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यहां किताबों से सीखी गई 100 महत्वपूर्ण बातें :-1. विनम्र रहो, तुम सब कुछ नहीं जानते हो।2. अक्सर वजन उठाओ।3. प्रकृति में ...
07/03/2025

यहां किताबों से सीखी गई 100 महत्वपूर्ण बातें :-

1. विनम्र रहो, तुम सब कुछ नहीं जानते हो।

2. अक्सर वजन उठाओ।

3. प्रकृति में चलने के लिए समय निकालो।

4. अक्सर असुविधा को अपनाओ।

5. पूर्णता नहीं, प्रगति के बारे में सोचो।

6. अपने अहंकार को नियंत्रित करो।

7. जल्दी पैसे कमाने के लिए समझौता मत करो।

8. अगर तुम इसे अभी कर सकते हो, तो कल तक मत छोड़ो।

9. रोज़ गहरी मेहनत करो।

10. ऊर्जा केवल उन चीजों पर खर्च करो, जिन्हें तुम नियंत्रित कर सकते हो।

11. खुद पर हंसी उड़ाओ। आराम करो।

12. जो तुम पसंद नहीं करते, वह करना बंद करो।

13. “जब भी आप अपमानित महसूस करें, तो समझें कि आप खुद भी उस अपमान को स्वीकार कर रहे हैं।” — एपिक्टेटस

14. एक ऐसा शौक ढूंढो जिसका कोई वित्तीय उद्देश्य न हो।

15. अपनी आंतरिक मंडली को सीमित करो।

16. अपने आप को यह सिखाओ कि बाधाओं को अवसर के रूप में देखो।

17. जो तुम करने वाले हो, उसके बारे में बात मत करो। जो तुमने किया, उसके बारे में बात करो।

18. किताबें पढ़ो सीखने के लिए, न कि यह दिखाने के लिए कि तुम किताबें पढ़ते हो।

19. हर दिन कुछ कठिन करो।

20. लोग तुम्हारे बारे में नहीं, बल्कि खुद के बारे में चिंता करते हैं। इससे शांति पाओ।

21. निर्णय लेने से पहले गहरे विचार करो।

22. रोज़ सूर्य की रोशनी में समय बिताओ।

23. “उन लोगों से संबंध रखें जो आपको सुधारने में मदद कर सकते हैं। ऐसे लोगों का स्वागत करें जिनके साथ आप सुधार सकते हैं।”

24. एक सुंदर कला का निवेश करो और उसे अपने घर में रखें।

25. एक प्यारा पालतू जानवर अपनाओ और आपकी खुशी बढ़ेगी।

26. उत्पादकता बढ़ाने के लिए व्यक्तिगत डेडलाइन सेट करो।

27. दूसरों की प्रशंसा करो, अपनी नहीं।

28. समय पर बिस्तर पर जाओ।

29. अपने फोन को बिस्तर पर मत ले जाओ।

30. “हमेशा आवश्यक से कम बोलो।” — रॉबर्ट ग्रीन

31. याद रखो "अच्छा किया" "अच्छा कहा" से बेहतर है।

32. यह समझो कि तुम हर किसी से कुछ न कुछ सीख सकते हो।

33. दूसरों से अपनी तुलना मत करो।

34. जब हालात खराब हों, तब भी प्रार्थना करो, जब हालात अच्छे हों, तब भी प्रार्थना करो।

35. अपने विवाह को अपने करियर से ज्यादा महत्वपूर्ण समझो।

36. यह समझो कि नफरत तुम्हारी चिकित्सा नहीं कर सकती।

37. क्लासिक्स पढ़ो। वे समय के लिए हैं।

38. शक्तिशाली बनना चुनो, न कि दुखी।

39. तुम्हारा गुस्सा एक बोझ है, यह कोई संपत्ति नहीं है।

40. आत्म-प्रेरणा ज्यादा प्रभावी नहीं है, प्रमाण जुटाओ।

41. अक्सर "अच्छा करो"।

42. किताब की कीमत के बारे में चिंता मत करो, बस उसे खरीदो अगर तुम पढ़ने वाले हो।

43. गलत देखना, और कुछ न करना, गलत है।

44. जीवन भर छात्र बने रहो।

45. ऐसा काम करो कि किसी को भी तुमसे कुछ न मांगना पड़े।

46. आगे बढ़ने से पहले कीमत का विचार करो।

47. giver के रूप में पहचाने जाओ, लेने वाले के रूप में नहीं।

48. हर बार जब तुम आशीर्वाद प्राप्त करो, तो किसी और को आशीर्वाद देने की कोशिश करो।

