भारतीय युवा राजपूत संगठन

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तो हमारे यशस्वी, तेजस्वी, ओजस्वी, प्रधान सेवक जी को लगता है कि बुड्ढे मुसलमानों को अधिक धन चाहिए होता है, सामान्य नागरिक...
23/02/2026

तो हमारे यशस्वी, तेजस्वी, ओजस्वी, प्रधान सेवक जी को लगता है कि बुड्ढे मुसलमानों को अधिक धन चाहिए होता है, सामान्य नागरिकों की अपेक्षा.

ऐसी कौन सी गतिविधि देखी है मोदी जी ने इनकी जिससे प्रभावित होकर उन्हें अधिक धन दे रहे हैं, हमारे टैक्स के पैसे से? Narendra Modi

20/02/2026
20/02/2026

आखिर ऐसी नौबत आई ही क्यों??

जब सवर्ण समाज खुले मन से 90 के दशक से लेकर आज तक भाजपा के साथ रहा उसको चार बार देश की सत्ता पर बैठाया ताकि हिन्दूओ के पतन को सरकार द्वारा रोका जा सकते और कांग्रेस व वामपंथी इकोसिस्टम से देश को आजादी मिल सके।

लेकिन सत्ता पाते ही तथाकथित हिन्दूवादी पार्टी और स्वघोषित हिन्दुत्व हृदय सम्राट ने अपने पसमांदा मुस्लिमों और अपनी कैटेगरी के हितों के लिए तुष्टीकरण करना शुरू कर दिया और भारत के विकास में अग्रणी भूमिका निभाने वाले सवर्णों को उनके ही देश में दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया।

तो आखिर सवर्ण करे तो करे क्या?

जिस देश को सवर्णों ने अपने पसीने से सींचकर समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ाया, जिस देश को सवर्णों ने अपना रक्त बहाकर शत्रु से बचाया आज उसी देश में सवर्णों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

#पसमांदा_सुल्तान_नरेन्द्रुद्दीन_मोदी
#सवर्ण_विरोधी_नरेन्द्र_मोदी

18/02/2026

महाराष्ट्र में मुसलमानों की 50+ जातियों को OBC में डालने के बाद, 5% मजहबी आरक्षण को हटाने का क्रेडिट लिया जा रहा है।

को लगता है कि केवल दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर ही फाइबर केबल जाता है और लोगों के पास NOKIA 1100 है जिस पर वो स्नेक खेल सकते हैं, इंटरनेट कहाँ से चलेगा!

सत्य यह है कि भाजपा ने मुसलमानों के आरक्षण को मेनस्ट्रीम किया है। इसके सूत्रधार यदि नहीं हैं, तो तारणहार तो हैं ही जिन्होंने छाती ठोक कर यह बात स्वीकारी कि उन्होंने ऐसा किया है।

रेटोरिक के लिए, रैलियों में, डिबेट में और सोशल मीडिया पर ये चिल्लाते हैं कि ‘संविधान में धर्म आधारित आरक्षण नहीं है, हम उसे लागू नहीं होने देंगे।’ इससे संदेश ऐसा जाता है कि देखो, भाजपा हिन्दुओं के लिए आरक्षण बचा रही है, पर इनके नेताओं के पास इस बात का कोई उत्तर नहीं कि ओबीसी में मुसलमान जातियों की संख्या यदि बढ़ती जा रही है, तो वो किसकी सीट खा रहे हैं?

केन्द्रीय भाजपा न केवल जातीय तुष्टिकरण कर रही है, बल्कि ये मुस्लिम तुष्टिकरण में भी अग्रणी हैं। इन्होंने बार-बार अल्पसंख्यक आयोग (मंत्रालय नहीं, आयोग) का बजट बढ़ाया है, छात्रवृत्तियों से ले कर कई सामान्य निर्धन नागरिक आधारित योजनाओं में मुसलमानों को अनुपात से अधिक आवंटन के गीत गाए हैं।

