Shri Mahasaraswati Puja Samiti, Grain Market, Ganesh Ganj, Lucknow.

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Shri Mahasaraswati Puja Samiti, Grain Market, Ganesh Ganj, Lucknow. We are registered religious organisation � under Society Registration Act Government of india.

महाराजतसंकाशां पूर्णचन्द्रनिभाननाम्।नानारत्नसमाकीर्णां कङ्कणैः कटकैरपि॥विभ्राजमानां दशभिर्बाहुभिः सुमनोहरैः।शरदम्भोजसंका...
23/05/2026

महाराजतसंकाशां पूर्णचन्द्रनिभाननाम्।
नानारत्नसमाकीर्णां कङ्कणैः कटकैरपि॥
विभ्राजमानां दशभिर्बाहुभिः सुमनोहरैः।
शरदम्भोजसंकाशविकासिमुखपङ्कजाम्॥
इन्दीवराभैर्विषमैर्लोचनैस्त्रिभिरुत्तमैः।
विद्योतयन्तीं नयनैरुद्दामद्युतिदामभिः॥
त्रिशूलं करवालञ्च चक्रं बाणञ्च शक्त्यपि।
चिन्तयेद् वामभागे तु खेटकं पूर्णचापकम्॥
पाशमङ्कुशञ्चैव परशुं ज्वालामालोपशोभिताम्।
ऊर्ध्वगुल्फं वामपदं महिषोपरिसंस्थिताम्॥
महिषं छिन्नशिरसमधस्तात् परिचिन्तयेत्।
खड्गचर्म्मधरं तत्र समुद्भूतं महासुरम्।
बिल्ववृक्षस्थितां ध्यायेत् सर्वकामार्थदायिनीम्॥
​One should meditate upon the Goddess who resides within the Bilva tree (Wood apple tree)and bestows all desires and goals. She possesses a complexion as brilliant as molten gold and a face as beautiful as the full moon. Adorned with various jewels, bracelets, and armlets, She shines with ten magnificent arms. Her lotus-like face blossoms with the grace of an autumnal lotus. She illuminates the surroundings with her three extraordinary eyes, which resemble blue lotuses and emit a fierce, radiant glow. In Her hands, She holds a trident, a sword, a discus, an arrow, and a spear, while on the left side, one should visualize a shield, a fully strung bow, a noose, a goad, and an axe. Surrounded by a garland of flames, She stands with Her left foot raised upon the buffalo demon. Beneath Her, one should envision the decapitated body of the buffalo, from which the great demon emerges holding a sword and a shield.

बड़ा मंगल विशेष;बड़ा मंगल विशेष:-हाट, बाट, कोट, ओट, अट्टनि, अगार पौरि,खोरि खोरि दौरि दौरि दीन्ही अति आगि है।आरत पुकारत ,...
19/05/2026

बड़ा मंगल विशेष;
बड़ा मंगल विशेष:-
हाट, बाट, कोट, ओट, अट्टनि, अगार पौरि,
खोरि खोरि दौरि दौरि दीन्ही अति आगि है।
आरत पुकारत , संभारत न कोऊ काहू,
ब्याकुल जहाँ सो तहाँ लोग चले भागि हैं ।।
बालधी फिरावै बार बार झहरावै, झरैं
बूंदिया सी लंक पघिलाई पाग पागि है।
तुलसी बिलोकि अकुलानी जातुधानी कहैं
" चित्रहू के कपि सों निसाचर न लागिहैं "।।