49. अकेलेपन की क़ीमत समझो।

50. चुनौतियों का सामना करो।

51. अनुभवों का पीछा करो, चीजों का नहीं।

52. जहरीले लोगों को अपनी जिंदगी से निकाल दो।

53. सफलता की कल्पना रोज़ करो।

54. सोशल मीडिया पर खुद को दिखाने के लिए ऊर्जा बर्बाद मत करो।

55. जो तुम करते हो, उसका एक अच्छा कारण होना चाहिए। अगर नहीं, तो उसे छोड़ दो।

56. दूसरों से मत मुकाबला करो, कल से बेहतर बनो।

57. खुद पर सख्त रहो, दूसरों के साथ लचीला रहो।

58. मोलभाव में माहिर बनो।

59. महान लोगों की जीवनी पढ़ो, उनका अध्ययन करो।

60. बच्चे पैदा करो। इससे बड़ी खुशी कुछ नहीं है।

61. माफ करो, भले ही वे इसके लायक न हों। यह उनके लिए नहीं, तुम्हारे लिए है।

62. बड़े लोगों के साथ समय बिताओ।

63. कोई शॉर्टकट नहीं है। सीखो और काम शुरू करो।

64. अनुशासन विकसित करो, प्रेरणा पर निर्भर मत रहो।

65. क्लिच से बचो मत। उनका ज्ञान कालातीत होता है।

66. सीखने के लिए पढ़ो, बस पढ़ने के लिए मत पढ़ो।

67. दर्शनशास्त्र पढ़ो।

68. अपना दर्शनशास्त्र तय करो।

69. आदतों को जलाने की शक्ति बढ़ाओ।

70. वर्तमान में जियो, अतीत को भूल जाओ।

71. हर दिन चलो।

72. हमेशा सच बोलो।

73. कोई भी काम छोटा नहीं होता।

74. "धन्यवाद" नोट लिखने की आदत बनाओ।

75. ममेंटो मोरी - अपनी मौत के बारे में सोचो। इसे तुम्हें सकारात्मक रूप से बदलने दो।

76. स्वतंत्रता के लिए संपत्ति प्राप्त करो, न कि स्थिति के लिए।

77. हमेशा कमरे में सबसे कठिन काम करने वाले बनो।

78. कभी भी कमरे में सबसे सफल व्यक्ति मत बनो।

79. प्रक्रिया को मंजिल से ज्यादा महत्व दो।

80. कभी भी कचरा देखकर उसे अनदेखा मत करो।

81. शतरंज खेलो।

82. अजनबियों से बात करो, यह तुम्हें बहुत कुछ सिखाएगा।

83. आदतों को अत्यधिक नियम मत बनाओ।

84. साधारण परिस्थितियों में सफलता प्राप्त करना सीखो।

85. आकर्षण नहीं, क्रियाओं का अभ्यास करो।

86. बार-बार असफल हो, बस कभी हार मत मानो।

87. जब तुम गिरो, जल्दी उठो।

88. जर्नल करो।

89. समाचार देखना बंद करो।

90. हर तिमाही अपने समय का ऑडिट करो। समय को चुराने वाले कौन हैं?

91. जो लोग तुमसे आगे हैं, उनसे जलो मत, उनसे सीखो।

92. तुम्हारा चरित्र तुम्हारे बैंक खाते से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

93. “नहीं” कहना सीखो (अक्सर)।

94. सफलता केवल संपत्ति नहीं है।

95. दूसरों का न्याय मत करो।

96. दूसरों के साथ वही करो, जो तुम चाहते हो कि वे तुम्हारे साथ करें।

97. जल्दी उठो।

98. शराब को छोड़ दो।

99. अपने पड़ोसी से प्यार करो।

100. एक दिलचस्प जीवन जियो।

04/08/2024

हमारा विनाश कब व कैसे शुरू हुआ था?
1. हमारा विनाश उस समय से शुरू हुआ था, जब हरित क्रांति के नाम पर देश में रासायनिक खेती की शुरूआत हुई और हमारा पौष्टिक वर्धक, शुद्ध भोजन विष युक्त कर दिया गया।

2. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन देश में जर्सी गाय लायी गई और भारतीय स्वदेशी गाय का अमृत रूपी दूध छोड़कर जर्सी गाय का विषैला दूध पीना शुरु किया था।

3. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन भारतीयों ने दूध, दही, मक्खन, घी आदि छोड़कर शराब पीना शुरू किया था।

4. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन देशवासियों ने गन्ने का रस छोड़कर पेप्सी, कोका कोला पीना शुरु किया था, जिसमें 12 तरह के कैमिकल होते हैं और जो कैंसर, टीबी, हृदय घात का कारण बनते हैं।

5. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन देशवासियों ने शुद्ध देशी तेल खाना छोड़ दिया था और रिफाइंड आयल खाना शुरू किया था, जो रिफाइंड ऑयल हृदयघात आदि का कारण बन रहा है।

6. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन देश के युवाओं ने नशा शुरू किया था। बीडी, सिगरेट, गुटखा, गांजा, अफीम, आदि शुरू किया था, जिससे कैंसर बढ रहा है।

7. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन देश में हजारों नकली दवाओं का व्यापार शुरु हुआ और नकली दवाओं से लोग मर रहे हैं।

8. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन देशवासियों ने अपने स्वदेशी भोजन छोड़कर पीजा, बर्गर, जंक फूड खाना शुरू किया था, जो अनेक बीमारियों का कारण बन रहा है।

9. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन लोगों ने अनुशासित और स्वस्थ दिनचर्या को छोड़कर मनमानी दिनचर्या शुरू की थी।

10. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन लोगों ने घरों में एलुमिनियम के बर्तन व घर में फ्रिज लाया था।

11. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन भारतीय जीवन शैली को छोड़कर विदेशी जीवन शैली शुरू की थी।

12 .हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन लोगों ने स्वस्थ रहने का विज्ञान छोड दिया था और अपने शरीर के स्वास्थ्य सिद्धांतों के विपरीत कार्य करना शुरू किया था ।

13. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन देश का अधिकतर युवा / युवतियां व्यभिचारी बनकर व्यभिचार करना, गर्भ निरोधक गोलियां खाना, लाखों युवतियां हर साल गर्भाशय कैंसर से मरती हैं।

14. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था, जिस दिन लोगों ने अपने बच्चों को टीके लगवाना शुरू किया था और यह विचार कभी भी नहीं किया था कि टीकों का बच्चों के शरीर पर भविष्य में क्या प्रभाव पडेगा?

15. इस शरीर की कुछ सीमा है, कुछ मर्यादा है, कुछ स्वस्थ सिद्धांत हैं, लेकिन मनमाने आचरण के कारण शरीर की बर्बादी की है।

नोट :- हमारे विनाश के अनेक कारण हैं। आज लोगों को सिर्फ रोना ही दिखाई दे रहा है, उन्हें यह भी देखना चाहिए कि लोग कैंसर, टीबी, हृदय घात, शुगर, किडनी फेल, BP High, BP Low, अस्थमा आदि गंभीर बीमारियों से मर रहे है Rajinder Singh

04/08/2024

सेब-संतरे पर क्‍यों लगे होते हैं स्‍टीकर, 100 में 99 लोग नहीं जानते असली फंडा:-
दिल्‍ली-मुंबई जैसे बड़े शहर हों या यूपी, बिहार का कोई छोटा जिला. हर जगह अब आपको ज्‍यादातर स्‍टीकर लगे सेब-संतरे ही बिकते दिखते होंगे. फलों पर स्‍टीकर लगा देख ज्‍यादातर लोग यही समझते हैं कि यह प्रीमियम क्‍वालिटी का और बाहर से इम्‍पोर्ट किया गया फ्रूट है।
इसकी क्‍वालिटी जबरदस्‍त होगी तो कुछ महंगा खरीदने में भी कोई हर्ज नहीं. फल बेचने वाला भी ग्राहक की इसी मानसिकता का जमकर फायदा उठाते हैं और आपको प्रीमियम क्‍वालिटी और विदेश से मंगाने की बात कहकर जमकर चूना भी लगाते हैं।

सेब हो या संतरा ऐसे हर फ्रूट पर आपको मॉल से लेकर रेहड़ी-पटरी तक स्‍टीकर लगे दिख जाएंगे. ऐसे फ्रूट को खरीदने में भी लोग तरजीह देते हैं, लेकिन 100 में 99 लोगों को इसका असली मकसद नहीं पता होगा. जैसा हमने बताया कि ज्‍यादातर लोग इसे प्रीमियम क्‍वालिटी और इम्‍पोर्ट किया फल मानते हैं, लेकिन आज हम आपका यह भ्रम दूर किए देते हैं. दरअसल, इन स्‍टीकर्स का न तो एक्‍सपोर्ट-इम्‍पोर्ट से कोई लेना देना है और न ही फलों की कीमत से, बल्कि यह सीधे तौर पर आपकी सेहत से जुड़ा होता है. कैसे, चलिए एक्‍सपर्ट के हवाले से डिटेल में जानते हैं।