भाजपा ही असली ‘भीम-मीम’ योजना चला रही है, बाकी पार्टियाँ घंटा करेगी। अर्थव्यवस्था अच्छी हो रही है, पर रेवड़ी किसको मिल रही है, वह देखने योग्य है। हम तो अब जग रहे हैं, क्योंकि हमें मोदी जी ने यूजीसी के बाद एक नया दृष्टिकोण दिया है।

जितना अधिक समय बीत रहा है, उतना हमें दिख रहा है कि भाजपा SC/ST Act के साथ BC Act को मूक और सहज समर्थन दे रही है। हम कर्न...
13/02/2026

जितना अधिक समय बीत रहा है, उतना हमें दिख रहा है कि भाजपा SC/ST Act के साथ BC Act को मूक और सहज समर्थन दे रही है। हम कर्नाटक के रोहित वेमुला एक्ट पर इनकी चुप्पी देख चुके हैं, तेलंगाना के BC Act पर भी इन्होंने कुछ नहीं बोला। आंध्र प्रदेश में ये स्वयं गठबंधन में हैं।

यूजीसी में जो हुआ वह भाजपा की सहमति के साथ ही हुआ है। इनका अगला पड़ा BC Act केन्द्रीय स्तर पर लागू करना है और उसके आगे ये अल्पसंख्यक उत्पीड़न कानून 2028 ले कर आएँगे।

कैसे डिफेंड करेंगे इसे आइटी सेलिए? ये ओवरसाइट नहीं है, यह सुनियोजित षड्यंत्र है।


#सवर्ण_उत्पीड़न_बंद_करो

12/02/2026

किसी को लग रहा है कि यति नरसिंहानंद राजनैतिक पार्टी बनाना चाहते हैं, तो उसको शीघ्रातिशीघ्र मानसिक चिकित्सालय में जाना चाहिए।

घृणा करो यूजीसी समर्थकों से। उन्हें बिका हुआ कह लो क्योंकि तुम्हारे पास कोई तर्क बचता नहीं। उन पर पर्सनल आक्षेप कर लो, क्योंकि उनके प्रश्नों का उत्तर नहीं है तुम्हारे पास, पर ऐसे हास्यास्पद आरोप मत लगाओ।

यति नरसिंहानंद को मैं छः वर्षों से जानता हूँ। कितने चुनाव हो चुके हैं, कोई पार्टी नहीं बनी। जो व्यक्ति केवल और केवल हिन्दू एकता के लिए 95% मुल्लों के बीच खड़ा है, उसको अपनी राजनैतिक दासत्व से सनी सोच का पात्र मत बनाओ।

तुम भाजपा की चाटो, किसी ने नहीं रोका है पर यदि तुम बाहर बैठ कर डासना, यति जी जैसों पर पार्टी बनाने के लांछन लगाते हो तो तुम थूकने योग्य भी नहीं हो। जो व्यक्ति किसी तरह अपने शिष्यों के लिए दो काल की रोटी और मंदिर के रखरखाव का दायित्व लिए वहाँ सनातन की लड़ाई लड़ने के लिए टिका हुआ है, उसे मत लपेटो।

जिस व्यक्ति ने तुमसे बहुत माँगा तो तुम्हारी एकता माँगी, जिसने बहुत माँगा तो 108 दिवस के यज्ञ के लिए तेल-समिधा-सामग्री हेतु धन माँगा, उसे अपनी संकुचित सोच का निशाना मत बनाओ।

कुछ भ्रम है तो एक बार मिल लो, दूर हो जाएँगे।

वाह Narendra Modi  जी, वाह… 😏🔥TMC बंगाल में अगर मुस्लिमों को OBC रिज़र्वेशन दे तो वो गद्दार और हिंदू-विरोधी हो जाती है। ...
10/02/2026

