आज हम सभी समाज के उस मोड़ पर हैं जहा सुख एवं सुविधाओ के संग्रह में हम आत्मकेंद्रित (अपने मे ही जीने वाले) हो गए है जिसका प्रतिकूल प्रभाव हम पर ही सामाजिक असुरक्षा के रूप में पड़ रहा है समाज में असामनता बढ़ती ही जा रही है और एकाकीपन भी। जहा समाज में एक वर्ग बडी तेजी से धनाढ्य बन रहा है वही दूसरा वर्ग मौलिक सुख सुविधाओं और आवश्यकताओं के लिए पिसता जा रहा है। जहा एक वर्ग सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है वही दूसरा वर्ग थक कर या नकारात्मक दृष्टिकोण के अधीन हो कर अपराध या दुष्कर्मो के माध्यम से अपनी इक्षाओ और मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहा है।
ऐसे संवेदनशील एवं परिवर्तनशील समय में हम बुद्धिजीविओ का कर्तव्य बनता है की हम सार्मथ्यानुसार समाज में जरूरतमंद लोगांे की सहायता कर समाज का पोषण एवं सामाजिक मूल्यो का संरक्षण करे। हमने देखा है कि बहुत से लोग ऐसा कर भी रहे हैं। परन्तु हम स्वामी विवेकानन्द जी के उस कथन से प्रेरित है कि:
किसी व्यक्ति को भोजन कराने से या भिक्षा देने से बेहतर है की उसे स्वावलम्बी बनाया जाए जिससे भविष्य में वह आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी बने।
तो आइये अपने सामाजिक कर्तव्यों के पालन हेतु Topportunity Foundation के साथ मिलकर एक उन्नत एवं आदर्श समाज (स्वस्थ, स्वावलम्बी, संयुक्त, संवेदनशील, समर्थ, स्वाभिमानी एवं सुसंस्कृत समाज) का निर्माण एवं पोषण करें।