4 डिजिट का स्‍टीकर लगा है तो…
अगर आपको सेब या संतरे पर 4 डिजिट का स्‍टीकर लगा दिखे तो उसे खरीदने से पहले सावधान हो जाइए. इन स्‍टीकर पर लिखे नंबरों की शुरुआत भी 4 अंक से होती है, जैसे 4026 अथवा 4987 आदि. यानी स्‍टीकर पर चार अंक हों और उनकी शुरुआत 4 से हो रही है तो ऐसे फलों का उत्‍पादन कीटनाशक और केमिकल के इस्‍तेमाल से हुआ है. यह नंबर फलों की गुणवत्‍ता को बताते हैं. यह फल आपको कुछ सस्‍ते मिल सकते हैं, लेकिन आपकी सेहत को फायदा कम और नुकसान ज्‍यादा पहुंचाते हैं।
5 डिजिट में है नंबर तो क्‍या मतलब
आपने देखा होगा कि कुछ फलों के स्‍टीकर पर 5 डिजिट में नबंर लिखे होते हैं. इन नंबरों की शुरुआत 8 से होती है. जैसे 84131 या 86532 आदि नंबर लिखे होते हैं तो इसका मतलब ये हुआ कि ऐसे फल जेनेटिकली मोडिफाइड हैं. यानी यह फल प्राकृतिक नहीं हैं, बल्कि लैब में विकसित किए गए हैं. इनकी कीमत केमिकल और कीटनाशक वाले फलों से ज्‍यादा होती है. ऐसे फल सेहत को कुछ फायदा पहुंचाते हैं तो इनका कुछ नुकसान भी होता है।

सबसे अच्‍छा है ये वाला
अब आपको बताते हैं कि बेस्‍ट क्‍वालिटी फ्रूट पर किस तरह के स्‍टीकर लगे होते हैं. ऐसे स्‍टीकर पर नंबरों की संख्‍या तो 5 ही होती है, लेकिन इनकी शुरुआत 9 से होती है. जैसे 93435 आदि कुछ भी हो सकता है. इसका मतलब है कि इन फलों को बिना केमिकल और कीटनाशक के ऑर्गेनिक तरीके से पैदा किया गया है. जाहिर है कि इनकी कीमत बाकी के मुकाबले ज्‍यादा होगी, लेकिन सेहत का सवाल है तो ऐसे फल ही सबसे बेस्‍ट क्‍वालिटी के होते हैं।

 #आहार के नियम भारतीय 12 महीनों अनुसार #चैत्र ( मार्च-अप्रैल) – इस महीने में गुड का सेवन करे क्योकि गुड आपके रक्त संचार ...
18/07/2024

#आहार के नियम भारतीय 12 महीनों अनुसार

#चैत्र ( मार्च-अप्रैल) – इस महीने में गुड का सेवन करे क्योकि गुड आपके रक्त संचार और रक्त को शुद्ध करता है एवं कई बीमारियों से भी बचाता है। चैत्र के महीने में नित्य नीम की 4 – 5 कोमल पतियों का उपयोग भी करना चाहिए इससे आप इस महीने के सभी दोषों से बच सकते है। नीम की पतियों को चबाने से शरीर में स्थित दोष शरीर से हटते है।

#वैशाख (अप्रैल – मई)- वैशाख महीने में गर्मी की शुरुआत हो जाती है। बेल पत्र का इस्तेमाल इस महीने में अवश्य करना चाहिए जो आपको स्वस्थ रखेगा। वैशाख के महीने में तेल का उपयोग बिल्कुल न करे क्योकि इससे आपका शरीर अस्वस्थ हो सकता है।

#ज्येष्ठ (मई-जून) – भारत में इस महीने में सबसे अधिक गर्मी होती है। ज्येष्ठ के महीने में दोपहर में सोना स्वास्थ्य वर्द्धक होता है , ठंडी छाछ , लस्सी, ज्यूस और अधिक से अधिक पानी का सेवन करें। बासी खाना, गरिष्ठ भोजन एवं गर्म चीजो का सेवन न करे। इनके प्रयोग से आपका शरीर रोग ग्रस्त हो सकता है।

#अषाढ़ (जून-जुलाई) – आषाढ़ के महीने में आम , पुराने गेंहू, सत्तु , जौ, भात, खीर, ठन्डे पदार्थ , ककड़ी, पलवल, करेला, बथुआ आदि का उपयोग करे व आषाढ़ के महीने में भी गर्म प्रकृति की चीजों का प्रयोग करना आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

