09/02/2026
ओहो! सरकार ने तो कोर्ट में यूजीसी का समर्थन नहीं किया न! अब तो स्टे लग गया, फिर क्यों विरोध कर रहे हो? सीधी बात है कि पैसे लिए हैं तुमने।
इतनी सीधी बात है तो बता दो किससे पैसे लिए हैं। मैं तो 15 जनवरी से लिख-बोल रहा हूँ, मुझे पैसे दिलवा दो, जो भी बाँट रहा है।
दूसरी बात, कोर्ट से स्टे का क्या मतलब है? वापस हुआ? क्या मध्यप्रदेश से ले कर भागलपुर तक इसी तरह के कानून अभी भी विश्वविद्यालयों में नहीं हैं? क्या सरकार समर्थन कर के भी कोर्ट में दो मिनट टिक पाती?
तुम्हें सच में लगता है कि बात केवल यूजीसी की है? जब तुम नाच रहे हो कि मोदी मुस्लिमों को आरक्षण नहीं देगा, उससे वर्षों पहले मोदी के गुजरात समेत कई राज्यों में (जिसमें भाजपा शासित भी सम्मिलित हैं) मुसलमानों को ओबीसी में आरक्षण मिल रहा है। किसे चूरन बाँट रहे हो?
हर दिन एससी/एसटी/ओबीसी के नाम पर निःशुल्क स्कूल और हॉस्टल खुल रहे हैं। बजट का बहुत बड़ा हिस्सा (2,37,400 करोड़ केवल SC/ST के लिए) आरक्षण भी मिल रहा है और फीस भी नाम मात्र का, या शून्य, देना है। और फंड कौन कर रहा है? वही जिसके बच्चे का एडमिशन रोक दिया है सरकारों ने।
यह यूजीसी तो ऑस्ट्रिया के आर्चड्यूक फर्डिनांड की हत्या जैसी है। यह तो लास्ट स्ट्रॉ ऑन कैमल्स बैक है। यूजीसी का प्रभाव शैक्षणिक वातावरण की विषाक्तता को ले कर होगा, पर सरकार की नीतियों का क्या जो एक के बाद एक लादी जा रही है और लक्षित कर के सामान्य वर्ग को बाहर किया जा रहा है।
हमारी समस्या इस पूरी सोच से है जो मुल्ले की टोपी न पहनने को ले कर बीस साल से नाच रही है, हल्ला कराती है जो बात कॉन्ग्रेस तेलंगाना में करने जा रही है, वो भाजपा होने नहीं देगी, पर वास्तव में यही काम तुम हर जगह भिन्न-भिन्न रूपों में कर रहे हो।
बदला केवल इतना है कि कल तो जो इसे अनदेखा करते थे, प्रतिभा के दम पर सर झुका कर आगे बढ़ते थे, उन्हें अब यह स्कीम समझ में आ गई है और उन्हें किसी भी पार्टी के आने या जाने का भय समझ में नहीं आ रहा।
भय तो मेरे जैसों को है जो विजिबल हैं, जो वामपंथी, कॉन्ग्रेसी, सपाई, टीएमसी, डीएमके से ले कर अब भाजपा के भी निशाने पर हैं। हमारे जैसे सौ-पचास के अतिरिक्त, सामान्य मतदाता को क्या फर्क पड़ेगा जो यह मान कर बैठे हैं कि भाजपा उनके बच्चों का भविष्य नेपाल-भूटान-श्रीलंका-यूक्रेन में देख रही है, भारत में तो केवल एससी-एसटी-ओबीसी रहेगा। नहीं समझ में आ रहा तो किसी गाँव में इस पर सर्वेक्षण करना लीजिए कि मोदी समर्थक सवर्ण अब मोदी के बारे में क्या कह रहे हैं।
फिर उन्हें सड़क-हॉस्पिटल-एयरपोर्ट से बहुत मतलब नहीं रह जाता। बात बच्चों की है, सामान्य वर्ग मोदी जी का त्रिपुंड बहुत देख चुका है जिसकी ऊपरी धारी एससी की है, बीच में एसटी है, नीचे ओबीसी और जो बीच का लाल रक्तिम तिलक है, वह सामान्य वर्ग का रुधिर है।
मोदी जी को लग रहा हो कि उनके ‘चाय ठंढी करके पीने’ की आदत इस आक्रोश को ठंढा कर देगी तो फिर आप जान लीजिए कि सामान्य वर्ग ने ग्यारह वर्ष धैर्यपूर्वक कोल्ड कॉफी ही पी है। उसने आपकी हर ऐसी जातिवादी नीति का समर्थन ही किया, पर इस बार अति हो गई।