व्याख्या- तुलसीदास जी कहते हैं कि बाजार , मार्ग , किला , गली , अटारी, तथा गली गली में दौड़ दौड़ कर हनुमान जी अपनी पूंछ से आग लगा रहे हैं।
2):- सभी लोग एक दूसरे को पुकार रहे है , लेकिन कोई भी किसी को संभाल नहीं रहा है।
व्याकुल होकर सब इधर से उधर भाग रहे हैं।
3):- हनुमान जी जब अपनी पूंछ को बार -बार
हिलाकर झाड़ते हैं तो उनकी पूंछ मे लगी विकराल आग की लपटों से छोटी - छोटी अग्नि की बूंदे जब गिरती है तो ऐसा लगता है मानो जैसे कोई पिघली हुई लंका रूपी पाग मे बूंदिया बना रहा हो।
4):- तुलसीदास जी कहते हैं कि अत्यंत व्याकुल राक्षस और राक्षसी कह रहे हैं कि अब तो कोई निशाचर चित्र मे बने वानर से भी गलती से दुश्मनी मोल नहीं लेगा।

कदा वृन्दारण्ये विमलयमुनातीरपुलिने          चरन्तं गोविन्दं हलधरसुदामादिसहितम् । अये ! कृष्ण स्वामिन् ! मधुरमुरलीवादन वि...
14/05/2026

कदा वृन्दारण्ये विमलयमुनातीरपुलिने
चरन्तं गोविन्दं हलधरसुदामादिसहितम् ।
अये ! कृष्ण स्वामिन् ! मधुरमुरलीवादन विभो !
प्रसीदेत्याक्रोशन् निमिषमिव नेष्यामि दिवसान् ।।

ऐसे मेरे दिन कब होंगे, जब कालिन्दीके पावन पुलिनोंमें जहाँ श्रीश्यामसुन्दर अपने भाई बलदेवजी तथा श्रीदामा आदि सखाओंके सहित गौएँ चराते हुए विचरते हैं, उसमें हे मुरली-धारी, हे गिरिधारी ! हे स्वामिन् ! मुझपर प्रसन्न हो, प्रसन्न हो-ऐसा कहते-कहते ही जीवनके दिवसोंको क्षणके समान बिताऊँगा ।

बड़ा मंगल विशेष🙏🪷🙏बालधी विसाल विकराल ज्वाल-जाल मानौं, लंक लीलिबे को काल रसना पसारी है।कैथौं ब्योमबीथिका भरे हैं भूरि धूम...
12/05/2026

बड़ा मंगल विशेष

🙏🪷🙏
बालधी विसाल विकराल ज्वाल-जाल मानौं, लंक लीलिबे को काल रसना पसारी है।
कैथौं ब्योमबीथिका भरे हैं भूरि धूमकेतु, बीररस बीर तरवारि सी उघारी है।।
तुलसी सुरेस चाप, कैध दामिनी कलाप, कैध चली मेरु तें कृसानु-सरि भारी है।
देखे जातुधान जातुधानी अकुलानी कहें, "कानन उजार्यो अब नगर प्रजारी है" ।।1।।​

संदर्भ :
दी गई पंक्तियां कवितावली से ली गई है**।**
यह कवितावली तुलसीदास द्वारा लिखी गई है।
प्रसंग :
इन पंक्तियों में तुलसीदास जी ने रामायण के उस दृश्य का वर्णन किया है जिसमें हनुमान जी लंका दहन कर रहे है।
**व्याख्या:**जब हनुमान जी श्री राम का संदेश लेकर अशोक वाटिका पहुंचे

10/05/2026

Our Shri Saraswati Puja 2026

काढ़ि कृपान, कृपा, न कहूँ पितु काल कराल बिलोकि न भागे।'राम कहाँ? 'सब ठाँउ है' 'खंभ में?' 'हाँ' सुनि हाँक नरकेहरि जागे।बै...
07/05/2026

काढ़ि कृपान, कृपा, न कहूँ पितु काल कराल बिलोकि न भागे।
'राम कहाँ? 'सब ठाँउ है' 'खंभ में?' 'हाँ' सुनि हाँक नरकेहरि जागे।

बैरी विदारि भए बिकराल, कहे प्रहलादहि के अनुरागे।
प्रीति प्रतीति बढ़ी तुलसी तब तें सब पाहन पूजन लागे॥

