श्री राधेकृष्ण शरणम् ममः

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श्री राधेकृष्ण शरणम् ममः श्री राधेकृष्ण शरणम् ममः

💕मेरे प्यारे श्री कृष्ण💕तेरी आँखों कि काशिश भी खीचती है इस कदर.....!!ये दिल सिर्फ बहलता नहीं ,बहक जाने कि ज़िद करता हैं.....
24/05/2026

💕मेरे प्यारे श्री कृष्ण💕
तेरी आँखों कि काशिश भी खीचती है इस कदर.....!!
ये दिल सिर्फ बहलता नहीं ,बहक जाने कि ज़िद करता हैं...!!
न जाने क्या कशिश है उसकी मदहोश आँखों मैं.....!!
नज़र अंदाज़ जितना भी करो नज़र उसी पर जाती है...!!

राधे गोविन्द....❣️

प्रभु के दर्शन में जो शांति है,वह दुनिया की किसी भी चीज़ में नहीं… 🥹🌸🙏आपको प्रभु के दर्शन में सबसे ज़्यादा क्या मिलता है...
23/05/2026

प्रभु के दर्शन में जो शांति है,
वह दुनिया की किसी भी चीज़ में नहीं… 🥹🌸🙏

आपको प्रभु के दर्शन में सबसे ज़्यादा क्या मिलता है—शांति, प्रेम या भरोसा...? 🥹👇

✍️༺मेरो सखी༻

गोविन्द,तुम्हारा हर अंदाज अच्छा लगता है, सिवाय 'नज़र-अंदाज़' करने के ☺
22/05/2026

गोविन्द,
तुम्हारा हर अंदाज अच्छा लगता है,
सिवाय 'नज़र-अंदाज़' करने के ☺

श्री त्रिपुरसुन्दरी का “तन्त्रोपकरण स्तोत्रम्” अत्यंत गूढ़, रहस्यमय और श्रीविद्या साधना से जुड़ा दिव्य स्तोत्र माना जाता...
21/05/2026

श्री त्रिपुरसुन्दरी का “तन्त्रोपकरण स्तोत्रम्” अत्यंत गूढ़, रहस्यमय और श्रीविद्या साधना से जुड़ा दिव्य स्तोत्र माना जाता है। यह स्तोत्र सामान्य उपासना से कहीं अधिक उच्च कोटि की तांत्रिक एवं आध्यात्मिक साधना का अंग है। “अति गुह्यती गुह्य दुर्लभतम” जैसे शब्द स्वयं संकेत करते हैं कि यह ज्ञान केवल योग्य गुरु द्वारा योग्य साधक को ही प्रदान किया जाता था।

इस स्तोत्र में देवी के तांत्रिक उपकरणों, शक्तियों, रहस्यमयी आयुधों, श्रीचक्र, मंत्रशक्ति, यंत्र, मुद्राओं तथा आंतरिक साधना तत्त्वों का वर्णन मिलता है। “तन्त्रोपकरण” का अर्थ है — वे दिव्य साधन एवं आध्यात्मिक उपकरण जिनके माध्यम से साधक देवी की परम चेतना से जुड़ता है।

श्रीचक्र को इस साधना का हृदय माना गया है। श्री त्रिपुरसुन्दरी को स्वयं श्रीचक्र की अधिष्ठात्री कहा गया है। तन्त्रोपकरण स्तोत्र में साधक को बाह्य पूजा से आगे बढ़ाकर आंतरिक साधना, कुण्डलिनी जागरण, चैतन्य शक्ति और अद्वैत भाव की ओर ले जाने का संकेत मिलता है।

श्री त्रिपुरसुन्दरी तन्त्रोपकरण स्तोत्रम्

अस्य श्रीत्रिपुरसुन्दरी तन्त्रोपकरण स्तोत्रस्य
भगवान् दक्षिणामूर्ति ऋषिः।
अनुष्टुप् छन्दः।
श्रीमहात्रिपुरसुन्दरी देवता।
श्रीविद्यासिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः॥

ध्यानम्॥

बालार्कमण्डलाभासां चतुर्बाहुं त्रिलोचनाम्।
पाशाङ्कुशधनुर्बाणधारिणीं शिववल्लभाम्॥

सिन्दूरारुणविग्रहां त्रिनयनां माणिक्यमौलिस्फुरत्।
तारानायकशेखरां स्मितमुखीमापीनवक्षोरुहाम्॥
पाणिभ्यामलिपूर्णरत्नचषकं रक्तोत्पलं बिभ्रतीम्।
सौम्यां रत्नघटस्थितरक्तचरणां ध्यायेत्परामम्बिकाम्॥