वाह Narendra Modi जी, वाह… 😏🔥

TMC बंगाल में अगर मुस्लिमों को OBC रिज़र्वेशन दे तो वो गद्दार और हिंदू-विरोधी हो जाती है। यही काम कांग्रेस तेलंगाना और कर्नाटक में करे तो उसे भी यही उपाधियाँ दी जाती हैं। लेकिन भाजपा गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार में करे तो वो राष्ट्रभक्त बन जाती है।
समाज कल्याण एवं अधिकारिता मंत्रालय आज केवल SC-ST-OBC कल्याण मंत्रालय बनकर रह गया है, जिसके पास जनरल के बच्चों को मुफ्त कोचिंग देने का बजट नहीं है, क्योंकि जनरल के बच्चे इस देश पर बोझ माने जाते हैं। हाँ, यह अलग बात है कि वे केवल टैक्स का ATM बनकर रह गए हैं।

बहन आस्था सिंह के साथ पूरा राजपूत समाज खड़ा है।जय भवानी जय राजपूताना
09/02/2026

बहन आस्था सिंह के साथ पूरा राजपूत समाज खड़ा है।

जय भवानी जय राजपूताना

गर्व से कहो हम क्षत्रिय हैं🚩🚩💪💪हाल ही में एक बैंक कर्मचारी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। बहस के दौरान उसने...
09/02/2026

गर्व से कहो हम क्षत्रिय हैं🚩🚩💪💪

हाल ही में एक बैंक कर्मचारी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। बहस के दौरान उसने अपनी जाति का उल्लेख किया, और देखते ही देखते लोग उसे ट्रोल करने लगे। कई लोगों ने बिना पूरी बात जाने उसे जातिवादी तक कह दिया। जबकि वीडियो में दिखाई दे रहा हिस्सा सिर्फ बहस का एक क्षण है, पूरी परिस्थिति नहीं।

इसी संदर्भ में कुछ पंक्तियाँ याद आती हैं—

पैदा हुई तो सरकारी योजनाओं से वंचित हुई क्योंकि ठाकुर थी।
स्कूल गई तो सरकारी छात्रवृत्तियों से वंचित हुई क्योंकि ठाकुर थी।
कॉलेज गई तो सबसे ऊँचा कटऑफ लाना पड़ा क्योंकि ठाकुर थी।
नौकरी करने गई तो सबसे महंगा फॉर्म भरना पड़ा क्योंकि ठाकुर थी।

फिर क्यों ना यह लड़की गर्व से खुद को ठाकुर कहे।

हमारे समाज में अलग-अलग वर्गों के लोगों के अपने-अपने संघर्ष हैं। कोई सुविधाओं की कमी से जूझता है, तो कोई अपेक्षाओं और प्रतिस्पर्धा के दबाव से। ऐसे में अगर कोई अपने सामाजिक परिचय को लेकर भावुक हो जाए, तो उसे तुरंत गलत ठहराना भी उचित नहीं। किसी एक पल की बहस से किसी व्यक्ति का पूरा चरित्र तय नहीं किया जा सकता। हमें घटना को समझने की कोशिश करनी चाहिए, न कि भीड़ की तरह निर्णय सुना देना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह लेख सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और सामान्य सामाजिक अनुभवों के संदर्भ में लिखा गया है। उद्देश्य किसी व्यक्ति या वर्ग का अपमान करना नहीं है।

09/02/2026

ओहो! सरकार ने तो कोर्ट में यूजीसी का समर्थन नहीं किया न! अब तो स्टे लग गया, फिर क्यों विरोध कर रहे हो? सीधी बात है कि पैसे लिए हैं तुमने।

इतनी सीधी बात है तो बता दो किससे पैसे लिए हैं। मैं तो 15 जनवरी से लिख-बोल रहा हूँ, मुझे पैसे दिलवा दो, जो भी बाँट रहा है।

दूसरी बात, कोर्ट से स्टे का क्या मतलब है? वापस हुआ? क्या मध्यप्रदेश से ले कर भागलपुर तक इसी तरह के कानून अभी भी विश्वविद्यालयों में नहीं हैं? क्या सरकार समर्थन कर के भी कोर्ट में दो मिनट टिक पाती?

तुम्हें सच में लगता है कि बात केवल यूजीसी की है? जब तुम नाच रहे हो कि मोदी मुस्लिमों को आरक्षण नहीं देगा, उससे वर्षों पहले मोदी के गुजरात समेत कई राज्यों में (जिसमें भाजपा शासित भी सम्मिलित हैं) मुसलमानों को ओबीसी में आरक्षण मिल रहा है। किसे चूरन बाँट रहे हो?