तुलसी जी को जल अर्पित करते समय या उनकी पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है: ​महाप्रसाद जनन...
06/05/2026

तुलसी जी को जल अर्पित करते समय या उनकी पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:
​महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी,
आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।
​अर्थ: हे तुलसी! आप समस्त प्रसादों में श्रेष्ठ (महाप्रसाद) को उत्पन्न करने वाली हैं, सभी सौभाग्यों को बढ़ाने वाली हैं। आप भक्तों के मानसिक और शारीरिक कष्टों को हर लेती हैं। आपको बार-बार नमस्कार है।

आज श्री नृसिंह चतुर्दशी 🙏🪷🙏
30/04/2026

आज श्री नृसिंह चतुर्दशी 🙏🪷🙏

यह केवल "गर्मी" नहीं है, बल्कि उस पारिस्थितिकी दिवालिएपन (Ecological Bankruptcy) का परिणाम है, जिसका ब्लूप्रिंट पिछले एक...
27/04/2026

यह केवल "गर्मी" नहीं है, बल्कि उस पारिस्थितिकी दिवालिएपन (Ecological Bankruptcy) का परिणाम है, जिसका ब्लूप्रिंट पिछले एक दशक में तैयार किया गया है। जब दुनिया की 100 सबसे गर्म शहरों की सूची में 95 नाम भारत के हों, तो यह जलवायु परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रशासनिक और कॉर्पोरेट मिलीभगत से पैदा की गई एक आपदा है।

तपता भारत: 'कंक्रीट का विकास' या 'जीवंतता का विनाश'?

जब विकास की परिभाषा केवल 'पेड़ काटकर हाईवे बनाना' और 'जंगल उजाड़कर खदानें खोलना' रह जाए, तो नतीजे वही होते हैं जो आज हम भुगत रहे हैं। भारत आज एक "हीट चैंबर" बन चुका है, और इसकी जवाबदेही किसी 'अदृश्य मौसम' पर नहीं, बल्कि उन 'दृश्य निर्णयों' पर है जो सत्ता के गलियारों में लिए गए।

1. अरावली से हसदेव तक: "प्रॉफिट" के लिए "फेफड़ों" की बलि
जब लोग 'सेव अरावली', 'सेव आरे' या 'सेव हसदेव' के लिए सड़कों पर उतरे, तो उन्हें विकास विरोधी बताकर चुप करा दिया गया।
हसदेव का सच: छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में हज़ारों पेड़ों की कटाई केवल इसलिए की गई ताकि विशिष्ट बिजनेस घरानों के कोयला ब्लॉकों का रास्ता साफ हो सके। यह "देश की ज़रूरत" नहीं, बल्कि "कॉर्पोरेट की तिजोरी" भरने का खेल था।

अरावली का विनाश:दिल्ली-एनसीआर का प्राकृतिक बफर 'अरावली' आज अवैध खनन और अनियंत्रित निर्माण की भेंट चढ़ चुका है। नतीजा? झुलसा देने वाली लू और ज़हरीली हवा।

2. 'विश्वगुरु' का मॉडल: पर्यावरण संरक्षण कानूनों का कमज़ोर होना
पिछले कुछ वर्षों में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के नाम पर पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) के नियमों को जिस तरह से शिथिल किया गया, वह आत्मघाती है।
जवाबदेही: जब CAG 54,282 करोड़ के बेहिसाब खर्च पर सवाल उठाता है, तो हमें यह भी पूछना चाहिए कि पर्यावरण के नाम पर वसूले गए 'ग्रीन सेस' का क्या हुआ?

