28/08/2026
कांग्रेस पार्टी और उनके युवराज राहुल गांधी का हिंदू-विरोधी चेहरा बार-बार देश के सामने उजागर होता रहा है! जरा सोचिए, जिस आदमी को मनुस्मृति के एक श्लोक का अर्थ तक नहीं पता, वह खुले मंच पर चिल्ला-चिल्लाकर ज्ञान बांट रहा है कि 'मनुस्मृति में महिलाओं को आजादी नहीं है'। हद तो तब हो जाती है जब यह बयान एक हिजाब और बुर्के में ढकी महिला के सामने दिया जाता है कि 'महिलाओं को आजादी हिंदू धर्म में नहीं है'। समझ नहीं आता कि वो कौन से हिंदू हैं जो आज भी कांग्रेस का समर्थन करते हैं? इसी को असल मायनों में मानसिक गुलामी कहते हैं! इतिहास उठाकर देख लीजिए, जिस प्रकार 1192 में मोहम्मद गोरी और पृथ्वीराज चौहान का युद्ध हुआ, तो पृथ्वीराज चौहान ने गोरी को वह मार लगाई कि वह कांप उठा, लेकिन हजारों बार कुरान की दुहाई देने और कसमें खाने पर उसे जिंदा छोड़ दिया। ठीक एक साल बाद वह फिर आया और कुछ जयचंदों की गद्दारी की वजह से पृथ्वीराज चौहान हार गए, जिसके बाद गोरी ने अपने गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक को उत्तराधिकारी बनाकर गुलाम वंश की नींव रखी; ठीक वैसे ही अंग्रेजों के जाने के बाद उनके चहेते सत्ता में बैठे और उन्हीं के मानसिक गुलाम आज भी गुलामी कर रहे हैं! इन्हीं राहुल गांधी और कांग्रेसियों से मेरा सीधा और कड़ा सवाल है—जिस सनातन धर्म में हजारों-हजार साल से महिलाओं का ऐसा सर्वोच्च सम्मान रहा है, क्या उसकी बराबरी दुनिया का कोई अन्य मजहब या पंथ कर सकता है? अगर सनातन में स्त्रियों को पर्दे या गुलामी में रखने का आदेश होता, तो हमारी महान परंपरा और इतिहास में मां दुर्गा, मां काली, माता सीता, श्री राधा, गार्गी, मैत्रेयी, मीराबाई, रानी दुर्गावती, गुजरात की रानी नायकी देवी, अहिल्याबाई होल्कर, रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले, सरोजिनी नायडू और किरण बेदी जैसी वीरांगनाओं और विदुषियों के अदम्य साहस, ज्ञान, नेतृत्व और शौर्य के उदाहरण कभी नहीं मिलते। अगर राहुल गांधी या किसी कांग्रेसी में जरा सी भी हिम्मत है, तो दुनिया के किसी भी अन्य मजहब में किसी एक भी महिला का नाम बता दें जो इतिहास में सनातन की इन देवियों और वीरांगनाओं की तरह सम्मानित, पूजित और प्रेरणास्रोत हुई हो! इनकी तथाकथित आजादी वाली पोल तो तब खुली जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिजाब को इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा मानने से साफ इंकार कर दिया और फैसला आते ही कांग्रेसी छाती कूटने लगे। मेरा उनसे सीधा सवाल है—यह हिजाब और बुर्का मुस्लिम महिलाओं के लिए पिंजरा है या खुला आकाश? क्योंकि राहुल गांधी ने इस पिंजरे को बहुत लोकप्रिय बनाने का ठेका ले रखा है। कोर्ट का फैसला आते ही कांग्रेस के बड़े नेता पवन खेड़ा और जयराम रमेश जैसे लोग सोशल मीडिया पर पोस्ट ठोकने लगे कि 'धार्मिक मान्यताओं की समीक्षा धार्मिक विद्वानों पर छोड़ देनी चाहिए'। जरा इनकी बेशर्मी तो देखिए! हिजाब और बुर्का जरूरी है या नहीं, इसकी व्याख्या ये मुस्लिम मौलानाओं पर छोड़ने की बात करते हैं, लेकिन मनुस्मृति की समीक्षा राहुल गांधी करेंगे? आखिर कौन हैं राहुल गांधी? क्या वो कोई हिंदू धार्मिक विद्वान, धर्माचार्य, शंकराचार्य, महामंडलेश्वर, जगद्गुरु या परमहंस हैं? उत्तर है—कुछ नहीं! मतलब हिजाब पर कोई गैर-मुस्लिम लीडर ना बोले, केवल मुस्लिम धार्मिक नेता बोलें, लेकिन मनुस्मृति पर राहुल गांधी धुआंधार बोलेंगे? यह खुलेआम 100 करोड़ हिंदुओं के मुंह पर करारा तमाचा है! मनुस्मृति की व्याख्या राहुल गांधी करेंगे, लेकिन कुरान की व्याख्या केवल मुस्लिम धर्मगुरु करेंगे, वरना कांग्रेस बुरा मान जाएगी—यह दोहरा चरित्र और पाखंड अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा! शायद कांग्रेसियों की बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी है, क्या इनको नहीं पता कि इसी हिजाब और बुर्के के खिलाफ बाबा साहब भीमराव अंबेडकर अपनी किताब 'पाकिस्तान ऑर द पार्टीशन ऑफ इंडिया' में साफ लिख गए हैं कि 'हिजाब और बुर्के से गलीज और घटिया किस्म की कोई प्रथा हो ही नहीं सकती मुस्लिम स्त्रियों के लिए'। क्या किसी कांग्रेसी, सोनिया, राहुल या खड़गे में इतनी हिम्मत है कि वे बाबा साहब को गलत बोलकर दिखा दें? अगर ऐसा बोलकर दिखा दें तो मैं इनको राणा सांगा का वंशज मान लूँ! जब कोई नेहरू की विनाशकारी नीतियों की आलोचना करता है तो यही कांग्रेसी चिल्लाने लगते हैं कि '60 साल पुराने नेहरू पास्ट टेंस हैं, वर्तमान की बात करो', लेकिन हजारों साल पुरानी मनुस्मृति इनके लिए प्रेजेंट टेंस बन जाती है और उस पर विष वमन करने राहुल गांधी पुणे पहुंच जाते हैं, मानो उसके दो-दो पन्ने रोज छपकर आ रहे हों! मनुस्मृति की समीक्षा से किसी को आपत्ति नहीं, लेकिन क्या ऐसा ही साहस ये शरिया, कुरान या बाइबिल के लिए दिखा सकते हैं? अगर हिम्मत है, तो लाओ एक मंच पर मनुस्मृति, कुरान, शरिया और हदीस को और हो जाए खुला वैचारिक महाकुंभ! पर सच तो यह है कि कांग्रेस में यह हिम्मत कभी नहीं हो सकती, क्योंकि इनका एकमात्र मकसद हिंदुत्व के खिलाफ छल, कपट और दोहरा व्यवहार करना है, जिसका करारा जवाब आज पूरा देश मांग रहा है!🚩🚩❤️❤️💫💫