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हुसैनाबाद ट्रस्ट की ज़मीन पर पार्किंग और “लज़ीज़ गली” बनाए जाने के विरोध में उलमा और अंजुमन हाय मातमी के सदस्यों ने मौके...
22/05/2026

हुसैनाबाद ट्रस्ट की ज़मीन पर पार्किंग और “लज़ीज़ गली” बनाए जाने के विरोध में उलमा और अंजुमन हाय मातमी के सदस्यों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और डी.एम के फैसले की निंदा की।

17/05/2026
ईरान के संबंध में सरकार के रवैये और आयतुल्लाह ख़ामेनई की शहादत का शोक मनाने वालों पर पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ़ मौलाना कल्बे...
02/05/2026

ईरान के संबंध में सरकार के रवैये और आयतुल्लाह ख़ामेनई की शहादत का शोक मनाने वालों पर पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ़ मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और रक्षामंत्री को पत्र भेजा

लखनऊ, 2 मई: मजलिसे उलमा-ए-हिंद के महासचिव और इमाम-ए-जुमा लखनऊ, मौलाना सैय्यद कल्बे जवाद नक़वी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को एक विस्तृत पत्र भेजकर ईरान के प्रति भारत सरकार के रवैये और देश के विभिन्न हिस्सों में शहीद आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनई के शोक मनाने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर कड़ी चिंता और नाराज़गी का इज़हार किया। मौलाना ने भारत सरकार द्वारा आयतुल्लाह ख़ामेनई की शहादत के बाद शोक संदेश जारी न करने की भी निंदा की और इसे अमेरिकी दबाव में उठाया गया कदम बताया। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि 28 मार्च 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने उस समय ईरान पर हमला किया जब ओमान में वार्ता जारी थी, और इस हमले में आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनई अपने परिवार के कुछ सदस्यों के साथ शहीद हो गए, जिनमें उनकी एक छोटी नातिन भी शामिल थी। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इस गंभीर घटना पर भारत सरकार की ओर से न तो कोई निंदा की गई और न ही कोई शोक संदेश जारी किया गया, जबकि ईरान को भारत का एक पुराना और विश्वसनीय मित्र माना जाता है और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध हमेशा मजबूत रहे हैं।

मौलाना ने अपने पत्र में यह सवाल भी उठाया कि एक ओर ईरान पर हुई गंभीर आक्रामकता, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया गया, उस पर सरकार खामोश रही, जबकि दूसरी ओर क़तर और दुबई पर ईरान के हमलों की तुरंत निंदा की गई, जबकि इन हमलों में आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाया गया था बल्कि सैन्य ठिकानों और उन कंपनियों को लक्ष्य किया गया था जिनका संबंध अमेरिका और इज़राइल से था। पत्र में ईरान के शहर मीनाब के एक स्कूल पर हमले में 160 से अधिक मासूम छात्राओं की शहादत और तेहरान के महात्मा गांधी अस्पताल पर बमबारी का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ऐसे अमानवीय घटनाओं पर भी सरकार की चुप्पी बेहद दुखद और निंदनीय है। मौलाना ने कहा कि इस रवैये से न केवल भारत की विदेश नीति पर सवाल उठे हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि भी प्रभावित हुई है।

मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने आगे कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों, खासकर उत्तर प्रदेश और कश्मीर में आयतुल्लाह ख़ामेनई की तस्वीरें लगाने और उनकी शहादत पर शोक मनाने वाले युवाओं के खिलाफ पुलिस ने सख्त कार्रवाई की। उन्होंने आरोप लगाया कि न केवल युवाओं को गिरफ़्तार किया गया, बल्कि उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए और कुछ स्थानों पर उनकी तस्वीरों का अपमान किया गया, जो अत्यंत आपत्तिजनक है। मौलाना ने कहा कि हिंदुस्तान के कुछ स्थानों पर आयतुल्लाह ख़ामेनई की शहादत पर कार्यक्रमों की अनुमति नहीं दी गई, जिससे लोगों में भारी नाराज़गी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय मुसलमान आयतुल्लाह ख़ामेनई को एक धार्मिक नेता के रूप में देखते हैं, न कि किसी राजनीतिक नेता के रूप में, इसलिए उनकी तस्वीरों पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी शहादत से पहले भी पुलिस ने उनकी तस्वीरों के संबंध में गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाया था, जिसकी वे निंदा करते हैं, और ऐसे पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। पत्र में यह भी कहा गया कि भारत सरकार के नकारात्मक रवैये के बावजूद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय जहाज़ों को अनुमति दी, जिसे उन्होंने भारतीय जनता की ईरान के प्रति सहानुभूति का परिणाम बताया। मौलाना ने मांग की कि उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए जिन्होंने युवाओं को परेशान किया, गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ मामले दर्ज किए, साथ ही जिन्होंने आयतुल्लाह ख़ामेनई की तस्वीरों का अपमान किया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं की गई तो यह संदेश जाएगा कि भारत सरकार ईरान के साथ दोस्ताना संबंध बनाए रखने में गंभीर नहीं है।

पत्र में यह भी कहा गया कि भारत को अमेरिका और इज़राइल के साथ रक्षा समझौतों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, क्योंकि यदि ये देश स्वयं अपनी रक्षा में पूरी तरह सफल नहीं हो पाए हैं तो उनके रक्षा तंत्र पर आंख बंद करके भरोसा करना समझदारी नहीं होगी। अंत में मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने ज़ोर दिया कि भारत को अपने पारंपरिक रुख की ओर लौटते हुए ईरान के साथ संबंधों को और मजबूत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच बेहतर संबंध न केवल दोनों देशों के लिए लाभदायक होंगे बल्कि क्षेत्र में शक्ति संतुलन को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करेंगे। उन्होंने कहा कि हम, एक भारतीय नागरिक के रूप में, यह मानते हैं कि इज़राइल के साथ हमारा राष्ट्रीय हित जुड़ा नहीं है, बल्कि हमारे अधिकांश राष्ट्रीय हित मुस्लिम देशों, विशेषकर ईरान, के साथ जुड़े हुए हैं, इसलिए ईरान के साथ संबंधों को मजबूत किया जाना चाहिए।

यह पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को ईमेल के माध्यम से भेजा गया।

دفتر آیۃ اللہ العظمیٰ الحاج بشیر حسین نجفی دام ظلہ الوارف سے مولانا ضامن حسین نجفی نے مجلس علمائے ہند کے جنرل سکریٹری ،...
30/04/2026

دفتر آیۃ اللہ العظمیٰ الحاج بشیر حسین نجفی دام ظلہ الوارف سے مولانا ضامن حسین نجفی نے مجلس علمائے ہند کے جنرل سکریٹری ،امام جمعہ مولانا کلب جواد نقوی سے گھر پر ملاقات کی ۔

15/04/2026

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