#श्रावण (जूलाई-अगस्त) – श्रावण के महीने में हरड का इस्तेमाल करना चाहिए। श्रावण में हरी सब्जियों का त्याग करे एव दूध का इस्तेमाल भी कम करे। भोजन की मात्रा भी कम ले – पुराने चावल, पुराने गेंहू, खिचड़ी, दही एवं हलके सुपाच्य भोजन को अपनाएं।

#भाद्रपद (अगस्त-सितम्बर) – इस महीने में हलके सुपाच्य भोजन का इस्तेमाल कर वर्षा का मौसम् होने के कारण आपकी जठराग्नि भी मंद होती है इसलिए भोजन सुपाच्य ग्रहण करे। इस महीने में चिता औषधि का सेवन करना चाहिए।

#आश्विन (सितम्बर-अक्टूबर) – इस महीने में दूध , घी, गुड़ , नारियल, मुन्नका, गोभी आदि का सेवन कर सकते है। ये गरिष्ठ भोजन है लेकिन फिर भी इस महीने में पच जाते है क्योकि इस महीने में हमारी जठराग्नि तेज होती है।

#कार्तिक (अक्टूबर-नवम्बर) – कार्तिक महीने में गरम दूध, गुड, घी, शक्कर, मुली आदि का उपयोग करे। ठंडे पेय पदार्थो का प्रयोग छोड़ दे। छाछ, लस्सी, ठंडा दही, ठंडा फ्रूट ज्यूस आदि का सेवन न करे , इनसे आपके स्वास्थ्य को हानि हो सकती है।

#अगहन (नवम्बर-दिसम्बर) – इस महीने में ठंडी और अधिक गरम वस्तुओ का प्रयोग न करे।

#पौष (दिसम्बर-जनवरी) – इस ऋतू में दूध, खोया एवं खोये से बने पदार्थ, गौंद के लाडू, गुड़, तिल, घी, आलू, आंवला आदि का प्रयोग करे, ये पदार्थ आपके शरीर को स्वास्थ्य देंगे। ठन्डे पदार्थ, पुराना अन्न, मोठ, कटु और रुक्ष भोजन का उपयोग न करे।

#माघ (जनवरी-फ़रवरी) – इस महीने में भी आप गरम और गरिष्ठ भोजन का इस्तेमाल कर सकते है। घी, नए अन्न, गौंद के लड्डू आदि का प्रयोग कर सकते है।

#फाल्गुन (फरवरी-मार्च) – इस महीने में गुड का उपयोग करे। सुबह के समय योग एवं स्नान का नियम बना ले। चने का उपयोग न करे।

Jai Shree Ram
27/01/2024

Jai Shree Ram

04/12/2023

Jai Mata Di

27/07/2023

*जामुन एक ऐसा वृक्ष जिसके अंग अंग में औषधि है।*🍇

🍇अगर जामुन की मोटी लकड़ी का टुकडा पानी की टंकी में रख दे तो टंकी में शैवाल, हरी काई नहीं जमेगी और पानी सड़ेगा भी नहीं।

🍇जामुन की इस खुबी के कारण इसका इस्तेमाल नाव बनाने में बड़ा पैमाने पर होता है।

🍇पहले के जमाने में गांवो में जब कुंए की खुदाई होती तो उसके तलहटी में जामून की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है जिसे जमोट कहते है।

🍇दिल्ली की निजामुद्दीन बावड़ी का हाल ही में हुए जीर्णोद्धार से ज्ञात हुआ 700 सालों के बाद भी गाद या अन्य अवरोधों की वजह से यहाँ जल के स्तोत्र बंद नहीं हुए हैं।

🍇भारतीय पुरातत्व विभाग के प्रमुख के.एन. श्रीवास्तव के अनुसार इस बावड़ी की अनोखी बात यह है कि आज भी यहाँ लकड़ी की वो तख्ती साबुत है जिसके ऊपर यह बावड़ी बनी थी। श्रीवास्तव जी के अनुसार उत्तर भारत के अधिकतर कुँओं व बावड़ियों की तली में जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल आधार के रूप में किया जाता था।

🍇स्वास्थ्य की दृष्टि से विटामिन सी और आयरन से भरपूर जामुन शरीर में न केवल हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता। पेट दर्द, डायबिटीज, गठिया, पेचिस, पाचन संबंधी कई अन्य समस्याओं को ठीक करने में अत्यंत उपयोगी है।

🍇एक रिसर्च के मुताबिक, जामुन के पत्तियों में एंटी डायबिटिक गुण पाए जाते हैं, जो रक्त शुगर को नियंत्रित करने करती है। ऐसे में जामुन की पत्तियों से तैयार चाय का सेवन करने से डायबिटीज के मरीजों को काफी लाभ मिलेगा।

