Shanatan Dharm JanJangen Sewa Samit

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Jai Jai Shri SitaRam
30/07/2023

Jai Jai Shri SitaRam

03/07/2023

शिव रुद्रविषेक पूजन 🚩, 01/07/23 शनिवार शिव प्रदोष में सनातन धर्म जन जागरण सेवा समिति लखनऊ ऊपर द्वार, संकट मौचन हनुमान मंदिर मुख्य शिव जी का रुद्रविषेक पूजन संपन्न हुआ 🙏

09/06/2023

"व्यवहार....

आओ आओ मोहन बेटा .... दरवाजे खोलते हुए अशोक के पिताजी ने मोहन से कहा ..
नमस्ते अंकलजी पैरों को छूते हुए मोहन ने कहा
अशोक कह रहा था पापा ने बुलाया है तो में तुरंत चला आया बताइए क्या बात है अंकलजी
मोहन .... दरअसल ...आशा के लिए एक लड़के का रिश्ता आया है मुझे जिस तरह बताया गया उस तरीके से लड़के का घर कारोबार और वो खुद देखने में भी अच्छा है अभी उसकी फोटो दिखाता हूं तुम्हें
अरे वाह ...ये तो बड़ी अच्छी खबर है अंकलजी ...
कहा है आशा ... मोहन उत्साहित होकर पूछा
वो दर असल तुम्हारा ही ... तुम जानते हो ना वो तुम्हे अपने बड़े भाई जैसा प्यार और सम्मान देती है
अरे जब में हूं उसका बड़ा भाई तो वो मुझे प्यार नहीं करेंगी मेरी छोटी बहन है देखना रौनकें लगा देंगे हम उसकी शादी में कयुं अशोक
हां भाई ... मगर वो मुझे भी तो कुछ समझे बस मोहन भैया मोहन भैया जैसे में तो हूं ही नहीं मुंह बनाकर अशोक ने कहा
और नहीं तो क्या ... मेरे मोहन भैया तेरे जैसे फिजूल की बातें नहीं करते कुछ भी उलूल जलूल कहता रहता है
अरे अरे तुम दोनों फिर से शुरू हो गये पिताजी गुस्से से बोले
आखिर बात क्या है मुझे भी तो बताओ मोहन ने बोला
अरे भाई होना क्या है लड़का इससे अकेले में मिलना चाहता है जैसा आजकल होता है उसे लगता है कि पहले लड़के लड़की को आपसी सहमति होनी चाहिए घरवालों को बाद में मिलकर मुंह मीठा करवाना होता है मेरा मतलब वो एकदूसरे की पसंद नापसंद कम्पेटेब्लटी देखना चाहते हैं कि कल उनके जीवन में कोई परेशानी ना हो मोहन वो चाहता है तो मिल लें मेंने यही कहा अब यहां अकेले में घरपर क्या जान समझ पाएंगे दोनों बस इतनी सी बात है अशोक बोला
तो परेशानी क्या है अंकलजी ...मेरा मतलब आशा तुम्हें अकेले जाने में डर लगता है तो मैं और अशोक अलग थोड़ा दूर रहेंगे
नहीं भैया दर असल मुझे समझ नहीं आ रहा ऐसे में कैसे कोई निर्णय ले सकती हूं वो अच्छा है या नहीं ... पंडित जी पापा से उनके बारे में बहुत अच्छा बोल रहे थे मगर मुझे डर लग रहा है यहां पापा होते आप होते तो आपकी सहमति से में मेरे आनेवाले जीवन के लिए निर्णय ले सकती थी अब वहां अकेली ... भैया कुछ समझ नहीं आ रहा मुझे ... कहते हुए आशा आकर मोहन से लिपटकर आंख साफ करने लगी
पागल ... तुम्हें अंकलजी ने पढ़ाया समझदार बनाया किसलिए की जरा सी बात पर घबरा जाओ ... विश्वास करो एक पिता अपनी बेटी और हर भाई अपनी बहन के साथ हमेशा रहते हैं
तो आप ही कुछ बताइए कि मैं कैसे....
मोहन ने आशा से कहा ... देखो जीवन में अमीर गरीब होना जरूरी नहीं है अच्छा होना जरूरी है तुम्हें उसकी अमीरी से प्रभावित नहीं होना और ना बड़े घर कारोबार से तुम्हें उसके स्वभाव को देखना चाहिए कि वह खुशी में और गुस्से में कैसे व्यवहार करता है खासकर अपने से कम हैसियत वाले व्यक्ति के साथ मसलन तुम किसी रिक्शा से कहीं जा आ रहे हो तो उसके साथ कैसा व्यवहार करता है किसी रेहड़ी पटरी वाले के साथ कैसा व्यवहार करता है ...आशा अगर जीवनसाथी व्यहवार से अच्छा हो तो वह तुम्हारे हर कदम को समझेगा जीवन में उतार चढाव आते जाते हैं ऐसे में ये स्वभाव में व्यहवार ही तय करता है की हमारी कितनी निभेगी तुम उसके साथ जहां जाओगी उसके व्यवहार पर नज़र बनाए रखना तुम्हें निर्णय लेने में कोई भी दिक्कत नहीं होगी यकीन मानो