पॉलिसी विफलता: नीति-निर्माता चीन की तरह 'रियल रिसोर्सेज' (तेल रिज़र्व, फॉरेस्ट कवर) को सुरक्षित करने के बजाय रेटिंग एजेंसियों और बिल्डिंग लॉबी को खुश करने में लगे हैं।

3. 'ईएमआई' पर टिका घर और झुलसता शहर
मजदूरों की दिहाड़ी 2017 से फ्रीज है, घर की बचत खत्म हो रही है और मध्यम वर्ग कर्ज (EMI) के बोझ तले दबा है। ऐसे में एक व्यक्ति के लिए 'क्लाइमेट चेंज' एक विलासिता का मुद्दा बन जाता है, क्योंकि उसकी पूरी ऊर्जा केवल जिंदा रहने के संघर्ष में खर्च हो रही है। सत्ता इसी लाचारी का फायदा उठाती है और धार्मिक उन्माद व झूठी रैलियों के पीछे असली मुद्दों को दफन कर देती है।

यह राजनीतिक मुद्दा क्यों नहीं है?
यह मुद्दा राजनीतिक इसलिए नहीं बनता क्योंकि:

1. कॉर्पोरेट फंडिंग: जंगल काटने वाली कंपनियां ही राजनीतिक दलों की सबसे बड़ी चंदादाता (Political Funding) हैं।
2. इमोशनल नैरेटिव: जब तक जनता को 'धार्मिक गौरव' और 'वीवीआईपी काफिलों' की चकाचौंध में उलझाया जा सकता है, तब तक उसे 'साँस लेने लायक हवा' की कमी महसूस नहीं होने दी जाएगी।

मसूरी के मलबे से लेकर झारखंड के कटते जंगलों तक, कहानी एक ही है—"लूट की खुली छूट"। अगर आज भारत 'नॉन-लिवेबल' (जीने लायक नहीं) बन रहा है, तो इसकी सीधी जवाबदेही उस 'पॉलिसी सर्कल' पर है जिसने पर्यावरण को 'अड़चन' और कॉर्पोरेट मुनाफे को 'विकास' मान लिया है।

क्या अब समय नहीं आ गया कि 'लिविंग वेज' की तरह 'लिवेबल एनवायरनमेंट' को भी एक संवैधानिक अधिकार के रूप में मांगा जाए?

कल्पवल्ली हि दीनानां सर्वदारिद्र्यनाशिनी ।भूमिजा शान्तिदा शान्ता श्रीसीता शरणं मम ॥(वसिष्ठ संहिता)जो दीनजनों के लिए कल्प...
25/04/2026

कल्पवल्ली हि दीनानां
सर्वदारिद्र्यनाशिनी ।
भूमिजा शान्तिदा शान्ता
श्रीसीता शरणं मम ॥
(वसिष्ठ संहिता)

जो दीनजनों के लिए कल्पवल्ली के समान हैं और समस्त दरिद्रता का नाश करने वाली हैं, जो भूमिजा (भूमि की पुत्री), शान्त स्वरूप एवं शान्ति प्रदान करने वाली हैं— ऐसी श्रीसीताजी मेरी शरण हैं।

श्रीरघुनाथ-प्राणवल्लभा, श्री जनकदुलारी, श्री सुनयना प्राणप्यारी, भूमिजा, विदेहजा, त्रिभुवनसाम्राज्ञी श्री जानकी जी के प्राकट्य महामहोत्सव "श्री जानकी नवमी" की समस्त जीव सृष्टि को अनन्त बधाईयां।

जय गोमाता।।

मां आदि शक्ति की दस महाविद्याएं हैं, जैसे तारा, काली, छिन्नमस्ता, कमला, षोडषी, मां बगलामुखी, धूमावती आदि। आज शत्रुओं का ...
24/04/2026

मां आदि शक्ति की दस महाविद्याएं हैं, जैसे तारा, काली, छिन्नमस्ता, कमला, षोडषी, मां बगलामुखी, धूमावती आदि। आज शत्रुओं का नाश करनेवाली तथा उनकी जिह्वा को स्तंभित करनेवाली मां बगलामुखी की जयंती है।

