श्री राधेकृष्ण शरणम् ममः

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श्री राधेकृष्ण शरणम् ममः श्री राधेकृष्ण शरणम् ममः

जय श्री हनुमान
25/08/2026

जय श्री हनुमान

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के पावन रात्रि दर्शन 🙏सावन एकादशी की पावन रात्रि में भगवान त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के दिव्...
24/08/2026

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के पावन रात्रि दर्शन 🙏

सावन एकादशी की पावन रात्रि में भगवान त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के दिव्य दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

मान्यता है कि बाबा त्र्यंबकेश्वर के दर्शन मात्र से भक्तों को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
इस पावन अवसर पर आप भी बाबा का स्मरण करें और दिल से बोलें — हर हर महादेव! 🚩

ॐ नमः शिवाय 🕉️
बाबा त्र्यंबकेश्वर सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करें।

💕कान्हा💕 मूरत को निहारूँ तो बस खो ही जाऊँ.....!!तुम ऐसे बसे हो कान्हा, कि मैं तुम्हारी ही हो जाऊँ....!!न कोई आरज़ू है, न...
23/08/2026

💕कान्हा💕 मूरत को निहारूँ तो बस खो ही जाऊँ.....!!
तुम ऐसे बसे हो कान्हा, कि मैं तुम्हारी ही हो जाऊँ....!!
न कोई आरज़ू है, न कोई इबादत अधूरी है....!!
तेरे सामने झुक जाए सर, तो ज़िंदगी पूरी है.....!!

श्याम रंग में जो रँगे, सो पावै विश्राम।पर जो श्री राधा भजै, वश में ताके श्याम॥
22/08/2026

श्याम रंग में जो रँगे, सो पावै विश्राम।
पर जो श्री राधा भजै, वश में ताके श्याम॥

🌹॥श्री महालक्ष्मी नमो नमः॥🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏श्रीः पद्मा कमला मुकुन्दमहिषी,,,लक्ष्मीस्त्रिलोकेश्वरी मा क्षीराब्धिसुता,विरिञ्चिजनन...
21/08/2026

🌹॥श्री महालक्ष्मी नमो नमः॥🌹
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
श्रीः पद्मा कमला मुकुन्दमहिषी,,,
लक्ष्मीस्त्रिलोकेश्वरी मा क्षीराब्धिसुता,
विरिञ्चिजननी विद्या माँ सरोजासना,
सर्वाभीष्टफलप्रदेति सततं नामानि!🌹🙏

श्री लाड़ली जू के मनमोहक श्रृंगार दर्शन।।।।
20/08/2026

श्री लाड़ली जू के मनमोहक श्रृंगार दर्शन।।।।

꧁🕉️🎪!!जय श्री गणेश!!🎪🕉️꧂                                    ⛳‼ वक्रतुंड  महाकाय  सूर्यकोटि  समप्रभः  ‼️  ⛳‼️ निर्विघ्नम ...
19/08/2026

꧁🕉️🎪!!जय श्री गणेश!!🎪🕉️꧂
⛳‼ वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः ‼️
⛳‼️ निर्विघ्नम कुरुमेव देवा सर्वकार्येषु सर्वदा‼️
ॐ गं गणपतये नमो नमः🐀 विघ्नहर्ता गणपति
🌸🎪 !!ॐ गणपतये नमः!! 🌸
🌿꧁🕉️ शुभ प्रभात 🕉️꧂🌿
꧁🔻 आपका दिन शुभ एवम् मंगलमय हो🔺꧂

॥ हनुमानाष्टक ॥बाल समय रवि भक्षि  लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टा...
18/08/2026

॥ हनुमानाष्टक ॥

बाल समय रवि भक्षि लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो ।
देवन आनि करी बिनती तब, छाडि दियो रवि कष्ट निवारो ।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ १ ॥

बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो ।
चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो ।
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ २ ॥

अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो ।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु, बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो ।
हेरी थके तट सिन्धु सबै तब, लाए सिया-सुधि प्राण उबारो
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ ३ ॥

रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसी सों कही सोक निवारो ।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाए महा रजनीचर मारो ।
चाहत सीय असोक सों आगि सु, दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ४ ॥

बान लग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सुत रावन मारो ।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ।
आनि सजीवन हाथ दई तब, लछिमन के तुम प्रान उबारो.
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ ५ ॥

रावन युद्ध अजान कियो तब, नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो I
आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ६ ॥

बंधु समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पताल सिधारो ।
देबिहिं पूजि भलि विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो ।
जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत संहारो
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ७ ॥

काज किये बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसे नहिं जात है टारो ।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होय हमारो
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ८ ॥

॥ दोहा ॥
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर ।
वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर ॥

सियावर रामचंद्र की जय
पवनसुत हनुमान की जय
सब संतन की जय
हर हर महादेव
हरि ॐ

17/08/2026
🌿 विदुर की तीर्थयात्रा — जब एक भक्त सत्य की खोज में निकल पड़ा 🌿श्रीमद्भागवत महापुराण का तृतीय स्कंध केवल एक कथा नहीं, बल...
17/08/2026

🌿 विदुर की तीर्थयात्रा — जब एक भक्त सत्य की खोज में निकल पड़ा 🌿

श्रीमद्भागवत महापुराण का तृतीय स्कंध केवल एक कथा नहीं, बल्कि एक ऐसे भक्त की आंतरिक यात्रा है, जिसने राजमहल का वैभव छोड़कर सत्य और भगवान की खोज को अपना जीवन बना लिया।