🍇सबसे पहले आप एक कप पानी लें। अब इस पानी को तपेली में डालकर अच्छे से उबाल लें। इसके बाद इसमें जामुन की कुछ पत्तियों को धो कर डाल दें। अगर आपके पास जामुन की पत्तियों का पाउडर है, तो आप इस पाउडर को 1 चम्मच पानी में डालकर उबाल सकते हैं। जब पानी अच्छे से उबल जाए, तो इसे कप में छान लें। अब इसमें आप शहद या फिर नींबू के रस की कुछ बूंदे मिक्स करके पी सकते हैं।

🍇जामुन की पत्तियों में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं. इसका सेवन मसूड़ों से निकलने वाले खून को रोकने में और संक्रमण को फैलने से रोकता है। जामुन की पत्तियों को सुखाकर टूथ पाउडर के रूप में प्रयोग कर सकते हैं. इसमें एस्ट्रिंजेंट गुण होते हैं जो मुंह के छालों को ठीक करने में मदद करते हैं। मुंह के छालों में जामुन की छाल के काढ़ा का इस्तेमाल करने से फायदा मिलता है। जामुन में मौजूद आयरन खून को शुद्ध करने में मदद करता है।

🍇जामुन की लकड़ी न केवल एक अच्छी दातुन है अपितु पानी चखने वाले (जलसूंघा) भी पानी सूंघने के लिए जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल करते।
*☘️एक कदम आयुर्वेद की ओर☘️*
🙏🏻

05/07/2023

गहराई से सोचो !
आपकी ज़िंदगी का कोच कौन है ??

अनीता_अल्वारेज,
अमेरिका की एक पेशेवर तैराक हैं जो वर्ल्ड चैंपियनशिप के दौरान परफॉर्म करने के लिए स्विमिंग पूल में जैसे ही छलांग लगाई , वो छलांग लगाते ही पानी के अंदर बेहोश हो गई ,

जहाँ पूरी भीड़ सिर्फ़ जीत और हार के बारे में सोच रही थी वहीं उसकी कोच एंड्रिया ने जब देखा कि अनीता एक नियत समय से ज़्यादा देर तक पानी के अंदर है ,

एंड्रिया पल भर के लिए सब कुछ भूल गई कि वर्ल्ड चैंपियनशिप प्रतियोगिता चल रही है , एक पल भी व्यर्थ ना करते हुए एंड्रिया चलती प्रतियोगिता के बीच में ही स्विमिंग पूल में छलांग लगा दी ,

वहाँ मौजूद हज़ारों लोग कुछ समझ पाते तब तक एंड्रिया पानी के अंदर अनीता के पास थी ,
एंड्रिया ने देखा कि अनीता स्विमिंग पूल में पानी के अंदर बेहोश पड़ी है ,

ऐसी हालत में ना हाथ पैर चला सकती ना मदद माँग सकती ,

एंड्रिया ने अनीता को जैसे बाहर निकाला मौजूद हज़ारों लोग सन्न रह गए , एंड्रिया ने अनीता को तो बचा लिया ,

लेकिन हम सबकी ज़िंदगी में बहुत बड़ा सवाल छोड़ गई !

इस दुनियाँ में ना जाने कितने लोग हम सबकी ज़िंदगी से जुड़े हैं कितनों से रोज़ मिलते भी होंगे ,

जो इंसान हर किसी से अपने मन की बात नहीं कह पाता कि असल ज़िंदगी में वह भी कहीं डूब रहा है , वह भी किसी तकलीफ़ से गुज़र रहा है , वह भी किसी बात को लेक़र ज़िंदगी से परेशान हो रहा है , लेकिन बता नहीं पा रहा है

जब इंसान किसी को अपने मन की व्यथा , अपनी परेशानी नहीं बता पाता तो मानसिक तनाव इतना बढ़ जाता है कि वह ख़ुद को पूरी दुनियाँ से अलग़ कर लेता है , सबकी नज़रों से दूर एकांत में ख़ुद को चारदीवारी में क़ैद कर लेता है ,

ये वक़्त ऐसा होता है कि तब इंसान डूब रहा होता है , उसका मोह ख़त्म हो चुका होता है , ना किसी से बात चीत ना किसी से मिलना जुलना ,

ये स्थिति इंसान के लिए सबसे ख़तरनाक होती है ,

जब इंसान अपने डूबने के दौर से गुज़र रहा होता है , तब बाक़ी सब दर्शकों की भाँति अपनी ज़िंदगी में व्यस्त होते हैं किसी को ख़्याल ना होता कि एक इंसान किसी बड़ी परेशानी में है ,

अगर इंसान कुछ दिन के लिए ग़ायब हो जाए तो पहले तो लोगों को ख़्याल नहीं आएगा , अगर कुछ को आ भी जाए तो लोग यही सोचेंगे , पहले कितनी बात होती थी अब वो बदल गया है या फिर उसे घमंड हो गया है या अब तो बड़ा आदमी बन गया है इसलिए बात नहीं करता , जब वो बात नहीं करता तो हम कियूँ करें !