#देविमांबगलामुखी_अष्टोत्तरशतनाम-स्तोत्रम!!
ऊँ ब्रह्मास्त्र-रुपिणी देवी,माता श्रीबगलामुखी।चिच्छिक्तिर्ज्ञान-रुपा च,ब्रह्मानन्द-प्रदायिनी ॥1॥
महा-विद्या महा-लक्ष्मी,श्रीमत् -त्रिपुर-सुन्दरी ।
भुवनेशी जगन्माता,पार्वती सर्व-मंगला ॥ 2 ॥

ललिता भैरवी शान्ता, अन्नपूर्णा कुलेश्वरी ।
वाराही छिन्नमस्ता च, तारा काली सरस्वती॥3॥
जगत् -पूज्या महा-माया,कामेशी भग-मालिनी ।
दक्ष-पुत्री शिवांकस्था,शिवरुपा शिवप्रिया ॥ 4 ॥

सर्व-सम्पत्-करी देवी,सर्व-लोक वशंकरी ।
वेद-विद्या महा-पूज्या,भक्ताद्वेषी भयंकरी ॥ 5 ॥
स्तम्भ-रुपा स्तम्भिनी च, दुष्ट-स्तम्भन-कारिणी ।
भक्त-प्रिया महा-भोगा,श्रीविद्या ललिताम्बिका॥6॥

मेना-पुत्री शिवानन्दा,मातंगी भुवनेश्वरी ।
नारसिंही नरेन्द्रा च,नृपाराध्या नरोत्तमा ॥7॥
नागिनी नाग-पुत्री च,नगराज-सुता उमा । पीताम्बरा पीत-पुष्पा च,पीत-वस्त्र-प्रिया शुभा॥8॥

पीत-गन्ध-प्रिया रामा,पीत-रत्नार्चिता शिवा ।
अर्द्ध-चन्द्र-धरी देवी,गदा-मुद्-गर-धारिणी ॥9॥
सावित्री त्रि-पदा शुद्धा,सद्यो राग-विवर्द्धिनी ।
विष्णु-रुपा जगन्मोहा,ब्रह्म-रुपा हरि-प्रिया ॥10॥

रुद्र-रुपा रुद्र-शक्तिद्दिन्मयी,भक्त-वत्सला । लोक-माता शिवा सन्ध्या,शिव-पूजन-तत्परा॥11॥
धनाध्यक्षा धनेशी च,धर्मदा धनदा धना ।
चण्ड-दर्प-हरी देवी,शुम्भासुर-निवर्हिणी ॥ 12 ॥

राज-राजेश्वरी देवी,महिषासुर-मर्दिनी ।
मधु-कैटभ-हन्त्री च,रक्त-बीज-विनाशिनी॥13॥
धूम्राक्ष-दैत्य-हन्त्री च,भण्डासुर-विनाशिनी ।
रेणु-पुत्री महा-माया,भ्रामरी भ्रमराम्बिका ॥14॥

ज्वालामुखी भद्रकाली,बगला शत्र-ुनाशिनी ।
इन्द्राणी इन्द्र-पूज्या च,गुह-माता गुणेश्वरी ॥15॥
वज्र-पाश-धरा देवी, जिह्वा-मुद्-गर-धारिणी।
भक्तानन्दकरी देवी,बगला परमेश्वरी ॥16॥

फल- श्रुति:-
अष्टोत्तरशतं नाम्नां,बगलायास्तु यः पठेत् ।
रिप-ुबाधा-विनिर्मुक्तः,लक्ष्मीस्थैर्यमवाप्नुयात्॥1॥
भूत-प्रेत-पिशाचाश्च,ग्रह-पीड़ा-निवारणम् ।
राजानो वशमायाति,सर्वैश्वर्यं च विन्दति ॥ 2 ॥

नाना-विद्यां च लभते,राज्यं प्राप्नोति निश्चितम् । भुक्ति-मुक्तिमवाप्नोति,साक्षात् शिव-समो भवेत्॥3॥

॥श्रीरूद्रयामले सर्वसिद्धिप्रद श्रीबगलाष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्॥

Address

Grain Market Ganesh Ganj
Lucknow
226018

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