मोहन की बात सुनकर अब आशा मुस्कुरा रही थी और अशोक को चिढ़ाते हुए बोली ...देखा ... इसलिए में हमेशा मोहन भैया को सम्मान करती हूं और तू है की कह रहा था कि ऐसे में हर लड़का अपने आपको किसी अमीर बाप का बेटा दिखाने से नहीं चूकता तो हर लड़की खुदको गोपी बहू दिखाने से ... आशा की बात सुनकर सब हंस पड़े ... अगले दिन आशा लड़के से मिलने गई और शाम को जब वह घर लौटी तो उसके पिताजी के साथ अशोक और मोहन भी वहां उसका इंतजार कर रहा था वापस लौटी आशा के चेहरे पर मुस्कराहट थी और उसने बताया कि उसने लड़के को मुंह पर ना कह दिया बिना किसी झिझक के ...सब हैरानी से आशा को देख रहे थे क्योंकि जो किसी को भी सामने से हां या ना नहीं कह पाती वो ऐसे कैसे आज लड़के को मुंह पर ना कहकर आ गई
तब आशा ने बताया वो लड़का उसे अपनी कार से पहले इधर उधर घुमाते हुए अपने कारोबार अपने कपड़े ब्रांडेड चीजों के बारे में बता रहा था मुझे भूख लगी थी तो वो पास के ही एक रेस्टोरेंट में खाना खिलाने लेकर गया जहां खाने के बाद उसने वेटर को आवाज लगाई ...ओए ... हैलो ... वेटर
जी सर आया...
ये क्या हैं ....कैसी सर्विस है तुम लोग की ...कितनी आवाजें लगानी पड़ती है
माफ कीजिये सर... वो मैं वहां पेमेंट ले रहा था इसलिए देर हो गई
अच्छा ....तो तू ही है यहां पर अकेला पेमेंट कोई और नहीं ले सकता था जब मैंने तुझे दो बार बुलाया तो तूने सुना क्यों नहीं
आपकी आवाज तो सुनी थी मैंने और में बस आ ही रहा था वो क्या है ना सर... वो मेरी टिप चली जाती
यही टिप तो हमारी असली आमदनी होती है वरना हमारी तनख्वाह तो बहुत कम है
छोड़ो ना ....कयुं गुस्सा हो रहे हो आप जब वो कह रहा है तो उसकी परेशानी को समझने की कोशिश कीजिए मैंने कहा
छोड़ दूं ....तुम नहीं समझतीं ये बड़े मक्कार होते हैं इन्हें इसी बात की तनख्वाह मिलती है कि हमें किसी बात की परेशानी ना हो लेकिन ये जानबूझकर...और क्या कह रहा था तेरा मालिक कम तनख्वाह देता है तो चल मैं तेरी शिकायत तेरे उसी मालिक से ही करता हूं तब पता चलेगा तुझे... पापा उसने उस बेचारे वेटर का कालर पकड़ लिया
मुझे बहुत बुरा लगा तो मैंने कहा... ये क्या कर रहे हैं आप ये कैसा व्यवहार है किसी से ऐसे बात करते हैं क्या
तो बजाय वह उसे छोड़ने के मुझे घूरने लगा था मोहन भैया उस वक्त मुझे आपकी बात याद आने लगी कि किसी भी इंसान का स्वभाव इस बात से समझ आता है कि वह अपने से कम हैसियत वाले व्यक्ति से कैसे बात करता है बस में उठकर खड़ी हो गई और तुरन्त उस वेटर से माफी मांगने को कहा
वो भड़क कर मुझसे बोला ...तुम तो ऐसे बुरा मान रही हो जैसे ये तुम्हारा कोई रिश्तेदार हो
हां इससे मेरा रिश्तेदार है मेरा भाई है और कुछ . ...तुम मेरा जबाव जानना चाहते हो ना तो में तुम जैसे से शादी नहीं करना चाहती जिसे इंसान और इंसानियत का मतलब भी नहीं पता हो ...ये कहकर में बाहर आ गई
भैया सच कहूं उस वक्त मुझे जरा भी झिझक महसूस नहीं हुई बल्कि मुझे ये एहसास हुआ यदि इससे मेरी शादी हो गई होती तो मेरा जीवन सचमुच बर्बाद हो जाता जो किसी की बात किसी की परेशानी नहीं सुनना समझना चाहता वो जीवन में आनेवाली उलझनों को क्या समझेगा और क्या सुलझाएगा ... मैंने सही किया ना पापा... कहकर आशा अपने पिताजी के गले लग गई वहीं अशोक और मोहन उसे और उसकी साहसिक हिम्मत देखकर मुस्कुराते हुए अपनी भीगी हुई पलकों को साफ कर रहे थे......🙏🙏🙏

09/06/2023

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