या फिर ये सोच लेते हैं कि अब दिखाई ना देता तो वो अपनी ज़िंदगी में मस्त है इसलिए नहीं दिखाई देता ,

अनीता पेशेवर तैराक होते हुए डूब सकती है तो कोई भी अपनी ज़िंदगी में बुरे दौर से गुज़र सकता है , ये समझना ज़रूरी है

लेकिन उन लोगों से हट कर कोई एक इंसान ऐसा भी होगा जो आपकी मनोस्थिति तुरंत भाँप लेगा , उसे बिना कुछ बताये सब पता चल जाएगा , आपकी ज़िंदगी के हर पहलू पर हमेशा नज़र रखेगा , थोड़ा सा भी परेशान हुए वो आपकी परेशानी आकर पूछने लगेगा ,

आपके बेहवियर को पहचान लेगा , आपको हौसला देगा आपको सकारात्मक बनायेगा और एंड्रिया की तरह कोच बन कर आपकी ज़िंदगी को बचा लेगा ,

हम सबको ऐसे कोच की ज़रूरत पड़ती है…

ऐसा कोच कोई भी हो सकता है , आपका भाई , बहन , माँ , पापा ,
आपका कोई दोस्त , आपका कोई हितैषी , आपका कोई रिश्तेदार , कोई भी , जो बिना बताये आपके भावों को पढ़ ले और तुरंत एक्शन ले।

गहराई से सोचो आपकी ज़िंदगी का कोच कौन है ??

साभार

ll सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे संतु निरामय: ||

आप सभी को गुरु पूर्णिमा की बहुत बहुत शुभकामनाएं..🙏🏻🙏🏻🌹🌹

01/06/2023

इस घटना को जिओ सिनेमा पर उपलब्ध इंस्पेक्टर अविनाश सीरीज में दिखाया गया है।

श्री हनुमान गढ़ी मंदिर अयोध्या, साल 1998 का एक अघोषित दिन, मंदिर परिसर में लगे ठंडे पानी की मशीन के पास बैठा एक छोटा सा वानर मुंह में दो बिजली के तारों को लिए चबाए जा रहा था, मानों कोई फल हो।

पूरा मंदिर खाली करा लिया गया था, एक-एक श्रद्धालु और एक-एक दर्शनार्थी को केवल पुलिस बल और बम निरोधक दस्ता वहां उस समय हनुमान गढ़ी मंदिर के भीतर था और वे सभी के सभी उस छोटे से वानर को बिजली का तार चबाते हुए देख रहे थे।

सवाल है कि मंदिर पूरा खाली क्यों था और पुलिस के साथ में बम निरोधक दस्ता वहां क्या कर रहा था? इसे थोड़े से में बता रहा हूं क्योंकि 1998 में घटी ये सत्य घटना आज तक किसी अखबार या न्यूज चैनल में दिखाई नही गई है, अयोध्या के अति संवेदनशील होने के कारण।

साल 1998 में करीब बीस किलो आरडीएक्स अयोध्या में आने की खबर उत्तरप्रदेश की एसटीएफ यानी विशेष पुलिस दस्ते को लगी थी, जिसमे से अधिकांशतः आरडीएक्स को समय रहते पुलिस की मुस्तैदी से जब्त कर लिया गया और अयोध्या में किसी प्रकार का धमाका नही हुआ।

परंतु एक आतंकी बम निरोधक दस्ते का भेष बनाकर अयोध्या के सबसे प्राचीन हनुमान गढ़ी मंदिर में घुस गया और उसने टाइमर सेट करके वहां ठंडे पानी की मशीन में बम लगा दिया।

जब तक पुलिस ने उसे बाहर भागते समय पकड़ा और पूछताछ शुरू की तब तक केवल एक मिनट का समय शेष रह गया था मंदिर में बम के विस्फोट के लिए, ऐसा उस आतंकी ने स्वयं बताया था।

आनन-फानन में पूरा का पूरा पुलिस बल जिसका नेतृत्व इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा कर रहे थे, मंदिर में घुसे और वो टाइम बम को खोजने लगे, मंदिर का हर एक कोना हर एक गलियारा छान मारा पर बम जैसा कुछ भी किसी को दिखाई नही दे रहा था की तभी सबने देखा।