हर दिन एससी/एसटी/ओबीसी के नाम पर निःशुल्क स्कूल और हॉस्टल खुल रहे हैं। बजट का बहुत बड़ा हिस्सा (2,37,400 करोड़ केवल SC/ST के लिए) आरक्षण भी मिल रहा है और फीस भी नाम मात्र का, या शून्य, देना है। और फंड कौन कर रहा है? वही जिसके बच्चे का एडमिशन रोक दिया है सरकारों ने।

यह यूजीसी तो ऑस्ट्रिया के आर्चड्यूक फर्डिनांड की हत्या जैसी है। यह तो लास्ट स्ट्रॉ ऑन कैमल्स बैक है। यूजीसी का प्रभाव शैक्षणिक वातावरण की विषाक्तता को ले कर होगा, पर सरकार की नीतियों का क्या जो एक के बाद एक लादी जा रही है और लक्षित कर के सामान्य वर्ग को बाहर किया जा रहा है।

हमारी समस्या इस पूरी सोच से है जो मुल्ले की टोपी न पहनने को ले कर बीस साल से नाच रही है, हल्ला कराती है जो बात कॉन्ग्रेस तेलंगाना में करने जा रही है, वो भाजपा होने नहीं देगी, पर वास्तव में यही काम तुम हर जगह भिन्न-भिन्न रूपों में कर रहे हो।

बदला केवल इतना है कि कल तो जो इसे अनदेखा करते थे, प्रतिभा के दम पर सर झुका कर आगे बढ़ते थे, उन्हें अब यह स्कीम समझ में आ गई है और उन्हें किसी भी पार्टी के आने या जाने का भय समझ में नहीं आ रहा।

भय तो मेरे जैसों को है जो विजिबल हैं, जो वामपंथी, कॉन्ग्रेसी, सपाई, टीएमसी, डीएमके से ले कर अब भाजपा के भी निशाने पर हैं। हमारे जैसे सौ-पचास के अतिरिक्त, सामान्य मतदाता को क्या फर्क पड़ेगा जो यह मान कर बैठे हैं कि भाजपा उनके बच्चों का भविष्य नेपाल-भूटान-श्रीलंका-यूक्रेन में देख रही है, भारत में तो केवल एससी-एसटी-ओबीसी रहेगा। नहीं समझ में आ रहा तो किसी गाँव में इस पर सर्वेक्षण करना लीजिए कि मोदी समर्थक सवर्ण अब मोदी के बारे में क्या कह रहे हैं।

फिर उन्हें सड़क-हॉस्पिटल-एयरपोर्ट से बहुत मतलब नहीं रह जाता। बात बच्चों की है, सामान्य वर्ग मोदी जी का त्रिपुंड बहुत देख चुका है जिसकी ऊपरी धारी एससी की है, बीच में एसटी है, नीचे ओबीसी और जो बीच का लाल रक्तिम तिलक है, वह सामान्य वर्ग का रुधिर है।

मोदी जी को लग रहा हो कि उनके ‘चाय ठंढी करके पीने’ की आदत इस आक्रोश को ठंढा कर देगी तो फिर आप जान लीजिए कि सामान्य वर्ग ने ग्यारह वर्ष धैर्यपूर्वक कोल्ड कॉफी ही पी है। उसने आपकी हर ऐसी जातिवादी नीति का समर्थन ही किया, पर इस बार अति हो गई।

09/02/2026

देश में 200 से ज़्यादा सवर्ण सांसद बैठे हैं, फिर भी UGC जैसा कानून बिना विरोध के आ गया।
इसका मतलब साफ़ है— मुद्दा संख्या का नहीं, नीयत का है।
इन नेताओं की प्राथमिकता समाज नहीं, सत्ता है।
चुनाव के समय सवर्ण याद आते हैं, लेकिन नीति बनाते वक्त
वही समाज सबसे पहले कुर्बान कर दिया जाता है।

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