यह कथा है महान भक्त विदुर जी की। 🙏

विदुर जी हस्तिनापुर के अत्यंत बुद्धिमान, धर्मनिष्ठ और भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त थे। उन्होंने जीवन भर धर्म का पक्ष लिया, लेकिन जब अधर्म ने राजसभा में अपना स्थान बना लिया और उनके सत्य व धर्म के वचनों को अनसुना किया गया, तब उन्होंने राजसी जीवन से स्वयं को अलग कर लिया।

उन्होंने तीर्थयात्रा का मार्ग चुना।

न कोई राजसिंहासन…
न कोई वैभव…
न कोई मोह…

बस हृदय में भगवान का स्मरण और मन में परम सत्य को जानने की तीव्र इच्छा। 🌸

🌊 श्री उद्धव से भेंट

अपनी यात्रा के दौरान विदुर जी की भेंट भगवान श्रीकृष्ण के परम प्रिय भक्त उद्धव जी से हुई।

उद्धव जी से मिलते ही विदुर जी ने सबसे पहले श्रीकृष्ण के विषय में पूछा।

उनके मन में संसार की कोई चर्चा नहीं थी।

उनकी जिज्ञासा केवल एक थी—

“मेरे प्रभु श्रीकृष्ण कैसे हैं?”

लेकिन उद्धव जी की आँखों में आँसू आ गए।

उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का स्मरण किया और बताया कि भगवान पृथ्वी पर अपनी लीला पूर्ण करके अपने दिव्य धाम को प्रस्थान कर चुके हैं।

यह सुनकर दोनों भक्तों का हृदय श्रीकृष्ण-विरह से भर उठा। 💔🙏

उद्धव जी ने विदुर जी को भगवान की लीलाओं और उनके उपदेशों का स्मरण कराया।

क्योंकि सच्चे भक्तों के लिए भगवान केवल सामने दिखाई देने वाला रूप नहीं हैं—

भगवान तो स्मरण में भी उतने ही जीवंत रहते हैं।

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🌺 विदुर जी की अगली यात्रा

इसके बाद विदुर जी की भेंट महान ऋषि मैत्रेय मुनि से हुई।

विदुर जी ने उनसे ऐसे प्रश्न पूछे, जो केवल संसार को समझने के लिए नहीं थे, बल्कि जीवन के परम उद्देश्य को जानने के लिए थे।

उन्होंने पूछा—

यह संसार कैसे बना?

जीव इस संसार में क्यों आता है?

समय क्या है?

आत्मा और शरीर में क्या अंतर है?

मनुष्य जन्म-मरण के बंधन से कैसे मुक्त हो सकता है?

और सबसे महत्वपूर्ण—

भगवान को प्राप्त करने का वास्तविक मार्ग क्या है?

मैत्रेय मुनि ने उन्हें सृष्टि की उत्पत्ति, काल की शक्ति, जीव और प्रकृति के संबंध तथा भगवान की महिमा का गहन ज्ञान दिया।

उन्होंने समझाया कि यह संसार परिवर्तनशील है।

जो आज है, कल नहीं होगा।

शरीर बदल जाएगा।
संपत्ति बदल जाएगी।
संबंध बदल जाएंगे।
समय सबको अपने साथ बहा ले जाएगा।

लेकिन—

आत्मा शाश्वत है और परमात्मा शाश्वत हैं।

इसी सत्य को भूल जाने के कारण जीव संसार के मोह में बंध जाता है।

⏳ समय का रहस्य

विदुर जी को यह भी बताया गया कि समय किसी के लिए रुकता नहीं।

राजा हो या भिखारी,
विद्वान हो या अज्ञानी,
सुंदर हो या साधारण—

काल सबको समान रूप से अपने साथ ले जाता है।

इसलिए बुद्धिमान वही है जो नश्वर संसार में रहते हुए भी शाश्वत सत्य को खोजता है।

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💛 विदुर की यात्रा का असली अर्थ

विदुर जी की तीर्थयात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने की यात्रा नहीं थी।

यह थी—

राजमहल से वैराग्य तक की यात्रा,
मोह से ज्ञान तक की यात्रा,
प्रश्न से उत्तर तक की यात्रा,
और अंततः जीव से परमात्मा की ओर लौटने की यात्रा।

उन्होंने हमें सिखाया कि जब संसार के सारे सहारे छूटने लगें, तब घबराना नहीं चाहिए।

कभी-कभी भगवान हमें बाहरी सहारों से इसलिए दूर करते हैं, ताकि हम उनकी ओर मुड़ सकें। 🌿

विदुर जी के पास राजसी वैभव नहीं था, लेकिन उनके हृदय में श्रीकृष्ण थे।

और जिस हृदय में श्रीकृष्ण बस जाएँ—

उससे बड़ा कोई धनवान नहीं। 🙏❤️

✨ कथा का संदेश:
जीवन में कितनी भी यात्राएँ कर लें, यदि मन भगवान तक नहीं पहुँचा तो यात्रा अधूरी है।

और यदि हृदय में भगवान का स्मरण जाग गया,
तो साधारण जीवन भी तीर्थ बन जाता है।

🌸 जय श्रीकृष्ण
🌿 जय श्रीहरि
🙏 राधे राधे 🙏

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