मंदिर के प्रांगण में बने ठंडे पानी की मशीन के पास एक छोटा वानर बैठकर अपने हाथों में दो तार लिए उनसे खेल रहा था और मुंह में लेकर चबाए जा रहा था, जैसे कुछ काट रहा हो, पुलिस को अंदेशा हो गया की हो ना हो इसी मशीन में बम फिट किया गया है, उन्होंने उस वानर के मुंह से तार छुड़ाने के लिए केले उसकी ओर फेंके।

केले जैसे ही उस वानर की ओर फेंके गए वैसे ही वो तार छोड़कर बिना केले लिए वहां से उतरकर चला गया या यूं कहूं लुप्त हो गया, तुरंत ही बम निरोधक दस्ता वहां बुलवाया गया और जैसे ही मशीन खोली गई, उसमे से एक टाइमर सेट किया गया बम पाया गया।

"सर इस बम को तो डिफ्यूज (नष्ट) किया जा चुका है, ये देखिए टाइमर 3 सेकेंड पर रुक चुका है, उस छोटे से बंदर ने तार काटकर बम को फटने से रोक दिया है"

बड़े उत्साह के साथ बम निरोधक दस्ते के उस सिपाही ने सूचना दी और कुछ ही देर में सारे पुलिस बल ने हनुमान गढ़ी मंदिर के शिखर पर वही छोटे से वानर को देखा, जो शिखर के कलश को सहला रहा था।

आप ही बताइए वो छोटा सा वानर था या फिर भक्त प्रवर श्री हनुमान जी महाराज संसार से कुछ कह रहे थे। *निश्चित ही वो हनुमान थे और वो ये डंके की चोट पर सारे संसार को बता रहे थे कि अवध मेरे प्रभु श्रीराम की है और इसकी ओर जब-जब संकट आएगा तब-तब एक वानर आकर इस अवध की रक्षा करेगा।*

अपने प्रभु की परम प्रिय नगरी पर आंच भी नही आने देगा।।

20/04/2023

रमाकांत जी सेवानिवृत्त शिक्षक थे। उनकी बहू आई.पी. एस. थी। वह एस.पी.थी। उनका बेटा पड़ोस के जनपद में डी. एम. था।

वह अपनी बहू-बेटे से मिलने जा रहे थे। वे दोनों उन्हें कई बार कह चुके थे कि बाबूजी कुछ दिन मेरे साथ आकर रहिये।

ट्रेन से उतरकर वह एक रिक्शेवाले के पास पहुँचे और उससे पुलिस अधीक्षक के बंगले पर चलने को कहा।

बंगले पर पहुँचकर उन्होंने एक महिला सिपाही को देखा।

सिपाही ने कहा, "कहिये किससे मिलना है?

"उन्होंने उससे कहा कि मैं तुम्हारी मैडम का ससुर हूँ।

महिला सिपाही ने बड़े सम्मान के साथ हाथ जोड़ दिया और उन्हें ले जाकर ड्रॉइंग रूम में बिठा दिया।

वह एक सोफ़े पर बैठे थे कि उन्होंने सामने बैठी 7-8 महिलाओं को देखा।

शायद उस दिन उनकी किटी पार्टी थी जिसमें वे सभी शामिल होने आयी थीं। उनमें से एक महिला बोली ," यह कौन उजड्ड दिहाती है,सोफ़े पर ऐसे बैठा है जैसे इसके बाप का बंगला हो।

"रमाकांत जी कुर्ता-धोती पहने हुए थे। उन्हें यहाँ आने पर काफी आत्मग्लानि हो रही थी।

तभी उनकी बहू वहाँ पर आयी और सिर पर दुपट्टा ओढ़कर उसने सोफ़े के निकट बैठकर उनके पैर छुए और कहा," अरे बाबूजी आप मुझे फोन कर देते तो मैं आपके लिए स्टेशन गाड़ी भेज देती अथवा मैं स्वयं आपको लेने आ जाती।

"बाबूजी बेचारे कुछ नहीं बोल पाए।

तभी बहू ने महिलाओं की ओर मुड़ते हुए कहा कि यह मेरे पापाजी हैं।

आज हम और हमारे पति जो कुछ भी हैं, इन्हीं की बदौलत हैं।
आज आप लोग हमें क्षमा करें किटी पार्टी फिर कभी होगी।
रामकांतजी के मन में अब एक आत्मसंतुष्टि का भाव था।
धन्यवाद।

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