजी से सिद्धि प्राप्त होती है

भैरव केवल उग्र नहीं हैं…
वे समय के स्वामी हैं…
जो उन्हें साध लेता है, वह अपने भाग्य को भी साध लेता है।

#कालभैरव #अमावस्या #तंत्रसाधना #भैरवकृपा
#धनप्राप्ति

Address

Village Chuharpur, Near Yuvraj Patrol Pump, Haibowal, Kalan
Ludhiana
141001

Telephone

+919914444313

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Shri Batuk Bheravnath Mandir Ludhiana posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to Shri Batuk Bheravnath Mandir Ludhiana:

Share