24/04/2026
सूर्य आत्मा का कारक है, और गोचर में जब वह परम उच्च के हो रहे है, ऐसे पावन समय में खुलता है ब्रह्मांड का एक अनुपम रहस्य, जिसे आजतक हम प्रत्येक हवन यज्ञ और पूजा के बोलते तो आए पर कभी अर्थ नहीं समझ पाएं । यह है ऋग्वेद के सविता सूक्त में वर्णित सूर्य का मंत्र । कौन कहता है वेद समझ नहीं आते? या वेद को समझा नहीं जा सकता । असल में हमें इस पावन आत्मज्ञान से परिचय ही नहीं पाने दिया । किंतु आज इस पावन अवसर को जाने न दें, अवश्य सुनिए
न भूतो न भविष्यति। वैदिक सूर्यमंत्र “आ कृष्णेन रजसा” का रहस्योद्घाटन | Swami Sanatan Shri Ji Maharaj
🔱 मंत्र:
ॐ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च।
हिरण्ययेन सविता रथेन देवो याति भुवनानि पश्यन्।
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