स्तोत्रम्॥

अति गुह्यती गुह्य दुर्लभतम महेश्वरि।
तव तन्त्रोपकरणं कथयामि वरानने॥

श्रीचक्रं परमं दिव्यं सर्वतन्त्रेषु गोपितम्।
यस्य स्मरणमात्रेण सर्वसिद्धिः प्रजायते॥

पाशोऽयं रागसंयुक्तोऽङ्कुशः क्रोधनाशनः।
इक्षुकोदण्डमायुक्ताः पञ्चबाणा मनोहराः॥

एते तव महादेवि तन्त्रोपकरणाः शुभाः।
यैः साधकः सदाऽनन्दं परमं पदमश्नुते॥

कुलाचारप्रिया देवि कुलमार्गप्रदायिनि।
कुलकुण्डलिनी रूपे कुलज्ञानप्रकाशिनि॥

श्रीविद्या परमागुह्या सर्वमन्त्रेषु दुर्लभा।
यस्याः प्रसादमात्रेण मोक्षलक्ष्मीः प्रजायते॥

नमस्ते परमेशानि नमस्ते करुणामये।
नमस्ते देवदेवेशि त्रिपुरे परमेश्वरि॥

फलश्रुतिः॥

यः पठेत् प्रातरुत्थाय श्रद्धाभक्तिसमन्वितः।
तस्य सिद्धिर्भवेद्देवि सर्वका

हे कान्हा ...💞समय के बदलने से लगन कहां बदलती है.....!!तुम्हीं से लगन लगी थी,तुम्हीं से प्रीत है.....!!💞Զเधॆ_Զเधॆ_जी 💞🙏🌹
20/05/2026

हे कान्हा ...💞
समय के बदलने से लगन कहां बदलती है.....!!
तुम्हीं से लगन लगी थी,तुम्हीं से प्रीत है.....!!

💞Զเधॆ_Զเधॆ_जी 💞🙏🌹

शुभ तीसरा बड़ा मंगलवार 🌸💗
19/05/2026

शुभ तीसरा बड़ा मंगलवार 🌸💗

🪷आज के श्रृंगार झाँकी के दर्शन🪷  _श्री श्री राधा गोविन्द देव जी जयपुर_  | हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे |  || ...
18/05/2026

🪷आज के श्रृंगार झाँकी के दर्शन🪷
_श्री श्री राधा गोविन्द देव जी जयपुर_

| हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे |
|| हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे |.

🌹ओ मेरी बांह पकड़ लो श्यामा। तेरो ऊचों महल बरसाना। मेरे बस में नहीं है आना। ओ मेरी बांह पकड़ लो श्यामा। 🌹ओ मै तो जोगन हो...
17/05/2026

🌹ओ मेरी बांह पकड़ लो श्यामा।
तेरो ऊचों महल बरसाना।
मेरे बस में नहीं है आना।
ओ मेरी बांह पकड़ लो श्यामा।

🌹ओ मै तो जोगन हो गई तेरी।
ओ मै तो जन्म जन्म से तेरी।
ओ लाडो अपने महल बुलाना।
ओ मेरी बांह पकड़ लो श्यामा।

🌹मेरे बस में नहीं है आना।
तेरो ऊचों महल बरसाना।
ओ मेरी बांह पकड़ लो श्यामा।

🌹मेरी नाव भवर में अटकी।
मै तो जन्म जन्म से भटकी।
ओ लाडो जन्म जन्म से भटकी।
मुझे अपने गले लगालो।
ओ लाडो मुझको दर्श दिखा दो।
ओ मेरी बांह पकड़ लो श्यामा।

🌹मेरे बस में नहीं है आना।
तेरो ऊचों महल बरसाना।
ओ मेरी बांह पकड़ लो श्यामा।

श्री राधे।

.                     “पुरुषोत्तम–मास माहात्म्य”         पुराणों में अधिकमास यानी मलमास के पुरुषोत्तम मास बनने की बड़ी ह...
16/05/2026

. “पुरुषोत्तम–मास माहात्म्य”

