18/11/2021
हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को वैकुण्ठ चतुर्दशी मनाई जाती है। इस साल 17 नवंबर को वैकुण्ठ चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाएगा, इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस दिन बड़े पैमाने पर पूजा का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन महादेव और श्रीहरि विष्णु की उपासना करने से मनुष्य के सभी पाप कट जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जिन चार महीने के लिए भगवान शयन निद्रा में चले जाते हैं, उस दौरान सृष्टि की संचालन भगवान शिव करते हैं।
पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन हरि और हर का मिलन होता है। इस दिन हरि अर्थात भगवान विष्णु और हर अर्थात भगवान शिव का एक साथ पूजन करने का विधान है। मान्यता है कि चतुर्मास तक सृष्टि का कार्य संभालने के बाद भगवान शिव बैकुंठ चतुर्दशी के दिन विष्णु जी को उनका कार्य पुनः प्रदान करते हैं।
मान्यता है कि शिवजी पर तुलसी
दल और विष्णु जी पर बेलपत्र गिर जाता है। लोक मान्यता के अनुसार साल में एक बार बैकुंठ चतुर्दशी के दिन भगवान शिव पर तुलसी दल और भगवान विष्णु पर बेल पत्र चढ़ाया जाता है। भगवान श्री हरि विष्णु और भगवान शिव की विधि विधान से पूजा-अर्चना करने से उनकी कृपा और बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
विषेश मे यह नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मे शिवजी और विष्णुजीका मिलन हुवा है.ईसलिये ईस ज्योतिर्लिंग को हरिहरात्मक ज्योतिर्लिंग कहते है.जय नागेश्वर🙏