01/02/2017
क्यो आये हम धरती पर (एक सोच)
(नश्वर जीवन, और सुख के बाद का जीवन)
एक प्रेरक कथानक
एक राज्य के लोग एक साल के बाद अपना राजा बदल लेते थे, राजा को हटाने के दिन जो भी व्यक्ति सबसे पहले शहर में आता था तो, उसे ही नया राजा घोषित कर दिया जाता था।
पहले वाले राजा को सैकड़ों मील में फैले जंगल के बीचोबीच छोड़ आते थे, जहां खूंखार जानवर थे। बेचारा अगर खूंखार जानवरो से किसी तरह अपने आप को बचा लेता तो भूख- प्यास से मर जाता।
न जाने कितने ही राजा ऐसे ही एक साल तक राज करने के बाद जंगल में जाकर मर गए।
एक बार राज्य में एक नौजवान किसी दूसरे राज्य से आया, वह इस राज्य के नियम से अंजान था। लोगों ने आगे बढ़ कर उसे बधाईयां दीं और बताया कि, आपको इस राज्य का नया राजा चुन लिया गया है।
नए राजा को बड़े मान-शान के साथ राजमहल में ले जाया गया, वह हैरान भी था, और ख़ुश भी, राजगद्दी पर बैठते ही उसने पूछा कि, "मुझसे पहले जो राजा था, वह कहाँ है?"
दरबारियों ने उसे राज्य का नियम बताया कि, "कैसे पुराने राजा को जंगल में छोड़ कर ही नया राजा चुना जाता है।"
यह बात सुनकर वह एक बार तो परेशान हुआ लेकिन फिर उसने दिमाग का इस्तेमाल करते हुए कहा कि, "मुझे उस जगह लेकर चलो जहां तुम पहले के राजाओ को छोड़कर आते हो।"
दरबारियों ने सिपाहियों को साथ लिया और, नए राजा को वह जगह दिखाने जंगल ले गए, राजा ने अच्छी तरह उस जगह को देखा और वापस आ गया। अगले दिन उसने सबसे पहला आदेश दिया कि "मेरे राजमहल से जंगल तक एक सड़क बनाई जाए।"
जंगल के बीचों बीच एक ख़ूबसूरत राजमहल बनाया जाए जहां पर हर तरह की सुविधा मौजूद हो, राज महल के बाहर ख़ूबसूरत बाग़ बनाया जाए। राजा के आदेश का पालन किया गया, जंगल में सड़क और राजमहल बनकर तैयार हो गया।
एक साल के पूरा होते ही राजा ने दरबारियों से कहा कि अपने नियम का पालन करो और मुझे वहां छोड़ आओ जहां राजाओ को छोड़ आते थे। दरबारियों ने कहा कि महाराज आज से यह नियम ख़त्म हो गया क्योंकि हमें अब एक अक़लमंद राजा मिल गया है।
वहां तो हम उन बेवक़ूफ राजाओं को छोड़कर आते थे जो एक साल की राज शाही के मज़े में बाक़ी की ज़िंदगी को भूल जाते. राजमहल की जिंदगी के बाद के जीवन के लिए कोई बंदोबस्त नहीं करते थे, जबकि उन्हें पता था कि उनको साल भर बाद यह सब छोड़ना होगा। लेकिन आपने दिमाग का इस्तेमाल किया और आगे का बंदोबस्त कर लिया, हमें ऐसे ही होशियार राजा की खोज थी।
प्रेरणा व अर्थः-
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●हम जीवों का जीवन चक्र भी ऐसा ही है, जो आता है वह जानता है कि उसे चले जाना है, जो सिर्फ इस लोक के ऐश्वर्य में फंसे रहते हैं, उनकी गति बाकी राजाओं सी होती है।
●जो इस लोक औऱ परलोक दोनों की सोचते हैं वे संकट से निकल जाते हैं।
●इस लोक के सुख को अपनी जरूरत से प्राप्त करने में तो जुटे ही रहते हैं।
●मित्रो, परलोक सुधारना है तो नेक कर्म जरूर कीजिए, व अपने सारे कर्म ईश्वर को समर्पित करते रहे।
●जमा-खाता रखिए, और स्मरण करते रहिए कि, आपके नेक कर्म ज्यादा जमा हुए हैं या बुरे कर्म क्योंकि गति उसके अनुरूप ही होनी है।
आप सभी को नमन, किसी के दिल को ठेस लगी हो तो क्षमा चाहता हूॅ