पुराणों में अधिकमास यानी मलमास के पुरुषोत्तम मास बनने की बड़ी ही रोचक कथा है। उस कथा के अनुसार, स्वामीविहीन होने के कारण अधिकमास को ‘मलमास’ कहने से उसकी बड़ी निन्दा होने लगी। इस बात से दु:खी होकर मलमास श्रीहरि विष्णु के पास गया और उनसे दुखड़ा रोया।
भक्तवत्सल श्रीहरि उसे लेकर गोलोक पहुँचे। वहाँ श्रीकृष्ण विराजमान थे। करुणासिन्धु भगवान श्रीकृष्ण ने मलमास की व्यथा जानकर उसे वरदान दिया–‘अब से मैं तुम्हारा स्वामी हूँ। इससे मेरे सभी दिव्य गुण तुम में समाविष्ट हो जायेंगे। मैं पुरुषोत्तम के नाम से विख्यात हूँ और मैं तुम्हें अपना यही नाम दे रहा हूँ। आज से तुम मलमास के बजाय पुरुषोत्तम मास के नाम से जाने जाओगे।’
शास्त्रों के अनुसार हर तीसरे साल सर्वोत्तम यानी पुरुषोत्तम मास की उत्पत्ति होती है। इस मास के दौरान जप, तप, दान से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है। इस मास में श्रीकृष्ण, श्रीमद्भगवतगीता, श्रीराम कथा वाचन और विष्णु भगवान की उपासना की जाती है। इस माह उपासना करने का अपना अलग ही महत्व है।
पुरुषोत्तम मास में कथा पढ़ने, सुनने से भी बहुत लाभ प्राप्त होता है। इस मास में जमीन पर शयन, एक ही समय भोजन करने से अनंत फल प्राप्त होते हैं। ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पढ़ने के लिये हमारा फेसबुक पेज ‘श्रीजी की चरण सेवा’ को लाईक एवं फॉलो करें। अब आप हमारी पोस्ट व्हाट्सएप चैनल पर भी देख सकते हैं। चैनल लिंक हमारी फेसबुक पोस्टों में देखें। सूर्य की बारह संक्रांति के आधार पर ही वर्ष में 12 माह होते हैं। प्रत्येक तीन वर्ष के बाद पुरुषोत्तम माह आता है।
पंचांग के अनुसार सारे तिथि-वार, योग-करण, नक्षत्र के अलावा सभी मास के कोई न कोई देवता स्वामी है, किन्तु पुरुषोत्तम मास का कोई स्वामी न होने के कारण सभी मंगल कार्य, शुभ और पितृ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

(दान, धर्म, पूजन का महत्व)

पुराणे शास्त्रों में बताया गया है कि यह माह व्रत-उपवास, दान-पूजा, यज्ञ-हवन और ध्यान करने से मनुष्य के सारे पाप कर्मों का क्षय होकर उन्हें कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है। इस माह आपके द्वारा दान दिया गया एक रुपया भी आपको सौ गुना फल देता है। इसलिए अधिक मास के महत्व को ध्यान में रखकर इस माह दान-पुण्य देने का बहुत महत्व है। इस माह भागवत कथा, श्रीराम कथा श्रवण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। धार्मिक तीर्थ स्थलों पर स्नान करने से आपको मोक्ष की प्राप्ति और अनंत पुण्यों की प्राप्ति मिलती है।
पुरुषोत्तम मास का अर्थ जिस माह में सूर्य संक्रांति नहीं होती वह अधिक मास कहलाता होता है। इनमें खास तौर पर सर्व मांगलिक कार्य वर्जित माने गए है, लेकिन यह माह धर्म-कर्म के कार्य करने में बहुत फलदायी है। इस मास में किए गए धार्मिक आयोजन पुण्य फलदायी होने के साथ ही ये आपको दूसरे माहों की अपेक्षा करोड़ गुना अधिक फल देने वाले माने गए हैं।
पुरुषोत्तम मास में दीपदान, वस्त्र एवं श्रीमद् भागवत कथा ग्रंथ दान का विशेष महत्व है। इस मास में दीपदान करने से धन-वैभव में वृद्घि होने के साथ आपको पुण्य लाभ भी प्राप्त होता है।
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इस वर्ष पुरुषोत्तम मास रविवार 17.05.2026 से आरम्भ होकर सोमवार 15.06.2026 तक रहेगा।

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॥जय जय श्री हरि॥
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राधा राधा🙏 राधा राधा🙏 राधा राधा🙏 राधा राधा🙏 राधा राधा🙏 राधा राधा🙏 राधा राधा🙏 राधा राधा🙏
15/05/2026

राधा राधा🙏 राधा राधा🙏 राधा राधा🙏 राधा राधा🙏 राधा राधा🙏 राधा राधा🙏 राधा राधा🙏 राधा राधा🙏

जहाँ प्रेम निशब्द होता है,वहाँ राधा-कृष्ण का वास होता है।🌺
14/05/2026

जहाँ प्रेम निशब्द होता है,
वहाँ राधा-कृष्ण का वास होता है।🌺

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